श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी  के साप्ताहिक स्तम्भ  “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “है जीवन क्षण भंगुर प्यारे…। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।

✍ मनोज साहित्य # २२२ ☆

☆  है जीवन क्षण भंगुर प्यारे…  श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

है जीवन क्षण भंगुर प्यारे।

बन कर जियो बहादुर प्यारे।।

*

सद्भावों के बीज बोइए।

निकस पड़ें सद्-अंकुर प्यारे।।

*

जीवन में घिर आते संकट।

कभी न होना आतुर प्यारे।।

*

होती आत्म परीक्षा निशिदिन।

कभी न बनना निष्ठुर प्यारे।।

*

आएँगें शादी के दिन जब।

गूँजेंगे मंगल सुर प्यारे।।

*

छल-छद्मों की है यह दुनिया।

कहे जगत से माहुर प्यारे।।

©  मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

29/5/26

संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002

मो  94258 62550

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted