श्री अरुण कुमार दुबे

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “रूह परिंदा तन में तड़पे“)

☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १५५ ☆

✍ रूह परिंदा तन में तड़पे… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे 

जब जब मुझको याद करोगे

तन्हाई में शाद करोगे

 *

 जंगल जैसे काट रहे हो

बंजर भी आबाद करोगे

 *

अपनी सरपंची की खातिर

दुनिया क्या बर्बाद करोगे

 *

मौत बरसती है अंबर से

क्या क्या तुम ईज़ाद करोगे

 *

जोर बिना कब हक़ मिलता अब

नाहक ही फ़रियाद करोगे

 *

रूह परिंदा तन में तड़पे

कब तक रब आज़ाद करोगे

 *

इश्क़ न कर जब अच्छी सेहत

क्या तबियत नाशाद करोगे

 *

दुनिया से बातें दुनिया की

खुद से कब संवाद करोगे

 *

मक़्ता दोस्त ग़ज़ल का आया

आखिर कब इरशाद करोगे

 *

रब्त अरुण शक़ करते बिगड़े

क्या तुम इसके बाद करोगे

© श्री अरुण कुमार दुबे

सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश

मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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