श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता अच्छे दिन भी आऐंगे…”।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २४४ ☆

☆ # “अच्छे दिन भी आऐंगे…” # ☆

मत उदास हो अपना आपा मत खो

ये दिन भी कट जाएंगे

छाई है बदली तो क्या

ये बादल भी छट जाएंगे

 

कितनी भी हो लंबी रातें

कितनी भी हो दुख भरी बातें

भोर की कोमल कोमल किरणें

ओस की बूंदो पर लगी है गिरने

जीवन का नया संदेशा लाती है

उम्मीद की ज्योत जलाती है

भ्रमर वाटिका में फूल खिलाएंगे

अब अच्छे दिन भी आएंगे

 

बीते दिनों की बीती बातें

अंधेरी और गुमनाम रातें

भूखे पेट घर भर के फांकें

फटे वस्त्रोंसे गरीबी ही झांके

बुझे हुए हैं घर के चूल्हे

कोई देवदूत बनकर आकर छू ले

इस उम्मीद से आंखों में सपने सजाएंगे

अब अच्छे दिन भी आएंगे

 

जीवन तो एक संघर्ष है

कभी गम तो कभी हर्ष है

आंखों में है कितने सपने

राह में छूट गए हैं अपने

लड़ते लड़ते हम जीतेंगे

दुख के दिन जरूर बितेंगे

हम भी गीत खुशी के गाएंगें

अब अच्छे दिन भी आएंगे /

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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