सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’
(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ले लो हरि अवतार यहाँ!!)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # ४ ☆
☆ ले लो हरि अवतार यहाँ!! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆
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कृष्ण कन्हैया तुम्हे दिखाऊं, बिखरे पग पग खार यहां
, जगह-जगह पर जंजालों का, लगा हुआ अंबार यहांँ ।।
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गैया तेरी रोती कान्हा, सड़कों पर कूड़ा खाती ।
कृषि कार्य को छोड़ा जब से, नंदी है बेकार यहांँ ।।
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दूध दही घृत माखन होता, अमृत तुल्य यह बतलाया ।
इन सब में ही मिला रसाय*न, होता कारोबार यहांँ ।।
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माखन सबको बांँटा तुमने, भोग बांँटना सिखलाया।
अन्न भरा है गोदामों में, जन भूखे लाचार यहांँ।
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युद्ध महाभारत करवाया, हर नारी को मान मिले।
धवल चदरिया ओढ़े कुछ जन, करते तन व्यापार यहांँ।।
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चीर बढ़ाने की लीला रच, लाज अमूल्य बताई थी।
अंग-प्रदर्शन को समझे पर, नारी शिष्टाचार यहाँ ।।
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दंश धरा अति झेल रही है, निशदिन अत्याचारों के
मानव में फिर मानवता हो, ले लो हरि अवतार यहाँ ।।
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© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”
झालरापाटन राजस्थान
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




