श्री अरुण कुमार दुबे

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “बोलना इंसाफ़ की जब माँग हो“)

☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १३५ ☆

✍ बोलना इंसाफ़ की जब माँग हो… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे 

ये ख़ुदा ने की कमी अच्छी नहीं

चार दिन की चाँदनी अच्छी नहीं

 *

हर समय की बेबसी अच्छी नहीं

आंखों में  इतनी नमी अच्छी नहीं

 *

बोलना इंसाफ़ की जब माँग हो

आपकी ये ख़ामुशी अच्छी नहीं

 *

सब्र रखिये जब मुसीबत सर पड़ी

देखिये यूँ हड़बड़ी अच्छी नहीं

 *

कुछ शरीफ़ों का सलीका सीखिए

शर्ट की कॉलर खड़ी अच्छी नहीं

 *

अंधभक्ति हो के हो ला-उम्मती

ज़ीस्त ऐसी शेख़ जी अच्छी नहीं

 *

कान के तुम साथ रखना ध्यान भी

हर खबर उड़ती हुई अच्छी नहीं

 *

तू मकाम अपना रियाज़त से बना

इन्हिसारी वक़्त की अच्छी नहीं

 *

खानदानों तक अगर ये जा रही

दोस्त ऐसी दिल्लगी अच्छी नहीं

 *

पास अपनी तुम अना के दो भुला

इस तरह की आज़जी अच्छी नहीं

 *

और के अश्क़ों से जो भीगी हुई

ज़िंदगी में वो ख़ुशी अच्छी नही

 *

छीन लेती है ये ज़र ज़ेवर जमीं

अय अरुण ये काहिली अच्छी नहीं

© श्री अरुण कुमार दुबे

सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश

सिरThanks मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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