श्री संतोष नेमा “संतोष”
(आदरणीय श्री संतोष नेमा जी कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है आपके दोहे – राधा कृष्ण पर दोहे…। आप श्री संतोष नेमा जी की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार आत्मसात कर सकते हैं।)
☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # २८२ ☆
☆ राधा कृष्ण पर दोहे… ☆ श्री संतोष नेमा ☆
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प्रेम दवा है रोग भी, प्रेम राधिका नाम |
मोहन राधे में रमे, राधा मन घनश्याम ||
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हरि जिसके हैं सारथी, उसके ही मन मीत |
हर मुश्किल में सर्वदा, होती उसकी जीत ||
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जय राधे वृषभानुजा, कृष्ण चरण सुखधाम |
लेकर अपनी शरण में, करें सफल सब काम ||
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जय मोहन मुरली धरा, मोहक मौलिक रूप |
मधुसूदना मनोहरा, माधव मदन अनूप ||
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मोहन मुरली बज उठी, झुकी कदम की डाल |
राधा रम कर रास में, होतींं खूब निहाल ||
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राधा जोगन प्रेम की, खोजे नवल किशोर |
नैन बसाये सांवरे, थामे प्रेमहिं डोर ||
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वंशीवट की छाँव तले, सुन मुरली की तान |
राधा डूबी श्याम में, नित नित सुन नव गान ||
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गलियाँ गोकुल की लगें, मुरलीधर का धाम |
अंत समय आता कहाँ, मुख से कृष्णा नाम ||
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बृज की रज चंदन लगे, पावन यमुना धार |
कुंज गली अति पावनी, बृज का अनुपम प्यार ||
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राधा प्रेम में बावरी, कृष्ण चरण अनुराग |
छलिया से जब मन लगा, बढ़ी प्रेम की आग ||
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राधे राधे बोलिये, सुनते कृष्ण पुकार |
राधे कृष्णा नाम ही, साँचा प्रेमाधार ||
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रंग बदलता ये जहाँ, देखा जग व्यवहार |
टूटे दिल को भा गया, कृष्णा तेरा प्यार ||
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राधे राधे बोलिए, पावन राधा नाम |
नाम जाप से आ मिलें, मनमोहन घनश्याम ||
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अहसासों का नाम ही, होता सच्चा प्यार |
दर्द किसी का झेल कर, दूजा सहता भार ||
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चढ़े रंग जब प्रेम का, रंग न दूजा भाय |
इंद्रधनुष के रंग भी, फीके तब पड़ जाय ||
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रंग चढ़े जब प्यार का, चढ़े न दूजो रंग |
सबसे गहरा रंग यह, भीगे हर इक अंग ||
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राधे राधे कह उठा, चरण शरण “संतोष” |
कृष्ण भक्ति देकर सदा, हरिये मेरे दोष ||
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© संतोष कुमार नेमा “संतोष”
वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार
आलोकनगर, जबलपुर (म. प्र.) मो 7000361983, 9300101799
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





