आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका सौ.ज्योत्स्ना तानवडे यांना मनस्पर्शी साहित्य प्रतिष्ठान ने सन्मानित केले आहे. प्रतिष्ठानच्या लेखन उपक्रमात साप्ताहिक कविता आणि मासिक लेख वर्षभर लिहिल्याबद्दल सातत्यपूर्ण उत्तम लेखनाचा विशेष पुरस्कार त्यांना प्राप्त झाला आहे.
ई अभिव्यक्ती मराठी परिवारातर्फे सौ.तानवडे यांचे मन:पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील वाटचालीसाठी हार्दिक शुभेच्छा 💐💐
आजच्या अंकात वाचूया सुश्री ज्योत्स्ना तानवडे चा चित्रकाव्य – पाऊस आला रे SSSSS…!
संपादक मंडळ
ई अभिव्यक्ती मराठी
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चित्रकाव्य
– पाऊस आला रे SSSSS…! – ☆ सुश्री ज्योत्स्ना तानवडे ☆
अरण्यऋषी म्हणून गौरवले गेलेले पद्मश्री मारुती चित्तमपल्ली यांचे नुकतेच दु:खद निधन झाले. वनाधिकारी म्हणून सरकारी सेवेत कार्यरत झाल्यापासून पुढे निवृत्त झाल्यानंतरचा सगळा काळ.. अशी एकूण ६५ वर्षं त्यांनी जंगलातच वास्तव्य केलं होतं, आणि ही त्यांची आवड अपवादात्मक म्हणावी अशीच होती. ‘वन्यजीव अभ्यासक आणि निसर्ग-लेखक‘ म्हणून ते ख्यातनाम होते. वन्यजीव संरक्षणात त्यांचे मोठेच योगदान आहे. “वन्यजीवांसाठी अनाथाश्रम“ ही संकल्पना मेळघाट आणि नागझिरा इथे प्रत्यक्षात उतरवण्यामध्ये त्यांचा मोलाचा सहभाग होता. जर्मन, रशियन आणि संस्कृत या भाषांसह त्यांना एकूण १८ भाषा अवगत होत्या हे त्यांचे आणखी एक वैशिष्ट्य होते. तसेच, पक्षीविज्ञान आणि वन्यजीवनाशी संबंधित अनेक नवीन शब्द, संज्ञा आणि पक्षीशास्त्रीय संकल्पनांची मराठी नावे ही त्यांनी मराठी भाषेला दिलेली देणगीच म्हणायला हवी.
जंगलातले अद्भुत म्हणावे असे प्राणी-जीवन आणि त्यातील बारकावे रेखाटणारी आणि ओघवत्या शैलीत त्या सगळ्या गोष्टींचे वर्णन करणारी त्यांची कितीतरी पुस्तकं म्हणजे सर्वसामान्यांना अगदी वेगळीच आणि अनोखी माहिती देणारा एक चिरंतन असा अनमोल खजिनाच आहे. “चकवा चांदणं“ ही त्यांची आत्मकथा प्रसिद्ध आहे.
पद्मश्री पुरस्काराप्रमाणे, महाराष्ट्र सरकारतर्फे त्यांना “विंदा करंदीकर स्मृति जीवनगौरव पुरस्कार“ प्रदान करून सन्मानित करण्यात आले होते. २००६ साली सोलापूर इथे झालेल्या मराठी साहित्य संमेलनाचे अध्यक्ष पद त्यांनी भूषवलेले होते.
आदरणीय स्व. मारुती चित्तमपल्ली यांना आपल्या सर्वांतर्फे अतिशय भावपूर्ण श्रद्धांजली.
आजच्या अंकात वाचूया.श्री श्री आशिष बिवलकर द्वारा प्रस्तुत आपल्या ओळखीच्या प्राण्यांबद्दल एक वेगळीच माहिती देणारा त्यांच्या एका पुस्तकातला काही अंश ‘प्राणीकोश’.
🙏भावपूर्ण श्रद्धांजली🙏
– संपादक मंडळ,
ई अभिव्यक्ति, मराठी विभाग.
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
☆ अंतरराष्ट्रीय अवधी सेमिनार, मारीशस – विश्व भाषा अवधी के वैश्विक सर्व मान्यता की ओर बढ़ते कदम☆ साभार – डॉ.गंगा प्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’ ☆
अवधी के ध्वज और बापू के अहिंसा के संदेश के साथ मारीशस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अवधी सेमिनार हेतु भारतीय विद्वत्मंडल रवाना।
भारत से तीस आचार्यों का एक अकादमिक मंडल लख़नऊ से अवधी भाषा के वैश्विक स्वरूप की मान्यता और उसके सम्यक् प्रचार -प्रसार के लिए सुदूर अफ्रीकी महाद्वीप में स्थित मारीशस की अकादमिक यात्रा के लिए चारबाग स्टेशन से तेजस ट्रेन से रवाना हुआ। देश के कोने कोने से आने वाले इस विद्वत्मंडल के शेष सदस्य दिल्ली स्थित इंदिरा गाँधी अंतर राष्ट्रीय एअरपोर्ट, दिल्ली पर इस दल का हिस्सा बनें और फिर उन्होने मारिशस के लिए उड़ान भरी। अपनी सात समंदर पार वाली लंबी उड़ान के बाद अवधी के ध्वज और बापू के अहिंसा के संदेश के साथ यह भारतीय विद्वत्मंडल लघु भारत के नाम से दुनिया भर में चर्चित अपने गिरमिटिया पूर्वजों की स्वर्णभूमि मारीशस में अपनी उपस्थिती दर्ज कराएंगे।
अंतरराष्ट्रीय अवधी अकादमी, लखनऊ, भारत, आर्य महासभा, मॉरीशस एवं हिंदी साहित्य अकादमी, मारीशस के संयुक्त तत्वावधान में ‘महात्मा गांधी के कालजयी दृष्टिकोण की पुनर्कल्पना : 21वीं सदी के परिप्रेक्ष्य में’ विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के अलग-अलग हिस्सों से जा रहे मनीषी विचार- विमर्श करेंगें।
इस आयोजन में मॉरीशस से स्थानीय समन्वयक के रूप में हिंदी साहित्य अकादमी के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. हेमराज सुंदर जी, छह सौ से अधिक पात्रों और तीन हज़ार से अधिक पृष्ठों वाले विश्व के विशालतम उपन्यास ‘पथरीला सोना’ के सर्जक श्रीरामदेव धुरंधर और डॉ. जयचंद लाल बिहारी जी योगदान दे रहे हैं।
लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर अंतरराष्ट्रीय अवधी अकादमी के संस्थापक निदेशक डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’ जी ने यात्रियों के दल को एक बड़े लक्ष्य के लिए विदा करते हुए सुखद यात्रा और सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस यात्रा में प्रो० शैलेंद्र नाथ मिश्र,अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष, प्रो० जयशंकर तिवारी कार्यकारी निदेशक, प्रो० आर० पी० पाठक, संरक्षक और अंतरराष्ट्रीय अकादमी के सचिव प्रो० अनिल विश्वकर्मा इस महत सारस्वत आयोजन के संयोजक की भी भूमिका निभाएँगे ।
इस यात्रा से जहाँ एक ओर भारत और मॉरीशस के संबंध मधुर एवं सुदृढ़ होंगे वहीं ‘रामचरित मानस’ को वैश्विक महाकाव्य तथा अवधी भाषा को वैश्विक भाषा के रूप में स्वीकृति मिलेगी।
वहाँ की संगोष्ठी में समकालीन वैश्विक परिवेश में विश्व शांति हेतु गांधी दर्शन की प्रासंगिकता भी समझी जा सकेगी।
साहित्यक यात्रियों का यह विद्वत्मंडल मारीशस के राष्ट्रपति और भारतीय उच्चायोग, मारीशस से भी शिष्टाचार भेंट भी करेगा।
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साभार – डॉ. गंगाप्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’
संस्थापक निदेशक, अंतरराष्ट्रीय अवधी अकादमी
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
आपण देत असलेल्या उत्तम प्रतिसादाबद्द्ल सर्व साहित्यिकांचे मनःपूर्वक आभार! विषयांची विविधता असूनही आपण सर्वजण उत्साहाने लिहीत असता. त्यामुळे भरपूर साहित्य प्राप्त होते.
आम्हाला येणा-या अडचणी लक्षात घेऊन आम्ही आपणाला काही सूचना करू ईच्छितो. त्याचा विचार करावा ही विनंती:
आपले साहित्य पाठवण्यापूर्वी शुद्धलेखन तपासून पहावे.
आपले साहित्य विशिष्ट दिवशी किंवा त्या दरम्यान यावे यासाठी पुरेश्या कालावधीपूर्वी पाठवावे. पुढील आठ दिवसांचा आराखडा तयार असतो. त्यात ऐन वेळेला बदल करणे शक्य होत नाही.
एकाच विषयावर अनेक लेख, कविता आल्यानंतर साधारणपणे प्रथम आलेले साहित्य प्रथम प्रकाशित होईल.
कविता पाठवताना एकाच विषयावर एकाच वेळेला अनेक कविता पाठवू नयेत.
कोणते साहित्य कोणाकडे पाठवायचे यासंबंधी पूर्वी सूचना दिल्या आहेत. त्यांचे काटेकोरपणे पालन करावे. एकच साहित्य संपादक मंडळातील सर्वांकडे पाठवू नये, ही विनंती.
येणा-या अडचणी लक्षात घेऊन या सूचना केल्या आहेत. तरी कोणतेही गैरसमज करून न घेता सहकार्य करावे ही विनंती.
– संपादक मंडळ
ई – अभिव्यक्ती, मराठी विभाग
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
☆ प्रख्यात प्रवासी साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर (मॉरीशस) के जन्मदिवस पर भारत में विशेष आयोजन ☆ साभार – श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆
हिंदी गद्य साहित्य के प्रख्यात साहित्यकार, कथाकार नाट्यकार एवं उपन्यासकार श्री रामदेव धुरंधर (मॉरीशस) के जन्मदिन पर युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (उप्र इकाई) एवं डिप्लोमा फार्मेसी एसोसिएशन (आगरा इकाई) के सौजन्य से साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन।
आगरा। आज दिनांक 11 जून 2025 (सांय 6:30) को युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच उत्तर प्रदेश इकाई एवं डिप्लोमा फार्मेसी एसोसिएशन आगरा इकाई के सौजन्य से श्री रामदेव धुरंधर जी (मॉरीशस) के 79वां जन्मदिवस के अवसर पर एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन आगरा स्थित होटल बेडवाइजर (नियर शिल्पग्राम, ताज नगरी आगरा) में किया गया है।
श्री धुरंधर ही के जन्मदिन के इस अवसर अवध भारती साहित्य संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं अवधी – हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार डॉ. राम बहादुर मिश्र जी ने युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच के प्रांतीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह श्रेयस को सुखद जानकारी देते हुए बताया कि लघुभारत मॉरीशस में रहकर हिंदी की सेवा करने वाले प्रवासी साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी के उपन्यास “ढलते सूरज की रोशनी” को अवध विश्वविद्यालय अयोध्या ने अपने पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया है। यह श्री धुरंधर जी के जन्मदिन पर विश्वविद्यालय एवं भारतीय हिंदी जगत द्वारा प्रदान किया गया एक उपहार सदृश्य है।
श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’
इस अवसर पर युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच उत्तर प्रदेश इकाई के प्रांतीय अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह श्रेयस ने मंच के पदाधिकारी एवं सदस्यों की तरफ से श्री रामदेव धुरंधर जी के जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए बताया कि आज इस पावन अवसर पर ताज नगरी आगरा में एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन भी किया जाएगा।
इस साहित्यिक संगोष्ठी का विषय है “भेषजज्ञ के भीतर का साहित्यकार”। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डिप्लोमा फार्मेसी एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के पूर्व संस्थापक अध्यक्ष डॉ जितेंद्र कुमार जैन करेंगे, वही कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ चीफ फार्मासिस्ट एवं प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार श्री राजेश कुमार सिंह श्रेयस सवा साहित्य की चर्चा के साथ-साथ श्री रामदेव धुरंधर जी के रचना संसार पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालेंगे।
कार्यक्रम के आयोजक डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय संगठन मंत्री एवं उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के सदस्य डॉ. रविंद्र सिंह राणा ने उपरोक्त कार्यक्रम के विषय में अवगत कराते हुए बताया कि एक चीफ फार्मासिस्ट के रूप में अपनी सेवा सेवाएं देने वाले राजेश कुमार सिंह श्रेयस जी की साहित्यिक उपलब्धियों पर संगठन एवं पूरा फार्मासिस्ट समाज गर्व करता है। डॉ रविंद्र सिंह राणा ने बताया कि श्री राजेश कुमार सिंह ” श्रेयस ” द्वारा के द्वारा लिखें गए अन्य साहित्यिक ग्रंथो के अतिरिक्त अब तक प्रकाशित उनके दोनों उपन्यास (तुमसे क्या छुपाना एवं चाक सी नाचती जिंदगी) मानव स्वास्थ्य के प्रति जन जागरूकता का सन्देश देने वाले स्वयं में विशेष अद्वितीय साहित्यिक उपन्यास है। क्षय मुक्त भारत की संकल्पना पर आधारित श्री राजेश कुमार सिंह श्रेयस कृत उपन्यास को वर्ष 2023 में राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा श्याम सुंदर दास पुरस्कार (₹ 100000/-) से भी सम्मानित किया जा चुका है।
चीफ फार्मासिस्ट के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले साहित्यकार फार्मासिस्ट श्री राजेश कुमार सिंह श्रेयस भारत सरकार के महत्वाकांक्षी क्षय उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत क्षय मुक्त भारत 2025 के लिए अनवरत अपनी उल्लेखनीय सेवाएं दे रहे हैं। इस महान कार्य के लिए भी संगठन श्री सिंह के प्रति बार-बार कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए गौरव की अनुभूति कर रहा है।
श्री रामदेव धुरंधर जी के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर श्री राजेश कुमार सिंह श्रेयस ने राज्य प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र आगरा के निदेशक को उनकी लाइब्रेरी के लिए अपनी कृतियां भेंट की l
हिंदी गद्य साहित्य के प्रख्यात साहित्यकार, कथाकार नाट्यकार एवं उपन्यासकार श्री रामदेव धुरंधर (मॉरीशस) के जन्मदिन पर युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच (उप्र इकाई) एवं डिप्लोमा फार्मेसी एसोसिएशन (आगरा इकाई) के सौजन्य से साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन।
रिपोर्ट : डॉ रविंद्र सिंह राणा, आगरा, प्रांतीय संगठन मंत्री, डिप्लोमा फार्मेसी स्टेट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश एवं सदस्य उत्तर प्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल।
🙏💐 ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से श्री रामदेव धुरंधर जी को उनके जन्मदिवस पर अशेष हार्दिक शुभकमनाएं 💐🙏
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साभार : श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”
लखनऊ, उप्र, (भारत)
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
📖 दि. ५/६ ते ९/६/२५ अंक बंद असल्याबद्दल महत्वाची सूचना!! 📖
कृपया सर्वांनी नोंद घ्यावी – –
गुरुवार दि. ५/६/२५ ते सोमवार दि. ९/६/२५ असे पाच दिवस काही अपरिहार्य तांत्रिक कारणामुळे आपल्या ई- अभिव्यक्तीचे दैनिक अंक प्रकाशित करता येणार नाहीत.
यासाठी सर्व लेखक / लेखिका, कवी / कवयित्री आणि तमाम वाचकवर्ग यांच्याप्रती आम्ही दिलगीर आहोत. मंगळवार दि. १०/६/२५ रोजी अंक नेहेमीप्रमाणे प्रकाशित होईल. आपणा सर्वांचे सहकार्य अपेक्षित आहे.
– संपादक मंडळ
ई – अभिव्यक्ती, मराठी विभाग
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
☆ व्यंग्यम् जबलपुर की मासिक व्यंग्य गोष्ठी सम्पन्न ☆ साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार ☆
जबलपुर। संस्कारधानी में व्यंग्य में रुचि रखने वाले शहर के लब्धप्रतिष्ठ व्यंग्यकारों की उपस्थिति में व्यंग्यम् जबलपुर द्वारा मासिक व्यंग्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी की शुरूआत व्यंग्यकार श्री रमाकांत ताम्रकार जी ने व्यंग्य गोष्ठी के संस्थापक स्व. जय प्रकाश पांडे जी के स्मरण से की। व्यंग्य पाठ की मासिक गोष्ठी में उपस्थित श्री राकेश सोहम जी ने बिन डाटा सब सून, श्री प्रतुल श्रीवास्तव जी ने ज्योतिषाचार्यों की कैद में गृह नक्षत्र, श्री निरंजन द्विवेदी ‘वत्स’ जी ने व्यंग्य जमीर और उसूल बेचते हैं, श्री विजय नेमा ‘अनुज’जी ने पराजय, आचार्य विजय तिवारी ‘किसलय’ जी ने विद्या वकील, श्री अभिमन्यु जैन जी ने खोटी नीयत, श्री विनोद खंडालकर जी ने रंगों में छिपा अंधविश्वास, श्री यशोवर्धन पाठक जी ने बस एक मिनट में,श्री सुरेश ‘विचित्र’ जी ने सब कुछ ठीक ठाक है,श्री रमाकांत ताम्रकार जी ने देवदूत तथा कार्यक्रम के यशस्वी अध्यक्ष डॉ. कुंदन सिंह परिहार जी ने गुस्ताख हँसी नामक व्यंग्यों का पाठ किया।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री सुरेश विचित्र ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के प्रसिद्ध कथाकर एवं व्यंग्यकार प्रो. कुंदन सिंह परिहार जी ने की तथा आभार श्री प्रतुल श्रीवास्तव जी द्वारा व्यक्त किया गया।
साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार, जबलपुर
≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
📖 महत्वपूर्ण सूचना – 5 जून से 9 जून तक प्रकाशन में विराम 📖
सम्माननीय लेखक एवं पाठक गण सादर अभिवादन,
कुछ तकनीकी कारणो से5 जून से 9 जून तक ई-अभिव्यक्ति के प्रकाशन में विराम रहेगा। 10 जून से ई-अभिव्यक्ति का प्रकाशन पुनः प्रारम्भ हो जाएगा। हम अभिभूत हूँ आपके अथाह प्रेम, स्नेह और ई-अभिव्यक्ति को इतना प्रतिसाद देने के लिए।
आपके आत्मीय स्नेह के लिए पुनः हृदय से आभार। 💐🙏
सस्नेह
हेमन्त बावनकर
संपादक (ई-अभिव्यक्ती)
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
आपल्या समूहातील लेखिका सुश्री अंजली गोखले यांनी ‘ विज्ञान ‘ विषयावर आयोजित केलेल्या एका कथा स्पर्धेत भाग घेतलेला होता आणि डॉ. जयंत नारळीकर यांनी त्यांच्या कथेची दखल घेतल्याबद्दलचे स्वतः लिहिलेले पत्र त्यांच्या स्वाक्षरीसह अंजलीताईंना पाठवले होते. तेच हे पत्र…
या गोष्टीला आता जरी काही वर्षे उलटून गेली असली तरी पद्मविभूषण डॉ. नारळीकर यांचे हस्ताक्षर आणि स्वाक्षरी हा फक्त अंजलीताईंसाठीच नाही तर प्रत्येक भारतीयासाठी आता एक अनमोल ठेवा असणार आहे, यात दुमत असणार नाही असे खात्रीने म्हणावेसे वाटते. म्हणूनच अंजलीताईंना त्या स्पर्धेत प्रथम क्रमांक मिळालेली ही कथा आजच्या जीवनरंग सदरात प्रकाशित करत असतांना हे पत्रही आवर्जून प्रकाशित केले आहे. डॉ. नारळीकर यांना आपल्या सर्वांतर्फे पुन:श्च भावपूर्ण आदरांजली आणि अंजलीताईंचे मनःपूर्वक अभिनंदन.
संपादक मंडळ
ई अभिव्यक्ती मराठी
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका सुश्री गायत्री हेर्लेकर यांची दोन पुस्तके नुकतीच प्रकाशित झाली आहेत. ‘सेल्फी’ हा लेखसंग्रह व ‘परतीचा पाऊस’ हा कथासंग्रह नागपूर येथे ‘आम्ही सिद्ध लेखिका’ समुहाच्या स्नेहसंमेलनात प्रकाशित झाले आहेत. यापूर्वी त्यांचा “बीज अंकुरे अंकुरे” हा कवितासंग्रह ही प्रकाशित झाला आहे.
त्यांच्या या साहित्यिक वाटचालीबद्दल ई अभिव्यक्ती परिवारातर्फे मन:पूर्वक अभिनंदन आणि शुभेच्छा.
संपादक मंडळ, ई-अभिव्यक्ती (मराठी)
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈