श्री एस के कपूर “श्री हंस”
☆ “श्री हंस” साहित्य # १८९ ☆
☆ मुक्तक ।। आओ मिल दुनिया की कहानी नई लिखते हैं ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆
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=1=
आओ मिल कर कहानी , नई लिखते हैं।
जीवन रंग-ढंग रवानी, नई लिखते हैं।।
सबके लिए सरोकार, की ही बात हैं करते।
जीने का सलीका जिंदगानी, नई लिखते हैं।।
=2=
बात मेहरबानी की हर, किसी के लिए हो।
साथ ही परेशानी कम हर, किसी के लिए हो।।
अधिकार और कर्तव्य, का मेल रहे सदा।
दुनिया दीवानी भी हर, किसी के लिए हो।।
=3=
कड़ी से कड़ी जोड़ कर, जंजीर बनाते हैं।
मेहनत से मिल कर , चलो तक़दीर बनाते हैं।।
कण-कण में जहाँ पर, प्रेम हो बिखरा हुआ।
दुनिया की ऐसी कोई , नई तस्वीर बनाते हैं।।
=4=
हमदर्द हमसाया सा कोई, समाज नया रचते हैं।
हमराह सा अब रिवाज़, कोई नया ही रचते हैं।।
प्यार की हर रीत , प्रेम की प्रथा हो जहाँ पर।
हमदम सा दोस्त का, कोई साज़ नया रचते हैं।।
=5=
स्नेह-प्रेम प्यार के हमसब, बनते चित्रकार हैं।
दोस्ती और दुआ के बनते, हम कलाकार हैं।।
महाभारत पांसे नहीं, लाते हैं रमायण के आदर्श।
स्वर्ग सरीखी दुनिया के, बनते अब शिल्पकार हैं।।
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© एस के कपूर “श्री हंस”
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