श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “वीरान दिल में फूल खिलाया…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १३४ ☆
वीरान दिल में फूल खिलाया… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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अपने वतन का शम्स हुआ दिन में अस्त है
हिंसा से ये अहिंसा की यारो शिकस्त है
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तौहीन मेरी रोकने निकला न घर से वो
कल बारी उसकी आनी पड़ोसी जो मस्त है
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बढ़कर ये हैसियत से तमन्नाएं पालता
औरों से आदमी नहीं खुद से ही त्रस्त है
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जी जान जो निसार मुझे कर दे कह रहा
इमदाद मांगिये तो कहे तंग हस्त है
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छीना हँसी है घर की मुबाइल का आगमन
बैठे है एक कमरे में हर शख़्स व्यस्त है
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बहुमत का जोर लोक सभा में ये दिख रहा
कानून हाथ बाँधे जो होता निरस्त है
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वीरान दिल में फूल खिलाया जो प्यार के
तक़दीर मेरी कर गया वो फिर से दश्त है
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रौनक हर इक शज़र पे नहीं एक सी दिखे
बेलौस इस चमन का नहीं सर परस्त है
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होती है लूटमार धड़ल्ले से शहर में
कैसी पुलिस लगाती यहाँ रोज़ गश्त है
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जाना था घूमने को पहाड़ों पे मार्च में
तुम फस गए हो जाके अरुण ये अगस्त है
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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