सूचनाएँ/Information ☆ व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई की स्मृति – परसाई जी समाज के डाक्टर थे ☆ साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई की स्मृति – परसाई जी समाज के डाक्टर थे साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार

जबलपुर l देश की ख्यातिलब्ध संस्था जबलपुर व्यंग्यम (अपंजीकृत) द्वारा “व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई जी” की स्मृति में मेरी दृष्टि में “हरिशंकर परसाई व्याख्यान माला” का आयोजन जानकीरमण महाविद्यालय में आयोजित किया गया जिसमें डॉ. कुंदन सिंह परिहार ने उनकी साथ के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि “परसाई को जानना है तो उनका पूरा साहित्य पढ़ना चाहिए जिससे समाज में व्याप्त विसंगतियों की जानकारी हो सकेगी. परसाई जी व्यंग्य के दीपक स्तंभ है जो निडरता से बुराइयों पर प्रहार करने की दृष्टि और शक्ति प्रदान करते है.” इस व्याख्यान माला में देश के उद्भट व्यंग्यकार सर्वश्री अभिमन्यु जैन, शरद जोशी सम्मान से सम्मानित सुरेश विचित्र, आचार्य विजय तिवारी किसलय, रमाकांत ताम्रकार, राकेश सोहम, विजय विश्वकर्मा, विनोद खंडालकर ने उक्त  आशय के विचार व्यक्त किए.

दूसरे सत्र में व्यंग्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें आचार्य विजय तिवारी किसलय ने धूपगांव का अपग्रेडेड लड़का, रमाकांत ताम्रकार ने अस्पताल का चक्कर, सुरेश मिश्रा विचित्र ने मुख्य अतिथि की पीड़ा, अभिमन्यु जैन ने भोजन और विमोचन, राकेश सोहम ने राशन में मिले डाटा, विनोद खंडालकर ने सावधान! आगे हैलमेट चेकिंग चालू आहे, डॉ कुंदन सिंह परिहार जी ने भाई हिम्मत लाल का संकट और विजय विश्वकर्मा ने समाधि से सम्भोग की ओर का वाचन किया.

कार्यक्रम का संचालन श्री राकेश सोहम ने तथा आभार प्रदर्शन श्री अभिमन्यु जैन ने किया.

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साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार, जबलपुर  

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ मराठी अस्मिता… + संपादकीय निवेदन – सौ. अस्मिता इनामदार – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

सौ. अस्मिता इनामदार

🪻 अभिनंदन 🪻

आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका सौ. अस्मिता इनामदार यांना शब्दसेतू आयोजित काव्य स्पर्धेत प्रथम क्रमांक प्राप्त झाला आहे.

ई अभिव्यक्ती परिवारातर्फे त्यांचे मन: पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील वाटचालीसाठी शुभेच्छा 🌹

आज त्यांची कविता “मराठी अस्मिता…“,कवितेचा उत्सव‘ या सदरात देत आहोत.

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

? कवितेचा उत्सव ? 

☆ मराठी अस्मिता… ☆ सौ. अस्मिता इनामदार ☆

१) “  “ कवयित्री : अस्मिता इनामदार

शीर्षक : मराठी अस्मिता

किती सांगावे कौतुक

माझ्या माय मराठीचे

ज्ञानेश्वरीतून झरतात

शब्दकण अमृताचे….

*

मराठीची शब्दकळा

जशी फुलवावी फुलते

शब्दा शब्दांची उकल

अर्थातून व्यक्त होते….

*

नाही आड येत कधी

नियमांचे अडसर

बोलताना समजते

नाद मधुर सुस्वर….

*

जरी म्हणतात सारे

भाषा बदले कोसावरी

आत्मा परी एक तिचा

बाज वेगळा आहे जरी….

*

ओवी, अभंग, भारूड

लावणीही बहरते

नानाविध प्रकाराने

भाषा रंगरूप घेते….

*

प्राचीन, स्वयंभू, सलगता

श्रेष्ठता हे निकष चार

माय मराठी ही भाषा

चौगुणांनी शोभे फार….

*

अशी माझी गोड भाषा

व्यथा सांगते मनीची

ज्योत पेटती रहावी

मराठीच्या अस्मितेची….

© सौ. अस्मिता इनामदार 

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन – – “ अभिनंदन “– ‘ काव्यानुभूती ‘ पुस्तकाबद्दल. ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

💐 संपादकीय निवेदन अभिनंदन काव्यानुभूती पुस्तकाबद्दल 💐

सोहम क्रिएशन अँड पब्लिकेशन्स यांच्यातर्फे “काव्यानुभूती” हे पुस्तक दिनांक २७ जुलै २०२५ रोजी पुणे येथे प्रकाशित झाले. हे पुस्तक कादंबरी – कथासंग्रह – लेखसंग्रह किंवा कवितासंग्रह अशा कुठल्याच प्रकारात येत नाही – तर हा आहे दहा कवयित्रींच्या वेगवेगळ्या प्रत्येकी पाच कवितांच्या रसग्रहणाचा संग्रह… एकूण ५० कवितांचे रसग्रहण यात आहे आणि हे रसग्रहण केलेले आहे आपल्या समूहातील पाच ज्येष्ठ लेखिका / कवयित्रींनी.. त्या कवयित्री म्हणजे – – – 

** सुश्री ज्योत्स्ना तानवडे 

** सुश्री अरुणा मुल्हेरकर

** सुश्री नीलिमा खरे 

** सुश्री राधिका भांडारकर

** सुश्री अमिता पाटणकर

या अनोख्या संग्रहाबद्दल वरील सर्व लेखिका / कवयित्री यांचे आपल्या सर्वांतर्फे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि हार्दिक शुभेच्छा.

आजच्या ‘काव्यानंद ‘ सदरात वाचूयात या संग्रहातील एका कवितेचे रसग्रहण. आणि या पुस्तकाच्या संकल्पनेबद्दल जाणून घेऊ या ‘ पुस्तकावर बोलू काही ‘ या सदरातून.

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ के बाल उपन्यास – “चंद्रबस्ती का रहस्य” को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की स्वीकृति – अभिनन्दन ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ के बाल उपन्यास – “चंद्रबस्ती का रहस्य” को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की स्वीकृति – अभिनन्दन ☆

 बाल साहित्य में चंद्रमा की ओर एक नई उड़ान –  

नई दिल्ली।  बाल साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ द्वारा रचित उपन्यास “चंद्रबस्ती का रहस्य” को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय द्वारा किशोरों के लिए भारतीय साहित्य पुस्तकमाला के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है।

यह उपन्यास विज्ञान और कल्पना का अद्भुत संगम है, जिसमें लेखक ने चंद्रमा पर भविष्य में मानव बस्ती बसने की संभावना को आधार बनाकर एक रोमांचक और विचारोत्तेजक कथा रची है। बाल पाठकों के लिए यह रचना न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान, अन्वेषण और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास भी है।

“चंद्रबस्ती का रहस्य” में लेखक ने चंद्रमा की सतह, वहां की चुनौतियाँ, तकनीकी संघर्ष और मानव जिज्ञासा को बाल मनोविज्ञान के अनुरूप प्रस्तुत किया है। यह उपन्यास बच्चों को कल्पनाशीलता, वैज्ञानिक सोच और साहसिकता की ओर प्रेरित करता है।

उपन्यास के रचनाकार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ एक प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार हैं, जिनकी रचनाएँ बाल पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। वे बाल साहित्य में संवेदना, संस्कृति और विज्ञान के समन्वय के लिए जाने जाते हैं। उनकी यह नवीनतम रचना बाल साहित्य को अंतरिक्ष की नई दिशा में ले जाने वाली मानी जा रही है।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा इस उपन्यास को स्वीकृति मिलना न केवल लेखक की उपलब्धि है, बल्कि यह संकेत है कि बाल साहित्य अब कल्पना से आगे बढ़कर भविष्य की वैज्ञानिक संभावनाओं को भी छूने लगा है।

यह उपन्यास शीघ्र ही प्रकाशित होकर देशभर के किशोर पाठकों तक पहुंचेगा, और उन्हें चंद्रमा की रहस्यमयी दुनिया में एक नई दृष्टि प्रदान करेगा।

 

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ भेट आपुली ती पहिली… + संपादकीय निवेदन – प्रा.सौ.सुमती पवार – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

प्रा.सौ.सुमती पवार

🪻 अभिनंदन 🪻

आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका प्रा. सुमती पवार यांच्या, मानस, इंद्रा आणि नक्षत्र या तीन कवितासंग्रहांचे नुकतेच प्रकाशन झाले आहे. साहित्य क्षेत्रातील त्यांच्या या कामगिरीबद्दल ई अभिव्यक्ती परिवारातर्फे त्यांचे मन: पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील प्रकाशनासाठी हार्दिक शुभेच्छा.

आज त्यांची एक नवीन कविता “भेट आपुली ती पहिली…“,कवितेचा उत्सव‘ या सदरात देत आहोत.

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

? कवितेचा उत्सव ? 

☆ भेट आपुली ती पहिली… ☆ प्रा.सौ.सुमती पवार

आठवते भेट मला भेट आपुली पहिली

लाजेने मी चूर चूर नजर नाही उचलली…

माती कोरत राहिले, शब्द नेती माझ्या ओठी

भेटीची ती ओढ अशी हुरहुर लागे पोटी..

*

न बोलताच बोलणे मौनातच सारे आले

समजत होते तुला मन माझे भांबावलेले…

मिष्किल नजर तुझी डोळ्यातही हसू होते

अस्फूट ते तुझे ओठ गोड किती होते नाते…

*

नाही पाहिले हो पूर्वी तरी ओढ का लागते

हृदयात काठोकाठ प्रेम का हो ओसांडते…

जीवाशिवाची का भेट देवादारी ठरवली

एका ह्याच नात्यासाठी मायबापे दुरावली..

*

वरचढ ठरे नाते अशी कोणती पुण्याई

जन्मदिला वाढवला त्यांना सोडूनच जाई…

जीव जीवात गुंततो नवे जीव येती घरा

अशी चाले घरोघरी मायबाप परंपरा…

*

ठेचा लागल्या हो किती पूर्णत्वाला नेती थेट

हात हातात घालून दूर जरी दिसे वाट

सुखदु:खे घरोघर मातीच्या चुली असती

पळसाला पाने तीन निभाऊन सारे नेती…

© प्रा.सौ.सुमती पवार 

 नाशिक

मो. ९७६३६०५६४२; ईमेल – svpawar6249@gmail.com

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ वरिष्ठ साहित्यकार गुरुवर प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी अनंत में विलीन – विनम्र श्रद्धांजलि ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🙏 💐 वरिष्ठ साहित्यकार गुरुवर प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी अनंत में विलीन – विनम्र श्रद्धांजलि 💐🙏

भोपाल। वरिष्ठ साहित्यकार, भगवतगीता , रघुवंश, मेघदूत के हिंदी काव्य में अनुवादक, 40 से ज्यादा कृतियों के कवि, लेखक, आध्यात्मिक, राष्ट्र प्रेम की भावधारा के साहित्यिक पिताजी प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध का दुखद अवसान 99 वर्ष की आयु में आज 25 जुलाई को शाम 4 बजकर 50 मिनट पर हो गया है।

उन्होने शांति से अंतिम सांसे ली, और दिव्य स्थान को प्रस्थान कर गए हैं।

उन्होंने बच्चों के बच्चों के संग भी जीवन का भरपूर आनंद लिया।

ई-अभिव्यक्ति परिवार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ संपादक ई-अभिव्यक्ति (हिंदी) के इस दुःख में सहभागी है। 🙏

– हेमन्त बावनकर, पुणे  

🙏 ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से गुरुवर प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी को विनम्र श्रद्धांजलि 🙏

 ≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना ☆ सम्पादक मंडल ई-अभिव्यक्ति ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

📖 प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना !! 📖

प्रत्येक माह की 14 तारीख को ई-अभिव्यक्ति के अंक का पाक्षिक अवकाश होता। इस महीने यह अवकाश 14 तारीख के स्थान पर 16/7/25 को लिया जाएगा।

14 /7/25 को अंक सामान्य रूप से प्रकाशित होगा।

आप सभी का इसी प्रकार स्नेह, प्रतिसाद और सहयोग अपेक्षित है।

– संपादक मंडल 

ई-अभिव्यक्ति 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ महत्वाची सूचना!! ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

💐 संपादकीय निवेदन 💐

📖 महत्वाची सूचना!! 📖

कृपया सर्वांनी नोंद घ्यावी – – 

दर महिन्याच्या १४ तारखेला आपल्या अंकाला पाक्षिक सुट्टी असते. या महिन्यात मात्र ही सुट्टी १४ तारखेऐवजी दि. १६/७/२५ रोजी घेतली जाईल.

दि. १४/७/२५ रोजी अंक नेहेमीसारखा प्रकशित होईल.

– संपादक मंडळ

ई – अभिव्यक्ती, मराठी विभाग

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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मराठी साहित्य – मनमंजुषेतून ☆ स्वामी विवेकानंदांवरचे पुस्तक मला का लिहावेसे वाटले – सौ.अंजली दिलीप गोखले – अभिनंदन + संपादकीय निवेदन ☆

सूचना/Information

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

सौ.अंजली दिलीप गोखले 

🪻 अभिनंदन 🪻

आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखिका सुश्री अंजली गोखले यांनी लिहिलेले  “हिंदुत्वाचे विश्वप्रवक्ते स्वामी विवेकानंद” हे माहितीपूर्ण पुस्तक ‘विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी, मराठी प्रकाशन विभाग’ यांनी नुकतेच प्रकाशित केले आहे.

आपल्या समूहातर्फे अंजलीताईंचे मनःपूर्वक खूप अभिनंदन आणि यापुढील त्यांच्या अशाच समृद्ध साहित्य-सेवेसाठी असंख्य हार्दिक शुभेच्छा. 💐

🌸🌼🌸

आजच्या मनमंजुषा सदरात वाचू या.. ‘ हे पुस्तक का लिहावेसे वाटले ‘ याबद्दलचे अंजलीताईंचे मनोगत.

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

🪷 मनमंजुषेतून 🪷 

☆ स्वामी विवेकानंदांवरचे पुस्तक मला का लिहावेसे वाटले… ☆ सौ.अंजली दिलीप गोखले ☆

स्वामीजींच्या आशीर्वादाने, त्यांच्या कृपेनेच या पुस्तकाचे लिखाण पूर्णत्वाला जाऊ शकले.

ऑटोबायोग्राफी ऑफ योगी परमहंस योगानंद या पुस्तकाचा मराठीमध्ये अनुवाद करताना स्वामी विवेकानंदांचा संदर्भ आला.

अमेरिकेतील एका छोट्या गावामध्ये सहा सात वर्षाची मुले खेळत असतात. जवळच छोटासा टॅंकअसतो. थोडावेळ खेळ झाल्यानंतर मुलांची दंगामस्ती, त्यानंतर भांडणे होतात. एक मुलगा आपल्या लहान भावाला पाणी भरलेल्या टॅंक मध्ये ढकलून देतो. तो मुलगा बु डायला लागतो आणि त्याच क्षणी त्याचे लक्ष आकाशाकडे जाते. तिथे त्याला झगझगता प्रकाश दिसतो आणि त्यामध्ये एक आश्वासक चेहराही दिसतो. त्याचवेळी पाण्यामध्ये त्याच्या हाताला एक काठी लागते आणि मित्र त्याला ओढून घेतात आणि त्याचा जीव वाचतो..

त्यानंतर जवळजवळ दहा वर्षांनी तो मुलगा आपल्या आईबरोबर शिकागो येथे चाललेला असतो. त्यात वेळी त्याला समोर तसाच झुक झुकता प्रकाश पुन्हा दिसतो आणि तोच आश्वासक चेहरा असलेली व्यक्ती पण दिसते. तो त्यांच्याकडे जायचे ठरवतो तेवढ्यात ती व्यक्ती पायऱ्या चढून एका मोठ्या हॉलमध्ये जाते. तोही त्या हॉलमध्ये जातो आणि पाहतो तो हॉल गच्च भरलेला असतो आणि त्या ठिकाणी जागतिक धर्म परिषद भरलेली असते.

केशरी फेटा आणि अंगभर केशरी कपनी घातलेली ती व्यक्ती म्हणजे भारतामधून आलेले स्वामी विवेकानंद होते. त्यांचे भाषण संपल्यानंतर तो त्यांना शेक हँड करून यावे असे मनाशी ठरवतो. त्यांच्या जवळून जाताना त्याच्या मनात येते की आपल्याला असे मोठे गुरु पाहिजेत. यांचे मार्गदर्शन आपल्याला मिळावे. तो जवळ गेल्यावर स्वामीजी त्याच्याकडे पाहून त्याच्या डोक्यावर हात ठेवून म्हणाले,, ” अरे मी तुझा गुरु नाही. तुझ्या पुढील आयुष्यामध्ये जे तुला चांदीचा पेला देतील, ते तुझे गुरु असतील.”

25-30 वर्षांनी त्या व्यक्तीला, भारतातूनच आलेल्या परमहंस योगानंदानी चांदीचा पेला दिला.

.. हा प्रसंग वाचल्यानंतर मी थक्क होऊन गेले. अशा द्रष्ट्या, दैवी शक्ती लाभलेल्या स्वामीजींची आपण पूर्ण ओळख करून घ्यावी, त्यांचे विचार समजून घ्यावेत, असे मी नक्की केले. आणि त्यांची पुस्तके वाचण्याचा सपाटा सुरू केला. अशी मोठी पंधरा-सोळा पुस्तके वाचल्यानंतर सोप्या भाषेत स्वामीजींवर पुस्तक लिहिण्याचे मी ठरवले आणि त्यातून तयार झाले हिंदुत्वाचे विश्व प्रवक्ते स्वामी विवेकानंद  हे स्वामीजींवरील पुस्तक.

…. स्वामीजींच्या आईने भगवान शंकराकडे आणि जशा सुपुत्राची मागणी प्रार्थनेने केली केली, तसेच होते स्वामीजी. त्यांच्यातले सद्गुण ओळखून वडिलांनी जसे मार्गदर्शन केले तसेच घडले स्वामीजी.

…. सद्गुरु रामकृष्ण परमहंस यांनी आपल्या पट्ट शिष्याला ओळखून, त्याला प्रेमाने आपलेसे करून, आपल्या ज्ञानाची ओंजळ पुरती रिकामी करून त्याला जशी झळाळी दिली, तसे तेज:पुंज बनले स्वामीजी.

…. आपल्या गुरुदेवांच्या इच्छेप्रमाणे आयुष्यात फक्त त्यांची इच्छापूर्ती करण्यासाठी झटले स्वामीजी.

…. आपल्या मातृभूमी बरोबर सगळ्या जगाच्या हितासाठी झटले स्वामीजी.

…. ” हे विश्वची माझे घर ” म्हणत ज्ञानदेवांचे पसायदान आचरणात आणून आपल्या आयुष्याची 

 अक्षरशः आहुती दिली ती स्वामीजींनी.

…. फक्त भारतातच नाही तर अमेरिका इंग्लंड येथेही हिंदुध्वज रोवून तो ध्वज फडकवला तो स्वामीजींनी.

 अशा स्वामीजींचे सर्व पिढीला आदर्श असेच आहे.

म्हणूनच – – 

“हिंदुत्वाचे विश्व प्रवक्ते स्वामी विवेकानंद” हे पुस्तक सर्वांनी जरूर वाचावे आणि आचरणात आणावे असे मला मनापासून वाटते.

© सौ. अंजली दिलीप गोखले

मोबाईल नंबर 8482939011

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचना/Information ☆ सम्पादकीय निवेदन – सुश्री अर्चना सुरेश देशपांडे – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

सुश्री अर्चना सुरेश देशपांडे

💐 अ भि नं द न 💐

आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखिका सुश्री अर्चना देशपांडे यांचा “मोगरा फुलला” हा कथासंग्रह नुकताच प्रकाशित झाला आहे. त्याबद्दल त्यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि पुढील साहित्यिक वाटचालीसाठी हार्दिक शुभेच्छा. 💐💐

आजच्या व उद्याच्या अंकातील जीवनरंग सदरात वाचू या याच संग्रहातील त्यांची कथा – “नवं नातं”… दोन भागात.

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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