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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सामाजिक चेतना #71 ☆ पर्यावरण प्रहरी ☆ सुश्री निशा नंदिनी भारतीय

सुश्री निशा नंदिनी भारतीय  (सुदूर उत्तर -पूर्व  भारत की प्रख्यात  लेखिका/कवियित्री सुश्री निशा नंदिनी जी  के साप्ताहिक स्तम्भ – सामाजिक चेतना की अगली कड़ी में  प्रस्तुत है  एक भावप्रवण कविता पर्यावरण प्रहरी ।आप प्रत्येक सोमवार सुश्री  निशा नंदिनी  जी के साहित्य से रूबरू हो सकते हैं।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सामाजिक चेतना  #71 ☆ ☆ पर्यावरण प्रहरी ☆   करें काम कुछ ऐसा धरती स्वर्ग दिखाई दे इतनी खुशियां फैला दें हर दिन पर्व दिखाई दे।   जो काटे हरे वृक्षों को उनको आड़े हाथ धरें ज्ञान मान देकर उनको जीवन पथ साफ करें।   अपने पर हो गर्व हमको करें प्रकृति की रक्षा प्रकृति हमारा धन असली पोटली बांध करें सुरक्षा।   सब हों मानवता रक्षक शिक्षा का करें प्रसार करे जो दूषित गंगा को उन पर करें वाणी प्रहार।   सब हों पर्यावरण प्रहरी करें प्रदूषण पर प्रहार जो करे दूषित भू मंडल उन पर पड़े कर की मार।   © निशा नंदिनी भारतीय  तिनसुकिया, असम 9435533394 ≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈ ...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ परिहार जी का साहित्यिक संसार # 70 ☆ व्यंग्य – साहित्यिक किसिम के दोस्त ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार

डॉ कुंदन सिंह परिहार (वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय  डॉ  कुन्दन सिंह परिहार जी  का साहित्य विशेषकर व्यंग्य  एवं  लघुकथाएं  ई-अभिव्यक्ति  के माध्यम से काफी  पढ़ी  एवं  सराही जाती रही हैं।   हम  प्रति रविवार  उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते  रहते हैं।  डॉ कुंदन सिंह परिहार जी  की रचनाओं के पात्र  हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे  आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं।  उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल  की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं। आज  प्रस्तुत है एक  अतिसुन्दर व्यंग्य रचना  ‘साहित्यिक किसिम के दोस्त’।  इस सार्थक व्यंग्य  के लिए डॉ परिहार जी की  लेखनी को  सादर नमन।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार  # 70 ☆ ☆ व्यंग्य – साहित्यिक किसिम के दोस्त ☆ सबेरे सात बजे फोन घर्राता है। आधी नींद में उठाता हूँ। 'हेलो।’ 'हेलो नमस्कार। पहचाना?' 'नहीं पहचाना।’ 'हाँ भई, आप भला क्यों पहचानोगे! एक...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ गांधीजी के जन्मोत्सव पर विशेष – गांधी-150 (गांधी वादी मित्रों का आत्म चिंतन) ☆ श्री राकेश कुमार पालीवाल

श्री राकेश कुमार पालीवाल (सुप्रसिद्ध गांधीवादी चिंतक श्री राकेश कुमार पालीवाल जी  वर्तमान में  प्रधान मुख्या आयकर आयुक्त ( प्रिंसिपल  चीफ कमिश्नर) मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पद पर पदासीन हैं। गांधीवादी चिंतन के अतिरिक्त कई सुदूरवर्ती आदिवासी ग्रामों को आदर्श गांधीग्राम बनाने में आपका महत्वपूर्ण योगदान है। आपने कई पुस्तकें लिखी हैं जिनमें  ‘कस्तूरबा और गाँधी की चार्जशीट’ तथा ‘गांधी : जीवन और विचार’ प्रमुख हैं। हम आदरणीय श्री राकेश कुमार पालीवाल जी की  फेसबुक वाल से  गांधीजी के जन्मोत्सव पर एक सार्थक  एवं विचारणीय कविता प्रस्तुत कर रहे हैं – गांधी - 150 (गांधी वादी मित्रों का आत्म चिंतन)) ☆ गांधीजी के जन्मोत्सव पर विशेष ☆  ☆ गांधी - 150 (गांधी वादी मित्रों का आत्म चिंतन)  ☆   बीत गया गांधी - एक सौ पचास भी अब दो अक्तूबर दो हजार बीस में दी जा रही है उसे अंतिम श्रद्धांजलि   इसकी शुरुआत में गांधी वादी संस्थाओं ने की थी बड़ी बड़ी घोषणाएं मसलन एक सौ पचास गांवों को बनाएंगे आदर्श गांधी गांव गांधी के सपनों के और, और भी न जाने बनाई थी कितनी भारी भरकम महत्वाकांक्षी...
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मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ शेखर साहित्य # 8 – कवितेशी बोलू काही ☆ श्री शेखर किसनराव पालखे

श्री शेखर किसनराव पालखे ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – शेखर साहित्य # 8 ☆ ☆ कवितेशी बोलू काही ☆ अनामिक हे सुंदर नाते तुझ्यासवे ग जुळून यावे तुझ्याच साठी माझे असणे तुलाच हे ग कळून यावे आनंदाने हे माझे मन सोबत तुझ्या ग खुलून यावे दुःखाचे की काटेरी हे क्षण कुशीत तुझ्या ग फुलून यावे भेटावी मज तुझी अशी ही घट्ट मिठी ती हवीहवीशी अथांगशा या तुज डोहाची अचूक खोली नकोनकोशी रुजावेस तू मनात माझ्या प्रेमळ नाजूक सुजाणतेने तूच माझे जीवन व्हावे अन तुच असावे जीवनगाणे   © शेखर किसनराव पालखे  पुणे 05/06/20 ≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈...
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English Literature – Book-Review – Lines of Fate – Ms. Neelam Saxena Chandra

Lines of Fate Amazon Link - >>>> Lines of Fate e-abhivyakti.com congratulates Ms. Neelam Saxena Chandra ji for this most successful book released on 20th June 2020.  Excerpts from the Amazon as on 18th July 2020 itself describes the success story of less than one month. Amazon Bestsellers Rank: #644 #57 in Short Stories (Books) #19 in Short Stories (Kindle Store) #89 in Romance (Kindle Store) Ms Neelam Saxena Chandra (Ms. Neelam Saxena Chandra ji is a well-known author. She has been honoured with many international/national/ regional level awards. We are extremely thankful to Ms. Neelam ji for permitting us to share her excellent poems with our readers. We will be sharing her poems on every Thursday. Ms. Neelam Saxena Chandra ji is  an Additional Divisional Railway Manager, Indian Railways, Pune Division. ) ☆ Book Review - Lines of Fate: First Love and Other Stories by Ms. Neelam Saxena Chandra☆ Lines of Fate: First Love and Other Stories by AKS Publishing House written by Ms. Neelam Saxena Chandra Often a simple encounter on the path of life can change one's...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ तन्मय साहित्य # 52 – तुमको भी कुछ सूत्र सिखा दें….☆ डॉ. सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’

डॉ  सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’ (अग्रज  एवं वरिष्ठ साहित्यकार  डॉ. सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’ जी  जीवन से जुड़ी घटनाओं और स्मृतियों को इतनी सहजता से  लिख देते हैं कि ऐसा लगता ही नहीं है कि हम उनका साहित्य पढ़ रहे हैं। अपितु यह लगता है कि सब कुछ चलचित्र की भांति देख सुन रहे हैं।  आप प्रत्येक बुधवार को डॉ सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’जी की रचनाएँ पढ़ सकेंगे। आज के साप्ताहिक स्तम्भ  “तन्मय साहित्य ”  में  प्रस्तुत है इस सदी की त्रासदी को बयां करती  भावप्रवण रचना तुमको भी कुछ सूत्र सिखा दें....। ) ☆  साप्ताहिक स्तम्भ – तन्मय साहित्य  # 52 ☆ ☆ तुमको भी कुछ सूत्र सिखा दें.... ☆     अपना यशोगान करना पहचान हमारी आओ तुमको भी अचूक कुछ सूत्र सिखा दें।   थोड़े से गंभीर मुस्कुराहट महीन सी संबोधन में भ्रातृभाव ज्यों नीति चीन की, हो शतरंजी चाल स्वयं राजा, खुद प्यादे आओ तुमको भी अचूक कुछ सूत्र सिखा दें।।   हो निशंक, अद्वैत भाव मैं - मैं, उच्चारें दिनकर बनें स्वयं सब, शेष पराश्रित तारे, फूकें मंत्र, गुरुत्व भेद, शिष्यत्व लिखा दें आओ तुमको भी अचूक कुछ सूत्र सिखा दें।।   बुद्ध, प्रबुद्ध, शुद्धता के हम हैं पैमाने नतमस्तक सम्मान कई, बैठे पैतानें, सिरहाना,सदियों का सब भवितव्य...
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हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि ☆ चुप्पियाँ -12 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। )  ☆ संजय दृष्टि  ☆ चुप्पियाँ - 12 ☆ मेरे शब्द चुराने आए थे वे, चुप्पी की मेरी अकूत संपदा देखकर मुँह खुला का खुला रह गया....., समर्पण में बदल गया आक्रमण, मेरी चुप्पी में कुछ और पात्रों का समावेश हो गया! # दो गज़ की दूरी, है बहुत ज़रूरी। ©  संजय भारद्वाज, पुणे (प्रातः 8:07 बजे, 2.9.18) (कविता-संग्रह *चुप्पियाँ* से) ☆ अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव,...
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मराठी साहित्य – कविता ☆ साप्ताहिक स्तम्भ # 1 – स्वप्नपाकळ्या ☆ ☆ श्री प्रभाकर महादेवराव धोपटे

श्री प्रभाकर महादेवराव धोपटे ( ई-अभिव्यक्ति में श्री प्रभाकर महादेवराव धोपटे जी  के साप्ताहिक स्तम्भ – स्वप्नपाकळ्या को प्रस्तुत करते हुए हमें अपार हर्ष है। आप मराठी साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। वेस्टर्न  कोलफ़ील्ड्स लिमिटेड, चंद्रपुर क्षेत्र से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। अब तक आपकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें दो काव्य संग्रह एवं एक आलेख संग्रह (अनुभव कथन) प्रकाशित हो चुके हैं। एक विनोदपूर्ण एकांकी प्रकाशनाधीन हैं । कई पुरस्कारों /सम्मानों से पुरस्कृत / सम्मानित हो चुके हैं। आपके समय-समय पर आकाशवाणी से काव्य पाठ तथा वार्ताएं प्रसारित होती रहती हैं। प्रदेश में विभिन्न कवि सम्मेलनों में आपको निमंत्रित कवि के रूप में सम्मान प्राप्त है।  इसके अतिरिक्त आप विदर्भ क्षेत्र की प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। अभी हाल ही में आपका एक काव्य संग्रह – स्वप्नपाकळ्या, संवेदना प्रकाशन, पुणे से प्रकाशित हुआ है, जिसे अपेक्षा से अधिक प्रतिसाद मिल रहा है। इस साप्ताहिक स्तम्भ का शीर्षक इस काव्य संग्रह  “स्वप्नपाकळ्या” से प्रेरित है । आज प्रस्तुत है...
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मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कवितेच्या प्रदेशात # 39 – त्या हळूवार, अलवार  क्षणांची  साक्षीदार ……… ☆ सुश्री प्रभा सोनवणे

सुश्री प्रभा सोनवणे (आज प्रस्तुत है सुश्री प्रभा सोनवणे जी के साप्ताहिक स्तम्भ  “कवितेच्या प्रदेशात” में  उनके चौदह वर्ष की आयु से प्रारम्भ साहित्यिक यात्रा के दौरान उनके साहित्य  के   'वाङमय चौर्य'  के  कटु अनुभव पर आधारित एक विचारणीय आलेख “त्या हळूवार, अलवार  क्षणांची  साक्षीदार ………”.  सुश्री प्रभा जी  का यह आलेख इसलिए भी विचारणीय है, क्योंकि  हमारी समवयस्क पीढ़ी को साहित्यिक चोरी का पता काफी देर से चलता था जबकि सोशल मीडिया के इस जमाने में चोरी बड़ी आसानी से और जल्दी ही पकड़ ली जाती है। किन्तु, शब्दों और विचारों के हेर फेर के बाद  'वाङमय चौर्य'  के  अनुभव को आप क्या कहेंगे। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को अपने तरीके से जीता है।  जैसे वह जीता है , वैसा ही उसका अनुभव होता है।  इस अतिसुन्दर  एवं विचारणीय आलेख के लिए  वे बधाई की पात्र हैं। उनकी लेखनी को सादर नमन ।   मुझे पूर्ण विश्वास है  कि आप निश्चित ही प्रत्येक बुधवार सुश्री प्रभा जी की रचना की प्रतीक्षा करते होंगे....
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हिन्दी साहित्य ☆ पुस्तक विमर्श (English Review) # – स्त्रियां घर लौटती हैं – “There exists books like this that make you halt and observe” – Shri Archit Ojha ☆ श्री विवेक चतुर्वेदी

पुस्तक विमर्श – स्त्रियां घर लौटती हैं  श्री विवेक चतुर्वेदी  ( हाल ही में संस्कारधानी जबलपुर के युवा कवि श्री विवेक चतुर्वेदी जी का कालजयी काव्य संग्रह  “स्त्रियां घर लौटती हैं ” का लोकार्पण विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।  यह काव्य संग्रह लोकार्पित होते ही चर्चित हो गया और वरिष्ठ साहित्यकारों के आशीर्वचन से लेकर पाठकों के स्नेह का सिलसिला प्रारम्भ हो गया। काव्य जगत श्री विवेक जी में अनंत संभावनाओं को पल्लवित होते देख रहा है। ई-अभिव्यक्ति  की ओर से यह श्री विवेक जी को प्राप्त स्नेह /प्रतिसाद को श्रृंखलाबद्ध कर अपने पाठकों से साझा करने का प्रयास है।  इस श्रृंखला की चौथी कड़ी के रूप में प्रस्तुत हैं श्री अर्चित ओझा जी  के अंग्रेजी भाषा में विचार “There exists books like this that make you halt and observe” ।) अमेज़न लिंक >>>   स्त्रियां घर लौटती हैं   ☆ पुस्तक विमर्श #9 – स्त्रियां घर लौटती हैं – “There exists books like this that make you halt and observe” – Shri Archit Ojha  ☆ When I was in school, I remember waiting for Wednesdays because I would...
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