श्रीमती शशि सराफ

(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता मेरा एहसास।)

☆ शशि साहित्य # ५ ☆

? कविता – मेरा एहसास…  ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ  ? ?

उसने कुछ लिखने से पहले,

कलम अपने होठों में दबाई..

और हमने उसका अनलिखा,

आखरी पन्ना भी पढ़ लिया..

 

यह वह जज़्बात है जिनका,

सफर आसान नहीं है यारा..

रब की होगी मेहरबानी,

तो ही उतरेगा दरिया के पारा..

 

पहली सांस की तरह,

ज़रूरी यह हिस्सा है ..

आखिरी सांस को थामने,

तक का यह किस्सा है..

 

जज़्बात, वहां से यहां तक कैसे पहुंचे,

जो तल तक डूबा, सिर्फ उसने यह नेमत पाई है..

जिसने प्रीति में ही भक्ति की लौ जलाई है,

समर्पण की दिल से, हर रीत निभाई है..

 

उसी का दिल तो करेगा शोर….

यारा मैं क्या करूं.. तुझ में….      ‍

© श्रीमती शशि सराफ

जबलपुर, मध्यप्रदेश 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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