सूचनाएँ/Information ☆प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी, पुणे द्वारा गुरुवर्य पद्माकर सदाशिव चिरपुटकर पर स्मृतिग्रंथ ‘ज्ञानव्रती’ विमोचित ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी द्वारा गुरुवर्य पद्माकर सदाशिव चिरपुटकर पर स्मृतिग्रंथ ‘ज्ञानव्रती’ विमोचित ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

संस्था की गुणवत्ता में वृद्धि, डॉ. चिरपुटकर सर के आशीर्वाद – डॉ. गजानन एकबोटे, कार्याध्यक्ष, पी.ई. सोसायटी, पुणे

प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी की ओर से गुरुवर्य पद्माकर सदाशिव चिरपुटकर पर ‘ज्ञानव्रती’ शीर्षक से स्मृतिग्रंथ का विमोचन समारोह आयोजित किया गया थाl इस समारोह के अवसर पर प्रा. डॉ. नितीन करमलकर (माजी कुलपति, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय) डॉ. अरविन्द पांडे (उपकार्याध्यक्ष, प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी), प्रा. शामकांत देशमुख (कार्यवाह, प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी) प्रा. श्री. सुरेश तोड़कर (सहकार्यवाह, प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी) प्रा. डॉ. निवेदिता एकबोटे (उपकार्यवाह, प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी) प्रा. डॉ. प्रकाश दीक्षित (उपकार्यवाह, प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी) के करकमलों से स्मृतिग्रंथ “ज्ञानव्रती” का विमोचन संपन्न हुआl डॉ. अरविन्द पांडे द्वारा संपादित तथा अभिरुचि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस स्मृतिग्रंथ में 48 लेखों का समावेश किया गया है तथा संस्था की ओर से इससे ऑडियो बुक का निर्माण भी किया गया हैl

डॉ. चिरपुटकर की सुपुत्री डॉ. सुचित्रा केलकर ने समारोह के आयोजन हेतु आभार ज्ञापित किएl डॉ. ज्योत्स्ना एकबोटे ने संस्था के महत्वपूर्ण कार्य का श्रेय डॉ. चिरपुटकर को प्रदान कियाl

डॉ. अरविन्द पांडे ने कहा, “डॉ. चिरपुटकर शांत, अनुशासनप्रिय, सहृदय, दिलदार व्यक्तित्व के थेl मनुष्य को जौहरी की तरह वे परख लेते थेl ” डॉ. नितीन करमलकर ने संस्था के निर्माण में सहयोगियों का योगदान महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “प्राध्यापकों के कार्य के कारण संस्था बड़ी बनती हैl डॉ. चिरपुटकर का कार्य और योगदान अनन्यसाधारण हैl यह स्मृतिग्रंथ उनके ऋण में रहने के लिए ही निर्मित हैl ”

प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. गजानन एकबोटे ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा, “संस्था के अत्यंत कठिन समय और परिस्थितयों में डॉ. चिरपुटकर आधारस्तंभ थेl उनकी नि:स्वार्थ भावना, और आशीर्वादों के कारण संस्था की गुणवत्ता में निरंतर वृद्धि होती आई हैl संस्था में संस्कारपूर्ण वातावरण बना रहना भी आशीर्वाद हैl डॉ. एकबोटे ने अपने एकनिष्ठ कार्यकर्ता और सहयोगी डॉ. चिरपुटकर को सुमंनाजली अर्पित कीl साथ ही उन्होंने बताया, गणित और संख्याशास्त्र में प्रथम स्थान अर्जित करने वाले छात्र को एक लाख रुपयों की राशि का पुरस्कार संस्था की ओर से निर्धारित किया गया हैl

प्रस्तुत कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. निवेदिता एकबोटे ने की तथा अतिथियों का परिचय प्रा. शामकांत देशमुख ने कियाl प्रा. समीर नेर्लेकर द्वारा निर्मित ध्वनिचित्र का प्रस्तुतीकरण भी इस समय किया गयाl प्रस्तुत समारोह में प्रोग्रेसिव एज्युकेशन संस्था के संस्था के सभी सदस्य, पदाधिकारी, प्राध्यापक, अन्य कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थेl

साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे 

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ दुबई से ~ महिला काव्य मंच, दुबई द्वारा कार्यक्रम ‘मन से मंच’ तक आयोजित ~ ☆ साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹 दुबई से ~ महिला काव्य मंच, दुबई द्वारा कार्यक्रम ‘मन से मंच’ तक आयोजित ~ 🌹 साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ 🌹

सारस्वत रिश्ते वसुधैव कुटुंबकम् वाले होते हैं। शब्द आत्मीयता के आधार कुटुंब हैं। दुबई में मेरे आगमन की सूचना श्रीमती स्नेहा देव जी तथा श्री नितिन उपाध्ये जी को हुई, तो १५ नवम्बर २०२५ की शाम स्नेहा जी के आवास पर पंजीकृत संस्था महिला काव्य मंच (मन से मंच तक) के तत्वावधान में एक काव्य गोष्ठी रखी गई। मेरे अतिरिक्त सिंगापुर से अनुसुइया साहू जी, विश्व साहित्य सेवा संस्थान का भी आगमन दुबई हुआ है।

डाक्टर दंपति अनिल सक्सेना जी जिनकी खासियत ‘किडनी आधारित चित्रांकन’ और ‘कराओके सिंगिंग’ है, ने रात्रि भोज का आयोजन उनके आवास पर किया था। गोष्ठी में ‘किताबवाली नूपुर’ (यह उनके बुक रिव्यू यू ट्यूब चैनल का नाम है), मार्मिक कविता के लिए जाने जानेवाले  हरीश खत्री, तरन्नुम में गज़ल की हस्ताक्षर कौसर भुट्टो जी, केतकी जी, रेखा जी, संगीता जी, हिंदी और अरबी के साहित्य के प्रकाशक व्यास जी सहित कई साहित्यिक मित्रों से आत्मीय भेंट हुई। कविताएं सुनी, सुनाई। फिल्मी गीत भी गाये गए।

सुस्वादु भोजन हेतु डाक्टर श्रीमती सक्सेना का धन्यवाद। कुल जमा एक अंतरराष्ट्रीय अद्भुत साहित्यिक काव्य तथा विमर्श का आयोजन रहा।

हमने सुनाया..

☆ सारस साइबेरिया के… ☆

कल आये थे

सारस साइबेरिया के

मेरे घर के सामने की झील पर

बिना वीसा बिना पासपोर्ट

तुम्हारी सरहदों से होकर .

उन्हें यहां आने से रोक नहीं सकती

कोई

एक रंग में रंगी सेना या किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त सरकार .

 

तुम सिर्फ

कागजो के नक्शे पर

लकीरें सुर्ख कर

सीमायें बना सकते हो

 

अकारण जेहाद के फितूर में

उगा सकते हो

नई नई सरहदें

सरहदों पर कटीले तार

चौकियां और बंकर

निगरानी कर सकते हो

ड्रोन और सेटेलाइट से

पर क्या तुम

रोक सकते हो ?

धूप हवा और बादलो की आवाजाही

सीमा पार उगे वृक्ष की

इस पार पड़ती परछाई

इधर बजते संगीत की

उस पार गूंजती स्वर लहरियां

 

नहीं रोक सकते

मेरी कवितायें

जो समेटने को आतुर हैं

सारी सृष्टि को

अपनी बाहों में

साइबेरिया के सारसो का संदेश है

वसुधैव कुटुम्बकम .

साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’, दुबई से  

 

vivek ranjan Shrivastava

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ श्रीमती उर्मि कृष्ण स्मृति विशेषांक ☆ साभार – श्री विजय कुमार ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹श्रीमती उर्मि कृष्ण स्मृति विशेषांक 🌹 साभार – श्री विजय कुमार 🌹

‘शुभ तारिका’ मासिक पत्रिका का अगला अंक ‘श्रीमती उर्मि कृष्ण स्मृति विशेषांक’ होगा।

इस विशेष अंक के लिए आप अपना साहित्य, ईमेल urmi.klm@gmail.com पर या व्हाट्सएप नंबर 9813130512 (विजय कुमार), 9416860445 (पंकज शर्मा) पर भेज सकते हैं।

आप अपनी श्रद्धांजलि विज्ञापन रूप में भी भिजवा सकते हैं। सहयोग राशि 500 रुपये।

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – सूचनाएँ ☆ संपादकीय निवेदन – श्री राजीव पुजारी – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

श्री राजीव पुजारी

🎇अ भि नं द न 🎇

आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखक श्री. राजीव पुजारी त्यांच्या लेखनातून आपल्या वाचकांना नेहेमीच नवनवी उत्तम आणि आवश्यक अशी वैज्ञानिक माहिती देत असतात हे सर्वश्रुत आहे. आणि आता श्री. पुजारी यांना नुकताच त्यांच्या ‘अंतराळवेध’ या पुस्तकासाठी “ महामृत्युंजय वाड. मय पुरस्कार “ जाहीर झाला आहे. गडचिरोली येथील नाट्यश्री कलामंचातर्फे हा प्रतिष्ठेचा राज्यस्तरीय महामृत्युंजय वाड•मय पुरस्कार राजीव पुजारी यांना दिला जात आहे. क्राउन पब्लिकेशन्स यांनी हे पुस्तक प्रकाशित केले आहे. इतका महत्वपूर्ण पुरस्कार मिळाल्याबद्दल श्री. राजीव पुजारी यांचे सर्व थरांतून कौतुक होत आहे.

हे पुस्तक अवकाश विज्ञानाला वाहिलेले असून, पुस्तकात नासा व इस्रो द्वारा राबविण्यात आलेल्या विविध अंतरिक्ष मोहिमांचा समावेश आहे. दहा लेखांचा समावेश असलेला एक विशेष विभाग म्हणजे NASA च्या मार्स २०२० मोहिमेला समर्पित आहे. याशिवाय LCRD, IXPE, DART, LUCY, जेम्स वेब अंतरिक्ष दुर्बीण, आर्टिमिस योजना, चंद्रयान-३, गुरुत्वाकर्षण लहरी, आदित्य-एल १, नासाची मंगळ ग्रहावरील मातीचे नमुने परत आणायची मोहीम, इत्यादी मोहिमांवर अभ्यासपूर्ण लेख आहेत.

…. या सोबतच दोन रंजक अंतराळ कथा आहेत.

…. शेवटचा विभाग संशोधक व संशोधन संस्था या संबंधी आहे. यामध्ये डॉ. विक्रम साराभाई, प्रो. यू. आर. राव, के. कस्तुरी रंगन, एम. जी. के. मेनन, डॉ. सतीश धवन यांचेविषयी माहिती आहे.

…. याच विभागात इस्रो व तिच्या विविध केंद्रांची माहिती आहे.

आधुनिक आणि अद्ययावत अशी विज्ञान विषयक आवश्यक माहिती सर्वसामान्य वाचकांना सहज आकलन होईल अशा पद्धतीने लिहिणे हे श्री. पुजारी यांचे वैशिष्ट्य आहे. आणि एक प्रकारे हे समाज-प्रबोधनाचेच काम आहे यात दुमत नाही.

आपल्या अभिव्यक्ती परिवाराकडून श्री. राजीव पुजारी यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन, आणि त्यांच्या यापुढील अशाच यशस्वी आणि वैज्ञानिक माहितीपर उत्तम लिखाणासाठी असंख्य शुभेच्छा.

– संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

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ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ एक संवाद ☆ हेमन्त बावनकर ☆

हेमन्त बावनकर

☆ ई-अभिव्यक्ति – एक संवाद ☆ हेमन्त बावनकर ☆

प्रिय मित्रो,

ई-अभिव्यक्ति के सभी प्रबुद्ध लेखकगण तथा पाठकगण के आत्मीय स्नेह के लिए हृदय से आभार।

अक्तूबर २०२५ में आपकी प्रिय वैबसाइट ने सफलवर्ष पूर्ण किये हैं एवं १५ अगस्त २०२५ को ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ने अपने सफल ५ वर्ष पूर्ण कर लिए हैं।  

इन पंक्तियों के लिखे जाते तक ३१,२००+ रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं एवं  710958 से अधिक विजिटर्स आपकी प्रिय वैबसाइट https://www.e-abhivyakti.com पर विजिट कर अपना आत्मीय स्नेह और प्रतिसाद दे चुके हैं.

हमें इस सूचना को आपसे साझा करते हुए अत्यंत गर्व का अनुभव हो रहा है कि ई-अभिव्यक्ति भारत का प्रथम प्रकाशन है जो विगत चार वर्षों से फ्लिपबुक फोर्मेट में हिंदी एवं मराठी भाषा में दीपावली विशेषांक का निःशुल्क प्रकाशन कर रहा है.    

इस सम्पूर्ण यात्रा में हम लोग काफी उतार चढ़ाव से गुजरे. गत एक वर्ष में हमने आपने प्रिय मित्र स्मृतिशेष जय प्रकाश पाण्डेय जी के साथ ही गुरुवर डॉ राजकुमार तिवारी ‘सुमित्र’ और प्रो. चित्रभूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी को खोया है जिनकी स्मृतियाँ सदैव अविस्मृत रहेंगी.  

हमारे सम्पादक मंडल ने अपने प्रबुद्ध लेखकगण एवं पाठकगण के सहयोग से साहित्य सेवा में अपना निःस्वार्थ योगदान देकर साहित्य को नए आयाम देने का प्रयास किया है. 

आप को आश्चर्य होगा कि हमारे संपादक मंडल के सदस्य वरिष्ठ नागरिकों / साहित्यकारों का एक छोटा सा समूह है, जो बिना किसी व्यावसायिक लाभ के अपनी अभिरुचि स्वरुप  स्वान्तः सुखाय उत्कृष्ट साहित्य प्रदान करने को तत्पर है. ई-अभिव्यक्ति नवोदित साहित्यकारों से लेकर सम्माननीय वरिष्ठ साहित्यकारों के साहित्य को एक सम्माननीय  मंच प्रदान करता है और ससम्मान प्रकाशित करने का प्रयास करता है.

हमारे संपादक मंडल का प्रयास रहता है कि – अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पूरा सम्मान देते हुए निर्विवादित साहित्य प्रस्तुत करें। हम रंग, धर्म, जाति और राजनीति से सम्बंधित विवादित साहित्य को कदापि प्रोत्साहित नहीं करते. यदि हमें कोई साहित्य मिलता है तो उसे हम ससम्मान प्रकाशित करते हैं। हाँ साहित्य की अधिकता में कुछ विलम्ब की संभावना हो सकती है. यदि आपका कोई साहित्य प्रकाशित नहीं होता है तो कृपया यह समझा जाए कि वह हमारे निर्धारित साहित्यिक मानदंडों के अंतर्गत नहीं आते और इस सन्दर्भ में आपका सादर सहयोग अपेक्षित है. साहित्य के चुनाव में संपादक मंडल का निर्णय अंतिम एवं मान्य होता  है. 

उपरोक्त सभी उपलब्धियों से ई-अभिव्यक्ति परिवार गौरवान्वित अनुभव करता है। हम कामना करते हैं कि – आप सभी का यह अपूर्व आत्मीय स्नेह एवं प्रतिसाद इसी प्रकार हमें मिलता रहेगा। 

आपसे सस्नेह विनम्र अनुरोध है कि आप ई-अभिव्यक्ति में प्रकाशित साहित्य को आत्मसात करें एवं अपने मित्रों से सोशल मीडिया पर साझा करें। 

आपके विचारों एवं सुझावों की हमें प्रतीक्षा रहेगी।

एक बार पुनः आप सभी का हृदय से आभार ।

सस्नेह

हेमन्त बावनकर

पुणे (महाराष्ट्र)   

१४ नवम्बर २०२५  

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’≈

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ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ एक संवादी सहप्रवासएक संवादी सहप्रवास ☆ हेमन्त बावनकर ☆

हेमन्त बावनकर

☆ ई-अभिव्यक्ती : एक संवादी सहप्रवास ☆ हेमन्त बावनकर ☆

सस्नेह नमस्कार.

ई-अभिव्यक्ती : साहित्य मंचाचे सर्व सुजाण साहित्यिक आणि वाचक यांचे मी मनापासून आभार मानू इच्छितो.

ऑक्टोबर २०२५ मध्ये आपली ही आवडती वेबसाईट सुरु झाल्याला ७ वर्षं पूर्ण झाली आहेत, आणि ई-अभिव्यक्ती – मराठी विभागाने दि. १५ ऑगस्ट २०२५ रोजी ५ वर्षांचा यशस्वी टप्पा पार केला आहे, ही गोष्ट अतिशय आनंददायक आहे.

…. या मंचावरून आजपर्यंत ३१,२००  पेक्षाही जास्त संख्येने विविध प्रकारच्या साहित्य-रचना प्रकाशित केल्या गेल्या आहेत. आणि 710958  पेक्षाही जास्त संख्येने रसिकांनी https:www.e-abhivyakti.com या आपल्या वेबसाईटला भेट देत उत्तम प्रतिसाद दिलेला आहे.

आपणा सर्वाना हेही ज्ञातच आहे की ई – अभिव्यक्ती साहित्य मंच गेल्या चार वर्षांपासून ‘ फ्लिपबुक ‘ या format मध्ये हिंदी आणि मराठी दिवाळी अंक नि:शुल्क प्रकाशित करत आहे, आणि अशा स्वरूपाचा भारतात प्रकाशित होणारा हा पहिला अंक आहे हे आम्ही अतिशय आनंदाने आणि अभिमानाने सांगू इच्छितो.

…… “ दुधात साखर “ म्हणता येईल अशी ‘ई-अभिव्यक्ती मराठी’ बाबतची आणखी एक विशेष गोष्ट म्हणजे >>> “ Feedspot “ या कंपनीने आपणहून केलेल्या सर्व्हेनुसार, ‘ ९० सर्वोत्तम मराठी ब्लॉग्स च्या त्यांनी केलेल्या यादीमध्ये आपला हा ब्लॉग २८ व्या क्रमांकावर आहे. ( आधीच्या २७ ब्लॉग्सपैकी १३ ब्लॉग्स फक्त वेगवेगळ्या वृत्तपत्रांचे आहेत हे या संदर्भात लक्षात घ्यायला हवे.)

आमच्या जाणकार आणि अनुभवसंपन्न लेखक/लेखिका, आणि कवी/कवयित्रींच्या, तसेच रसिक वाचकांच्या सहकार्याने आमचे संपादक मंडळ या निखळ साहित्य-सेवेसाठी नि:स्वार्थपणे संपूर्ण योगदान देते आहे, आणि साहित्याला एक नवे परिमाण देण्याचा सातत्याने प्रयत्न करत आहे.

… आपणास हे जाणून आश्चर्य वाटेल की आमचे संपादक मंडळ म्हणजे स्वतः साहित्यिक असणाऱ्या ज्येष्ठ नागरिकांचा एक अगदी लहानसा ग्रुप आहे आणि या कामात कुठलाही व्यावसायिक वा आर्थिक लाभ नसतांनाही, निव्वळ त्यांना स्वतःला साहित्याची मनापासून असणारी आवड आणि इतर साहित्यिकांबद्दल वाटणारा सहभाव याच कारणाने अनेकांचे चांगले साहित्य इतर असंख्य लोकांपर्यंत निरपेक्षपणे पोहोचवण्यासाठी हे सगळे संपादक मनापासून, तत्परतेने आणि सातत्याने काम करताहेत…. याला ‘स्वान्त सुखाय‘ असेही म्हणता येईल. नवोदित साहित्यिकांपासून ते सन्मान्य ज्येष्ठ साहित्यिकांपर्यन्त सर्वांसाठीच हा एक सन्माननीय साहित्य मंच सातत्याने उपलब्ध आहे, आणि अशा सर्वांनी आमच्याकडे पाठवलेले साहित्य नियमित स्वरूपात योग्य प्रकारे प्रकाशित करण्याचा मनापासूनचा प्रयत्न या मंचावरून सातत्याने केला जात आहे.

इथे आवर्जून एक गोष्ट सांगायला हवी ती अशी की, प्रत्येकाच्या अभिव्यक्ती-स्वातंत्र्याचा पूर्णतः आदर करत असतांनाच, कुठच्याही प्रकारचा जातीयवाद, धर्मवाद, किंवा राजकारण या संदर्भातले, किंवा इतर कुठलेही.. कुठल्याही प्रकारे विवाद्य ठरेल असे साहित्य वगळता, आम्हाला पाठवलेले सर्व साहित्य सन्मानपूर्वक प्रकाशित करायचे हाच संपादक मंडळाचा सततचा प्रयत्न असतो. अर्थात जेव्हा आमच्याकडे एकाच वेळी जास्त प्रमाणात साहित्य आलेले असते तेव्हा ते प्रकाशित व्हायला उशीर होण्याची शक्यता असते… नव्हे, बऱ्याचदा असा उशीर नाईलाजाने होतोही… पण ते प्रकाशित केले जातेच आणि याची दक्षता घेतली जाते.

…. पण आपले एखादे साहित्य अजिबातच प्रकाशित केलेच गेले नाही तर कृपया असे गृहीत धरावे की आम्ही निर्धारित केलेले साहित्यिक मानदंड लक्षात घेऊनच अशा साहित्याचा समावेश केला गेलेला नाही….. आणि या बाबतीत आपणा सर्वांचे सकारात्मक सहकार्य अपेक्षित आहे. साहित्याची निवड करण्याबाबतचा अंतिम निर्णय संपादक मंडळाचा असेल याची कृपया दखल घ्यावी

ई – अभिव्यक्ती परिवारासाठी आपल्या सर्वांचा उत्स्फूर्त सहभाग खरोखरच गौरवास्पद आहे…

आपणा सर्वांचा हा अनोखा स्नेह आणि मनापासूनचा प्रतिसाद असाच आम्हाला सतत मिळत राहू दे.

या निमित्ताने एक नम्र विनंती अशी की या मंचाद्वारे दैनिक स्वरूपात प्रकाशित होणारे सगळे साहित्य आपण स्वतः तर न चुकता वाचावेच, आणि सोशल मीडियाद्वारे आपल्या परिचितांनाही पाठवावे … जेणेकरून, एक साहित्यिक लिखाण अनेकांपर्यंत सहजपणे पोहोचावे हा या मंचाचा निरपेक्ष हेतू सफल होईल.

आपले विचार आणि सूचना नेहेमीच स्वागतार्ह आहेत.

आपणा सर्वांचे पुन्हा एकदा अगदी मनापासून आभार … आपल्यामधली ही स्नेहभावना सतत वृद्धिंगत होवो हीच कामना.

आपला स्नेहांकित,

हेमन्त बावनकर

पुणे (महाराष्ट्र)   

१४ नवम्बर २०२५  

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025 – संपन्न ☆ साभार – डॉ. जवाहर कर्नावट ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025 – संपन्न 🌹 साभार – डॉ जवाहर कर्णावट 🌹

देहरादून के समीप ग्राम थानो में नवनिर्मित लेखक गांव में 3 से 5 नवंबर 2025 तक आयोजित ‘स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025’ में ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मीडिया की जिम्मेदारी एवं चुनौतियां’ तथा ‘वैश्विक परिदृश्य में हिंदी’ सत्रों में अतिथि वक्ता के रूप में सहभागिता का अवसर प्राप्त हुआ। यात्रा की शुरुआत भोपाल विमानतल पर श्री जावेद अख्तर जी से मुलाकात से हुई। लेखक गांव के संरक्षक देश के पूर्व शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस सम्मेलन में मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति श्री पृथ्वीराज सिंह रूपन, देश के कानून, न्याय मंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल जी एवं ख्यात गायक श्री कैलाश खेर से भी मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। मीडिया सत्र में पूर्व सांसद एवं विचारक श्री तरुण विजय, उत्तराखंड मुख्यमंत्री के सलाहकार वरिष्ठ पत्रकार श्री गोविंद सिंह आदि के साथ मंच साझा किया। देश-विदेश के अनेक लेखकों एवं साहित्यकारों से भी भेंट हुई। आदरणीय श्री निशंक जी और श्री अनिल जोशी जी का विशेष धन्यवाद।

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – सूचनाएँ ☆ संपादकीय निवेदन – सौ. वंदना हुळबत्ते – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

सौ. वंदना हुळबत्ते

🎇अ भि नं द न 🎇

आपल्या समूहातील मान्यवर लेखिका / कवयित्री  सौ. वंदना हुळबत्ते यांना, अखिल भारतीय नाट्य परिषदेच्या सांगली शाखेतर्फे, दि. ४ नोव्हेंबर २५ रोजी, “कै. श्रीनिवास शिंदगी बालनाट्य पुरस्कार“ प्रदान करण्यात आला आहे. श्रीनिवास शिंदगी सर हे सांगलीतील बालनाट्य चळवळीचे पहिले पुरस्कर्ते आहेत. त्यामुळे वंदनाताईंना त्यांच्या नावे दिला गेलेला हा पुरस्कार अतिशय महत्वाचा आणि मानाचा आहे.

या पुरस्काराबद्दल, ई-अभिव्यक्ती परिवारातर्फे वंदनाताईंचे मन:पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील अशाच यशस्वी साहित्यिक प्रवासासाठी असंख्य हार्दिक शुभेच्छा.

आजच्या अंकातल्या ‘ मनमंजुषा’ सदरात वाचूया त्यांच्या या नाट्यप्रवासाबद्दलचे त्यांचे मनोगत.  

– संपादक मंडळसंपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

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सूचनाएँ/Information ☆ व्यंग्यम् जबलपुर की मासिक व्यंग्य गोष्ठी सम्पन्न ☆ साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ व्यंग्यम् जबलपुर की मासिक व्यंग्य गोष्ठी सम्पन्न ☆ साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार

कोट के मौसम में रैनकोट – गोष्ठी में व्यंग्य की बौछारें

जबलपुर l संस्कारधानी में व्यंग्य में रुचि रखने वाले शहर के लब्धप्रतिष्ठ व्यंग्यकारों की उपस्थिति में व्यंग्यम जबलपुर द्वारा मासिक व्यंग्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

गोष्ठी की शुरुआत में ख्यात व्यंग्यकार स्मृतिशेष जय प्रकाश पाण्डेय, संस्थापक व्यंग्यम के स्मृति जन्मदिवस 02 जनवरी 2026 पर कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा बनाई गई। इस व्यंग्य पाठ की मासिक गोष्ठी में उपस्थित सुरेश ‘विचित्र’ जी ने कटर पिल्ला, प्रतुल श्रीवास्तव जी ने गधा और गधत्व के सुख-दुःख, रमाकांत ताम्रकार ने  कोट से रेनकोट तक: सत्ता के बदलते मौसम, यशोवर्धन पाठक ने महिमा प्रशंसा के उपासकों की, कार्यक्रम अध्यक्ष अभिमन्यु जैन ने कार बिना सब सून जैसे महत्त्वपूर्ण विषय पर व्यंग्य का पाठ किया।

कार्यक्रम का संचालन व्यंग्यकार श्री यशोवर्धन पाठक एवं आभार प्रदर्शन आचार्य विजय तिवारी  ‘किसलय’ ने किया।

साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार, जबलपुर  

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ विवेचना, जबलपुर के पचास साल पूरे होने पर विवेचना कला महोत्सव आयोजित ☆ साभार – श्री हिमांशु राय  ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹 विवेचना, जबलपुर के पचास साल पूरे होने पर विवेचना कला महोत्सव आयोजित – श्री हिमांशु राय 🌹

विवेचना, जबलपुर के पचास साल पूरे होने पर विवेचना कला महोत्सव आयोजित है।

2 नवंबर को शाम 6:30 बजे शहीद स्मारक हाल में जाने-माने विज्ञान वक्ता श्री अमिताभ पांडे का व्याख्यान “आदम का सफर अफ्रीका से आसमान तक” विषय पर होगा।

3 नवंबर को तरंग प्रेक्षा गृह में शाम 7:00 बजे श्री जानकी बैंड ऑफ वीमेन के द्वारा गीतों की मनोहारी सांगीतिक प्रस्तुति की जाएगी । यह प्रदेश का पहला महिला बैंड है।

4 नवंबर को शालिनी खरे व समूह द्वारा कथक नृत्य पर केंद्रित कथक नाद कार्यक्रम होगा। शालिनी खरे प्रख्यात कथक नृत्यांगना हैं।  यह सभी कार्यक्रम निशुल्क हैं । 3  व 4 नवंबर के कार्यक्रम उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज  के सहयोग से आयोजित है ।

हर साल होने वाला विवेचना का राष्ट्रीय नाट्य समारोह इस साल 31 वें साल में प्रवेश कर रहा है।  यह समारोह 5 नवंबर से 9 नवंबर तक 2025 तक तरंग प्रेक्षा ग्रह  में शाम 7:30 बजे से होगा ।  कार्यक्रम नीचे पोस्टर में दिया गया है।

हर नाटक के पूर्व 7:00 बजे से पूर्व रंग में विभिन्न कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे ।

इस अवसर पर अवधेश बाजपेई की पेंटिंग प्रदर्शनी भी आयोजित हो रही है ।

पुस्तक प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रहेगी ।

आप सभी कार्यक्रमों में सादर आमंत्रित हैं ।

नाट्य समारोह के प्रवेश पत्र समारोह स्थल पर उपलब्ध रहेंगे।  इस बार नाट्य समारोह के प्रवेश पत्र Bookmyshow पर भी उपलब्ध हैं।  इस वर्ष नाटक समारोह के प्रवेश पत्र की दरों में संशोधन किया गया है। आप सभी का सहयोग अपेक्षित है ।

आईये, विवेचना कला महोत्सव का आनंद लेते हैं। आप सादर आमंत्रित हैं।  विवेचना कला महोत्सव के कार्यक्रमों के विवरण उपरोक्त कार्ड में दिए गए हैं।

साभार –  श्री हिमांशु राय

सचिव विवेचना

जबलपुर, मध्यप्रदेश

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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