Shri Jay Prakash Pandey

☆ Reading – The best 15 minutes you’ll even invest ☆
© Jay Prakash Pandey
416 – H, Jay Nagar, Near IBM Office, Jabalpur – 482002 Mobile – 9977318765
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Shri Jagat Singh Bisht
(Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.)
Very Good, Very Good, Yay!
What would you say about a club that grooms a hundred youngsters every week to laugh for no reason? Chetana Laughter Club has the unique distinction of taking a few thousand young pilgrims along the pathway of self-triggered joy during the past one year. And, the journey continues..
State Bank Foundation Institute (Chetana) has been set-up at Indore (India) to groom young bank officers. During their training, the officers have a brief tryst with Laughter Yoga. It is used as an ice-breaker at the beginning of programme and as an energizer in between the sessions as and when required. Besides, there is a full-fledged laughter session every Wednesday evening.
All the participants invariably imbibe the chants of ‘Very Good Very Good Yay’ during their stay and it soon becomes their mantra. This is something they will never forget in life. Gradually, they realize the virtues of unconditional laughter.
Here is a testimonial from one of our participants:
Survival of the Happiest
Laughter is something that comes naturally to people and it is the most contagious thing on earth. No one has to teach a baby to laugh.
I came to State Bank Foundation Institute (Chetana), Indore unaware of what was in store for me. After my tryst with the laughter yoga club, the laugh has never stopped.
The Laughter session conducted by Jagat Bisht Sir was one laugh riot. Every time sir introduced a new exercise for laughter, it instantly generated excitement and contemplation of the possible outcome.
My favorite act was the small role-play where if someone asked “What’s the time?”; one replied “It’s time to laugh ” and everyone broke out into laughter.
One of the phrases which everyone chanted after every act was – “Very good, Very Good, Yay!” It’s a simple phrase without any actual meaning .But when you clap your hands and say it loud the phrase brings out its actual magic. It became an instant hit and a college anthem for us.
I didn’t realize through the course of the session how it had a positive biochemical effect on my cardiovascular and nervous system. It’s only when I got back to my room that I could see myself happy, de-stressed and re-energized. In this era of ‘survival of the fittest’, Laughter club has the guts to say ‘ survival of the happiest ‘.
Founder: LifeSkills
Seminars, Workshops & Retreats on Happiness, Laughter Yoga & Positive Psychology.
Speak to us on +91 73899 38255
lifeskills.happiness@gmail.com
श्रीमद् भगवत गीता
पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
द्वितीय अध्याय
साँख्य योग
( अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद )
इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते ।
तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि ।।67।।
विषयलीन इंद्रियों से होता मन -भटकाव
जैसे जल में हो कोई वायु प्रवाहित नाव।।67।।
भावार्थ : क्योंकि जैसे जल में चलने वाली नाव को वायु हर लेती है, वैसे ही विषयों में विचरती हुई इन्द्रियों में से मन जिस इन्द्रिय के साथ रहता है, वह एक ही इन्द्रिय इस अयुक्त पुरुष की बुद्धि को हर लेती है।।67।।
For the mind which follows in the wake of the wandering senses, carries away his discrimination as the wind (carries away) a boat on the waters ।।67।।
© प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर
मो ७०००३७५७९८
(हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)
☆ अक्षय तृतीया ☆
(प्रस्तुत है कविराज विजय यशवंत सातपुते जी द्वारा अक्षय तृतीया पर्व पर रचित कविता “अक्षय तृतीया “।)
अक्षय सुखाची वैशाख तृतीया
पर्वणी साधुया मुहूर्ताची ….!
शुभदिन योग शुभ मुहूर्ताचा
दानधर्म साचा फलदायी. …!
गहू, हरभरे जवस नी सातू
दानधर्म हेतू साधियेला. …!
पितृश्राध्द कर्म मिष्टान्न भोजन
हवन, तर्पण लाभदायी. ….!
जडजवाहीर सुवर्ण लंकार
शुभकार्य द्वार उघडिले.. . !
स्नेहबंध वृद्धी नामजप सिद्धी
अक्षय प्रसिद्धी सामावली.
अक्षय तृतीया शुभारंभ योग
कर्मफल भोग अविनाशी. . . . !
चैत्रगौरी सण आनंदी सांगता
समृद्धी मागुता प्रवेशली.. . !
संकल्प आरंभ आनंद वर्धन
सौभाग्य दर्पण अंतरात . . . . !
अक्षय तृतीया ठेवा मांगल्याचा
कर्म साफल्याचा शुभदिन. . . . . !
सुख, स्नेह, शांती अक्षय रहावी
त्रिसूत्री जपावी स्नेहमयी.
विजय यशवंत सातपुते, पुणे.
डॉ उमेश चन्द्र शुक्ल
☆ भगवान परशुराम जयंती एवं अक्षय तृतीया पर्व ☆
भगवान परशुराम जयंती एवं अक्षय तृतीया पर्व पर डॉ उमेश चंद्र शुक्ल जी का विशेष आलेख उनके व्हाट्सएप्प से साभार। )
आपको और आपके परिवार को परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएँ ।
वैशाखस्य सिते पक्षे तृतीयायां पुनर्वसौ।
निशाया: प्रथमे यामें रामाख्य: समये हरि:।।
स्वोच्चगै:षड्ग्रहैर्युक्ते मिथुने राहुसंस्थिते।
रेणुकायास्तु यो गर्भादवतीर्णो विभु: स्वयं।।
भगवान *परशुराम* स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं। इनकी गणना दशावतारों में होती है। वैशाखमास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को *पुनर्वसु* नक्षत्र में रात्रि के प्रथम प्रहर में उच्च के छः ग्रहों से युक्त मिथुन राशि पर राहु के स्थित रहते माता *रेणुका* के गर्भ से भगवान् परशुराम का प्रादुर्भाव हुआ।
दिग्भ्रमित समाज में अपने तपोबल और पराक्रम से समता और न्याय की स्थापना करने वाले भगवान परशुराम का जीवन अत्यंत प्रेरणादायी और अनुकरणीय है।
उनके आदर्शों पर चलने का हम सबको संकल्प लेना चाहिये।
☆ किटी पार्टी ☆
(प्रख्यात व्यंग्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी ने किटी पार्टी पर काफी शोध कर लिया है। किन्तु, शोध के पश्चात ऐसे पारिवारिक /सामाजिक विषय पर व्यंग्य लिखने के लिए काफी हिम्मत की आवश्यकता पड़ती है। श्री विवेक जी को बधाई।)
पुराने जमाने में महिलाओं की परस्पर गोष्ठियां पनघट पर होती थी। घर परिवार की चर्चायें, ननद, सास की बुराई, वगैरह एक दूसरे से कह लेने से मनो चिकित्सकों की भाषा में, दिल हल्का हो जाता है, और नई ऊर्जा के साथ, दिन भर काटने को, पारिवारिक उन्नति हेतु स्वयं को होम कर देने की हमारी सांस्कृतिक विरासत वाली ’नारी’ मानसिक रूप से तैयार हो लेती थी। समय के साथ बदलाव आये हैं। अब नल-जल व्यवस्था के चलते पनघट इतिहास में विलीन हो चुके हैं। स्त्री समानता का युग है। पुरूषों के क्लबों के समकक्ष महिला क्लबों की संस्कृति गांव-कस्बों तक फैल रही है। सामान्यतः इन क्लबों को किटी-पार्टी का स्वरूप दिया गया है। प्रायः ये किटी पार्टियां दोपहर में होती है, जब पतिदेव ऑफिस, और बच्चे स्कूल गये होते हैं। महिलायें स्वयं अपने लिये समय निकाल लेती है। और मेरी पत्नी इस दौरान सोना, टी.वी. धारावाहिक देखना, पत्रिकायें-पुस्तकें पढ़ना, संगीत सुनना, और कुछ समय बचाकर लिखना जैसे षौक पाले हुए थी। पर हाल ही उसे भी किटी पार्टी का रोग लग ही गया।
प्रत्येक मंगलवार को मैं महावीर मंदिर जाता हूं, अब श्रीमती जी इस दिन किटी पार्टी में जाने लगी है। कल क्या पहनना है, ज्वेलरी, साड़ी से लेकर चप्पलें और पर्स तक इसकी मैंचिंग की तैयारियां सोमवार से ही प्रारंभ हो जाती हैं। कहना न होगा इन तैयारियों का अर्थिक भार मेरे बटुये पर भी पड़ रहा है। जिसकी भरपाई मेरा जेबखर्च कम करके की जाने लगी है। ब्यूटी कांषेस श्रीमती जी, नई सखियों से नये-नये ब्यूटी टिप्स लेकर, मंहगी हर्बल क्रीम, फेस पैक वगैरह के नुस्खे अपनाने लगी है। किटी पार्टी कुछ के लिये आत्म वैभव के प्रदर्शन हेतु, कुछ के लिये पति के बॉस की पत्नी की बटरिंग के द्वारा उनकी गुडबुक्स में पहुंचने का माध्यम कुछ के लिये नये फैशन को पकड़ने की अंधी दौड़, तो कुछ के लिये अपना प्रभुत्व स्थापित करने का एक प्रयास कुछ के लिये इसकी-उसकी बुराई भलाई करने का मंच, कुछ के लिये क्लब सदस्यों से परिचय द्वारा अपरोक्ष लाभ उठाने का माध्यम तो कुछ के लिये सचमुच विशुद्ध मनोरंजन होती है। कुछ इसे नेटवर्क मार्केटिंग का मंच बना लेती हैं।
क्लब में हाउजी का प्रारंपरिक गेम होता है, जिस किसी की टर्न होती है, उसकी रूचि, क्षमता एवं योग्यता के अनुरूप सुस्वादु नमकीन-मीठा नाश्ता होता है। चर्चायें होती हैं। गेम आफ द वीक होता है, जिसमें विनर को पुरस्कार मिलता है। मेरी इटेलैक्चुअल पत्नी जब जाती है, ज्यादातर कुछ न कुछ जीत लाती है। आंख बंद कर अनाज पहचानना, एक मिनट में अधिकाधिक मोमबत्तियां जलाना, जिंगल पढ़कर विज्ञापन के प्राडक्ट का नाम बताना, एक रस्सी में एक मिनट में अधिक से अधिक गठाने लगाना, जैसे कई मनोरंजक खेलों से, किटी पार्टी के जरिये हम वाकिफ हुये हैं। मेरा लेखक मन तो विचार कर रहा है एक किताब लिखने का- गेम्स आफ किटी पार्टीज मुझे भरोसा है, यह बेस्ट सैलर होगी। क्योंकि हर हफ्ते एक नया गेम तलाशने में महिलायें काफी श्रम कर रही है।
इस हफ्ते मेरी श्रीमती जी ’लेडी आफ दि वीक’ बनाई गई है। यानी इस बार टर्न उनकी हैं। चलतू भाषा में कहें तो उन्हें मुर्गा बनाया गया है- नहीं शायद मुर्गी। श्रीमती जी ने सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति देने के अंदाज में मेरे सारे मातहत स्टाफ को तैनात कर रखा है, चाट वाले को मय ठेले के क्लब बुलवाया जाना है, आर्डर पर रसगुल्ले बन रहे हैं, एस्प्रेसों काफी प्लांट की बुकिंग कराई जा चुकी है, हरेक को रिटर्न गिफ्ट की शैली में कुछ न कुछ देने के लिये मेरी किताबों के गिफ्ट पैकेट बनाये गये हैं- ये और बात है कि इस तरह श्रीमती जी लाफ्ट पर लदी मेरी किताबों का बोझ हल्का करने का एक और असफल प्रयास कर रही है, क्योंकि जल्दी ही मेरी नई किताब छपकर आने को है। क्या गेम करवाया जावे इस पर बच्चों से, सहेलियों से, बहनों से मोबाईल पर, लम्बे-लम्बे डिस्कशंस हो रहे हैं- मोबाईल पर कर्टसी काल करके वैयक्तिक आमंत्रण भी श्रीमती जी अपने क्लब मेम्बरस् को दे रही है। श्रीमती जी की सक्रियता से प्रभावित होकर लोग उन्हें क्लब सेक्रेटरी बनाना चाह रहे हैं। मैं चितिंत मुद्रा में श्रीमती जी की प्रगति का मूक प्रशंसक बना बैठा हूँ। उन्हें चाहकर भी रोक नहीं सकता क्योंकि क्लब से लौटकर जब चहकते हुये, वे वहाँ के किस्से सुनाती है, तो उनकी उत्फुल्लता देखकर मैं भी किटी पार्टी में रंग जमाने वाली संदर, सुशील, सुगढ़ पत्नी पाने हेतु स्वयं पर गर्व करने का भ्रम पाल लेता हूं। अब कुछ प्रस्ताव किटी पार्टी को आर्थिक लाभों से जोड़ने के भी चल रहे हैं, जिनमें बीसी के साथ ही, नेटवर्क मार्केटिंग, सहकारी खरीद, पारिवारिक पिकनिक वगैरह के हैं। आर्थिक सामंजस्य बिठाते हुये, श्रीमती जी की प्रसन्नता के लिये उनकी पार्टी में हमारा पारिवारिक सहयोग बदस्तूर जारी है। क्योंकि परिवार की प्रसन्नता के लिये पत्नी की प्रसन्नता सर्वोपरि है।
© श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव
ए-1, एमपीईबी कालोनी, शिलाकुंज, रामपुर, जबलपुर, मो ७०००३७५७९८
डॉ प्रेम कृष्ण श्रीवास्तव
☆ बेटियां शची रति दुर्गा लक्ष्मी और सरस्वती बनें ☆
बेटियां जब आतीं घर आंगन महकातीं,
जब वह चिड़ियों सा चहकतीं गुनगुनाती।
मन के घर आंगन में निज प्यार बिखेरतीं,
अपना होने का निरंतर अहसास दिलातीं।।
पैदा होते ही वो जनक की जानकी बनतीं,
राम की सीता कृष्ण की राधा बन जातीं।
प्रतीक होतीं मां बाप के आन बान शान की,
फिर किसी और के घर की शान बन जातीं।।
बेटियां तो पिता की आंखों का तारा,
मां के हृदय में ही सदा रहा करतीं।
देर जब हो जाए उनके आने में घर,
मां बाप की चिंता भी बना करतीं।।
इस सृष्टि की भी वही तो सृष्टा होतीं,
आंचल में दूध आंखों में पानी रखतीं।
ससुराल जा कर भी बाबुल की होतीं,
मां बाप का गौरव बन सम्मान बढ़ातीं।।
बेटियां कभी श्रुति तो कभी सृष्टि होतीं,
तन से ससुराल पर मन से मायके होतीं।
तन से कठोर पर मन से कोमल बनतीं,
पर छुप छुप कर बाबुल के लिए रोतीं।।
ससुराल में जब बेटियां दु:खी रहतीं,
मा बाप के हृदय में शूल चुभता रहता।
जब बेटियां ससुराल में सुखी रहतीं,
मां बाप का हृदय सदा खिला रहता।।
बेटियां दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती बनतीं,
तो मां बाप निश्चिंत हुआ करते हैं।
जब बेटियां अबला बन जातीं हैं तो,
मां बाप सदा चिंतित रहा करते हैं।।
दहेज, शोषण, घरेलू हिंसा न होंगे नियंत्रित,
यदि बेटियां अपने पैरों पर खड़ी नहीं होंगी।
लालची जुआरी चरित्रहीन करेंगी नियंत्रित,
जब बेटियां सशक्त और आत्म निर्भर होंगी।।
बेटियां शची रति दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती बने,
निज मां बाप की आन बान और शान बने।
उन्हें अबला बन कर जीते तो ज़माना बीता,
अब वे सबल बन राष्ट्र का अभिमान बनें।।
© डॉ प्रेम कृष्ण श्रीवास्तव
श्री जय प्रकाश पाण्डेय

(श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी का एक प्रयोग – एक मार्मिक माइक्रो व्यंग्य। आज सोशल मीडिया इस तरह की अनेकों मार्मिक घटनाओं से भरा पड़ा है। प्रश्न यह उठता है कि इनसे कितने लोगों की आँखें खुलती हैं? किन्तु, ऐसे माइक्रो व्यंग्य के प्रयोग आवश्यक हैं।)
“हलो…. बेटा तुम्हारे पापा अस्पताल में बहुत सीरियस हैं तुम्हें बहुत याद कर रहे हैं, उनका आखिरी समय चल रहा है। यहां मेरे सिवाय उनका कोई नहीं है। कब आओगे बेटा ?”
“माँ बहुत बिजी हूँ । वैसे भी इण्डिया में अभी बहुत गर्मी होगी, तुम्हारे घर में एसी भी नहीं है। छोटे भाई से बात करता हूँ कि अभी वो इण्डिया जाकर उन्हें देख ले फिर माँ के समय मैं चला जाऊँगा। तुम तो समझती हो माँ … मुझे तुम से ज्यादा प्यार है।”
© जय प्रकाश पाण्डेय
सुश्री विजया देव
☆ भक्तिगीत ☆
(वरिष्ठ मराठी साहित्यकार सुश्री विजया देव जी का एक भक्तिगीत । )
अभिमान नकाे धरु मनी
मानवा हाेईल रे हानी
धन दाैलत सुख अय्याशी
ना राहिल रे तुजपाशी
लीन का न हाेशी इशचरणी – 1
गर्वाची घागर रिकामी
प्रभु नामच येई कामी
सुवीचार आण रे मनी – 2
रावण राजा बलवान
तरी क्षणात हरले प्राण
त्याची काही न उरली निशाणी – 3
© विजया देव
Shri Jagat Singh Bisht
(Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.)
Laugh For A Healthy Heart
Laughter Yoga is the happiest workout in the world. It promotes a healthy heart by massaging it as one giggles gently from the diaphragm.
Amrita Kadam did a brief interview with me which has been published in the Hindustan Times, Indore on the occasion of
Laugh For A Healthy Heart.
Amrita Kadam
The release of physical, emotional and mental stress can help one have a healthy heart. You can do this with a good laugh. Certified laughter professor and assistant general manager (training) of State Bank of India Jagat Singh Bisht says, “Stress is the root cause of many heart problems. Laughing gives oxygen to the body and is a powerful cardio workout. Ten minutes of hearty laughter is equal to 30 minutes on treadmill.”
Laughter yoga is done under proper guidance and can help a person in maintaining the blood pressure level. It also helps in proper circulation of blood and its dilation.
Sharing an experience Bisht says, “About nine years ago, my wife Radhika used to pop BP pills every day. She started laughter yoga and according to doctors’ advice she gradually stopped taking the pills and we used to monitor her BP at regular intervals. Now, she is completely off the pills and laughter yoga has helped her a lot.”
Daily dose of laughter can help in opening the arteries and helps those who have cholesterol problem. It also manages the sugar level in the body. But there is a word of caution here from the trainer. “Laughter yoga is not a complete cure but is a preventive method. Those with high BP and complicated heart problems are advised not to go for laughter yoga. However, a person can surely remain fit if laughter yoga is practiced regularly.”
amrita.kadam@hindustantimes.com
Laughter Yoga is the best cardio-vascular exercise. Anyone can do it. It is scientifically proven, easy to learn and a lot of fun. You can feel the benefits right from the very first session.
Laughter Yoga is the latest health craze sweeping the world where anyone can laugh without any reason. It is truly a life changing experience because when you laugh, you change and when you change, the whole world changes.
Courtesy:
Founder: LifeSkills
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