मराठी भाषा विभाग , महाराष्ट्र शासन व महाराष्ट्र राज्य साहित्य आणि सांस्कृतिक मंडळ, मुंबई, यांच्या अनुदानातून जामनेर तालुका साहित्य संस्कृती मंडळाने आयोजित केलेल्या ‘ ग्रामीण युवा साहित्य संमेलन’ या दोन दिवसीय संमेलनात आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखिका, कवयित्री डॉ. शैलजा करोडे यांच्या ” निशिगंध ” या ललित लेख संग्रहास ” उत्कृष्ट ग्रंथ ” पुरस्काराने गौरविण्यात आले आहे. डॉ. शैलजा करोडे यांचे हे २५ वे पुस्तक आहे.
तसेच, ‘ समाज चिंतामणी प्रतिष्ठान, जळगाव ‘ आयोजित दुसऱ्या अखिल भारतीय online साहित्य संमेलनाच्या अध्यक्षा म्हणून शैलजाताईंना आमंत्रित केले गेले आहे.
या दुहेरी सन्मानाबद्दल ई-अभिव्यक्ती (मराठी) परिवारातर्फे शैलजाताईंचे मनःपूर्वक अभिनंदन, आणि त्यांच्या यापुढील अशाच यशस्वी साहित्यिक वाटचालीसाठी हार्दिक शुभेच्छा !💐💐
संपादक मंडळ
ई अभिव्यक्ती मराठी
☆ ☆ ☆ ☆ ☆
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
तितिक्षा भावार्थ सेवांतर्गत तितिक्षा इंटरनॅशनल, पुणे, आयोजित, साखळी चित्र काव्य लेखन स्पर्धेत आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका सौ. ज्योती कुळकर्णी यांनी तीन चित्र काव्ये सादर केली होती. या तीन कव्यांसाठी त्यांना स्पर्धेत तृतीय क्रमांक प्राप्त झाला आहे.
ई अभिव्यक्ती मराठी परिवारातर्फे सौ. ज्योती कुळकर्णी यांचे मन: पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील लेखनासाठी शुभेच्छा!💐💐
पुरस्कार प्राप्त कविता ‘शिवरूप दत्त स्तवन‘ आज प्रकाशित होत आहे. 🪻
संपादक मंडळ
ई अभिव्यक्ती मराठी
☆ ☆ ☆ ☆ ☆
कवितेचा उत्सव
☆ “शिवरूप दत्त स्तवन” ☆ सौ. ज्योती कुलकर्णी ☆
(तितिक्षा इंटरनॅशनल पुणे आयोजित साखळी चित्र काव्य लेखन स्पर्धेत – तृतीय पारितोषिक प्राप्त)
☆ स्मृतिशेष जय प्रकाश पाण्डेय जी को व्यंग्य मित्र अलंकरण समर्पित ☆ साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार ☆
☆ रूप बदलते साँप व्यंग्य संग्रह का लोकार्पण संपन्न ☆
☆ व्यंग्यम का भावभीना कार्यक्रम ☆
श्रीजानकीरमण महाविद्यालय में स्व. जयप्रकाश पाण्डेय जी का स्मृति जन्मोत्सव एवं व्यंग्य संग्रह “रूप बदलते साँप” का लोकार्पण संपन्न हुआ जिसमें मुख्य अतिथि श्री राजीव कुमार शुक्ल, विशिष्ट अतिथि रूप में श्रीजानकीरमण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अभिजात कृष्ण त्रिपाठी तथा मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य भगवत दुबे रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ कुंदनसिंह परिहार ने की।
स्व. जयप्रकाश पाण्डेय
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ वीणा वादिनी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से प्रारंभ हुआ। तदोपरांत स्व जयप्रकाश पाण्डेय जी के छाया चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। व्यंग्यम का परिचय एवं स्वागत उद्बोधन रमाकांत ताम्रकार द्वारा दिया गया। स्व पाण्डेय जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सुरेश मिश्र ‘विचित्र‘, अभिमन्यु जैन सहित स्वर्गीय श्री पांडेय जी की धर्मपत्नी श्रीमती मंजू पांडेय जी ने अपने आत्मीय उद्गार व्यक्त किए।
अतिथियों के करकमलों द्वारा स्व. श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी के व्यंग्य संग्रह ‘रूप बदलते साँप‘ का भव्य लोकार्पण किया गया। इसी अवसर पर श्री दविंदर ग्रोवर ने व्यंग्य संग्रह ‘रूप बदलते सांप‘ में संकलित ‘अस्थि विसर्जन का लफड़ा ‘ व्यंग्य का पाठ किया गया। साथ ही आचार्य विजय तिवारी ‘किसलय‘ एवं यशोवर्धन पाठक ने पुस्तक पर चर्चा करते हुए विभिन्न प्रसंगों की विस्तृत व्याख्या की। हेमन्त बावनकर के श्री पांडेय जी पर केन्द्रित आलेख का वाचन किया। व्यंग्यम संस्था द्वारा श्री पांडेय जी के परिजनों को पाण्डेय जी को मरणोपरांत ‘व्यंग्य मित्र‘ अलंकरण प्रदान किया गया।
संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रतुल श्रीवास्तव ने तथा आभार श्री विनोद खंडालकर द्वारा व्यक्त किया गया। आयोजन में राज सागरी, मनोज शुक्ल मनोज, आशुतोष तिवारी, डॉ गंगाधर त्रिपाठी, अजय मिश्रा, संजय जैन, अनिल अग्रवाल, नरेश जैन, मकबूल अली कादरी, ओ पी गुप्ता अशोक शुक्ल, गणेश प्यासा, सुभाष जैन शलभ, मनोज जैन मित्र, सुजय पांडेय, स्वयं पांडेय की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार, जबलपुर
≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
☆ पुणे में संपन्न सार्थक काव्यगोष्ठी ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆
हाल ही में हिंदी के सुप्रतिष्ठित कवि संदीप मिश्रा ‘सरस‘ जी के पुणे आने की ख़ुशी में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया था । हिंदी-सिन्धी-उर्दू कवयित्री इंदिरा पूनावाला जी ने इस गोष्ठी का आयोजन किया था। काव्यगोष्ठी के अध्यक्ष कवि संदीप मिश्रा ‘सरस‘ जी और प्रमुख अतिथि श्री. राजेंद्र श्रोत्रिय जी को पुष्प, श्रीफल, शाल देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर ज्येष्ठ कवि श्री. नंदकुमार मिश्र ‘आदित्य सामवेदी‘, श्री. गोविंद मिश्र, श्री. राजेंद्र श्रोत्रिय, डॉ. प्रेरणा उबाले, भावना गुप्ता, कुमार गौरव, वेद स्मृति मौजूद थे और उन्होंने अपनी कविताएँ काव्य गोष्ठी में प्रस्तुत की।
हास्य व्यंग्य कवि, नाटककार श्री राजेंद्र श्रोत्रिय, मध्य प्रदेश ने सरस्वती वंदना गाकर काव्य गोष्ठी का आरंभ किया तथा गाँव की स्मृतियाँ तजा करनेवाली ‘शहरों से आया है प्रभाव, कितना बदल गया है गाँव‘ कविता लय में प्रस्तुत कर सबको गाँव के वातावरण में ले गए। काव्य गोष्ठी की आयोजक इंदिरा पूनावाला ‘शबनम‘ ने ‘डरते-डरते एक-दूसरे के करीब आते हैं क्यों‘ शीर्षक गज़ल पढ़कर समां बाँध दिया।
पुणे की हिंदी- मराठी में लेखन करने वाली कवयित्री डॉ. प्रेरणा उबाले ने जीवन की शाश्वतता और क्षणभंगुरता को प्रतिपादित करने वाली ‘मिटता कुछ नहीं जिन्दगी से, मिलता सबकुछ जिन्दगी से‘ और ‘भूख थोड़ी बची रहें, पेट में आग थोड़ी बची रहें ‘ शीर्षक कविताएँ प्रस्तुत की। श्री. गोविन्द मिश्र, ने अपने गाँव और पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कार्य की महती गानेवाला गीत प्रस्तुत किया। और वेद स्मृति ‘कृति‘, उत्तरप्रदेश ने कुंडलियाँ छंद में माता धवला दो मुझे वरदान‘ कविता का सरस पठन किया।
काव्य गोष्ठी के अध्यक्ष और प्रमुख अतिथि , साहित्य सृजन के संस्थापक श्री. संदीप मिश्र जी ने पुणे के अपने अनुभव सबसे साझा किए। पुणे की सभ्यता- संस्कृति की उन्होंने मुक्त कंठ प्रशंसा की। साथ ही पुणे के लोगों का हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुझान उन्हें अच्छा लगा और अपनी अनुभूतियों से निर्मित कविताओं का सस्वर पठन किया ‘मायके को संभाल देती हैं बिटिया, मन को खंगाल देती हैं बिटियाँ‘ कविता से उन्होंने सबको मोह लिया। ‘वेद मन्त्रों का पूर्ण फल अम्मा, गंगा के दिव्य जल अम्मा, जिन्दगी की कठिन परीक्षा में , सारे प्रश्नों का एक हल अम्मा‘ कविता ने सबकी वाहवाही बटोरी। साथ ही भावना गुप्ता ने ‘मैं कैसे कह दूं रुक जाना,’ और ‘शांत हूँ खुद में‘ कविताओं को प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक, सामाजिक दृष्टियों से साहित्य और भाषा को संरक्षण देने वाली तथा उनका संवर्धन करने वाली इस तरह की गोष्ठियों का आयोजन बहुत आवश्यक प्रतीत होता है। इंदिरा पूनावाला ‘शबनम‘ द्वारा आयोजित इस काव्य गोष्ठी में सभी ने कविताओं का आनंद लिया। विभिन विषयों पर पढ़ी गई कविताओं से हर्षोल्लास का वातावरण काव्य गोष्ठी में छाया रहा।
साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे
अध्यक्ष, हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय, शिवाजीनगर, पुणे
संपर्क- 7028525378
≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
☆ रंगक्षितिज थियेटर एंड वेलफेयर सोसाइटी, भोपाल द्वारा,”अटल स्वप्न” नाटक का मंचन ☆ साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ☆
अटल बिहारी बाजपेई जी के जन्म दिवस के उपलक्ष में सहयोग वेलफेयर सोसाइटी द्वारा भारत सरकार संस्कृति विभाग के सहयोग से दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन केरियर कालेज भोपाल के सभागार में किया गया।
जिसके अंतर्गत रंगक्षितिज थियेटर एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा,”अटल स्वप्न”नाटक का मंचन किया गया। जिसका लेखन निर्देशन रीना बिष्ट द्वारा किया गया। अटल बिहारी वाजपेई के किरदार को प्रेम प्रकाश अष्ठाना द्वारा जीवित किया गया। मंच पर किरती बौरा, सतीश रे, ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
गीत संगीत सतीश रे का था। बड़ी संख्या में दर्शको कि उपस्थिति में नाटक कि सराहना कि गया। अटल जी के नारों से सभागार गुंजायमान था।
साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
गायत्री स्मृति सम्मान समारोह – पाथेय साहित्य कला अकादमी, जबलपुर
इंजी. इस्मिता माथुर
☆ डॉ. गायत्री कथा सम्मान 2025 से सम्मानित होंगी इंजी.इस्मिता माथुर ☆
☆ नारी जागरण के लिए क्रियाशील संस्थाएं भी होंगी सम्मानित ☆
जबलपुर। प्रतिष्ठित कथा लेखिका, कवयित्री डॉ.गायत्री तिवारी की स्मृति में ‘पाथेय साहित्य कला अकादमी‘ द्वारा आयोजित गायत्री कथा सम्मान 2025 से इंजीनियर स्मिता माथुर को 27 दिसम्बर 2025 को अपरान्ह 3.30 बजे कलावीथिका में सम्मानित किया जाएगा । यह जानकारी पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पाथेय साहित्य कला अकादमी के महासचिव राजेश पाठक प्रवीण दी। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर नारी जागरण के क्षेत्र में क्रियाशील संस्थाएं प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय शिव स्मृति भवन, कान्यकुब्ज ब्राह्मण महिला प्रकोष्ठ, सनाढ्य महिला संस्था, राजपूताना क्लब, मां नर्मदा वानप्रस्थ आश्रम, मातृशक्ति परम वैभव समिति, स्वर्णकार महिला मंडल, ममत्व सेवा महिला प्रकोष्ठ को भी सम्मानित किया जाएगा।
गायत्री कथा सम्मान से सम्मानित होने जा रही इंजी. इस्मिता माथुर के चार कथा संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जिन्हें प्रबुद्ध वर्ग ने सराहा। इनकी कहानी मुख्यतः नारी विमर्श और उनकी समस्याओं पर केंद्रित होती हैं। समाज के विभिन्न वर्गों की भारतीय नारी को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ा है उन स्थितियों और परिस्थितियों को इस्मिता ने मार्मिक भावों में सृजित करते हुए उन्मूलन की दिशा भी प्रदान की है ।
ज्ञातव्य हो कि डॉ.गायत्री तिवारी ने साहित्य की विविध विधाओं में सृजन किया। उनकी कहानी ‘कोबरा‘ को मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग ने पुरस्कृत किया था। पत्रकार वार्ता में डॉ. संध्या श्रुति, प्रतिमा अखिलेश, राजेन्द्र मिश्रा, प्रतुल श्रीवास्तव, विजय जायसवाल, डॉ. हर्ष कुमार तिवारी, आलोक पाठक भी उपस्थित थे।
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका श्रीमती दीप्ती कुलकर्णी यांनी साहित्य क्षेत्रात तिहेरी यश संपादन केले आहे.
तितिक्षा इंटरनॅशनल, पुणे या संस्थेचा उत्कृष्ट ग्रंथ पुरस्कार त्यांच्या ‘खोल डोहाच्या तळ्यातून’ या काव्य संग्रहास प्राप्त झाला आहे.
तसेच तितिक्षा आयोजित नवरात्री विशेष काव्य लेखन स्पर्धेत त्यांच्या ‘ कुष्माडा ‘ या कवितेस द्वितीय पुरस्कार मिळाला आहे. तर तितिक्षा च्या काव्य पूर्तता स्पर्धेतही ‘ संदेश कवितेचा ‘ या कवितेस द्वितीय क्रमांक मिळाला आहे.
दीप्ती कुलकर्णी यांच्या या यशाबद्दल ई अभिव्यक्ती मराठी परिवारातर्फे त्यांचे मन: पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील लेखनासाठी शुभेच्छा 💐💐
पुरस्कार प्राप्त कविता ‘संदेश कवितेचा‘ आज प्रकाशित होत आहे. 🪻
संपादक मंडळ
ई अभिव्यक्ती मराठी
☆ ☆ ☆ ☆ ☆
कवितेचा उत्सव
☆ “संदेश कवितेचा” ☆ सौ.ज्योत्स्ना तानवडे ☆
☆
मानवतेचा पथ सजवाया
होवुनिया रांगोळी
माझ्यानंतर शिल्लक मागे,
या कवितेच्या ओळी ||धृ||
*
कवितेची किमया न्यारी,
पवित्रता सदा आगळी
सहिष्णुतेचा मार्ग दाखवी,
एकात्मकता सगळी ||१||
*
शुभसंदेशा पेरत जाई,
सकलां साद जवळी
वेधकतेने मानवतेला, नित्य
दाखवी करांगुळी ||२||
*
रंगसंगती मनाजोगती,
दिसते सर्वची वेळी
प्रतिका दाखवी, शुभचिन्हे
ती प्रेरकता वेळोवेळी| ||३||
*
भाव मनीचे, तेच उमटवी,
आकर्षकता पाळी,
सुंदर कवने सदा खुलविती,
तेजोमयता भाळी ||४||
*
अर्थ जागवी, मना तोषवी,
सकाळी कधी सायंकाळी
कविता ही तर सदा शोभते,
सजते नाना पळी ||५||
*
मुक्तहस्ते कलात्मकता
शुचिर्भूतता ती वेगळी,
निमंत्रिते ती, मना जनांच्या,
हृदया स्पर्शी मोकळी ||६||
*
मानवतेचा मंत्र खरा जो,
संदेशात्मक या ओळी
भावोत्कटता जपते सारी,
कविता रूपी ओळी ||७||
☆
ता. क. :- पाचव्या कडव्यात – सजते नाना पळी, या ओळीत “पळी” म्हणजे ‘ घटका-पळे’ – यातील पळाला हा वेळवाचक शब्द आहे. संध्येची पळी नाही.
तितिक्षा इंटरनॅशनल, पुणे यांनी आयोजित केलेल्या नवरात्री काव्यलेखन स्पर्धेत,आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका सौ. ज्योत्स्ना तावडे यांना त्यांच्या ‘ महिषासुरमर्दिनी जोगवा ‘ या काव्यरचनेसाठी उत्तेजनार्थ पुरस्कार प्राप्त झाला आहे.
ई अभिव्यक्ती मराठी परिवारातर्फे सौ. तानवडे यांचे मन: पूर्वक अभिनंदन आणि शुभेच्छा 💐💐
पुरस्कार प्राप्त कविता ‘अंबे जोगवा मागते‘ आज प्रकाशित होत आहे. 🪻
संपादक मंडळ
ई अभिव्यक्ती मराठी
☆ ☆ ☆ ☆ ☆
कवितेचा उत्सव
☆ “अंबे जोगवा मागते” ☆ सौ.ज्योत्स्ना तानवडे ☆
(तितिक्षा इंटरनॅशनल पुणे आयोजित नवरात्र विशेष काव्यलेखन महोत्सव – उत्तेजनार्थ पारितोषिक प्राप्त)
तितिक्षा इंटरनॅशनल, पुणे या संस्थेने नवरात्री निमित्त ‘रोज एका देवीवर काव्य‘ अशी काव्य स्पर्धा आयोजित केली होती. या स्पर्धेत आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका श्रीमती उज्ज्वला सहस्रबुद्धे यांना तीन पुरस्कार प्राप्त झाले आहेत. याशिवाय संपूर्ण नवरात्रीत काव्य लेखन केल्याबद्दल विशेष सरस्वती मोमेंटो ही प्रदान करण्यात आला आहे. त्यांच्या या वैशिष्ट्यपूर्ण यशाबद्दल ई-अभिव्यक्ती परिवारातर्फे त्यांचे मन:पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील लेखनासाठी शुभेच्छा! 💐
☘️. ☘️. ☘️. ☘️. ☘️
– आजच्या अंकात वाचूया त्यांचे एक पुरस्कारप्राप्त कविता – “घटस्थापना…”
☆ कोटा में ‘कृति लोकार्पण एवं राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मान समारोह 2025’ संपन्न– अभिनंदन ☆ साभार -श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆
कोटा, 7 दिसंबर, 2025। बाल साहित्य के गंभीर और महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श हेतु कोटा के ब्लू सफायर होटल में ‘कृति लोकार्पण एवं राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मान समारोह 2025’ का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी आयोजन के दो चरण थे, जिसमें साहित्य की चुनौतियों और विकास पर गहन चर्चा हुई, तथा राजस्थान के 30 से अधिक बाल साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
प्रथम चरण: सम्मान समारोह
समारोह की अध्यक्षता डॉ. दिविक रमेश (नोएडा) ने की और मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. विकास दवे (भोपाल) उपस्थित रहे। इस चरण में विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रभात सिंघल और श्रीमती रेखा पंचोली थीं। स्वागत वक्तव्य श्रीमती श्वेता शर्मा ने दिया, और व्यक्तिगत परिचय डॉ. वैदेही गौतम द्वारा कराया गया।
समारोह के संरक्षक श्री जितेंद्र निर्मोही (कोटा) थे। इस चरण में पूरे राजस्थान से आए 30 से अधिक बाल साहित्यकारों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया, जिससे बाल साहित्य के प्रति गंभीर विमर्श को बल मिला।
द्वितीय चरण: कृति लोकार्पण एवं विशिष्ट सम्मान
यह चरण विशेष रूप से साहित्यकार डॉ. युगल सिंह की महत्वपूर्ण कृति “हाड़ौती अंचल का बाल साहित्य: उद्भव एवं विकास” के लोकार्पण पर केंद्रित था। इस चरण में गंभीर साहित्यिक विमर्श हुआ, जिसमें बाल साहित्य के भविष्य पर चिंता और समाधान दोनों पर चर्चा की गई।
अध्यक्ष: डॉ. दिविक रमेश (नोएडा), ख्यातनाम बाल साहित्यकार।
मुख्य अतिथि: डॉ. विकास दवे (भोपाल), निदेशक साहित्य एवं संस्कृति अकादमी।
संरक्षक: श्री जितेंद्र निर्मोही (कोटा), ख्यातनाम साहित्यकार।
मुख्य वक्ता: श्री जय सिंह आशावत (नैनवां, बूँदी), ख्यातनाम साहित्यकार।
विशिष्ट अतिथि: श्री बलदाऊ राम साहू (दुर्ग), सदस्य, छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग एवं राजभाषा सलाहकार मंत्रालय, भारत सरकार।
इस द्वितीय चरण में, श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ (रतनगढ़, नीमच, म.प्र.) को हाड़ौती अंचल के बाल साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘अति विशिष्ट सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
कृति परिचय मेजर रिद्धिमा द्वारा प्रस्तुत किया गया, और संपूर्ण लोकार्पण समारोह का संचालन वरिष्ठ उद्घोषक एवं नामवर साहित्यकार श्री रामानारायण मीणा “हलधर” ने किया।
यह समारोह बाल साहित्य की गुणवत्ता और विस्तार पर विचार करने तथा युवा साहित्यकारों को प्रेरित करने के उद्देश्य से एक गंभीर प्रयास रहा।
ई- अभिव्यक्ति परिवार की ओर से श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ जी को इस विशिष्ट उप्लब्धि के लिए हार्दिक बधाई
≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈