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संस्थाएं / Organisations ☆ हिन्दी परिपक्वता हेतु समर्पित संस्था हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर ☆

 ☆  संस्थाएं / Organisations  ☆  ☆  हिन्दी परिपक्वता हेतु समर्पित संस्था - हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर ☆   साहित्यिक गतिविधियों की बात करें  तो पूरे मध्य प्रदेश में संस्कारधानी जबलपुर का नाम सबसे पहले लिया जाता है। देश में प्रयागराज (इलाहाबाद) के पश्चात जबलपुर ही एक ऐसा शहर  है जहाँ लगभग हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं के राष्ट्रस्तरीय साहित्यकारों ने अपनी श्रेष्ठता प्रमाणित की है। सुभद्रा कुमारी चौहान, भवानी प्रसाद तिवारी, द्वारिका प्रसाद मिश्र, हरिशंकर परसाई जैसे दिग्गजों को कौन नहीं जानता। जबलपुर के ही कामता प्रसाद गुरु की व्याकरण ने हिंदी को जो आयाम और दिशा दी है, उसके लिए सम्पूर्ण राष्ट्र उनके प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा। वर्तमान तक पहुँचते पहुँचते हिन्दी साहित्य का सृजन-प्रवाह धीमा तो नहीं हुआ परन्तु हिन्दी व्याकरण, शाब्दिक शुद्धता तथा रस-छंद-अलंकार की ओर अपेक्षानुरूप ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बिना व्याकरण ज्ञान, बिना हिन्दी शब्दों की शुद्धता तथा हिन्दी साहित्य के अथाह सागर में बिना डुबकी लगाए ही लोग हिन्दी के मोती अर्जित करना चाहते हैं। बिना...
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संस्थाएं / Organisations ☆  मुश्किल हालात में भी हम हैं न…. हैल्पिंग हेण्ड्स – फॉरएवर वेल्फेयर सोसायटी  ☆  

  ☆  संस्थाएं / Organisations  ☆    ☆  मुश्किल हालात में भी हम हैं न.... हैल्पिंग हेण्ड्स – फॉरएवर वेल्फेयर सोसायटी    ☆     आज के संवेदनहीन एवं संवादविहीन होते समाज में भी कुछ संवेदनशील व्यक्ति हैं, जिन पर समाज का वह हिस्सा निर्भर है जो स्वयं को असहाय महसूस करता है। ऐसे ही संवेदनशील व्यक्तियों की संवेदनशील अभिव्यक्ति का परिणाम है “हैल्पिंग हेण्ड्स – फॉरएवर वेल्फेयर सोसायटी” जैसी संस्थाओं का गठन। इस संस्था की नींव रखने वाले समाज-सेवा को समर्पित आदरणीय श्री देवेंद्र सिंह अरोरा  (अरोरा फुटवेयर, जबलपुर के संचालक) एक अत्यंत संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी हैं, जो यह स्वीकार करने से स्पष्ट इंकार करते हैं कि- वे इस संस्था की नींव के पत्थर हैं। उनका मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति जो इस संस्था से जुड़ा है वह इस संस्था की नींव का पत्थर है। उनकी यही भावना संस्था के सदस्यों को मजबूती प्रदान करती है।   आज जब सारा विश्व अदृश्य शत्रु ‘कोरोना’ से संघर्ष कर रहा है। हमारे देश में भी लॉकडाउन  लोग अपने अपने घरों में...
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संस्थाएं / Organisations – ☆ हैल्पिंग हेण्ड्स – फॉरएवर वेल्फेयर सोसायटी ☆ – डॉ. विजय तिवारी ‘किसलय’

 ☆ हैल्पिंग हेण्ड्स – फॉरएवर वेल्फेयर सोसायटी ☆  डॉ. विजय तिवारी 'किसलय' (www.e-abhivyakti.com की ओर से मानव कल्याण एवं समाज सेवा के लिए निःस्वार्थ भाव से समर्पित संस्था "हेल्पिंग हेण्ड्स फॉरएवर वेलफेयर सोसायटी" के सदस्यों का उनके चतुर्थ स्थापना दिवस के अवसर पर हार्दिक अभिनंदन।   इस विशेष अवसर  पर  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विजय तिवारी 'किसलय' जी के आख्यान को उद्धृत करने में प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं।)     हेल्पिंग हेण्ड्स फॉरएवर वेलफेयर सोसायटी का आज हम सभी चतुर्थ स्थापना दिवस मनाने हेतु आत्मीय एवं पारिवारिक रूप से एकत्र हुए हैं। आप सभी को हृदयतल से बधाई। संस्था "यथा नाम तथा गुणो" का पर्याय है। 'हेल्पिंग हैंड्स' अर्थात 'मददगार हाथ' आज प्राणपण से समाजसेवा में अहर्निश तत्पर हैं। यह सब मैं संस्था से जुड़कर देख पा रहा हूँ। मैं आज केवल संस्था के उद्देश्य "परोपकारी भाव" से संबंधित अपने विचार आप सब के साथ बाँटना चाहता हूँ। उपस्थित विद्वतजनों से 5 मिनट शांति एवं ध्यान चाहूँगा। महापुण्य उपकार है, महापाप अपकार। स्वार्थ के दायरे से निकलकर व्यक्ति जब...
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संस्थाएं – काव्यस्पंदन संस्था (प्रसिद्धीसाठी नाही, प्रगती साठी), महाराष्ट्र

काव्यस्पंदन संस्था, महाराष्ट्र (प्रसिद्धीसाठी नाही, प्रगती साठी) स्थापना:  29 अप्रैल 2017   दैनंदिन लेखन व्यासंग जोपासणा-या साहित्यिकांचे हक्काचे व्यासपीठ.   पारिवारीक स्नेहबंधातून विविध साहित्य प्रकारांचे ज्ञानार्जन, प्रचार व प्रसार.   काव्यस्पंदन संस्थेमार्फत दोन वर्षाच्या कार्यकाळात सुमारे दोनशे पंधरा राज्यस्तरीय कथा, काव्य, लेख स्पर्धा, उपक्रमांचे  यशस्वी आयोजन.   भजन,  अभंग, ओवी, भारूड, गण, गौळण,पोवाडे,  विडंबन गीत, भावगीत, लावणी अशा अभिजात पारंपरिक साहित्य प्रकारांवर दैनंदिन उपक्रम व कार्यशाळांचे आयोजन.   बालसाहित्यासाठी स्वतंत्र समुह.   म्हणी, वाक्प्रचार, काव्यमय गोष्ट,  उखाणे,  काव्यकोडे आदी साहित्य प्रकारासाठी विशेष स्पर्धा / उपक्रमांचे आयोजन.   साहित्यिकांची मुलाखत. नवीन रवी, नवीन कवी उपक्रम.   नाविन्यता आणि वेविध्य जोपासणा-या काव्यस्पंदन महास्पर्धा अंतर्गत दहा फेर्‍यांचे यशस्वी  आयोजन.   पारिवारीक स्नेहबंध जपणारे अनोखे स्नेहबंधन. काव्यस्पंदन.   समूह प्रशासक -  1) श्री भालचंद्र कऱ्हाडे  2) श्रीमति रंजना लसणे समूह संचालक -  1) कवीराज विजय यशवंत सातपुते  2)कवियित्री संगिता माने संयोजन समिति - 1) डॉ. रवीद्र वेदपाठक  2) श्री अजय रामटेके 3) श्री अजित माने  4)  सुश्री निशिगंधा सदामते   ...
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संस्थाएं – व्यंग्यम (व्यंग्य विधा पर आधारित व्यंग्य पत्रिका/संस्था), जबलपुर

संस्थाएं - व्यंग्यम (व्यंग्य विधा पर आधारित व्यंग्य पत्रिका/संस्था), जबलपुर   विगत दिवस साहित्यिक संस्था व्यंग्यम द्वारा आयोजित 23वीं व्यंग्य पाठ गोष्ठी में सभी ने परम्परानुसार अपनी नई रचनाओं का पाठ किया.  इस संस्था की प्रारम्भ से ही यह परिपाटी रही है कि प्रत्येक गोष्ठी में व्यंग्यकर सदस्य को अपनी नवीनतम व्यंग्य रचना का पाठ करना पड़ता है । इसी संदर्भ में इस व्यंग्य पाठ गोष्ठी में सर्वप्रथम जय प्रकाश पांडे जी ने 'सांप कौन मारेगा,  यशवर्धन पाठक ने  'दादाजी के स्मृति चिन्ह', बसंत कुमार शर्मा जी ने 'अंधे हो क्या', राकेश सोहम जी ने 'खा खाकर सोने की अदा', अनामिका तिवारीजी ने 'हम आह भी भरते हैं',  रमाकांत ताम्रकार जी ने 'मनभावन राजनीति बनाम बिजनेस', ओ पी सैनी ने 'प्रजातंत्र का स्वरूप', विवेक रंजन श्रीवास्तव ने 'अविश्वासं फलमं दायकमं', अभिमन्यु जैन जी ने 'आशीर्वाद', सुरेश विचित्रजी ने 'शहर का कुत्ता', रमेश सैनी जी ने 'जीडीपी और दद्दू', डा. कुंदनसिंह परिहार जी ने 'साहित्यिक लेखक की पीड़ा' व्यंग्य रचनाओं का पाठ...
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