हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ८३ – फिलहाल इतना ही… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– फिलहाल इतना ही…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ८३ — फिलहाल इतना ही — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

मेरी मातृभूमि की एक अद्भुत सी कथा है। कभी एक नामी धर्मनेता और एक राजनेता सूखे कुएँ में एक साथ गिर गए थे। दोनों अपने – अपने भविष्य के प्रति चिंतित थे। धर्मनेता धर्म के मामले में गोबर हो जाने से राजनीति में जाना चाहता था। राजनेता चुनाव हार जाने पर धर्म का रास्ता लेने के लिए विकल था। उन दिनों धोती का जमाना होने से उन्होंने आपस में धोती बदल ली। “फिलहाल इतना ही” बदलने से उनका काम चल जाता।

© श्री रामदेव धुरंधर

24 – 10 – 2025

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com
संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ८२ – संस्मरण… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– संस्मरण…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ८२ — संस्मरण — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

साठ उपन्यासों का ख्यातिलब्ध लेखक आज शर्म और आत्मताप से इस कदर व्यथित था कि उसे लगता था अपने गले में फाँसी की रस्सी डाल कर मर जाए। बात यह थी संस्मरणों की उसकी नवीनतम कृति को विश्व पुरस्कार मिला था। पर उसका अपना तो एक भी संस्मरण नहीं था। अपने संस्मरण दमदार और खास न होने से उसने तीन चार अनपढ़ कर्मठ बूढ़ों से साठ तक संस्मरण सुन कर अपने संस्मरणों के नाम से अपनी कृति तैयार की थी।

© श्री रामदेव धुरंधर

08 – 11 – 2025

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ८१ – राग – विराग… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

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आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– राग – विराग…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ८१ — राग – विराग — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

कवि पूरी तैयारी से अपनी आत्मा और अपनी कविता के सारे शब्द बेचने गया था। खरीदने वाली वक्त की चालाक राजनीति थी। उसने राजनीति से वादा किया था अब वह केवल दरबारी कवि होगा। कवि आगे – आगे गया था। उसके शब्द न चाह कर किसी तरह उसके पीछे — पीछे गए थे। पर खरीदारी शुरु होने पर उसके शब्द उसके पीछे तो थे ही नहीं। उसके शब्दों ने तो आपस में मिल कर सामूहिक आत्म हत्या कर ली थी।

© श्री रामदेव धुरंधर

01 – 11 – 2025

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ८० – मंत्री द्वारे — द्वारे… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

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आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– मंत्री द्वारे — द्वारे…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ८० — मंत्री द्वारे — द्वारे — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

दादी को पता चला शिक्षा मंत्री शिवचरण गाँव में आया है। उसने नाती सुरेश से पूछा, “चुनाव आया है क्या नाती?” चुनाव आया तो था। मंत्री शिवचरण द्वार — द्वार जाने की प्रक्रिया में इस द्वार भी आता। दादी के इस तरह आश्चर्यकित होने का रहस्य वहाँ से था पाँच साल पहले शिवचरण जब यहाँ आया था दादी के पाँवों पर तो बस माथा पटकता था। उसने दादी से वचन लिया था, “मुझे ही वोट देना दादी।”

© श्री रामदेव धुरंधर

25 – 10 – 2025

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ७९ – प्रकृति… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– प्रकृति…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ७९ — प्रकृति — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

संसार के एक किनारे में एक विशाल रेगिस्तान पानी में डूब रहा था। प्रश्न पैदा हुआ जो रेगिस्तान पानी के लिए हमेशा तरसा कैसे हुआ कि उसके डूबने के लिए इतना पानी निकल आया? इस प्रश्न का उत्तर तत्काल न मिल कर बहुत बाद में मिला। इस तरह के प्रश्नों के उत्तर बाद में ही मिलते हैं। संसार के दूसरे किनारे में बहुत विशाल पानी था। वैसे विशाल पानी को चीर कर उससे भी बड़ा एक रेगिस्तान उभर रहा था।

© श्री रामदेव धुरंधर

16 – 10 – 2025

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ७८ – आरोपित संस्कृति… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

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आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– आरोपित संस्कृति…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ७८ — आरोपित संस्कृति — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

अपनी जन्मभूमि मॉरिशस की वह संस्कृति मुझे अच्छी तरह याद है। वह पहली संस्कृति थी जब हम से आज़ादी के लिए खून मांगा जाता था। वह संस्कृति इतनी लुभावनी थी कि वह हमारी धमनियों में रच – बस गई थी। आज़ादी की शर्त पर हम बेबाकी से खून देते थे। हमारे खून से होली खेलने की संस्कृति तो बाद में बनी है। इस विकृत संस्कृति के पक्षधर बहुत ताकतवर हैं। वे बगावत करने वालों को देश द्रोही तक कह लेते हैं।

 © श्री रामदेव धुरंधर

01 / 10 / 2025

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका# ७७ – ऋचाएँ… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

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आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– ऋचाएँ…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ७७ — ऋचाएँ — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

किसी शब्द — स्रष्टा ने पेड़ों की छालों में सहस्रों ऋचाएँ लिखी थीं। एक ऋषि ने उन सारी ऋचाओं का अर्थ समझ लिया। वह जानता था भविष्य में मनुष्य के हाथों पेड़ कटेंगे। पेड़ कटने से ऋचाएँ नष्ट हो जातीं। ऋषि इन ऋचाओं को नष्ट होने नहीं देता। उसने इन्हें कंठाग्र करना शुरु किया। वह साधना से वर्षों जी कर लोगों को यह अभ्यास करवाता। ये ऋचाएँ जन – जन के कंठ में पहुँच कर अनंत हो जातीं।

 © श्री रामदेव धुरंधर
20 – 09 – 2025

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका#७६ – विचित्र यात्रा… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

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आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– विचित्र यात्रा…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ७६ — विचित्र यात्रा — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

उसकी एक ‘कल्पना’ चल रही थी। वह असाध्य बीमारी झेलते पलंग पर था। उसे प्यास लगने पर पानी पिलाया जाता कि पूरा परिवार रोने लगा। वह अपनों को रोने से मना करता कि उसे लगा कोई उसे लेने आया है। चाहे भगवान ही आए, वह क्यों जाता? तभी उसने सुना उसकी माँ कह रही है — मेरा बेटा चला गया ! माँ के इन शब्दों के साथ उस पर मृत्यु की चादर चढ़ा दी गई। यहीं उसकी ‘कल्पना’ का पटाक्षेप हो गया।

 © श्री रामदेव धुरंधर

19 — 04 — 2025

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका#७५ – हिस्से… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

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आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– हिस्से…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ७५ — हिस्से — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

छोटा सा खरगोश आकाश में उड़ना चाहता था। बाज आकाश से यह देखने पर नीचे उतरा। उसकी हिंसक वृत्ति से अनजान खरगोश ने कहा — उसी से उसे आकाश में उड़ने की प्रेरणा मिली। बाज़ बोला — तुम धरती से हो, मैं आकाश से हूँ। जो जहाँ है उसकी धरती वहीं है, उसका आसमान वहीं है। बाद में समझ जाओगे मैंने क्या कहा था। बाज ने उसे समझ की उम्र तक पहुँचने के लिए जिंदा छोड़ा और पंख फैलाये आकाश में उड़ गया।

 © श्री रामदेव धुरंधर

30 / 08 / 2025

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ गद्य क्षणिका#७४ – महाजनी… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– महाजनी…” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ गद्य क्षणिका # ७४ — महाजनी — ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

महाजन ने जहाँ – जहाँ पैसा दिया था बीमारी और बुढ़ापे से त्रस्त होने पर मूल और सूद यथाशीघ्र समेटा। एक दिन शायद उसने सपने में पत्नी से कहा, “मुझसे पैसा लेती हो। अरी पगली, मूल न लौटाओ, लेकिन सूद तो देना।” एकदम अशक्त हो जाने पर महाजन दिनों पलंगजीवी बना रहा कि पत्नी ने अचानक ही कहा, “लो जी मैं सूद देती हूँ।” आश्चर्य, महाजन को बहुत सुकून पहुँचा। शायद उसका प्राणांत होने में अब आसानी होती।

© श्री रामदेव धुरंधर

20 – 08 – 2025

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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