श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता फुलझड़ी…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २३६ ☆

☆ # “फुलझड़ी…” # ☆

आंधियों ने अब तक

कितने दीपक बुझाए  है

जल रहे हैं कुछ जो

बुझ नहीं पाए है

 

हवा के तेज झोंकों ने

बेरहमी से उजाड़ा है

तिनका तिनका करके

बसेरों को उखाड़ा  है

हालात के मारो पर

यह कैसे दिन आए हैं

आंधियों ने अब तक

कितने दीपक बुझाए है

 

अंधकार से लड़ने

वह हिम्मत तो जुटा पाए

महंगाई के मारे हैं

दिया बाती कहां से लाए

फिर भी चमत्कार की वह

आस लगाए हैं

आंधियों ने अब तक

कितने दीपक बुझाए हैं

 

दिवाली की यह रात

कैसी काली रात है

जगमगा रही है दुनिया

वह खाली हाथ है

देखकर रोशनी का पर्व

आंसू निकल आए हैं

आंधियों ने अब तक

कितने दीपक बुझाए हैं

 

गरीबों की भाई

कहां होती दिवाली है

बाजार सजे है पर

जेब उसकी खाली है

मुन्नी के लिए फुलझड़ी

खुद को बेचकर लाए हैं

आंधियों ने अब तक

कितने दीपक बुझाए हैं

 

आंधियों ने अब तक

कितने दीपक बुझाए हैं

जल रहे कुछ जो

बुझ नहीं पाए हैं /

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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