श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “सभी अपने लगेंगे गैर दुनिया में नहीं कोई…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १३० ☆
सभी अपने लगेंगे गैर दुनिया में नहीं कोई… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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पला जो ख़ौफ़ है दिल में उसे पहले हटाओ तो
किले की सख़्त दीवारें गिरें मिलकर हिलाओ तो
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भला इस चार दिन की जिंदगी में दुश्मनी कैसी
कभी दुश्मन को अपने तुम गले बढ़कर लगाओ तो
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जलाकर क्या मिला तुमको ये बस्ती और कुछ इन्सा
कहूँगा मर्द जो मुफ़लिस के घर चूल्हा जलाओ तो
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विजेता जीतकर दुनिया नहीं तुम हो गए सच है
कभी तुम बुद्ध सा मन जीत कर अपना दिखाओ तो
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सभी अपने लगेंगे गैर दुनिया में नहीं कोई
जो चश्मा भेद का आँखों पे है उसको हटाओ तो
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लगाने सिर्फ माँ के नाम से धरती न हरयाये
सभी रिश्तों के नामों से शज़र अपने लगाओ तो
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ख़ुदा की रहमतों की बारिशों से घर न हो खाली
मदद करने अगर ख़ुद आप दरिया दिल बनाओ तो
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रगों में दूध मीरा का बहे मेरी लहू बनकर
खुशी से ज़ह्र पी लूँगा मुहब्बत से पिलाओ तो
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बुज़ुर्गों की बनाई साख गर तुमको बचाना है
उठाई घर में दीवारें सभी भाई गिराओ तो
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कोई मां बाप बच्चों के मुखालिफ़ हो नहीं सकते
अरुण जो चाहते करना उन्हें खुलकर बताओ तो
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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