श्री संतोष नेमा “संतोष”
(आदरणीय श्री संतोष नेमा जी कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है आपका एक – गीत – बड़ो नटखट कृष्ण कन्हैया… । आप श्री संतोष नेमा जी की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार आत्मसात कर सकते हैं।)
☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # ३०० ☆
☆ गीत – बड़ो नटखट कृष्ण कन्हैया… ☆ श्री संतोष नेमा ☆
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इत पकड़त वो उत झट धावें, हाथ बढ़ावें मैया
दधि-माखन की मटकी फोड़ें, खाबें खूब मलैया
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प्रेम -जाल सखियों पै फेंके, बाँके बंशी बजैया
बालापन बहु असुर संहारे, हर्षित यशुमति मैया
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भू मंडल मुँह खोल दिखाया, चकित भई तब मैया
बाल रूप “संतोष” सुहावे, चाहे प्रभु की छैयां
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© संतोष कुमार नेमा “संतोष”
वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार
आलोकनगर, जबलपुर (म. प्र.) मो 7000361983, 9300101799
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





