मराठी साहित्य – सूचनाएँ ☆ संपादकीय निवेदन – डॉ. सोनिया कस्तुरे – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ डॉ. सोनिया कस्तुरे ☆

🎇अ भि नं द न 🎇

आपल्या समूहातील प्रसिद्ध लेखिका / कवयित्री डॉ. सोनिया कस्तुरे यांच्या “पिंपळायन” आणि “हसरे किनारे” या दोन कविता संग्रहांचे प्रकाशन नुकतेच लोकायत प्रकाशन सातारा, यांच्या वतीने, आणि ज्येष्ठ विचारवंत डॉ. आ. ह. साळुंखे सर यांच्या हस्ते करण्यात आले आहे.

… आपल्या सर्वांच्या वतीने डॉ. सोनिया यांचे हार्दिक अभिनंदन.

डॉ. सोनिया यांचे अभिनंदनास्पद आणखी एक यश म्हणजे या त्यांच्या दोन कवितासंग्रहांपैकी “हसरे किनारे” या संग्रहाला ‘मराठी भाषा विभाग, महाराष्ट्र शासन, महाराष्ट्र राज्य साहित्य आणि संस्कृती मंडळ अनुदानित’…

“राज्यस्तरीय माणगंगा साहित्यप्रेमी गौरव पुरस्कार” हा मानाचा पुरस्कार देण्यात आला आहे.

आपल्या सर्वांतर्फे या पुरस्काराबद्दल डॉ. सोनिया कस्तुरे यांचे अतिशय मनःपूर्वक अभिनंदन आणि पुढील अशाच दमदार आणि यशस्वी साहित्यिक वाटचालीसाठी असंख्य हार्दिक शुभेच्छा.

आजच्या अंकात वाचूया या पुरस्कारप्राप्त संग्रहातील वेगळ्या विषयावरची एक कविता.

– संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना ☆ सम्पादक मंडल ई-अभिव्यक्ति ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

📖 प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सूचना !! 📖

कुछ अपरिहार्य कारणों से, ई-अभिव्यक्ति का इस माह का पहला पाक्षिक अवकाश 14/12/25 के स्थान पर 12/12/25 को होगा। अतः शुक्रवार 12/12/25 का अंक प्रकाशित नहीं किया जाएगा। यह अंक शनिवार 13/12/25 से पुनः नियमित रूप से प्रकाशित किया जाएगा।

आप सभी का इसी प्रकार स्नेह, प्रतिसाद और सहयोग अपेक्षित है।

– संपादक मंडल 

ई-अभिव्यक्ति 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचना/Information ☆ संपादकीय निवेदन ☆ दि. १२/१२/२५ रोजी अंक बंद असल्याबद्दल महत्वाची सूचना!! 📖 ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

💐 संपादकीय निवेदन 💐

📖 दि. १२/१२/२५ रोजी अंक बंद असल्याबद्दल महत्वाची सूचना!! 📖

कृपया सर्वांनी नोंद घ्यावी – – 

या महिन्यातली पहिली पाक्षिक सुट्टी दि. १४/१२/२५ च्या ऐवजी दि. १२/१२/२५ रोजी घेण्यात येणार आहे. त्यामुळे शुक्रवार दि. १२/१२/२५ रोजी अंक प्रकाशित केला जाणार नाही. शनिवार दि. १३/१२/२५ पासून अंक पुन्हा नियमित प्रकाशित होईल.

सर्वांचे सहकार्य अपेक्षित आहे.

– संपादक मंडळ

ई – अभिव्यक्ती, मराठी विभाग

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ पूर्णिका उत्सव – ३ संपन्न –  विशिष्ट पूर्णिकाकारों को पूर्णिकाचार्य सम्मान – अर्धशतादिक पूर्णिका संग्रह लोकार्पित ☆ साभार – डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम’ ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

पूर्णिका उत्सव – ३ संपन्न –  विशिष्ट पूर्णिकाकारों को पूर्णिकाचार्य सम्मान – अर्धशतादिक पूर्णिका संग्रह लोकार्पित साभार – डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम’ ☆

प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी दिनांक ५ दिसंबर २०२५ दिन शुक्रवार को अपराह्न ३ बजे से रानी दुर्गावती कला वीथिका भंवरताल गार्डन, होटल श्री कृष्ण के सामने अपने भव्यतम स्वरूप में पूर्णिका उत्सव ➖ तृतीय का आयोजित किया गया , जिसमें देश-विदेश प्रदेश सहित संस्कार धानी जबलपुर  के पूर्णिका कारों के पूर्णिका संग्रह का लोकार्पण-विमोचन- पूर्णिका गोष्ठी आयोजित की गई।

पूर्णिका उत्सव की यशस्वी अध्यक्षता डॉ ललित कुमार सिंह ‘ललित’, पूर्व शिक्षा निदेशक अलीगढ़ उप्र, और मुख्य अतिथि डॉ बैजनाथ गौतम, पूर्व वरिष्ठ अधिकारी आकाशवाणी जबलपुर, विशिष्ट अतिथि महामहोपाध्याय डॉ हरिशंकर दुबे, प्रसिद्ध कीट वैज्ञानिक लोकभाषा बुंदेली के चंदन चर्चित वरिष्ठ पूर्णिका कार डा कृष्ण कुमार नेमा ‘निर्झर’, सीहोर मप्र, सहित डॉ विभा प्रकाश लखनऊ उप्र रहे।

सारस्वत अतिथि गायत्री ठाकुर ‘सक्षम’ नरसिंहपुर मप्र, डॉ दीनदयाल यादव ‘नीलेश’ बिलासपुर छत्तीसगढ़, डॉ अनिल कुमार बाजपेई रि HOD केमिस्ट्री जबलपुर मप्र हैं वहीं विशेष आमंत्रित अतिथि करुणा सिंह ‘कल्पना’ रांची झारखंड, रामगोपाल निर्मलकर ‘नवीन’ धनौरा सिवनी मप्र मंच को शोभित किया।

पूर्णिका प्रकाश यशोवर्धन पाठक जबलपुर, डॉ निर्मला डोंगरे ‘पूर्णिका’ वृंदावन, विजय बागरी कछारगांव कटनी मप्र। 

पूर्णिका उत्सव के आभार हेतु शिव अलग नैनपुर जबलपुर और कार्यक्रम विराम की घोषणा हेतु डॉ प्रकाश तिवारी जबलपुर मप्र ने की।

पूर्णिका उत्सव का संचालन ख्यात मंच मणि राजेश पाठक ‘प्रवीण’ जी, संतोष नेमा जी, आशुतोष तिवारी ‘आशु’, कविता राय ‘कृति’ जी ।।

समन्वयक प्रतुल श्रीवास्तव, मदन श्रीवास्तव, राजेन्द्र मिश्र, एम पी कोरी, विजय जायसवाल और इरफान झांसवी जी।

पूर्णिका संग्रहों का विमोचन लोकार्पण किया गया। 

डॉ  प्रो खेदू भारती ‘सत्येश’ धमतरी छत्तीसगढ़ जी के 5 छत्तीसगढ़ पूर्णिका संग्रह और हिंदी के 20 पूर्णिका संग्रह सहित आपके टोटल 25 पूर्णिका संग्रह, श्याम सुधा रस – सारिका शर्मा ‘वृंदा’ जी ओमान,अर्तिका की पूर्णिका, भावनाओं का दर्पण — उमा शर्मा ‘अर्तिका’ नोएडा, सिंधु तट गामिनी, हंसते गाते धूम मचाते(बाल पूर्णिका संग्रह), भावनाओं का मधुबन, भावनाओं का रंग (पूर्णिका संकलन)– रजनी कटारे ‘हेम’, दिव्य कौमुदी — नमिता गुप्ता ‘श्री’ लखनऊ उप्र, प्रेम की पूर्णिका — करुणा सिंह ‘कल्पना’ रांची झारखंड, जंगल में जगराता (बाल पूर्णिका संग्रह)– डॉ दीनदयाल यादव ‘नीलेश’ बिलासपुर छत्तीसगढ़, मंगल आशा — रामगोपाल निर्मलकर ‘नवीन’ धनौरा सिवनी मप्र, स्वर्णिम रश्मियां — रश्मि पाण्डेय ‘शुभि’, मधुबन में — पूर्णिका — ‘कदम’ जबलपुरी, माधुरी शतक (पूर्णिकांश संग्रह)— कीरत सिंह यादव ‘कीरत’ लहार भिण्ड मप्र, अविरामिका — विभा प्रकाश लखनऊ उप्र, दिव्या दीप— विनोद कश्यप शर्मा चण्डीगढ़, आशाओं के दीप — तारा गुप्ता लखनवी लखनऊ उप्र ,नेह विन्यास — साधना मिश्र लखनवी लखनऊ उप्र, आंगन में चांद — प्रदीप श्रीवास्तव ‘दीप’ ग्वालियर मप्र, बचपन की वाटिका (बाल पूर्णिका संग्रह)– अनुराधा गर्ग ‘दीप्ति’जबलपुर, प्रेम की बंशी — डॉ ललित कुमार सिंह ‘ललित’ अलीगढ़ उप्र,सब में है शिवत्व — शिव अलग नैनपुर जबलपुर,सफल हुआ अभियान,का भओ बिन्ना (बुंदेली पूर्णिका संग्रह) अंतर राष्ट्रीय विश्व दिवस विशेष पूर्णिका संग्रह सभी— पूर्णिका जनक साहित्याचार्य एडवोकेट डॉ सलपनाथ यादव ‘प्रेम’जी, पूर्णिका मकरंद — गायत्री ठाकुर ‘सक्षम’ नरसिंहपुर मप्र, झूठ के हांडी (भोजपुरी पूर्णिका संग्रह) — डॉ श्याम कुंअर भारती बोकारो झारखंड शामिल रही।

पूर्णिका-चार्य  का सम्मान

  • अनुराधा गर्ग ‘दीप्ति’जबलपुर मप्र
  • पं अंशुल विश्वंभर मिश्र ‘कदम’ जबलपुरी मप्र
  • प्रसिद्ध कीट वैज्ञानिक लोकभाषा बुंदेली के चंदन चर्चित वरिष्ठ पूर्णिकाकार डॉ कृष्ण कुमार नेमा ‘निर्झर’ सीहोर मप्र,
  • रजनी कटारे ‘हेम’ जबलपुर
  • डॉ दीनदयाल यादव ‘नीलेश’ बिलासपुर छत्तीसगढ़
  • करुणा सिंह ‘कल्पना’रांची झारखंड
  • कीरत सिंह यादव ‘कीरत’ लहार भिण्ड मप्र
  • डॉ प्रो खेदू भारती ‘सत्येश’ धमतरी छत्तीसगढ़
  • सारिका शर्मा ‘वृंदा’ ओमान
  • उमा शर्मा ‘अर्तिका’ नोएडा
  • विभा प्रकाश लखनऊ उप्र
  • डॉ ललित कुमार सिंह ‘ललित’अलीगढ़ उप्र
  • रश्मि पाण्डेय ‘शुभि’ जबलपुर
  • रामगोपाल निर्मलकर ‘नवीन’ सिवनी मप्र
  • डॉ निर्मला डोंगरे ‘पूर्णिका’ वृंदावन
  • शिव अलग नैनपुर जबलपुर
  • गायत्री ठाकुर ‘सक्षम’ नरसिंहपुर मप्र
  • विनोद कश्यप शर्मा चण्डीगढ़ जी

 उपरोक्त सभी पूर्णिकाकारों को पूर्णिका में किए गए सतत् सार्थक और उत्कृष्ट प्रयासों के हेतु पूर्णिकाचार्य अलंकरण से सम्मानित किया गया।

पूर्णिका जनक साहित्याचार्य एडवोकेट डॉ सलपनाथ यादव ‘प्रेम’ जी ने सभी पूर्णिका के चाहने वालों सराहने वालों की उपस्थिति का आभार अनुरोध सादर निवेदन किया।

पूर्णिका उत्सव तृतीय की खासियत यह रही कि हिन्दी प्रचारिणी सभा (पंजीकृत), अलीगढ़ उप्र ने साहित्य की नव्यतम विधा पूर्णिका के जनक साहित्याचार्य एडवोकेट डॉ सलपनाथ यादव ‘प्रेम’ जी को ₹ २१,०००/- इक्कीस हजार रूपए की राशि मान पत्र शाल श्रीफल देकर सम्मानित किया जो सभी पूर्णिका कारों के लिए अति अति गर्व गौरवान्वित होने का साक्षी बना इस हेतु अंतर राष्ट्रीय पूर्णिका मंच,आभा साहित्य संघ जबलपुर मप्र सादर आभार कृतज्ञता ज्ञापित करती है..जय पूर्णिका! जय हिन्द! हिन्दी की पूर्णिका, जय जय पूर्णिका!

साभार – संस्थापक/ संयोजक पूर्णिका जनक साहित्याचार्य एडवोकेट डॉ सलपनाथ यादव ‘प्रेम’

प्रदेश अध्यक्ष ➖ रजनी कटारे ‘हेम’, प्रदेश उपाध्यक्ष ➖ डॉ चंदा देवी स्वर्णकार, प्रदेश सहसचिव ➖ आशा झा सखि, संभागीय अध्यक्ष ➖ डॉ निर्मला डोंगरे ‘पूर्णिका’, नगर अध्यक्ष ➖ कविता राय ‘कृति’, नगर महासचिव ➖ ‘कदम’ जबलपुरी, नगर उपाध्यक्ष ➖ रश्मि पाण्डेय ‘शुभि’, कविता नेमा ‘काव्या’ सिवनी मप्र, संरक्षक ➖ एडवोकेट जी आर देशमुख सहित नगर प्रदेश देश की सभी साहित्यिक ईकाई व्हाट्सएप समूह

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ आभा साहित्य संघ के सौजन्य से अंतर्राष्ट्रीय पूर्णिका मंच का आयोजन “पूर्णिका उत्सव-३ (५ दिसंबर २०२५) ☆ साभार – डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम’ ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ आभा साहित्य संघ के सौजन्य से अंतर्राष्ट्रीय पूर्णिका मंच का आयोजन “पूर्णिका उत्सव-३ (५ दिसंबर २०२५) साभार – डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम’ ☆

आभा साहित्य संघ जबलपुर के सौजन्य से रानी दुर्गावती संग्रहालय जबलपुर में अंतर्राष्ट्रीय पूर्णिका मंच द्वारा दिनांक 5 दिसंबर २०२५ को दोपहर 3 बजे से रात्रि 9.00 बजे तक “पूर्णिका उत्सव-3” आयोजित किया जा रहा है.

डॉ ललित कुमार सिंह ‘ललित’ जी पूर्व संयुक्त शिक्षा निर्देशक, अलीगढ की अध्यक्षता में प्रस्तावित कार्यक्रम में 5 छत्तीसगढ़ी पूर्णिका संग्रह सहित 25 पूर्णिका संग्रह का विमोचन होगा. विशिष्ट पूर्णिका कार साथियों को अनुराग भारती यादव की स्मृति में पूर्णिकाचार्य सम्मान से सम्मानित किया जायेगा.

संस्कारधानी जबलपुर के साहित्यकारों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में यह कार्यक्रम संपन्न होगा.

ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से कार्यक्रम की सफलता के लिए अग्रिम शुभकामनाएं 💐

 

 

साभार – डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ ☆ संविधान जागरूकता से बने अच्छे नागरिक – हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय का आयोजन ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆ ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ संविधान जागरूकता से बने अच्छे नागरिक – हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय का आयोजन ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे

 हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय की ओर से “संविधान से बने अच्छे नागरिक” कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ l हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय, शिवाजीनगर, पुणे; मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार और सना साइबर फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एंड डाटा सिक्युरिटी सर्विसेस के संयुक्त तत्वावधान में प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी के सभागार में संविधान दिवस के भव्य समारोह का आयोजन किया गया था l

 वन्दे मातरम से समारोह का आरंभ हुआ l हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेरणा उबाळे ने अपनी प्रस्तावना में कहा, संविधान दिवस के माध्यम से संविधान के संदर्भ में जागरूकता निर्माण करने वाला कार्यक्रम करना मेरे लिए देशसेवा समान है l संविधान निर्माण के पीछे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का समर्पण भाव, उनकी समिति के परिश्रम और भारत के नागरिकों के जीवन को सुव्यवस्थित बनाने की डॉ. आंबेडकर की भूमिका का महत्व सबके सामने रखा l

 सभागार में मॉडर्न कला, विज्ञान और वाणिज्य महाविद्यालय, मॉडर्न कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मॉडर्न बी. बी. ए., बी. सी. ए. कॉलेज, मॉडर्न हाईस्कूल, राष्ट्रीय सेवा योजना और स्काउट और गाइड के छात्र, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निमंत्रित अतिथियों को संबोधित करते हुए प्राचार्या डॉ. निवेदिता एकबोटे ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा को सुमन अर्पित किए l डॉ. निवेदिता एकबोटे ने संविधान की जानकारी आज के सभी बच्चों को होना कितना आवश्यक है बताया l संविधान के माध्यम से न्याय सबके लिए समान होने की बात प्रतिपादित की l

 संविधान का महत्व बताने वाले तथा वर्तमान समय में संविधान का पालन करने की आवश्यकता पर बल देने वाले तीन व्याख्यान इस अवसर पर संपन्न हुए l वकील, नोटरी, पोश और पोस्को प्रशिक्षक श्रीमती प्रीतिसिंह परदेसी ने अपने व्याख्यान में संविधान द्वारा दिए गये मानवीय अधिकारों का महत्व समझाया l स्वतंत्रता और अतिरिक्त स्वतंत्रता के बीच के अंतर को समझने की सलाह उपस्थित छात्रों को दी l गूगल पर शोध किये जाने वाले डाटा के संदर्भ में अधिक सतर्क रहने के लिए उन्होंने सबको सुझाया l

 मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के श्रम विभाग की प्रतिनिधि श्रीमती प्रीति साखरे ने उपस्थित छात्रों और प्राध्यापकों के लिए हितकर कानून व्यवस्था की जानकारी दी l हाल ही में गिग मजदूरों के लिए जो क़ानून पारित किया गया, उसका महत्व और जानकारी उन्होंने प्रदान की l इंटरनेट का होनेवाला गलत प्रयोग आज की सबसे बड़ी चिंता उन्होंने प्रतिपादित की l

 इसके अतिरिक्त श्रीमती स्वरदा कबनूरकर ने साइबर सिक्युरिटी पर व्याख्यान देते हुए कहा कि आज के समय में विभिन्न एप के माध्यम से फोटो अपलोड करने की सुंदर दिखने की होड़ मची हुई है परंतु उससे ये फोटो अनुचित कार्यों के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं l भारत के अधिकांश लोगों का डाटा मोबाईल से किस तरह अनेक अनाधिकृत कंपनियों के पास जा रहा है इस संदर्भ में आंकड़े भी बताए l संकट में पड़ने पर महिलाऐं, छात्र कैसे पुलिस व्यवस्था से संपर्क कर सकते हैं इसकी भी जानकारी दी l डॉ. प्रेरणा उबाळे ने सीनियर पोलीस इन्स्पेक्टर श्री. नितीन लांडगे और सना साइबर फोरेंसिक इन्वेस्टिगेशन एंड डाटा सिक्युरिटी सर्विसेस के प्रमुख श्री नचिकेत दांडेकर के सहयोग तथा उपस्थितों के प्रति आभार ज्ञापित किए l

 प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी, पुणे के अध्यक्ष डॉ. गजानन एकबोटे, सहकार्यवाह डॉ. ज्योत्स्ना एकबोटे, सचिव प्रा. शामकांत देशमुख के मार्गदर्शन और प्राचार्या डॉ. निवेदिता एकबोटे के सहयोग से यह समारोह संपन्न हुआ l हिंदी विभाग द्वारा आयोजित इस समारोह का मंचसञ्चालन और व्याख्यानों का आयोजन हिंदी विभागप्रमुख डॉ. प्रेरणा उबाळे ने किया l कला शाखा की उपप्राचार्या प्रा. अलका काम्बले, मॉडर्न इंजीनियारिंग कॉलेज की उपप्राचार्या डॉ. सुहासिनी इटकर और हिंदी विभाग के प्रा. विनोद सूर्यवंशी, प्रा. सुरज बिरादार, प्रा. सबिना शेख, प्रा. शुभम राउत ने समारोह के आयोजन में सहयोग दिया l इस समारोह में चार सौ से अधिक छात्र और प्राध्यापक उपस्थित रहें l उपस्थितों के द्वारा डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को पुष्प अर्पित किए गए l संविधान जागृति हेतु आयोजित समारोह अत्यंत सुचारू ढंग से संपन्न हुआ l

 साभार 

डॉ. प्रेरणा उबाळे

अध्यक्ष, हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय, शिवाजीनगर, पुणे

संपर्क- 7028525378

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ हिंदी – उर्दू साझा कविता-संग्रह हेतु रचनाएँ आमंत्रित ☆ संयोजिका – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ हिंदी – उर्दू साझा कविता-संग्रह हेतु रचनाएँ आमंत्रित ☆ संयोजिका – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

मॉडर्न महाविद्यालय तथा अन्य सभी महाविद्यालयों के विभिन्न विषयों के साहित्यिक मित्रों को यह सूचना देते हुए प्रसन्नता हो रही है कि हिंदी विभाग की ओर से उनके लिए हिंदी – उर्दू साझा कविता संग्रह का प्रकाशन करने की योजना है l                   

प्रस्तुत हिंदी- उर्दू कविता-संग्रह के लिए विषय का बंधन नहीं है l हिंदी विभाग की ओर से प्रकाशित होनेवाली इस पुस्तक को विधिवत ISBN नंबर होगा तथा उसके विमोचन का कार्यक्रम मॉडर्न महाविद्यालय में आयोजित किया जाएगा l पुस्तक की प्रति प्रत्येक कवि को दी जाएगी l   प्रस्तुत पुस्तक की योजना को संपन्न करने हेतु कवि को मात्र 250.00 रुपयों का आर्थिक सहयोग हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय को करना होगा, इसकी विधिवत रसीद भी महाविद्यालय की ओर से प्रदान की जाएगी तथा ऑनलाइन,  प्रणाली से यह राशि आप प्रदान कर सकते हैं l कविता भेजते समय मेल पर फीस की screenshot भी भेजें l

आशा है, सभी इच्छुक हिंदी- उर्दू कविगण (साहित्यकार, प्राध्यापक, छात्र या अन्य) अधिकाधिक संख्या में सहभागी होकर अपना योगदान देंगे तथा अपनी कविता को पुस्तक रूप में प्रकाशित होने का आनंद उठाएँगे l

  •   कविता के विषय के लिए कोई बंधन नहीं है l  परंतु कविता स्तरीय  हो और विवादास्पद विषय न हो l
  •   कविता का भाषा-माध्यम – हिंदी l उर्दू रचनाएँ देवनागरी में टाइप कर भेजें  l
  •   कविता भेजने की अंतिम तिथि – 30 नवंबर 2025
  •   कविता यूनिकोड MS / मंगल फॉण्ट में टाइप कर word file अपने परिचय और औपचारिक फोटो, फीस की screenshot के साथ भेजिए l
  •   कविता भेजने हेतु मेल आई. डी. – hodhindi@moderncollegepune.edu.in
  •   कविता संग्रह हेतु सहयोग राशि – 250/-
  •   ऑनलाइन प्रणाली से राशि भेजेने हेतु विवरण  –
  •    बैंक खाता नाम – प्रिंसिपल, एम. सी. कोर्स, पोस्ट ग्रेज्युएशन कोर्स
  •   बैंक का नाम –  – बैंक ऑफ महाराष्ट्र
  •   बैंक शाखा – मॉडर्न कॉलेज रोड , शिवाजीनगर, पुणे 05
  •   खाता क्र. -20137634580
  •   आई. एफ. एस. सी. कोड – MAHB0001328

संपर्क –

डॉ. प्रेरणा उबाळे – 7028525378 /

धन्यवाद l

 

साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे (संयोजिका)

अध्यक्ष, हिंदी विभाग,मॉडर्न महाविद्यालय(स्वायत्त), पुणे 411005

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ बाल साहित्य संवर्धन संस्थान, कानपुर का सातवाँ वार्षिक सम्मान समारोह संपन्न ☆ रिपोर्ट : श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆

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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

बाल साहित्य संवर्धन संस्थान, कानपुर का सातवाँ वार्षिक सम्मान समारोह संपन्न ☆ रिपोर्ट : श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆

राष्ट्रबंधु की स्मृति में शब्दों का उत्सव 

कानपुर, 16 नवम्बर 2025। राम जानकी मंदिर सभागार, बर्रा-2 उस समय साहित्यिक चेतना से स्पंदित हो उठा जब बाल साहित्य संवर्धन संस्थान, कानपुर ने श्रद्धेय डॉ. श्रीकृष्ण चन्द्र तिवारी ‘राष्ट्रबंधु’ की पावन स्मृति में अपना सातवाँ वार्षिक सम्मान समारोह आयोजित किया। यह आयोजन केवल पुरस्कार वितरण का औपचारिक उत्सव नहीं था, अपितु भाव-संवेदना और शब्द-साधना का एक अनुपम पर्व बन गया, जहाँ शब्दों के माध्यम से मानवता की कोमलता और बालमन की निर्मलता का उत्सर्जन हुआ।

समारोह की अध्यक्षता श्री एस.बी. शर्मा, महामंत्री, भारतीय बाल कल्याण संस्थान, कानपुर ने की। मुख्य अतिथि डॉ. हरिभाऊ खांडेकर, विभागाध्यक्ष (हिन्दी), डी.बी.एस. कॉलेज, कानपुर रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. प्रेम स्वरूप त्रिपाठी (सम्पादक, ‘दि अंडरलाइन’ पत्रिका, कानपुर), संस्था प्रमुख श्री अनिल अवस्थी, श्री भारत तिवारी (डॉ. राष्ट्रबंधु जी के सुपुत्र), डॉ. विनोद त्रिपाठी तथा डॉ. नागेश पांडेय ‘संजय’ आदि प्रमुख थे। विद्वानों से सुशोभित मंच और वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमामयी ऊँचाई प्रदान की।

प्रथम सत्र : श्रद्धा के साथ सृजन का शुभारंभ

प्रथम सत्र का संचालन प्रसिद्ध कवि श्री चक्रधर शुक्ल ने अपनी अनूठी, चुटकीले हास्य और काव्यपूर्ण भाव-भंगिमा से भरपूर शैली में किया। माँ सरस्वती के पूजन और मधुर सरस्वती वंदना के पश्चात् वातावरण में अध्यात्म और साहित्य का सुन्दर सामंजस्य घुल गया। स्वागत भाषण में श्री अजीत सिंह राठौर ने संस्था की सात वर्षों की प्रगति यात्रा का भावपूर्ण विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा, “बाल साहित्य सृजन केवल लेखन नहीं, बल्कि भविष्य के संस्कारों की नींव रखने का पुनीत कार्य है।”

सम्मान समारोह : सृजनशील आत्माओं का सादर सम्मान

डॉ. श्रीकृष्ण चन्द्र तिवारी ‘राष्ट्रबंधु’ की स्मृति में प्रदत्त तेरह सम्मानों से देशभर के प्रतिभाशाली बाल साहित्यकारों को उनके विशिष्ट योगदान हेतु अलंकृत किया गया। प्रत्येक सम्मान के साथ सृजन की गरिमा, सरस्वती की कृपा और रचनाकार की समर्पित भावना स्पष्ट झलक रही थी।

इस सत्र की अध्यक्षता श्री एस.बी. शर्मा तथा मुख्य अतिथि डॉ. हरिभाऊ खांडेकर ने की। विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. नागेश पांडेय ‘संजय’, वरिष्ठ बाल साहित्यकार-समीक्षक डॉ. प्रेम स्वरूप त्रिपाठी आदि ने मंच की शोभा बढ़ाई। सम्मानित साहित्यकार निम्नलिखित हैं :

  1. कीर्तिशेष पंडित सन्त कुमार बाजपेयी (गोला गोकर्णनाथ, खीरी) – पंडित कृष्ण दत्त शुक्ल बाल साहित्य सम्मान (गंभीर, संस्कारित भाषा एवं बाल मनोविज्ञान पर केन्द्रित रचनाओं के लिए, मरणोपरांत)
  2. सुश्री सृष्टि पांडेय (शाहजहाँपुर) – स्मृतिशेष श्रीमती शिव देवी त्रिपाठी बाल साहित्य सम्मान (कल्पनाशील नारी स्वर एवं नवपीढ़ी के संवेदनशील चित्रण हेतु)
  3. श्री प्रेम सिंह राजावत (आगरा) – स्मृतिशेष शैलजीत सिंह राठौर बाल साहित्य सम्मान (कथा-साहित्य में भारतीय संस्कारों की उज्ज्वल प्रस्तुति हेतु)
  4. श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ (नीमच, मध्य प्रदेश) – कीर्तिशेष पंडित राम किशोर त्रिपाठी बाल साहित्य सम्मान (बाल मन की गहराई एवं सरल भाषा में गहन विचार व्यक्त करने की अप्रतिम क्षमता हेतु, सपत्नीक)
  5. डॉ. वेद प्रकाश अग्निहोत्री (गोला गोकर्णनाथ) – स्मृतिशेष श्रीमती भगवती देवी प्रजापति बाल साहित्य सम्मान (शैक्षणिक दृष्टिकोण एवं नीतिप्रधान कथा-लेखन हेतु)
  6. श्रीमती अनीता गंगाधर शर्मा (अजमेर) – कीर्तिशेष पंडित सत्य नारायण शुक्ल बाल साहित्य सम्मान (बाल काव्य में लोकगंध एवं सरल भावनाओं की सुन्दर प्रस्तुति हेतु, श्री सलीम स्वतंत्र द्वारा ग्रहण)
  7. श्री सुशील पांडेय (कानपुर) – स्मृतिशेष श्रीमती विद्या बाजपेयी बाल साहित्य सम्मान (बाल कहानियों में हास्य-रस एवं मूल्यपरक शिक्षण शैली हेतु)
  8. डॉ. कुसुम चौधरी (बाराबंकी) – स्मृतिशेष श्रीमती राजेश्वरी गुप्ता बाल साहित्य सम्मान (भावनात्मक बोध एवं संस्कारपरक सरोकारों हेतु)
  9. श्री राम दुलार सिंह पराया (मिर्ज़ापुर) – कीर्तिशेष राजेन्द्र सिंह राजावत बाल साहित्य सम्मान (ग्रामीण परिवेश के बच्चों के यथार्थपरक चित्रण हेतु)
  10. श्री सलीम स्वतंत्र (कोटा, राजस्थान) – कीर्तिशेष अविरल बाजपेयी बाल साहित्य सम्मान (राष्ट्रीय एकता एवं सौहार्द के भावों हेतु)
  11. श्री लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव (बस्ती) – स्मृतिशेष राजेश्वरी देवी अवस्थी बाल साहित्य सम्मान (लोककथात्मक शैली एवं नैतिक दृष्टि हेतु)
  12. इंजीनियर संतोष कुमार सिंह (मथुरा) – कीर्तिशेष आचार्य त्रयंबक प्रसाद शुक्ल बाल साहित्य सम्मान (विज्ञान एवं मानवीय मूल्यों का सुगम समायोजन हेतु)
  13. श्री रमेश आनंद (आगरा) – स्मृतिशेष किशन दुलारी बाल साहित्य सम्मान (हास्यप्रधान एवं शिक्षाप्रद बाल कविताओं हेतु) दिया जाना था। मगर वे किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाए।

श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गीता क्षत्रिय का संयुक्त सम्मान साहित्यिक परिवार की भावनात्मक एकता का प्रतीक बन गया। प्रत्येक सम्मान के साथ सभागार तालियों से गूँज उठा।

द्वितीय सत्र : बाल काव्य की मधुर गूँज

द्वितीय सत्र की अध्यक्षता श्री अनिल अवस्थी ने की। संचालन कवि श्री उदय नारायण ‘उदय’ ने सौम्य एवं सुमधुर स्वर में किया। बाल काव्य पाठ में बच्चों की मासूमियत, देशभक्ति और स्वप्निल उड़ान ने सभी को मुग्ध कर दिया। निर्णायक मंडल में श्री उपेन्द्रनाथ शुक्ल, श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ एवं श्री अजय सिंह राठौर आदि शामिल थे। सभी निर्णय को द्वारा दिए गए अंकों के आधार पर बाल कवियों को उनके भाव, भाषा, भंगिमा, लय, ताल, शैली, उनके बोलने के आत्मविश्वास आदि के आधार पर उन्हें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान दिया गया। इसमें प्रथम स्थान आराध्या मिश्रा को प्राप्त हुआ। द्वितीय स्थान युवान पांडेय ने प्राप्त किया। तृतीय स्थान पर अभिज्ञा सारस्वत रही। जिन्हें प्रमाण पत्र, नगद राशि और माल्यार्पण करके उनकी हौसला अफजाई करके प्रोत्साहित किया गया।

इस सत्र में नवसृजित पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ : 

  • चिर्रो रानी आओ जी – संत कुमार बाजपेयी ‘संत’ 
  • मेढक जी को चढ़ा बुखार – इंजी. संतोष कुमार सिंह 
  • गिट्टी फोड़ – डॉ. अजीत सिंह राठौर 
  • धरती हमें बचानी होगी – कैलाश बाजपेयी 
  • कुट-कुट चिड़िया एवं चली लोमड़ी दावत खाने – डॉ. मंजु लता श्रीवास्तव 

ये रचनाएँ बाल मन की उजली परतों को उघाड़ती प्रतीत हुईं, मानो साहित्य सहजता में संस्कार के बीज बो रहा हो।

समापन : आभार, आदर और नई आशा

अध्यक्ष श्री एस.बी. शर्मा ने कहा, “बाल साहित्य के बिना कोई समाज अपनी संवेदनशीलता को जीवित नहीं रख सकता; यही वह माध्यम है जो हमें हमारे मूल संस्कारों से जोड़े रखता है।” मुख्य अतिथि डॉ. हरिभाऊ खांडेकर ने ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर बल देते हुए कहा कि ये कार्यक्रम साहित्यकारों और बच्चों को प्रोत्साहित करने का उत्तम माध्यम हैं।

महासचिव श्री राजकुमार सचान ने संस्था की प्रगति-रिपोर्ट प्रस्तुत कर धन्यवाद ज्ञापित किया और इसे राष्ट्रबंधु जी की आत्मा को साक्षी मानकर बाल साहित्य के पुनर्जागरण का अवसर बताया।

प्रथम सत्र का संचालन श्री चक्रधर शुक्ल, द्वितीय सत्र का श्री रमेश मिश्र ‘आनंद’ ने किया। श्री कैलाश बाजपेयी, डॉ. ओमप्रकाश शुक्ल ‘अमिय’, श्री राजीव मिश्रा, डॉ. जयप्रकाश प्रजापति, श्री भारत तिवारी, श्रीमती सीता सचान तथा कार्यकारिणी के सभी सदस्यों का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा।

सांझ ढलते-ढलते जब सभागार से बाल-साहित्य प्रेमी और दर्शक निकले, तो उनकी आँखों में साहित्य के प्रति नई श्रद्धा और हृदय में राष्ट्रबंधु जी की स्मृति का उजास स्पष्ट झलक रहा था। लगा जैसे बाल साहित्य ने एक बार फिर बचपन की सरलता, सहजता और मनुष्यता के मीठे स्वर को जीवित कर दिया हो।

रिपोर्ट : श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

17 नवम्बर 2025

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी, पुणे द्वारा गुरुवर्य पद्माकर सदाशिव चिरपुटकर पर स्मृतिग्रंथ ‘ज्ञानव्रती’ विमोचित ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी द्वारा गुरुवर्य पद्माकर सदाशिव चिरपुटकर पर स्मृतिग्रंथ ‘ज्ञानव्रती’ विमोचित ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

संस्था की गुणवत्ता में वृद्धि, डॉ. चिरपुटकर सर के आशीर्वाद – डॉ. गजानन एकबोटे, कार्याध्यक्ष, पी.ई. सोसायटी, पुणे

प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी की ओर से गुरुवर्य पद्माकर सदाशिव चिरपुटकर पर ‘ज्ञानव्रती’ शीर्षक से स्मृतिग्रंथ का विमोचन समारोह आयोजित किया गया थाl इस समारोह के अवसर पर प्रा. डॉ. नितीन करमलकर (माजी कुलपति, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय) डॉ. अरविन्द पांडे (उपकार्याध्यक्ष, प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी), प्रा. शामकांत देशमुख (कार्यवाह, प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी) प्रा. श्री. सुरेश तोड़कर (सहकार्यवाह, प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी) प्रा. डॉ. निवेदिता एकबोटे (उपकार्यवाह, प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी) प्रा. डॉ. प्रकाश दीक्षित (उपकार्यवाह, प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी) के करकमलों से स्मृतिग्रंथ “ज्ञानव्रती” का विमोचन संपन्न हुआl डॉ. अरविन्द पांडे द्वारा संपादित तथा अभिरुचि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस स्मृतिग्रंथ में 48 लेखों का समावेश किया गया है तथा संस्था की ओर से इससे ऑडियो बुक का निर्माण भी किया गया हैl

डॉ. चिरपुटकर की सुपुत्री डॉ. सुचित्रा केलकर ने समारोह के आयोजन हेतु आभार ज्ञापित किएl डॉ. ज्योत्स्ना एकबोटे ने संस्था के महत्वपूर्ण कार्य का श्रेय डॉ. चिरपुटकर को प्रदान कियाl

डॉ. अरविन्द पांडे ने कहा, “डॉ. चिरपुटकर शांत, अनुशासनप्रिय, सहृदय, दिलदार व्यक्तित्व के थेl मनुष्य को जौहरी की तरह वे परख लेते थेl ” डॉ. नितीन करमलकर ने संस्था के निर्माण में सहयोगियों का योगदान महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “प्राध्यापकों के कार्य के कारण संस्था बड़ी बनती हैl डॉ. चिरपुटकर का कार्य और योगदान अनन्यसाधारण हैl यह स्मृतिग्रंथ उनके ऋण में रहने के लिए ही निर्मित हैl ”

प्रोग्रेसिव एज्युकेशन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. गजानन एकबोटे ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा, “संस्था के अत्यंत कठिन समय और परिस्थितयों में डॉ. चिरपुटकर आधारस्तंभ थेl उनकी नि:स्वार्थ भावना, और आशीर्वादों के कारण संस्था की गुणवत्ता में निरंतर वृद्धि होती आई हैl संस्था में संस्कारपूर्ण वातावरण बना रहना भी आशीर्वाद हैl डॉ. एकबोटे ने अपने एकनिष्ठ कार्यकर्ता और सहयोगी डॉ. चिरपुटकर को सुमंनाजली अर्पित कीl साथ ही उन्होंने बताया, गणित और संख्याशास्त्र में प्रथम स्थान अर्जित करने वाले छात्र को एक लाख रुपयों की राशि का पुरस्कार संस्था की ओर से निर्धारित किया गया हैl

प्रस्तुत कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. निवेदिता एकबोटे ने की तथा अतिथियों का परिचय प्रा. शामकांत देशमुख ने कियाl प्रा. समीर नेर्लेकर द्वारा निर्मित ध्वनिचित्र का प्रस्तुतीकरण भी इस समय किया गयाl प्रस्तुत समारोह में प्रोग्रेसिव एज्युकेशन संस्था के संस्था के सभी सदस्य, पदाधिकारी, प्राध्यापक, अन्य कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थेl

साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे 

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ दुबई से ~ महिला काव्य मंच, दुबई द्वारा कार्यक्रम ‘मन से मंच’ तक आयोजित ~ ☆ साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹 दुबई से ~ महिला काव्य मंच, दुबई द्वारा कार्यक्रम ‘मन से मंच’ तक आयोजित ~ 🌹 साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ 🌹

सारस्वत रिश्ते वसुधैव कुटुंबकम् वाले होते हैं। शब्द आत्मीयता के आधार कुटुंब हैं। दुबई में मेरे आगमन की सूचना श्रीमती स्नेहा देव जी तथा श्री नितिन उपाध्ये जी को हुई, तो १५ नवम्बर २०२५ की शाम स्नेहा जी के आवास पर पंजीकृत संस्था महिला काव्य मंच (मन से मंच तक) के तत्वावधान में एक काव्य गोष्ठी रखी गई। मेरे अतिरिक्त सिंगापुर से अनुसुइया साहू जी, विश्व साहित्य सेवा संस्थान का भी आगमन दुबई हुआ है।

डाक्टर दंपति अनिल सक्सेना जी जिनकी खासियत ‘किडनी आधारित चित्रांकन’ और ‘कराओके सिंगिंग’ है, ने रात्रि भोज का आयोजन उनके आवास पर किया था। गोष्ठी में ‘किताबवाली नूपुर’ (यह उनके बुक रिव्यू यू ट्यूब चैनल का नाम है), मार्मिक कविता के लिए जाने जानेवाले  हरीश खत्री, तरन्नुम में गज़ल की हस्ताक्षर कौसर भुट्टो जी, केतकी जी, रेखा जी, संगीता जी, हिंदी और अरबी के साहित्य के प्रकाशक व्यास जी सहित कई साहित्यिक मित्रों से आत्मीय भेंट हुई। कविताएं सुनी, सुनाई। फिल्मी गीत भी गाये गए।

सुस्वादु भोजन हेतु डाक्टर श्रीमती सक्सेना का धन्यवाद। कुल जमा एक अंतरराष्ट्रीय अद्भुत साहित्यिक काव्य तथा विमर्श का आयोजन रहा।

हमने सुनाया..

☆ सारस साइबेरिया के… ☆

कल आये थे

सारस साइबेरिया के

मेरे घर के सामने की झील पर

बिना वीसा बिना पासपोर्ट

तुम्हारी सरहदों से होकर .

उन्हें यहां आने से रोक नहीं सकती

कोई

एक रंग में रंगी सेना या किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त सरकार .

 

तुम सिर्फ

कागजो के नक्शे पर

लकीरें सुर्ख कर

सीमायें बना सकते हो

 

अकारण जेहाद के फितूर में

उगा सकते हो

नई नई सरहदें

सरहदों पर कटीले तार

चौकियां और बंकर

निगरानी कर सकते हो

ड्रोन और सेटेलाइट से

पर क्या तुम

रोक सकते हो ?

धूप हवा और बादलो की आवाजाही

सीमा पार उगे वृक्ष की

इस पार पड़ती परछाई

इधर बजते संगीत की

उस पार गूंजती स्वर लहरियां

 

नहीं रोक सकते

मेरी कवितायें

जो समेटने को आतुर हैं

सारी सृष्टि को

अपनी बाहों में

साइबेरिया के सारसो का संदेश है

वसुधैव कुटुम्बकम .

साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’, दुबई से  

 

vivek ranjan Shrivastava

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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