श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १९४ ☆ देश-परदेश – कहीं खुशी कहीं ग़म ☆ श्री राकेश कुमार ☆
यू पी आई उपयोग पर प्रथम बार टैक्स की घोषणा हुई हैं, इसके दूरगामी परिणाम भी होंगे। कुछ लोग इसका विरोध भी कर रहें है, कुछ खुशियों मना रहें हैं। खुशी और गम सिक्के के दो पहलू होते हैं। जीवन में भी खुशियां और गम साथ साथ ही चलते हैं।
उपरोक्त ए आई द्वारा निर्मित फोटो भी गृहणी की खुशी को लेकर हैं। अखिल भारतीय महिला समाज की प्रवक्ता ने भी इस बात को लेकर हर्ष व्यक्त किया हैं। घर के पुरुष अब अपनी जेबों में कुछ ना कुछ धन राशि छोड़ देंगे, जिसे घर की महिला अपनी पूंजी बना लेगी। भारतीय महिलाओं के नोट बंदी के समय दिए गए सहयोग से सभी परिवार लाभान्वित हुए थे।
फुटकर दुकानदार भी प्रसन्न है, खुले पैसे की कमी से वो जबरन टॉफी इत्यादि की बिक्री कर अतिरिक्त लाभ कमा लेंगे। हमारे मोहल्ले के कुछ दुकानदारों ने तो चिल्लर के बदले अपने कागज के कूपन भी छपवा लिए हैं, ताकि ग्राहक से झगड़ा/ बहस नहीं हो।
यातायात पुलिस कर्मी खुशी के मारे फूले नहीं समा रहें हैं। रिश्वत की राशि अब आसानी से नगद में मिल जाएगी। रेलवे या अन्य सरकारी विभाग जैसे बिजली, पानी के बिल जमा करने के स्थान पर कार्यरत लोग अब रोज़ दिवाली मनाएंगे। उनके पास छूटे पैसे क्या पांच और दस के नोट भी वापिस करने के लिए नहीं होते हैं। चिल्लर की कालाबाजारी करने वाले, आने वाले दिनों की मांग को देखते हुए सक्रिय होने लगे हैं।
निजी क्षेत्र के बड़े शोरूम आदि में अतिरिक्त कैशियर की भर्ती के विज्ञापन पेपर में छपने लग गए हैं। छोटे रबर बैंड बनाने वाले यूनिट्स ने नगद राशि के आदान प्रदान में अप्रत्याशित वृद्धि को देखते हुए, रबर बैंड की मांग वृद्धि की पूर्ति के लिए कमर कस ली हैं।
दूसरी तरफ अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है, कि आगामी त्योहारों को देखते हुए टैक्स लागू करने की तारीख़ एक माह बढ़ाई भी जा सकती हैं।
स्विगी, जोमेटो, जेप्टो आदि जैसे “घर पहुंच सेवा” में कार्यरत यूनिट्स के शेयर में गिरावट होनी भी शुरू हो गई हैं। पेटीएम ने अपने अधिकतर स्टाफ को एक माह का नोटिस दे दिया हैं। उनका ऑफिस भी अब कम/ छोटे स्थान पर जाने की तैयारी में हैं।
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© श्री राकेश कुमार
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