डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – प्रेम)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३२३ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के दोहे – प्रेम ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

प्रेम बिना कुछ भी नहीं, प्रेम मधुरतम राग।

प्रेम अनोखी साधना, यही प्रेम अनुराग।।

 *

प्रेम अगर सच्चा मिले, हो जीवन गुलज़ार।

समझा जिसने प्रेम को, छाई मधुर बहार।।

 *

प्रेम नदी की धार है, बहता शीतल नीर।

इसमें जो भी डूबता, हर जाती है पीर।।

 *

प्रेम सुधा का भाव है, मन का मिटता क्लेश।

जिसके उर में प्रेम हो, बनता वही विशेष।।

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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