डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है समसामयिक विषय पर आपकी एक भावप्रवण रचना “अरावली“.)

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # १७ ?

? अरावली… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

= 1 =

मज़बूर है बेबस है,वो अरावली सा है l

उत्तर की खोज में एक,प्रश्नावली सा है ll

= 2 =

बिछी हुई सियासती,बिसात हर तरफ़

सरकारी छतों से उफ़,बरसात हर तरफ़

माहौल आक़ाओं की विरुदावली-सा है ll

= 3 =

गीतावली दोहावली कवितावली सभी

सच की सूक्तियाँ लिए,शब्दावली सभी

ये ख़लबली हर धनबली,बाहुबली-सा है ll

= 4 =

श्रद्धांजलि पुष्पांजलि दिखावटी है सब

संवेदना बनावटी-मिलावटी  है अब

बर्ताव ऊपरी भले ही,मखमली सा है

= 5 =

चापलूसी-चमचागिरी की बयार है

झूठ की बहार,सच का तिरस्कार है

राजपथ भी अब तो,सँकरी गली सा है

= 6 =

बिछा रहे हैं शूल वो,राहों में हर तरफ़

पढ़ा नहीं जिन्होंने कभी,प्यार का हरफ़

अन्दर वो ज़हर,बाहर गुड़ की डली सा है

= 7 =

रंगीनियाँ-रौनक़ में,मेहबूबा की गली सा

मनहूस दरअसल,वो है कपटी छली सा

बहरूपिया लल्ला सा,कभी लली सा है

 = 8 =

चाहे जो चबा जाये,ऐसी मूँगफली सा

भौंरा जो मँडराये,उस फूल कली सा

चरित्र ये उस्मान की चित्रावली सा है

= 9 =

‘राजेश’ की हर दृश्यावली दीपावली सी

मेरी तो वंशावली है,गंगाजली सी

मेरा दर्द तुलसी की रत्नावली सा है ll

 

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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Sunil Kehri
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स्थापित रचनाधर्मिता का एक और उदाहरण है यह रचना।

सुनील केहरी भोपाल