डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “कितनी देर अब“.)  

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # १६ ?

? कविता – कितनी देर अब… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

=1=

पक भी गए, झरबेरी बेर अब

और, मिलन में कितनी देर अब

=2=

शेर ग़ज़ल के, पूछ रहे हैं

बचे वनों में, कितने शेर अब

=3=

अधिकारों की बात बे-मानी

अंधों के हाथों बटेर अब

=4=

सुर्खियों में, है बारह मासी

हुई हाशिये पर कनेर अब

=5=

आये दिन की, आम बात हुई

हेरा – फेरी, हेर – फेर अब

=6=

किसे पुकारे, आज द्रोपदी

सुनते नहीं हैं, किसन टेर अब

=7=

लोक तंत्र में, वोट की चोरी

गुण्डागर्दी, ये अंधेर अब

=8=

मत कर सड़क पे, नारे-बाजी

राजभवन को, घेर – वेर अब

=9=

कौन करे, ‘राजेश’ सफ़ाई

सत्ता में है, कचरा ढेर अब

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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Sunil Kehri
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“सुनते नहीं हैं किसन टेर अब।”

प्रोफेसर डॉ. राजेश ठाकुर जी बहुत ही गहरे साहित्यविद् हैं। गज़ब का प्रभावी लिखते हैं। शब्दों का जादुई प्रयोग निराला होता है। बहुत ही उच्च कोटि की सृजन दक्षता है।‌