डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “ईद…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३२
कविता – ईद… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
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दीदार बिन तुम्हारे, मेरी कैसे ईद हो
तुम चाँद, मेरा चैन, आँख ख़्वाब, नींद हो
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दिल से दिल मिला तो दिल ने दिल दिया मुझे
तुम चाहते हो इसकी भी कोई रसीद हो
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इक दिन ज़रूर आएगा देखोगे इस तरफ़
अच्छे-बुरे की तुम ही मेरी चश्मदीद हो
=4=
हमने नहीं कहा कभी गुस्सा न हो मगर
कुछ यूंँ करो कि आपका गुस्सा मुफ़ीद हो
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हसरत हो आरज़ू हो कामना हो तमन्ना
ख़्वाहिश तुम्हीं पहली और आख़िरी उम्मीद हो
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मर-मिट गये जिनके लिये, हम रुसवा हो गये
वे फ़रमा रहे आशिक़ हो, न कि तुम शहीद हो
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सियासत है इतनी बदनाम चीज़ उफ़्फ़
क्यों शरीक़ इसमें अब कोई फ़रीद हो
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यूँ धृष्टता के छू रहे हो सारे पायदान
तुम आदमी हो यार कि घोड़े की लीद हो
=9=
अच्छे-बुरे का ख्याल ज़रूरी है हर घड़ी
पहले कि इससे आपकी मिट्टी पलीद हो
=10=
मेरे अज़ीज़ आज मैं दिल खोलकर कहूँ
इस दिल में दिल से आपका ख़ुशामदीद हो
=11=
धूमिल हैं चाँद आपके हुस्नो जमाल से
‘राजेश’ क्यों न आपका दिल से मुरीद हो
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071
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