श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘अस्तित्व…’।)
☆ शशि साहित्य # ४३ ☆
कविता – अस्तित्व… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
☆
मेरे शौक बता रहे मुझको,
बहुत कुछ अंदर जिंदा है,,
दिल की धड़कन नम है,
उसे हौले हौले बहना है,,
मंजिल की क्या बात करें,
कुछ पता नहीं वह कैसी है,,
राहें खुशगवार बहुत हैं,
वहीं पैर अब थम गए हैं,,
जो भी मन को विकल करें,
हर उस बात का त्याग है,
चीख चिल्ला कर ऊर्जा गंवाना,
दोष, फितरत में शामिल नहीं है,,
नीरसता थक, हाहाकार करे,
सुख सरसता को आमंत्रण है,,
वक्त के दायरे का बंधन,
अब नहीं स्वीकार है,,
शाश्वत है और निरंतर है,
उससे प्रीत हर सीमा पार है…
☆
© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





