श्री संतोष नेमा “संतोष”
(आदरणीय श्री संतोष नेमा जी कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय कविता – माँ… । आप श्री संतोष नेमा जी की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार आत्मसात कर सकते हैं।)
☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # ३०८ ☆
☆ कविता – माँ… ☆ श्री संतोष नेमा ☆
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जिसने मुझको खुद लिखा, उसे लिखूं क्या आज |
मेरी हर इक सांस में, करती माँ ही राज ||
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पोथी पोथी पढ़ गए, मिला एक यह ज्ञान।
इस सारे संसार से, माँ है बड़ी महान।।
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नैनन में है जल भरा, आँचल में बस प्यार |
तुमसा दूजा कौन माँ, रखता प्रेम दुलार ||
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© संतोष कुमार नेमा “संतोष”
वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार
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