डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – विश्व पृथ्वी दिवस)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३१९ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के दोहे – विश्व पृथ्वी दिवस ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

संकट भारी आ पड़ा, धरा बचा लो आज।

मानव प्रकृति सहेजना, फिर शोभित सब काज।।

 *

बहुत बढ़ी अवहेलना, जगत हुआ है त्रस्त।

नर जीवन अनमोल है, इसे न करना पस्त।।

 *

होती फिर बंजर धरा, पर्वत जंगल नाश।

आने वाली पीढ़ियाँ, फिर ढोएँगी पाश।।

 *

नजर जहाँ भी जा रही, बहुधा प्लास्टिक ढेर।

रोक सको तो रोक लो, क्यों? करते हो देर।।

 

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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