श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्रेयस साहित्य # १९ ☆

☆ कविता  ☆ ~ हम शिवा के वंशज ~ ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆ 

 देखो लहर रहा है, बड़े शान से तिरंगा

 हम शिवा के वंशज, लेना न हमसे पंगा… 1

*

हिमगिरी सा ताज सिर पर,

सागर चरण पखारे

 विंध्य  के शिखर से

माँ भी शक्ति निहारे

 बाग जलियांवाला,

मेरठ की क्रांति बोली

 काकोरी, चौरी चौरा,

 बलिया की बागी टोली

 यमुना के तट पर मथुरा,काशी, प्रयाग, गंगा

देखो लहर रहा है, बड़े शान से तिरंगा

 हम शिवा के वंशज, लेना न हमसे पंगा…2

 *

 नाना की लाड़ली थी,

झांसी की लक्ष्मी बाई

 सौ मिल का सफर कर,

 कालपी थी आई

लड़की नही थी वह,

 जलती सी एक चिंगारी

थी दुर्गा, चंडी, शक्ति ,

काली की थी कटारी

हम शान्ति दूत भी है, शिव ग्रीव के भुजंगा

देखो लहर रहा है, बड़े शान से तिरंगा

 हम शिवा के वंशज, लेना न हमसे पंगा… 3

 *

 मंगल, भगत, उधम,

उद्धम मचाये आंधी

थे क्रांति वीर योद्धा,

नेता सुभाष, गांधी

 अशफाक, बिस्मिल सिर पर

 शोभता कफन था

 आजाद बोस खुदी  के

  श्वास में वतन था

ये क्रांति वीर योद्धा,सच में थे मस्त मलंगा

देखो लहर रहा है, बड़े शान से तिरंगा

 हम शिवा के वंशज, लेना न हमसे पंगा…4

 *

श्री राम -कृष्ण की है,

प्यारी धरा हमारी

नानक,कबीर, तुलसी,

 के ज्ञान की ये क्यारी

यह वीर बिरसा मुंडा,

कलाम की है धरती

स्वामी विवेकानंद के

व्याख्यान को जो सुनती

रसखान, सूर मीरा, रैदास का मन चंगा

देखो लहर रहा है, बड़े शान से तिरंगा

 हम शिवा के वंशज, लेना न हमसे पंगा…5

 *

 शक्ति पीठ मंदिर,

ज्योतिर्लिंग  शिवाला

कहता है जय भवानी,

 मेवाड वाला भाला

माँ भारती के माथे

कश्मीर सा मुकुट है

माँ के चरण की पैजन,

 सागर का सुन्दर तट है

दो भव्य हैं भुजाये कच्छ, कंचन जंघा

देखो लहर रहा है, किस शान से तिरंगा

 हम शिवा के वंशज, लेना न हमसे पंगा…6

 *

 आकाश, अग्नि, तेजस

हम त्रिशूल वाले

 हम चंद्रयान को भी,

 चांद पर उतारे

 ब्रह्मोस की गरज हम,

राफेल दम हमारा

 जिसने की शरारत

घुसकरके हमने मारा

 हम कोटिक युवा शक्ति  होने न देंगें दंगा

देखो लहर रहा है, किस शान से तिरंगा

 हम शिवा के वंशज, लेना न हमसे पंगा…7

हम समृद्ध वृहद भारत,

बढ ती अर्थ शक्ति

विज्ञान कला कौशल,

हम है एक हस्ती

क्षय मुक्त हिन्द होगा,

संकल्प है हमारा

हम स्वास्थ्य वीर योद्धा

हमसे करोना हारा

हम आत्म निर्भर भारत, बजता हमारा डंका

देखो लहर रहा है, किस शान से तिरंगा

 हम शिवा के वंशज, लेना न हमसे पंगा…8

 ♥♥♥♥

© श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”

कवि लेखक एवं समीक्षक

लखनऊ, उप्र, (भारत )

दिनांक 22-02-2025

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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