श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”
संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी के साप्ताहिक स्तम्भ “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण “गीत – नए वर्ष में खुशहाली का…”। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।
मनोज साहित्य # २०४ – गीत – नए वर्ष में खुशहाली का… ☆
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नए वर्ष में खुशहाली का,
मंगलमय संदेश मिले।
जन गण मन को स्वस्थ निरोगी,
सुखदाई परिवेश मिले।
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जीवन सबका जगमग दमके,
सुख की हर बदली बरसे।
छल-छद्मों की गिरें दिवालें,
नेह प्रेम चहुँ दिश सरसे।
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मानव पर यदि तम घिर जाए,
कभी न उसको क्लेश मिले ।
नए वर्ष में खुशहाली का,
मंगलमय संदेश मिले।
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नये वर्ष में सुख यश वैभव,
नित नूतन संगीत बजे।
नई सर्जना नई चेतना,
मधुर-मधुर नवगीत सजे।
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मिले सभी को तरुवर छाया,
निष्कंटक पथ कानन हो।
अन्तरघट में बजे बाँसुरी,
मन-भावन वृंदावन हो।
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द्वार तुम्हारे चलकर पहुँचें,
कृष्ण-सखा योगेश मिले।
नए वर्ष में खुशहाली का,
मंगलमय संदेश मिले।
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मिले सुजन-सान्निध्य सभी को,
कलयुग में द्वापर युग हो।
सत्य न्याय का शंखनाद हो,
राम राज्य-सा सतयुग हो ।
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हम विकास के पथ पर सबको,
लेकर साथ सदा बढ़ते।
मित्र सुदामा बने अगर तो,
उनका भी मंगल करते।
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भटके राही के चिंतन को,
यथा उचित निर्देश मिले।
नए वर्ष में खुशहाली का,
मंगलमय संदेश मिले।
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शांति और सद्भाव शीलता,
सदियों से सबकी चाहत।
है वसुधा परिवार हमारा,
दीन दुखी का हो स्वागत।
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गीता की अमरित वाणी को,
जग में फिर सम्मान मिले।
हो अखंड कण-कण भारत का,
विश्व गुरू का मान मिले।
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पुनर्जन्म जब हो धरती पर,
हमको भारत देश मिले।
नए वर्ष में खुशहाली का,
मंगलमय संदेश मिले।
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पाँच सदी पश्चात हमारे
राम-लला घर आए हैं।
विश्व जगत में छाईं खुशियाँ,
घर-आँगन मुस्काए हैं।
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दो हजार चौबीस शुभंकर
रामराज्य परिवेश मिले।
काशी विश्वनाथ का मंदिर
मथुरा का आदेश खिले।
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सत्य सनातन की वाणी को
जागृति का हुँकार मिले।
नए वर्ष में खुशहाली का,
मंगलमय संदेश मिले।
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© मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”
संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002
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