श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी  के साप्ताहिक स्तम्भ  “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “सजल –  नैन उनके झुके तो नमन हो गया…। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।

✍ मनोज साहित्य # २२५ ☆

☆ सजल –  नैन उनके झुके तो नमन हो गया…  श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

नैन उनके झुके तो नमन हो गया।

भावना का सहज, निर्गमन हो गया।।

*

राह में कल मिले, मुस्कराते हुए।

सामने आ गए, दिल चमन हो गया।।

*

प्रेम की राह कंटक भरी है प्रिये।

वासना में फँसे, तो पतन हो गया।।

*

द्वार में बैठकर, थी प्रतीक्षा हमें।

आँख पथरा गईं सच कथन हो गया।।

*

चाँदनी रात मिलने का वादा प्रिये।

तुम न आए मन में चुभन हो गया।।

*

देश की बात पर हम सभी एक हों।

सिर निछावर किया वह रतन हो गया।।

*

शूर होता वही जो मिटे देश पर।

वीर बलिदानियों का वतन हो गया।।

©  मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

16/6/26

संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002

मो  94258 62550

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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