श्रीमती शशि सराफ

(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता एक सफर बीज का…।)

☆ शशि साहित्य # २४ ☆

? कविता – एक सफर बीज का… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ  ? ?

हर बीज का नसीब नहीं होता वृक्ष हो जाना,

जाने कितनी अग्नि परीक्षा से गुजर कर अंकुरित हो पाना…

कहीं नर्म मुलायम मिट्टी की गोद नहीं मिलती,

कहीं जल भरे मेघों की बूंदे नहीं गिरती…

कभी जलाती तपन, बन जाती है कफन,

कभी बाढ़ में ठहरने को जमीं नहीं मिलती…

जीवन शुरू होने से पहले, सपने हो जाते हैं दफन,

बड़े वृक्षों से पनपने की इज़ाजत नहीं मिलती,

पैरों तले कुचल जाते हैं, कुछ नन्हे अंकुरण,

बेपरवाह परिस्थिति से, चंद सांसे नहीं मिलती…

फिर भी !!!! जो दम रखते हैं, हर मुश्किल का करने सामना…

वो खिल उठते हैं चीरकर, पत्थरों का भी सीना…

अथाह समर्पण और शक्ति का है यह मामला,

आसान नहीं है विपरीत परिस्थितियों को सहयोगी बना लेना…

ईश्वर की कृपा से ही पर्वत पर हरियाने की किस्मत है मिलती,

ना हो यह तो हरियाली में भी एक पत्ती नहीं खिलती…

तय करना पड़ती है तमाम मुश्किलें राहों की,

वरना हर बीज को, पुनः बीज बनाने की क्षमता नहीं मिलती…

© श्रीमती शशि सराफ

जबलपुर, मध्यप्रदेश 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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