डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी समसामयिक विषय पर एक विचारणीय रचना “इस दौर के…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # १८
कविता – इस दौर के… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
पानी पीकर स्वर्ग सिधारो अमृतकाल के दौर में
गुरूघण्टाल बजा रये घण्टा,स्वच्छ शहर इन्दौर में
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घूँट-घूँट की क़ीमत हमने दो-दो लाख चुकायी है
मातम की आवाज़ दब गई , हर्ज़ाने के शोर में
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साफ-सफाई में नंबर वन,उनकी इस गारण्टी को
देखो – देखो लील गई , लापरवाही एक कौर में
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सीवर का फीवर ले दूषित पानी घर-घर पहुँच रहा
चुल्लू भर पानी भी पहुँचे , भ्रष्ट ठिकाने-ठौर में
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तीन – तीन इंज़न वाली ,गाड़ी की है रफ़्तार ग़ज़ब
पानी से पानी टकराया , पानी मरा हिलोर में
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गौर से देखो तो पाओगे आस्तीन में साँप पले,
छुपे बबूलों के काँटे हैं , आज आम के बौर में
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चुप रहना ‘राजेश’ मुनासिब,व्यर्थ झमेला क्यों करना
ठनी बहस जबसे सफाई पर,मीडिया औ महापौर में
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
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