श्री अरुण कुमार दुबे

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “गुमान छोड़ के जीना है“)

☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १५४ ☆

✍ गुमान छोड़ के जीना है… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे 

गुनाह मौन जो देखो छुपी रज़ा होती

बशर गलत न सहे दिल में जो अना होती

 *

दरख़्त नीम के जैसी पिता की फ़ितरत है

घनी दे छाँव भले कड़वी जायका होती

 *

ग़ुरूर जिस्म पै इतना न करो तुम साहिब

जो रूह ओढ़े है वो ख़ाक की रिदा होती

 *

किसी भी मुद्दे की उड़ती ख़बर पे आँख रखें

न सच हो झूठ सरासर नहीं हवा होती

 *

गुमान छोड़ के जीना है आजज़ी अपना

ये मर्ज़ ऐसा है कुछ और कब दवा होती

 *

ये ख़ास होते नुमाइंदे मान लो रब के

फ़कीर की  ज़ुबाँ पै सबको है दुआ होती

 *

हसीन कोई न मेकप से सिर्फ लगता है

हसीन वो है अगर आँख में हया होती

 *

अगर हाँ , देखते हैं, बोले तो, सही नेता

कोई भी काम बताओ नहीं मना होती

 *

अरुण ज़ुदा है जो महबूब से उसे पूछो

फ़िज़ा खिज़ा सी जुदाई में बारहा होती

© श्री अरुण कुमार दुबे

सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश

मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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