डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “तो जानें“.)  

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # १५ ?

? कविता – माँ… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

=१=

जग का असल हसीं

अफ़साना माँ ही है,

दुनिया का अनमोल

ख़जाना माँ ही है।

सुर लय ताल तरन्नुम

सरगम साज़ है माँ,

जग का सबसे मधुर

तराना माँ ही है।।

=२=

ख़ुशी फ़तह कर ग़म को

हराना माँ ही है,

लफ़्ज़ जिसपे ज़हाँ

दीवाना माँ ही है।

जिसकी दुआ से

क़ामयाबी क़दम चूमे,

कर ज़िंदगी जो

शायराना माँ ही है।।

=३=

मक़सद जिसका सदा

हँसाना माँ ही है,

जिसके दम जीवन है

सुहाना माँ ही है।

जिसके आँचल तले

बिताये दिन स्वर्णिम,

गोदी में बचपन –

-बचकाना माँ ही है।।

=४=

परम पुनीत पाक़

आशियाना माँ ही है,

देव भी जिसको चाहे

पाना माँ ही है।

गंगा-सी पावन दुआएँ

हैं सिर पर

बौना जिससे हर

नज़राना माँ ही है।।

=५=

जग का सबसे मधुरिम

गाना माँ ही है,

जग-दुनिया-संसार

ज़माना माँ ही है।

शुभ-चिंतक हमदर्द

नहीं माँ सा कोई,

‘ राजेश ‘ निश्छल

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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