श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता बांझ…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २६९ ☆

☆ # “बांझ…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

वह सुकुमार सी कली

जो नाजो से थी पली

जो चिड़ियों सी चहकती थी

जो मोगरे की खुशबू सी महकती थी

जिसके पायल की आवाज से

सुबह खिलखिलाती थी

जिसके आरती के बाद

रात जवान हो जाती थी

जिसकी सांसों को सुनकर

पुरवाई चलती थी

उसकी मुस्कान से

उसकी गृहस्थी की

ज्योत जलती थी

 

वह आज गुमसुम

चुपचाप शांत है

शायद कोई बात है

जिससे भयाक्रांत है

उसकी आंखों में वेदना

झलक रही थी

आंसू की धार

उसके पलकों से छलक रही थी

अपने हृदय में कोई पीड़ा

वह छुपाए जा रही थी

ससुराल में उसकी उपेक्षा

 उसे अंदर ही अंदर

खाए जा रही थी

घर का हर सदस्य उससे

 एक सवाल पूछ रहा था

जिसका जवाब

उसे नहीं सूझ रहा था

 

उसने कठोर नियम का पालन किया

हर विधि को पवित्रता से पूर्ण किया

हर पूजा स्थल के

चौखट पर माथा टेका

चमत्कार की आशा से

सब की तरफ देखा

हर बड़े चिकित्सक से मिली

पर उसके मन की कली नहीं खिली

उसने आधुनिक आईवीएफ का भी प्रयास किया

पर यहां पर उसने भी

उसे निराश किया

पति और घर वाले

 उसकी उपेक्षा करने लगे

वह तो एक बांझ है

सब तिरस्कार से कहने लगे

बांझ शब्द उसके कानों में

पिघले शीशे सा लगने लगा

उसके नारीत्व का अपमान

चोट खाए नागिन सा धीरे-धीरे जगने लगा

वह लोगों के तानों से टूट गई

उसकी खुशी उससे

 सदा के लिए रूठ गई

 

उसने आत्मबल से

एक कठोर निर्णय लिया

अपने पति को

उसमें सम्मिलित किया

वह एक बाल आश्रम में

अपने पति संग गई

वहां पर एक बच्ची को

गोद लेने की बात कही

सारी कागजी कार्रवाई के बाद

कुछ माह पश्चात

उन्हें किया गया याद

वह बच्ची उन्हें

गोद दी गई

उनकी कानूनी रजामंदी

अधिकारी के समक्ष ली गई

 

बच्ची को गोद लेकर

वह खुशी-खुशी घर आई

घर के हर कोने को सजाया

मिठाई लोगों में बटवाई

उसके जीवन में नई सुबह हुई

दूर हुई दुःख भरी सांझ

बच्ची को गोद में लेकर

वह नाच उठी

उसकी भावनाओं की

सभी सीमाएं टूटी

और पूछ बैठी

ऐ बेदर्द जमाने

बता-

अब मुझे कौन कहेगा बांझ ? /

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted