श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘मधुमास…‘।)
☆ शशि साहित्य # ३४ ☆
कविता – मधुमास… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
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रूप सजा वसुधा का दुल्हन सा,
बलिहारी हो रहे ऋतुराज…
बदरा भी रिमझिम हुए,
हरियाली का है राज…
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टिप टिप करती बूंदनियां,
ज्यों बजे कहीं पर साज…
भावुक मन में उठे हिलोरें,
बतलाओ क्या है राज…
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प्रकृति खिलखिला उठी,
पहन लिया सौंदर्य का ताज…
ना बोलो कुछ कठोर बोल,
दिल पर गिरे है गाज…
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बूंदों संग खुशियां बरसें,
छाया मधुमास है आज…
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




