सूचनाएँ/Information ☆ हुजूरपागेत ‘हिंदी दिन’ उत्साहात साजरा !!!!! / हुजूरपागा में ‘हिंदी दिवस’ उत्साह से मनाया गया !!!!! ☆ साभार : हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

हुजूरपागेतहिंदी दिनउत्साहात साजरा !!!!! / हुजूरपागा में हिंदी दिवसउत्साह से मनाया गया !!!!! साभार : हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे ☆

देशाच्या सांस्कृतिक वारशाचे आणि एकतेचे प्रतीक हिंदी भाषाच आहे “, या शब्दात हिंदीचे महत्त्व प्रतिपादित करत बहुभाषिक होण्याचा संदेश हिंदीचे ज्येष्ठ साहित्यिक माननीय श्री. संजय भारद्वाज यांनी दिला.

निमित्त होतं 14 सप्टेंबर हिंदी दिनाचं !!!! हा दिवस एच.एच. सी. पी हायस्कूल, हुजूरपागा अँड ज्युनिअर कॉलेज, लक्ष्मी रोड प्रशालेत वैविध्यपूर्ण संकल्पनेतून साजरा झाला. या प्रसंगी म.ग.ए सोसायटीच्या अध्यक्षा माननीय शालिनी पाटील, सचिव माननीय रेखा पळशीकर, सहसचिव माननीय अरुणा भांबरे उपस्थित होत्या.

गागर मे सागरया संकल्पने अंतर्गत प्रशालेच्या ग्रंथालयात  हिंदीच्या विविध साहित्य प्रकारांच्या पुस्तकांचं, शब्दकोशांचं आणि विद्यार्थिनींनी तयार केलेल्या शैक्षणिक खेळाचं प्रदर्शन मांडण्यात आलं होतं, या प्रदर्शनाचं उद्घाटन तसंच विद्यार्थिनींनी तयार केलेल्याएकताया हस्तपुस्तिकेचे अनावरण कार्यक्रमाचे प्रमुख अतिथी असणाऱ्या ज्येष्ठ साहित्यिक व हिंदी परिवाराचे अध्यक्ष, हिंदी अभ्यास मंडळाचे सदस्य माननीय श्री संजय भारद्वाज यांच्या हस्ते झालं.

कार्यक्रमाची सुरुवात हिंदी गीताने झाली. विद्यार्थिनींनी अनेकोत्तम हिंदी कविता, भाषणे व  देशभक्तीपर अंताक्षरीच्या सादरीकरणातून हिंदी भाषेविषयी प्रेम व्यक्त केले. या कार्यक्रमात हिंदी निबंध स्पर्धेतील विजेत्या विद्यार्थिनींचे  कौतुकही मान्यवरांनी केले. प्रशालेच्या माननीय उपमुख्याध्यापिका संध्या गायकवाड यांनीही हिंदी चे महत्त्व विशद केले. शिक्षकांच्या मार्गदर्शनाने संपूर्ण कार्यक्रमाचे हिंदीतून सादरीकरण प्रशालेच्या गुणी विद्यार्थिनींनी केले. हिंदी दिवसाचा संपूर्ण कार्यक्रम नेटका व नियोजनबद्ध होण्यासाठी माननीय मुख्याध्यापिका केतकी पेंढारकर यांचे अनमोल मार्गदर्शन लाभले. शाळेचे पर्यवेक्षक मा.श्रीयुत मानेकर. आणि पर्यवेक्षिका मा. संगीता वाघमारे आणि सर्व हिंदी शिक्षक या कार्यक्रमात उत्साहाने  सहभागी झाले होते.

साभार : हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे ☆

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

श्री संजय भारद्वाज, हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे 

हुजूरपागा में हिंदी दिवसउत्साह से मनाया गया !!!!! ☆ 

हिंदी भाषा ही देश की सांस्कृतिक विरासत और एकता का प्रतीक है”, इन शब्दों में हिंदी का महत्व बताते हुए, हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार माननीय श्री संजय भारद्वाज जी ने बहुभाषी होने का संदेश दिया।

यह अवसर था 14 सितंबर को मनाए जाने वाले हिंदी दिवस का !!!! यह दिवस एच.एच.सी.पी. हाईस्कूल, हुजूरपागा एंड जूनियर कॉलेज, लक्ष्मी रोड स्कूल में विभिन्न संकल्पनाओं के माध्यम से मनाया गया। इस अवसर पर म.ग.ए सोसायटी की अध्यक्षा माननीय शालिनी पाटील, सचिव माननीय रेखा पळशीकर और सहसचिव माननीय अरुणा भांबरे उपस्थित थीं।

गागर में सागरकी संकल्पना के अंतर्गत स्कूल के पुस्तकालय में हिंदी के विभिन्न साहित्य विधाओं की पुस्तकों, शब्दकोशों और छात्राओं द्वारा बनाए गए शैक्षणिक खेलों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन, साथ ही छात्राओं द्वारा बनाई गई एकतानामक हस्तपुस्तिका का अनावरण, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, वरिष्ठ साहित्यकार और हिंदी परिवार के अध्यक्ष, हिंदी अभ्यास मंडल के सदस्य माननीय श्री संजय भारद्वाज के कर कमलों द्वारा हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत हिंदी गीत से हुई। छात्राओं ने अनेक उत्तम हिंदी कविताओं, भाषणों और देशभक्ति से भरी अंताक्षरी की प्रस्तुति के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति अपना प्रेम व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में हिंदी निबंध प्रतियोगिता की विजेता छात्राओं की सराहना भी गणमान्य व्यक्तियों ने की। स्कूल की माननीय उप-प्राचार्या संध्या गायकवाड ने भी हिंदी का महत्व समझाया। शिक्षकों के मार्गदर्शन में, पूरे कार्यक्रम का हिंदी में प्रस्तुतीकरण स्कूल की प्रतिभाशाली छात्राओं ने किया। हिंदी दिवस का पूरा कार्यक्रम सुव्यवस्थित और सुनियोजित हो, इसके लिए माननीय प्राचार्या केतकी पेंढारकर का अमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। स्कूल के पर्यवेक्षक मा. श्रीयुत मानेकर और पर्यवेक्षिका मा. संगीता वाघमारे और सभी हिंदी शिक्षक इस कार्यक्रम में उत्साह के साथ शामिल हुए थे।

 🙏💐 ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐🙏

♥♥♥♥

साभार : हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे 

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

सूचनाएँ/Information ☆ मध्य प्रदेश के स्कूलों में पहुँची ‘रोचक विज्ञान कथाएं’: बाल साहित्य और विज्ञान शिक्षा का अभिनव संगम – अभिनन्दन ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ मध्य प्रदेश के स्कूलों में पहुँची ‘रोचक विज्ञान कथाएं’: बाल साहित्य और विज्ञान शिक्षा का अभिनव संगम – अभिनन्दन ☆

रतनगढ़ (निप्र)। मध्य प्रदेश के साहित्यिक और शैक्षिक परिदृश्य में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। हिंदी बाल साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ की विज्ञान-आधारित कहानी संग्रह ‘रोचक विज्ञान कथाएं’ का द्वितीय संस्करण वर्ष 2025 में प्रकाशित हुआ है। यह संस्करण भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रशासन विभाग द्वारा जारी किया गया है, जिसकी कीमत ₹145 निर्धारित की गई है। इस पुस्तक को राज्य शिक्षा केंद्र, मध्य प्रदेश द्वारा बल्क मात्रा में खरीदा गया है, जिसे प्रदेश के विभिन्न स्कूलों के पुस्तकालयों में विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु वितरित किया जा रहा है।

यह संग्रह कुल 16 विज्ञान-आधारित कहानियों को समेटे हुए है, जो बच्चों की जिज्ञासा, कल्पनाशीलता और वैज्ञानिक सोच को प्रेरित करती हैं। कहानियाँ जैसे वज़न ग़ायब हो गया, इन्द्रधनुष बिखर गया, लड़ाई फूल, तने और पत्ती की, बन्दर-बाँट, नया साबुन कहाँ गया?, हवा का हवाई सफ़र, कुएँ को बुखार, बादल मर गया, श्रेष्ठ कौन, भूत का रहस्य, कुछ मीठा हो जाए, इंसेक्टा से मुलाक़ात, राफेल फिर जीत गया, मेरी आत्मकथा – हौमेटो, मोनिस्टा से मुलाक़ात, और काँव-काँव का भूत—इनमें विज्ञान की अवधारणाओं को रोचक घटनाओं और संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

इन कहानियों में बच्चों का स्वप्न में अंतरिक्ष यान में उड़ान भरना, वैज्ञानिक प्रश्नों के उत्तर खोजने की उत्सुकता, और उपदेशों की बजाय व्यवहारिक अनुभवों से सीखने की प्रेरणा प्रमुख रूप से दिखाई देती है। साथ ही यह संदेश भी स्पष्ट रूप से उभरता है कि बच्चों की क्षमता को कम न आँका जाए और निःस्वार्थ भाव से सहायता करना भी वैज्ञानिक सोच का हिस्सा हो सकता है।

लेखक ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ हिंदी बाल साहित्य में एक सृजनशील और प्रेरक हस्ताक्षर हैं। उनकी लेखनी में भारतीय संस्कृति, पर्यावरणीय चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। ‘रोचक विज्ञान कथाएं’ उनकी उसी रचनात्मक सोच का विस्तार है, जो बच्चों को सोचने, समझने और प्रयोग करने के लिए प्रेरित करती है।

मध्य प्रदेश के स्कूलों में इस पुस्तक का पहुँचना न केवल शैक्षिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि यह प्रदेश के साहित्यिक गौरव को भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करता है। यह संग्रह निश्चित रूप से बाल पाठकों के मन में विज्ञान के प्रति उत्सुकता और प्रेम जगाएगा, और उन्हें एक संवेदनशील, जिज्ञासु तथा रचनात्मक नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करेगा।

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ सांज मला डसते… + संपादकीय निवेदन – श्री विष्णू सोळंके – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

श्री विष्णू सोळंके

🪻 अभिनंदन 🪻

🌹🌹🌹 अभिनंदन 🌹🌹🌹

आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिक अमरावती येथील श्री विष्णू सोळंके यांचा कातरवेळी हा काव्य संग्रह आणि संवाद मौनाशी हे आत्मचरित्र नुकतेच प्रकाशित झाले आहे.

श्री.सोळंके यांच्या नव्या साहित्य कृतींबद्दल ई अभिव्यक्ती परिवारातर्फे मन:पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील लेखनासाठी शुभेच्छा 💐✒️💐

आज त्यांची कविता “सांज मला डसते…“,कवितेचा उत्सव‘ या सदरात देत आहोत.

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

? कवितेचा उत्सव ? 

सांज मला डसते… ☆ कवी : श्री विष्णू सोळंके

कातरवेळी संध्याछाया हळूच ही हसते

आयुष्याच्या वळणावरची सांज मला डसते…१

*

उन्हं सावली खेळत आहे प्रारब्धाची रेषा

मी कशाला कुणास दावू हातावरच्या रेषा…२

*

कशी विणावी विण सुखाची कशी म्हणावी गाणी?

मखमालीचा देश पेटला डोळा आले पाणी…३

*

निळ्या जळावर कोरुन घ्यावी नाही ऐशी नक्षी

जीव कुणावर लावून द्यावा दिसला नाही पक्षी…४

*

श्र्वास मोजके जीवन थोडे क्षणाक्षणाला घाई

सुख दुःखाच्या वाटेवरती पहाड आणि खाई…५

*

© श्री विष्णू सोळंके

अमरावती,४४४६०६

मो 7020300824

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

Please share your Post !

Shares

सूचनाएँ/Information ☆ अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच द्वारा 2025 के पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित ☆ साभार – श्रीमती संतोष श्रीवास्तव ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच द्वारा प्रदान किए जाने वाले 2025 के पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित ☆ 

अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच द्वारा प्रदान किए जाने वाले 2025 के पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित हैं।

पुरस्कार

****

1) माँ सुरतवन्ती वर्मा समाज सेवा पुरस्कार ।इस पुरस्कार के लिए समाज सेवा हेतु किए हुए कार्यों का ब्यौरा भेजें।

2) हेमंत स्मृति कविता सम्मान

इस पुरस्कार के लिए काव्य की किसी भी विधा की 10 रचनाएं भेजें। कृपया पौराणिक विषयों की रचनाएं न भेजें।

3) राधा अवधेश स्मृति कथा सम्मान के लिए 5 कहानी परिचय सहित भेजें ।

4) पुष्पा विश्वनाथ मेहता स्मृति कथा सम्मान के लिए पांच कहानी परिचय सहित भेजें

5) गोविंद आर्य “निशात”  स्मृति गजल सम्मान के लिए 10 गजल परिचय सहित भेजें

6) डॉ शिव शरण द्विवेदी स्मृति काव्य शिरोमणि सम्मान के लिए  10 गीत या 10  छंदबद्ध कविता परिचय सहित भेजें।

7) पूजा स्मृति कविता सम्मान हेतु मुक्त छंद में लिखी 10 कविताएं परिचय सहित भेजें।

8) ‘उदार‘ साहित्य साधक सम्मान जो नाटक विधा के लिए  है। कृपया नाटक के कुछ अंश परिचय सहित  भेजें।

9)’ नंदन-नंदिनी ‘ स्मृति साहित्य साधक सम्मान (उपन्यास) कृपया सम्मान हेतु उपन्यास के कुछ अंश परिचय सहित भेजें।

10)’ललिता-जयन्ती ‘ स्मृति साहित्य साधक सम्मान  (व्यंग्य)  कृपया सम्मान हेतु 5 व्यंग्य, परिचय सहित भेजें।

11) डॉक्टर संजीव कुमार काव्य रत्न पुरस्कार हेतु मुक्त छंद की 10 कविताएं परिचय सहित भेजें।

12) पांखुरी सक्सेना लांबा स्मृति लघुकथा सम्मान। पुरस्कार हेतु  10 लघुकथाएं परिचय सहित भेजें।

सभी पुरस्कारों की केटेगरी एक है (अर्थात सभी पुरस्कारों में पुरस्कार राशि, स्मृति चिन्ह और शॉल प्रदान किया जाता है)

नियम

**

1 )प्रविष्टियों के लिए पुस्तक नहीं बल्कि अपनी रचनाएं और परिचय 9769023188 नंबर पर व्हाट्सएप करें।

2) रचनाएं 2024 और 2025 में प्रकाशित पुस्तकों में से ही भेजें।

जिस पुरस्कार के लिए आप रचना भेज रहे हैं उस पुरस्कार का नाम भी लिखें।

3) आप केवल एक ही पुरस्कार के लिए प्रविष्टि भेज सकते हैं।

4) रचनाएं भेजने की अंतिम तिथि 1 अक्टूबर 2025 है । उसके  बाद आई हुई रचनाओं पर विचार नहीं किया जाएगा।

3) एक बार पुरस्कृत हो जाने के बाद कृपया अगले 3 वर्ष तक किसी भी पुरस्कार के लिए प्रविष्टि न भेजें।

4) पुरस्कार के लिए किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए कृपया फोन न करें। केवल मैसेज ही भेजें । श्रीमती सन्तोष श्रीवास्तव मो 9769023188 पर। 

पुरस्कारों की घोषणा  दिसंबर  2025 को की जाएगी। निर्णायकों का निर्णय अंतिम होगा तथा संस्था द्वारा मान्य होगा।

पुरस्कार फरवरी 2026 में अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच द्वारा भोपाल में आयोजित  होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदान किये जाएंगे।

पुरस्कार ग्रहण करने के लिए कृपया स्वयं आएं। डाक से पुरस्कार भेजने की व्यवस्था नहीं है।

****

साभार – श्रीमती संतोष श्रीवास्तव

संस्थापक अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच

1 सितंबर 2025

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

सूचनाएँ/Information ☆ व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई की स्मृति – परसाई जी समाज के डाक्टर थे ☆ साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई की स्मृति – परसाई जी समाज के डाक्टर थे साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार

जबलपुर l देश की ख्यातिलब्ध संस्था जबलपुर व्यंग्यम (अपंजीकृत) द्वारा “व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई जी” की स्मृति में मेरी दृष्टि में “हरिशंकर परसाई व्याख्यान माला” का आयोजन जानकीरमण महाविद्यालय में आयोजित किया गया जिसमें डॉ. कुंदन सिंह परिहार ने उनकी साथ के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि “परसाई को जानना है तो उनका पूरा साहित्य पढ़ना चाहिए जिससे समाज में व्याप्त विसंगतियों की जानकारी हो सकेगी. परसाई जी व्यंग्य के दीपक स्तंभ है जो निडरता से बुराइयों पर प्रहार करने की दृष्टि और शक्ति प्रदान करते है.” इस व्याख्यान माला में देश के उद्भट व्यंग्यकार सर्वश्री अभिमन्यु जैन, शरद जोशी सम्मान से सम्मानित सुरेश विचित्र, आचार्य विजय तिवारी किसलय, रमाकांत ताम्रकार, राकेश सोहम, विजय विश्वकर्मा, विनोद खंडालकर ने उक्त  आशय के विचार व्यक्त किए.

दूसरे सत्र में व्यंग्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें आचार्य विजय तिवारी किसलय ने धूपगांव का अपग्रेडेड लड़का, रमाकांत ताम्रकार ने अस्पताल का चक्कर, सुरेश मिश्रा विचित्र ने मुख्य अतिथि की पीड़ा, अभिमन्यु जैन ने भोजन और विमोचन, राकेश सोहम ने राशन में मिले डाटा, विनोद खंडालकर ने सावधान! आगे हैलमेट चेकिंग चालू आहे, डॉ कुंदन सिंह परिहार जी ने भाई हिम्मत लाल का संकट और विजय विश्वकर्मा ने समाधि से सम्भोग की ओर का वाचन किया.

कार्यक्रम का संचालन श्री राकेश सोहम ने तथा आभार प्रदर्शन श्री अभिमन्यु जैन ने किया.

====

साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार, जबलपुर  

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ मराठी अस्मिता… + संपादकीय निवेदन – सौ. अस्मिता इनामदार – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

सौ. अस्मिता इनामदार

🪻 अभिनंदन 🪻

आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका सौ. अस्मिता इनामदार यांना शब्दसेतू आयोजित काव्य स्पर्धेत प्रथम क्रमांक प्राप्त झाला आहे.

ई अभिव्यक्ती परिवारातर्फे त्यांचे मन: पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील वाटचालीसाठी शुभेच्छा 🌹

आज त्यांची कविता “मराठी अस्मिता…“,कवितेचा उत्सव‘ या सदरात देत आहोत.

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

? कवितेचा उत्सव ? 

☆ मराठी अस्मिता… ☆ सौ. अस्मिता इनामदार ☆

१) “  “ कवयित्री : अस्मिता इनामदार

शीर्षक : मराठी अस्मिता

किती सांगावे कौतुक

माझ्या माय मराठीचे

ज्ञानेश्वरीतून झरतात

शब्दकण अमृताचे….

*

मराठीची शब्दकळा

जशी फुलवावी फुलते

शब्दा शब्दांची उकल

अर्थातून व्यक्त होते….

*

नाही आड येत कधी

नियमांचे अडसर

बोलताना समजते

नाद मधुर सुस्वर….

*

जरी म्हणतात सारे

भाषा बदले कोसावरी

आत्मा परी एक तिचा

बाज वेगळा आहे जरी….

*

ओवी, अभंग, भारूड

लावणीही बहरते

नानाविध प्रकाराने

भाषा रंगरूप घेते….

*

प्राचीन, स्वयंभू, सलगता

श्रेष्ठता हे निकष चार

माय मराठी ही भाषा

चौगुणांनी शोभे फार….

*

अशी माझी गोड भाषा

व्यथा सांगते मनीची

ज्योत पेटती रहावी

मराठीच्या अस्मितेची….

© सौ. अस्मिता इनामदार 

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

Please share your Post !

Shares

सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन – – “ अभिनंदन “– ‘ काव्यानुभूती ‘ पुस्तकाबद्दल. ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

💐 संपादकीय निवेदन अभिनंदन काव्यानुभूती पुस्तकाबद्दल 💐

सोहम क्रिएशन अँड पब्लिकेशन्स यांच्यातर्फे “काव्यानुभूती” हे पुस्तक दिनांक २७ जुलै २०२५ रोजी पुणे येथे प्रकाशित झाले. हे पुस्तक कादंबरी – कथासंग्रह – लेखसंग्रह किंवा कवितासंग्रह अशा कुठल्याच प्रकारात येत नाही – तर हा आहे दहा कवयित्रींच्या वेगवेगळ्या प्रत्येकी पाच कवितांच्या रसग्रहणाचा संग्रह… एकूण ५० कवितांचे रसग्रहण यात आहे आणि हे रसग्रहण केलेले आहे आपल्या समूहातील पाच ज्येष्ठ लेखिका / कवयित्रींनी.. त्या कवयित्री म्हणजे – – – 

** सुश्री ज्योत्स्ना तानवडे 

** सुश्री अरुणा मुल्हेरकर

** सुश्री नीलिमा खरे 

** सुश्री राधिका भांडारकर

** सुश्री अमिता पाटणकर

या अनोख्या संग्रहाबद्दल वरील सर्व लेखिका / कवयित्री यांचे आपल्या सर्वांतर्फे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि हार्दिक शुभेच्छा.

आजच्या ‘काव्यानंद ‘ सदरात वाचूयात या संग्रहातील एका कवितेचे रसग्रहण. आणि या पुस्तकाच्या संकल्पनेबद्दल जाणून घेऊ या ‘ पुस्तकावर बोलू काही ‘ या सदरातून.

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

Please share your Post !

Shares

सूचनाएँ/Information ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ के बाल उपन्यास – “चंद्रबस्ती का रहस्य” को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की स्वीकृति – अभिनन्दन ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ के बाल उपन्यास – “चंद्रबस्ती का रहस्य” को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की स्वीकृति – अभिनन्दन ☆

 बाल साहित्य में चंद्रमा की ओर एक नई उड़ान –  

नई दिल्ली।  बाल साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ द्वारा रचित उपन्यास “चंद्रबस्ती का रहस्य” को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय द्वारा किशोरों के लिए भारतीय साहित्य पुस्तकमाला के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है।

यह उपन्यास विज्ञान और कल्पना का अद्भुत संगम है, जिसमें लेखक ने चंद्रमा पर भविष्य में मानव बस्ती बसने की संभावना को आधार बनाकर एक रोमांचक और विचारोत्तेजक कथा रची है। बाल पाठकों के लिए यह रचना न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान, अन्वेषण और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास भी है।

“चंद्रबस्ती का रहस्य” में लेखक ने चंद्रमा की सतह, वहां की चुनौतियाँ, तकनीकी संघर्ष और मानव जिज्ञासा को बाल मनोविज्ञान के अनुरूप प्रस्तुत किया है। यह उपन्यास बच्चों को कल्पनाशीलता, वैज्ञानिक सोच और साहसिकता की ओर प्रेरित करता है।

उपन्यास के रचनाकार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ एक प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार हैं, जिनकी रचनाएँ बाल पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। वे बाल साहित्य में संवेदना, संस्कृति और विज्ञान के समन्वय के लिए जाने जाते हैं। उनकी यह नवीनतम रचना बाल साहित्य को अंतरिक्ष की नई दिशा में ले जाने वाली मानी जा रही है।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा इस उपन्यास को स्वीकृति मिलना न केवल लेखक की उपलब्धि है, बल्कि यह संकेत है कि बाल साहित्य अब कल्पना से आगे बढ़कर भविष्य की वैज्ञानिक संभावनाओं को भी छूने लगा है।

यह उपन्यास शीघ्र ही प्रकाशित होकर देशभर के किशोर पाठकों तक पहुंचेगा, और उन्हें चंद्रमा की रहस्यमयी दुनिया में एक नई दृष्टि प्रदान करेगा।

 

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ भेट आपुली ती पहिली… + संपादकीय निवेदन – प्रा.सौ.सुमती पवार – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

प्रा.सौ.सुमती पवार

🪻 अभिनंदन 🪻

आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका प्रा. सुमती पवार यांच्या, मानस, इंद्रा आणि नक्षत्र या तीन कवितासंग्रहांचे नुकतेच प्रकाशन झाले आहे. साहित्य क्षेत्रातील त्यांच्या या कामगिरीबद्दल ई अभिव्यक्ती परिवारातर्फे त्यांचे मन: पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील प्रकाशनासाठी हार्दिक शुभेच्छा.

आज त्यांची एक नवीन कविता “भेट आपुली ती पहिली…“,कवितेचा उत्सव‘ या सदरात देत आहोत.

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

? कवितेचा उत्सव ? 

☆ भेट आपुली ती पहिली… ☆ प्रा.सौ.सुमती पवार

आठवते भेट मला भेट आपुली पहिली

लाजेने मी चूर चूर नजर नाही उचलली…

माती कोरत राहिले, शब्द नेती माझ्या ओठी

भेटीची ती ओढ अशी हुरहुर लागे पोटी..

*

न बोलताच बोलणे मौनातच सारे आले

समजत होते तुला मन माझे भांबावलेले…

मिष्किल नजर तुझी डोळ्यातही हसू होते

अस्फूट ते तुझे ओठ गोड किती होते नाते…

*

नाही पाहिले हो पूर्वी तरी ओढ का लागते

हृदयात काठोकाठ प्रेम का हो ओसांडते…

जीवाशिवाची का भेट देवादारी ठरवली

एका ह्याच नात्यासाठी मायबापे दुरावली..

*

वरचढ ठरे नाते अशी कोणती पुण्याई

जन्मदिला वाढवला त्यांना सोडूनच जाई…

जीव जीवात गुंततो नवे जीव येती घरा

अशी चाले घरोघरी मायबाप परंपरा…

*

ठेचा लागल्या हो किती पूर्णत्वाला नेती थेट

हात हातात घालून दूर जरी दिसे वाट

सुखदु:खे घरोघर मातीच्या चुली असती

पळसाला पाने तीन निभाऊन सारे नेती…

© प्रा.सौ.सुमती पवार 

 नाशिक

मो. ९७६३६०५६४२; ईमेल – svpawar6249@gmail.com

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

Please share your Post !

Shares

सूचनाएँ/Information ☆ वरिष्ठ साहित्यकार गुरुवर प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी अनंत में विलीन – विनम्र श्रद्धांजलि ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🙏 💐 वरिष्ठ साहित्यकार गुरुवर प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी अनंत में विलीन – विनम्र श्रद्धांजलि 💐🙏

भोपाल। वरिष्ठ साहित्यकार, भगवतगीता , रघुवंश, मेघदूत के हिंदी काव्य में अनुवादक, 40 से ज्यादा कृतियों के कवि, लेखक, आध्यात्मिक, राष्ट्र प्रेम की भावधारा के साहित्यिक पिताजी प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध का दुखद अवसान 99 वर्ष की आयु में आज 25 जुलाई को शाम 4 बजकर 50 मिनट पर हो गया है।

उन्होने शांति से अंतिम सांसे ली, और दिव्य स्थान को प्रस्थान कर गए हैं।

उन्होंने बच्चों के बच्चों के संग भी जीवन का भरपूर आनंद लिया।

ई-अभिव्यक्ति परिवार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ संपादक ई-अभिव्यक्ति (हिंदी) के इस दुःख में सहभागी है। 🙏

– हेमन्त बावनकर, पुणे  

🙏 ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से गुरुवर प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी को विनम्र श्रद्धांजलि 🙏

 ≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares