हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# १०३ – मौत की फकीरी… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– मौत की फकीरी…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # १०३ — मौत की फकीरी — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

गरीब और धनवान धरती पर जीवन से बने रहे। धनवान ने खूब पाया और गरीब ने खूब खोया। गरीब कपड़े के लिए तरसता था और धनवान कपड़ों में बादशाह था। पर दोनों दो गज के कफन में लिपट कर भगवान के घर जाते। जाने में गरीब अपने दायरे से होताऔर धनवान इस तरह से होता दो गज से अधिक कफन में जाने की व्यवस्था हो तो वह जाने का रास्ता भूल जाता।

 © श्री रामदेव धुरंधर

14 — 04 — 2024

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# १०१ – धरती एक ही… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– धरती एक ही…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # १०१ — धरती एक ही — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

अकूत धनवान सोचता था एक दिन इतना कुछ छोड़ कर जाना है। इस सोच से उसे रोना आ जाता था। इसी तरह की सोच एक फटेहाल आदमी के जेहन में कौंधती थी। कितने कष्ट से अपनी छोटी सी झोंपड़ी बनायी थी। एक दिन छोड़ कर जाना है। इस सोच से उसे भी रोना आ जाता था। शायद दुनिया के लिए यह नई बात न हो गरीब अपने जन्म की धरती के सीने पर लिखता हो मूल्यवान तो मैं भी होता हूँ।

 © श्री रामदेव धुरंधर
02 – 04 — 2026

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ९८ – तकदीर… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– तकदीर…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ९८  — तकदीर — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

(रिश्तों पर आधारित मेरी एक भावनात्मक सोच)

उसने जीवन पर्यंत अपनी तकदीर की तुलना अमावस से की। उसके पास न कभी ठीक से पैसा आया और न सेहत उस पर कृपालु हुई। यही उसकी तकदीर को अंधेरे पक्ष में ढालता था। परंतु आज उसके लिए तकदीर की परिभाषा बदल रही थी। उसके अपने बेटे – बेटियाँ उसके कंठ में पानी डाल रहे थे। सब की आँखों में उसके लिए मोह की आभा थी। पत्नी रो कर कह रही थी मत जाओ! उसने अपनों का यह संसार तकदीर से ही तो पाया था। बंद होती उसकी आँखों की अंतिम भाषा में लिखा हुआ था, — “इतनी तकदीर तुम्हारे पास थी और तुम यही पहचान न पाए थे।”

© श्री रामदेव धुरंधर

14 – 03 — 2026

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ९७ – रोग ग्रसित राजा… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– रोग ग्रसित राजा…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ९७ — रोग ग्रसित राजा — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

राजा के तीन रोग थे। उसने अपने रोग स्वयं में छिपाये रखा क्योंकि रोग प्रकट होने से उसका मस्तक झुकता। आश्चर्य, उसके देश के कवि ने उसके तीन रोगों से मिलती जुलती कविता लिख दी। राजा क्रोधित हुआ। उसने कवि की हत्या करवा दी। जहाँ लाश फेंकी गई वहाँ सुन्दर फूल खिले। राजा को ये फूल बहुत पसंद आए। पर उसे जब पता चला ये फूल उसके शत्रु के वक्ष पर उगे हुए हैं बिलखने पर चौथे रोग ने उसे ग्रस लिया।

 © श्री रामदेव धुरंधर

07 – 03 – 2026

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ९६ – वंदन… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

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आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– वंदन…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ९६ — वंदन — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

मैंने देखा मेरी टूटी हुई वीणा ने स्वयं अपनी मरम्मत कर ली है। पर मैं तो वीणा के मामले में छलिया हूँ। मेरे पास वीणा हो सकती है, लेकिन मैं उसके तारों को झंकृत नहीं कर सकता। पर मेरी वीणा की बात कुछ और है। विशेष कर आज मेरी वीणा आकंठ जागृत थी। मैं चुप था। मेरी वीणा ने स्वयं गाया, “मॉरिशस पहुँचे उन प्रथम भारतीय मजदूरों को वंदन जिनकी कुदाल से इस देश की धरती पहली बार स्पंदित हुई थी।”

 © श्री रामदेव धुरंधर

24 – 02 – 26

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ९५ – पराये भी अपने… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

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आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– पराये भी अपने…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ९५ — पराये भी अपने — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

दिवाली से चार दिन पहले हमारे पड़ोसी के घर में जवान बेटे की मृत्यु हुई थी इसलिए वहाँ दिवाली के दिये नहीं जले। शोक मानो स्वयं बोला हो। हमारे यहाँ दिवाली की भव्य तैयारी तो हो गई थी, लेकिन मेरे पिता ने हमसे कहा था हम दो ही दिये जलायें। पिता के कहने से हमने ऐसा ही किया। शोकग्रस्त घर के उधर के पड़ोसी ने भी दो ही दिये जलाये। इस बार मेरे पिता बोले थे, “पड़ोसी ऐसा ही होना चाहिए।”

 © श्री रामदेव धुरंधर

12 – 02 — 2026

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ९२ – कारा… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– कारा…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ९२ कारा  ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

दोनों कहते थे पिंजड़े में बंद उनका तोता उनके प्रेम का साक्षी है। तोते को दिखा कर वे हाथ पर हाथ रखते और कभी एक दूसरे को चूम लेते थे। तोता पिंजड़े में जैसे उनका यह प्रेम देख कर नाचने लगता था। आवाज़ तो वह खूब लगाता था। पर तोता एक दिन पिंजड़ा तोड़ कर उड़ गया। दोनों समझ रहे थे तोता उनके प्रेम का मोहताज नहीं था। वह भी एक जीव है। उसका अपना प्रेम कहीं और है।

 © श्री रामदेव धुरंधर

26 — 01 — 2026 

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ९१ – सिकंदर… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– सिकंदर…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ९१ — सिकंदर — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

मैं सिकंदर को कहानियों से जानता हूँ। आज उसके लिए लिख रहा हूँ। तुम पराजित योद्धा के रूप में पीछे लौटे हो सिकंदर। तुम जहाँ खड़े हो यह तुम्हारी विजय की जमीन नहीं है। इस जमीन को पता नहीं था तुम किस इरादे से आगे बढ़े थे। अब पता है तुम क्यों वापस आए हो। फिर भी यह तुम्हें स्वीकार करेगी। जमीन होती ही ऐसी है। तुम हो, कोई और हो, हर किसी के लिए यह दो गज की जमीन सुरक्षित रखती है।
रामदेव धुरंधर

 © श्री रामदेव धुरंधर

19 – 01 — 2026

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ९१ – दिल की खातिर… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

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आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– दिल की खातिर…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ९१ — दिल की खातिर — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

चोर ने एक ऐसा आईना चुराया जो आंतरिक दुनिया दिखाता था। उसने आईने में अपना दिल देखा। बड़ा प्यारा दिल था, लेकिन वह चोर होने से उसका दिल रोता था। उसने अपने दिल की खातिर चोरी छोड़ दी। अब उसे अपने दिल का हाल जानने के लिए आईने की आवश्यकता नहीं पड़ती। पर ऐसा भी था उसने अपना दिल देखने के लिए कहीं से आईना चुराया नहीं था। बस अपने दिल की खातिर एक कल्पना ने उसे बांध लिया था।

 © श्री रामदेव धुरंधर

13 – 01 – 2026

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ९० – चरित्र – मंथन… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– चरित्र – मंथन…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ९० — चरित्र – मंथन — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

बिल्ली अपने सामने खड़े चूहे को मजे – मजे देख रही थी। चूहा अपनी ओर से सतर्क ही था। सहसा भूकंप आने पर चूहा और बिल्ली दोनों एक खंडहर में फँस गए। बिल्ली की साँसें उखड़ने पर आईं। जब कि चूहा तो मज़े – मज़े जी सकता था। बिल्ली तो मर ही जाती कि चूहे ने मिट्टी खोद कर बाहर निकलने का रास्ता बना दिया। खंडहर से मुक्त होने पर चूहे के प्रति कृतज्ञ होते भी बिल्ली ने उसका शिकार कर लिया। बिल्ली चूहों का शिकार करने की अपनी प्रकृति से मजबूर थी। उधर ऐसी बात नहीं कि चूहा न जानता हो कि बिल्ली उसे खा जाएगी। पर मिट्टी खोदने की अपनी प्रकृति से चूहा भी मजबूर था।

 © श्री रामदेव धुरंधर
08 – 01 – 2026

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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