श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘दिल में ही समाओ…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # ८८ ☆ दिल में ही समाओ… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
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दिल कह रहा है, दिल से कहीं न जाओ,
दिल में ही तुम रहना, दिल में ही समाओ,
दिल की बाते, दिल ही जाने,
क्या कहता है, मैं क्या जानूं,
ये भी तुम बतलाओ,
दिल में ही समाओ,
दिल दीवाना, दिल पागल है,
दिल न समझे, दिल तो दिल है,
दिल की भाषा, दिल ही जाने,
दिल को भी समझाओ,
दिल में ही समाओ,
दिल रोता है, दिल हंसता है,
दिल चुप रहता, दिल कहता है,
दिल जिद्दी है,
दिल दीवाना, दिल की मान जाओ,
दिल में ही समाओ,
दिल न समझे, तुम समझाओ,
दिल न माने, इसे मनाओ,
मौन है दिल, इसे बताओ,
दिल से बातें, तुम कहलाओ,
दिल में ही समाओ.
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर
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