स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”
(संस्कारधानी जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया। वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है, आपके काव्य संग्रह ‘शब्द नहीं रहे शब्द‘ की एक भावप्रवण कविता – मूर्तियाँ चुप है…।)
साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २६४ – मूर्तियाँ चुप है
(काव्य संग्रह – शब्द नहीं रहे शब्द से )
लेनिन
गाँधी
मूर्तियाँ चुप हैं
श्यामा प्रसाद मुखर्जी
सुभाष और
पेरियार
तोड़ी जा रही हैं मूर्तियाँ
एक के बाद एक ।
मूर्तियाँ चुप हैं
शायद आँखें नम हों ।
और बकबका रहे हैं लोग
नहीं नहीं
ये वो लोग हैं
खण्डित हैं जिनके विचार और चरित्र
इनके मन का आवेश
बना देना चाहता है
खण्डित मूर्तियों का देश ।
© डॉ. राजकुमार “सुमित्र”
साभार : डॉ भावना शुक्ल
112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈







