डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “भयानक“.)  

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३५ ?

? कविता – भयानक… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

=1=

द्वेष  ईर्ष्या  कपट  भयानक

गर्म-गर्म  लू-लपट भयानक

=2=

शेर    मारने,    चूहे  निकले

मिल रई ऐसी रपट भयानक

=3=

शिष्य  गुरु  पर  हावी  हैं उफ़

अब वो डाँट न डपट भयानक

=4=

बाहर    ख़ामोशी   है   किन्तु

भीतर शोर है विकट भयानक

=5=

दंगे-तिकड़म-हुड़दंग   ‘राजेश’

करवाती यह  टिकट भयानक

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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