(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।
आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य भँवर “– असंभव तुलना …” ।)
~ मॉरिशस से ~
☆ कथा कहानी ☆ गद्य भँवर # १११ — असंभव तुलना —☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆
वह समंदर पार भ्रमणार्थ एक सुन्दर देश गया। विद्वान एवं अध्ययनशील होने से यहाँ उसने अपने देश को मिला कर एक तुलनात्मक दृष्टि रख ली। यहाँ उसे घरों के दर्शन तो हुए। उसने ध्यान से मानो एक खास बात का अध्ययन कर लिया। यहाँ के तमाम घर प्रायः एक रंग के थे। उसने सोच बना ली यहाँ की संस्कृति के तहत ऐसा हो। पर उसे याद तो आया अपने देश में इस रंग को अपशकुन माना जाता है। स्वयं यह रंग देखने पर उसके मन में आता है यह तो अपशकुन है। पर उसने इस देश में सुबह से शुरु हुए शाम तक अपने इस तुलनात्मक अध्ययन का एक तरह से मन ही मन प्रायश्चित कर लिया। वास्तव में दुनिया की विचित्रता यही है। एक ही भगवान ने पूरी दुनिया बनायी है, लेकिन देशों के हिसाब से भगवान के प्रति मान्यता और आस्था एकदम अलग — अलग है।
(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के लेखक श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही गंभीर लेखन। शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको पाठकों का आशातीत प्रतिसाद मिला है।”
हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों के माध्यम से हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)
☆ संजय उवाच # ३४४ ☆ स्थितप्रज्ञ…
एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर हमारी सोसायटी के पास ही रहा करते थे। सज्जन व्यक्ति थे।अकस्मात मृत्यु हो गई। एक दिन लगभग उसी जगह एक रिक्शा खड़ा देखा तो वे सज्जन याद आए। विचार उठा कि आदमी के जाने के बाद कोई उसे कितने दिन याद रखता है? चिता को अग्नि देने के बाद परिजनों के पास थोड़ी देर रुकने का समय भी नहीं होता।
एक घटना स्मरण हो आई। एक करीबी परिचित परिवार में शोक प्रसंग था। अंतिम संस्कार के समय, मैं श्मशान में उपस्थित था। सारी प्रक्रिया चल रही थी। लकड़ियाँ लगाई जा रही थीं। साथ के दाहकुंड में कुछ युवा एक अधेड़ की देह लेकर आए थे। उन्होंने नाममात्र लकड़ियाँ लेकर अधिकांश उपलों का उपयोग किया। श्मशान का कर्मचारी समझाता रह गया, पर केवल उपलों के उपयोग से से देह के शीघ्र फुँक जाने का गणित समझा कर अग्नि देने के तुरंत बाद वे सब चलते बने।
हमें सारी तैयारी में समय लगा। दाह दिया गया। तभी साथ वाले कुंड पर दृष्टि गई तो जो दृश्य दिखा, उससे भीतर तक मन हिल गया। मानो वीभत्स और विदारक एक साथ सामने हों। उस देह का एक पाँव अधजली अवस्था में लगभग पचास अंश में ऊपर की ओर उठ गया था। अधिकांश उपलों के जल जाने के कारण देह के कुछ अन्य भाग भी दिखाई दे रहे थे।
श्मशान के कर्मचारी से सम्पर्क करने पर उसने बताया कि हर दिन ऐसे एक-दो मामले तो होते ही हैं, जिनमें परिजन तुरंत चले जाते हैं। बाद में फोन करने पर भी नहीं आते। अंतत: मृत देह का समुचित संस्कार श्मशान के कर्मचारी ही करते हैं।
लोकमान्यता है कि जिसका कोई नहीं होता, उसका भी कोई न कोई होता है। अपनी कविता ‘स्थितप्रज्ञ’ याद हो आई-
💥 स्थितप्रज्ञ 💥
शव को / जलाते हैं / दफनाते हैं,
शोक, विलाप / रुदन, प्रलाप,
अस्थियाँ, माँस, / लकड़ियाँ, बाँस,
बंद मुट्ठी लिए / आदमी का आना,
मुट्ठी भर होकर / आदमी का जाना,
सब देखते हैं /सब समझते हैं,
निष्ठा से / अपना काम करते हैं,
श्मशान के ये कर्मचारी
परायों की भीड़ में /अपनों से लगते हैं,
घर लौटकर /रोज़ाना की सारी भूमिकाएँ
आनंद से निभाते हैं / विवाह, उत्सव
पर्व, त्यौहार /सभी मनाते हैं
खाते हैं, पीते हैं / नाचते हैं, गाते हैं,
स्थितप्रज्ञता को भगवान,
मोक्षद्वार घोषित करते हैं,
संभवत: / ऐसे ही लोगों को,
स्थितप्रज्ञ कहते हैं..!
विश्वास हो गया कि जिसका कोई नहीं होता, उसका भी कोई न कोई होता है। इस स्थितप्रज्ञता को प्रणाम !
अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆
मोबाइल– 9890122603
संजयउवाच@डाटामेल.भारत
writersanjay@gmail.com
☆ आपदां अपहर्तारं ☆
नारायण साधना संपन्न हो चुकी। नई साधना की सूचना यथासमय देंगे।
अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं।
≈ संस्थापक संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
(Captain Pravin Raghuvanshi—an ex Naval Officer, possesses a multifaceted personality. He served as a Senior Advisor in prestigious Supercomputer organisation C-DAC, Pune. He was involved in various Artificial Intelligence and High-Performance Computing projects of national and international repute. He has got a long experience in the field of ‘Natural Language Processing’, especially, in the domain of Machine Translation. He has taken the mantle of translating the timeless beauties of Indian literature upon himself so that it reaches across the globe. He has also undertaken translation work for Shri Narendra Modi, the Hon’ble Prime Minister of India, which was highly appreciated by him. He is also a member of ‘Bombay Film Writer Association’.
We present Capt. Pravin Raghuvanshi ji’s amazing poem “~ The Eternal Wait…~”. We extend our heartiest thanks to the learned author Captain Pravin Raghuvanshi Ji (who is very well conversant with Hindi, Sanskrit, English and Urdu languages) and his artwork.)
~ The Eternal Wait… ~
☆
Immerse into those enigmatic eyes…
Let your soul embark upon a mystical quest…
Dive deep into the mystical depths of those gazing eyes…
(डाॅ राकेश सक्सेना जी पूर्व सदस्य हिंदी सलाहकार समिति, खान मंत्रालय, भारत सरकार, जेएलएन पी०जी० काॅलेज, एटा से हिंदी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हैं। कनाडा, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, ताशकंद आदि देशों की विदेश यात्राएँ। 07 मौलिक कृतियां, 20 सम्पादित, अनगिनत पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित. आज प्रस्तुत है आपका एक शोधपरक आलेख – पंडवानी लोकगायन की विश्वविख्यात स्वर सम्राज्ञी: तीजनबाई।)
☆ आलेख – पंडवानी लोकगायन की विश्वविख्यात स्वर सम्राज्ञी: तीजनबाई☆ डाॅ राकेश सक्सेना
लोकगायन लोककला की आवाज़ है। यदि लोककला दीवारों पर दृष्टिगोचर होती है तो लोकगायन हवा में तैरता है और सीधे दिल में उतरता है। भारत के उत्तर प्रदेश,बिहार का विरहा, राजस्थान का मांड, बंगाल का बाउल, पूर्वी भारत का सोहर, बारहमासा और छत्तीसगढ का पंडवानी आदि प्रमुख लोकगायन के अन्तर्गत आते हैं। छत्तीसगढ की सांस्कृतिक पहचान के रूप में विकसित पंडवानी मूलत: महाभारत की कथाओं का लोकगायन है। इसमें कलाकार तंबूरा हाथ में लेकर कथा का गायन करता है और पात्रों के संवादों, युद्ध प्रसंगों तथा भावनात्मक घटनाओं का अभिनय भी करता चलता है। वेदमती और कपालिक पंडवानी गायन की दो प्रमुख शैलियाँ होती हैं। वेदमती शैली में कलाकार शान्त भाव से बैठकर प्रस्तुति करता है तथा कपालिक शैली में खड़े होकर अभिनय, संवाद, नाटकीयता के साथ ऊर्जावान प्रस्तुति की जाती है। लोकगायिका तीजनबाई ने पंडवानी की इसी कपालिक शैली को अभूतपूर्व ऊँचाइयाँ प्रदान की थीं। आपका जन्म 08 अगस्त 1956 ई० को छत्तीसगढ के दुर्ग जिले के गनियारी ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम हुनुकलाल पारथी और माता का नाम सुखवती देवी था। बचपन में आपको नाना ब्रजलाल पारथी से महाभारत की कहानियाँ सुनने का शौक पैदा हुआ और वे शीघ्र ही पंडवानी ( पाण्डव कथा ) की मुरीद हो गईं। तेरह वर्ष की उम्र में आपने पहली बार सार्वजनिक रूप से पंडवानी में प्रस्तुति दी, जिसकी दर्शकों ने सराहना तो की किन्तु समाज ने इसे स्वीकार नहीं किया। विरोधस्वरूप आपको सामाजिक बहिष्कार तक झेलना पड़ा लेकिन आपने हार नहीं मानी।
तीजनबाई की सोच थी कि यदि कला ईश्वर का वरदान है तो उसे समाज के डर से छोड़ा नहीं जा सकता। इसी आत्मविश्वास को लेकर आपने कम आयु में ही छोटे-छोटे गाँवों में प्रस्तुतियाँ देना प्रारम्भ कर दिया था। उनकी गायकी में बुलंद और प्रभावशाली स्वर, महाभारत के पात्रों का जीवंत अभिनय, सहज संवाद शैली, लोकभाषा का प्रभावी प्रयोग, भावानुकूल मुख मुद्राएँ, श्रोताओं से सीधा संवाद, तंबूरा का अभिनयात्मक प्रयोग आदि प्रमुख विशेषताएँ थीं। आप तंबूरा को कभी अर्जुन का गाण्डीव, कभी भीम की गदा, कभी दुर्योधन की तलवार तो कभी रथ का प्रतीक बना दिया करतीं थीं। आपकी कला में सहजता, मौलिकता, लोकजीवन की आत्मीयता, अभिनय की प्रखरता, गायन की अद्भुत शक्ति, कथावाचन की विलक्षण क्षमता दृष्टिगोचर होती थी। महाभारत के धार्मिक आख्यानों को आप मानव जीवन के संघर्ष, न्याय-अन्याय, धर्म, साहस, कर्तव्य और नैतिक मूल्यों की कथा के रूप में व्याख्यायित किया करतीं थीं। उनकी प्रस्तुति में भीम केवल बल का प्रतीक न होकर अन्याय प्रतिरोध का स्वर, अर्जुन केवल योद्धा नहीं, कर्तव्यनिष्ठ मनुष्य का प्रतीक, द्रोपदी नारी सम्मान और स्वाभिमान की प्रतिनिधि, कृष्ण नीति,विवेक और धर्म के मार्गदर्शक के रूप में उभरते हैं। इस प्रकार मनोरंजन के साथ-साथ पंडवानी में जीवन दर्शन भी प्रस्तुत किया। अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के कारण ही तीजनबाई की ख्याति राज्य की सीमाओं से बाहर भी पहुँचने लगी। उनकी इस कला को पहचान दिलाने में अनेक सांस्कृतिक संस्थानों, संस्थाओं एवं विद्वानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शनै: शनै: राष्ट्रीय नाट्य समारोहों, संगीत महोत्सवों, लोककला उत्सवों, विश्वविद्यालयों में आकर्षण का केन्द्र बिन्दु बनने लगीं और एक दिन ऐसा आया जब आपने यूरोप, एशिया, अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, रूस आदि के सांस्कृतिक समारोहों में प्रदर्शन करके यह प्रमाणित कर दिया कि लोककला भाषाओं की सीमा से परे होती है।
तीजनबाई को कला साधना के लिए 1988 ई०में पद्मश्री, 1995ई०में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 ई० में पद्मभूषण, 2018 ई० में फुकुओका प्राइज, 2019 ई० में पद्मविभूषण आदि अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया। छत्तीसगढी लोकभाषा को वैश्विक पहचान दिलाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आज अनेक लोग पंडवानी पर शोधकार्य कर रहे हैं, नई पीढ़ी में लोकगायकी के प्रति रुचि उत्पन्न हो रही है, पंडवानी राष्ट्रीय संस्थानों तक पहुँच रही है, युवा कलाकारों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, सांस्कृतिक आयोजनों में लोककला को प्रतिष्ठा मिल रही है। इसका एक बड़ा कारण आपकी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ रहीं हैं। आपका जीवन भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। आपने सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा सामाजिक बंधनों से बड़ी होती है। यदि महिलाएँ आत्मविश्वास और परिश्रम के साथ आगे बढ़ें तो वह विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना सकतीं हैं। लोककला, संघर्ष और साधना का पर्याय ‘ तीजनबाई ‘ आज हमारे मध्य नहीं हैं। यह महान कलाकारा 05 जुलाई 2026 ई० को रायपुर के एम्स अस्पताल में सत्तर वर्ष की आयु में हम सबको अलविदा कह गईं हैं लेकिन भारतीय लोक संस्कृति के इतिहास में सशक्त संवाहिका, इस परम्परा की संरक्षिका के रूप में आप हमेशा ही अजर-अमर रहेंगी।
आँखों से काजल चुराना, मुझे तो ये मुहावरा सही नहीं लगता, और समझ में भी नहीं आता– क्या ये मुमकिन है ? वीणा ने पतिदेव से कहा, तो उनका जवाब था— तुम्हारी शंका निराधार नहीं है।
“आँखें हमारी, काजल हमारा, लगाने वाले हाथ भी हमारे, फिर आँखों को छुए बगैर, काजल कैसे चुरा सकता है कोई?
पर जानती हो – जादू भी कोई चीज है। कोई पहुँचा हुआ जादूगर ही ऐसा कर सकता है। जिसे दूसरे शब्दों में हाथ की सफाई कहते हैं। दुनिया में बहुत कुछ ऐसा होता है, जो हमारी सोच से परे होता है।
जादूगर सरकार का कारनामा देखा है। उन्हें लोग मोटे से लोहे की संदूक में बिठा देते और बाहर से भारी भरकम ताला लगाकर समुद्र में फेंक देते। वे पलक झपकते ही बाहर निकल आते थे।
अब तुम्हारी ही बात ले लो- कितनी सफाई से मेरी जेब से पैसे चुराती हो।
देखिए जी–पति की जेब किसी मंदिर से कम थोड़े ही है। उससे पैसे उड़ाने में कैसा संकोच, कैसा पाप। जब आपने उड़ाते हुये देखा ही नहीं तो इल्जाम कैसा? अब तो न्याय की देवी की आँखों से पट्टी भी हट गई है। वो तो सबूतों के बिना मानेगी नहीं।
और सबूत आपके पास हैं नहीं।
— देखो डार्लिंग, इधर उधर की बातें न करो. जेब में 200 रुपए हों और 100 गायब हो जाएं !सोचनेवाली बात ये है कि घर में तुम और मैं, मैं और तुम, तीसरा कोई नहीं। फिर—-
हँसते हुये वीणा ने कहा- डाॅगी है ना। आपका वफादार।
उसकी वफादारी और कब काम आयेगी।
–अब मुझे डाॅगी की गवाही लेनी होगी।
–देखिए जी, अपनों के पैसे अपने चुरा लें, तो उसे चोरी नहीं कहते। उसे पाप भी नहीं कहते। उसे प्यार कहते हैं।
मैंने तुम्हारा दिल चुराया था कि नहीं? तब तो तुमने चोरी का इल्जाम नहीं लगाया। लोग तो जाने क्या-क्या नहीं चुराते, चैन चुराते हैं। नज़र चुराते हैं। और तो और नींदे भी चुराते हैं। अब तो कविता कहानी चोर भी सीना ताने घूमते नज़र आते हैं।
—सब कुछ शब्दों का ही तो खेल है. इसमें महारत होनी चाहिए।
—इसका मतलब डिग्री, रसूख आवाज़, विरासत, रंगरूप, ओहदे से ज्यादा जरूरी है हाथ की सफाई।
—अब तो समझ में आ ही गया होगा। आँखों से काजल चुराना– मुहावरा यूँ ही नहीं बना।
(डॉ. रीटा अरोड़ा जी का ई-अभिव्यक्ति में हार्दिक स्वागत. सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर। समाचार पत्रों एवं पत्र-पत्रिकाओं में आपके लेख एवं कविताएं निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। आपका लेख-संग्रह ‘बांस का विवेक’हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों संस्करणों में केडीपी (KDP) पर ‘अकीरा अराता’ (AKIRA ARATA) उपनाम से प्रकाशित है। आप जनवादी लेखक संघ, हरियाणा की सक्रिय सदस्य हैं।)
☆ लघुकथा ☆ बस एक और… ☆ डॉ. रीटा अरोड़ा ☆
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“माँ, इस बार प्रमोशन मिल जाए, फिर मैं चैन से जीऊँगा,” रवि ने कहा।
एक साल बाद प्रमोशन मिल गया।
“अब क्या बात है?” माँ ने पूछा।
“बस अपना घर हो जाए, फिर कोई चिंता नहीं रहेगी।”
कुछ वर्षों बाद घर भी बन गया।
माँ ने फिर पूछा, “अब तो खुश हो?”
रवि बोला, “सोच रहा हूँ, थोड़ा बड़ा घर ले लूँ।”
माँ अलमारी से उसकी बचपन की तस्वीर निकाल लाई।
“याद है, तब तुम कहते थे—बस एक साइकिल मिल जाए, फिर कुछ नहीं चाहिए।”
रवि तस्वीर को देर तक देखता रहा।
माँ ने मुस्कुराकर कहा, “बेटा, चीज़ें बदलती रहीं, लेकिन तुम्हारा ‘बस एक और’ कभी नहीं बदला।”
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है – ग़ज़लिका – श्रमवीर।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २८५ ☆
☆ ग़ज़लिका – श्रमवीर☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆
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दिन भर ईंटें-माटी-गारा बिन बोले जो ढोता है।
चुप रह श्रम-सीकर में भीगे नहीं भाग्य को रोता है।।
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उससे कोई क्या छीनेगा, नहीं जोड़ पाता जो कुछ।
रोज उगाता फसल काट खा, बेफिक्री से सोता है।।
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कर्मवीर गीता को जीता कभी न पूजे-पढ़ता है।
रोटी-चटनी भोग लगाता, शांति न मन की खोता है।।
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है वह पत्थर लगा नींव में उस पर बनते देवालय।
पुजे दूसरा पत्थर विग्रह बन जो निष्क्रिय होता है।।
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सार्थक किसका जन्म सोचिए, जो सक्रिय या जो निष्क्रिय?
विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ?
☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (13 जुलाई से 19 जुलाई 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆
जय श्री राम। महर्षि वाल्मीकि को विश्व का पहला कवि माना जाता है और उनके द्वारा रचित रामायण विश्व का पहला महाकाव्य है। इस महाकाव्य में श्री रामचंद्र जी के पूरे जीवन चरित्र का वर्णन है और हमारे श्री हनुमान जी श्री रामचंद्र जी के सबसे बड़े भक्त हैं। श्री हनुमान जी के अंदर हमारे सभी मनोरथ अर्थात मन की समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने की क्षमता है। श्री हनुमान जी की भक्ति का सबसे बड़ा साधन श्री हनुमान चालीसा का पाठ है जिसकी आज की चौपाई है :-
और मनोरथ जो कोई लावै |
सोई अमित जीवन फल पावै ||
इस चौपाई के संपुट पाठ करने से जातक के सभी मनोरथ सिद्ध होंगे और उसकी कीर्ति हर तरफ फैलेगी।
नासे रोग हरे सब पीरा नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।
आइये अब मैं पंडित अनिल पाण्डेय आपको इस सप्ताह अर्थात 13 जुलाई से 19 जुलाई 2026 तक के सप्ताह के, ग्रहों के विचरण की जानकारी दे रहा हूं।
इस सप्ताह मंगल वृष राशि में, गुरु कर्क राशि में, शनि मीन राशि में, बुध मिथुन राशि में बक्री, शुक्र सिंह राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे।
प्रारंभ में सूर्य मिथुन राशि में रहेगा तथा 17 तारीख के 11:00 बजे दिन से कर्क राशि में प्रवेश करेगा।
आईये अब हम राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।
मेष राशि
इस सप्ताह आपका अपने भाई बहनों के साथ अच्छा संबंध रहेगा। आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होने की पूरी संभावना है। इस सप्ताह आपको कचहरी के कार्यों में सावधान रहना चाहिए। भाग्य से इस सप्ताह आपको मदद प्राप्त हो सकती है। पैसे के मामले में सावधान रहें। इस सप्ताह आपके लिए 15 और 16 तारीख कार्यों के संपन्न करने के लिए शुभ है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। 15 और 16 तारीख को आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
वृष राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का सुंदर योग है भाई बहनों के साथ अच्छे संबंध रहेंगे आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति इस सप्ताह सावधान रहना चाहिए आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति इस सप्ताह थोड़ा सावधान रहना चाहिए। आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। इस सप्ताह आपको भाग्य से ज्यादा अपने कर्म पर विश्वास करना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 17 और 18 जुलाई लाभदायक है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आपका दिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।
मिथुन राशि
इस सप्ताह आपके पास धन आने का उत्तम योग है। कचहरी के कार्यों में आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आप अपने दुश्मनों को आसानी से पराजित कर सकते हैं। भाग्य के स्थान पर कर्म पर आपको विश्वास करना चाहिए। कर्मचारी और अधिकारियों को अपने कार्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको अपना आत्मविश्वास कायम रखने का प्रयास करना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 19 जुलाई शुभ है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
कर्क राशि
जैसा कि मैं पहले से कहता आ रहा हूं यह वर्ष आपके लिए अच्छा रहेगा। आपका मानसिक स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। आपको प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त होगी। आपको अपने संतान का अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। कचहरी के कार्यों में इस सप्ताह आपको सावधान रहना चाहिए। धन आने की उम्मीद की जा सकती है परंतु बहुत कम मात्रा में धन आएगा। इस सप्ताह आप अपने शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 15 और 16 जुलाई विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयोगी है। 13 और 14 जुलाई को आपको सतर्क रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
सिंह राशि
इस सप्ताह आपको कचहरी के कार्यों में विजय प्राप्त हो सकती है, परंतु आपको बड़े सावधानीपूर्वक कार्य करना होगा। इस सप्ताह आपके पास धन लाभ होगा। व्यापारियों का व्यापार उत्तम चलेगा। कर्मचारी और अधिकारियों को इस सप्ताह बहुत सावधान रहना चाहिए। आपको अपने संतान से उत्तम सहयोग प्राप्त होगा। परीक्षाओं में छात्रों को सफलता प्राप्त होगी। इस सप्ताह आपके लिए 17 और 18 तारीख विभिन्न प्रकार से सफलता दायक है। 15 और 16 तारीख को आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन सफेद चावल का दान करें और शुक्रवार को मंदिर में जाकर पुजारी जी को सफेद वस्त्रो का दान दें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।
कन्या राशि
कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। व्यापारियों के लिए भी यह सप्ताह ठीक है। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। माता जी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। आपका या आपके जीवन साथी में से किसी एक के गर्दन या कमर में दर्द हो सकता है। आपके शत्रु शांत रहेंगे परंतु समाप्त नहीं होंगे। भाग्य के स्थान पर आपको कर्म पर विश्वास करना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 19 जुलाई फलदायक हैं। 17 और 18 तारीख को आप सावधान रहकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का तीन बार पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।
तुला राशि
कर्मचारी और अधिकारियों के लिए सप्ताह उत्तम है। उनको अपने कार्यालय में सम्मान प्राप्त होगा। भाग्य से भी इस सप्ताह आपको मदद मिल सकती है। अल्प मात्रा में धन प्राप्त हो सकता है। भाई बहनों के साथ संबंध थोड़े अच्छे और थोड़े खराब हो सकते हैं। इस सप्ताह आपको अपने संतान से मदद प्राप्त नहीं होगी। संतान को कष्ट भी हो सकता है। थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता है। इस सप्ताह आपके लिए 15 और 16 तारीख कार्यों को करने के लिए अनुकूल है। 15 और 16 तारीख को ही अधिकारी और कर्मचारियों को अपने कार्यालय में सम्मान प्राप्त हो सकता है। 19 तारीख को कोई भी कार्य करते समय आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
वृश्चिक राशि
इस सप्ताह भाग्य आपका पूर्ण रूप से साथ देगा। भाग्य के कारण आपके कई कार्य आसानी से हो जाएंगे। आपको चाहिए कि आप अपने लंबित कार्यों को इस सप्ताह करने का प्रयास करें। आपका स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। जीवनसाथी का स्वास्थ्य थोड़ा खराब हो सकता है। इस सप्ताह आपको अपने संतान से सामान्य सहयोग प्राप्त होगा। छात्रों की पढ़ाई ठीक चलेगी। इस सप्ताह आपके लिए 17 और 18 तारीख है परिणाम मूलक है। 13 और 14 तारीख को आपको होशियार होकर कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन तांबे के पात्र में जल अक्षत और लाल पुष्प लेकर भगवान सूर्य को जल अर्पण करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।
धनु राशि
इस सप्ताह आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। आपके कई कार्य अपने आत्मविश्वास के कारण ही संपन्न हो जाएंगे। लंबी यात्रा का योग भी बन सकता है। इस सप्ताह आपको अपने भाग्य से ज्यादा अपने कर्म पर विश्वास करना चाहिए। भाग्य से आपको मामूली मदद ही मिल पाएगा। व्यापारियों का व्यापार अच्छा चलेगा। अधिकारी और कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य है। विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने के लिए 13, 14 और 19 तारीख उपयुक्त हैं। आपको 15 और 16 तारीख को सजग रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।
मकर राशि
यह सप्ताह आपके जीवनसाथी के लिए उत्तम रहेगा। व्यापारियों के लिए भी यह सप्ताह अच्छा रहेगा। इस सप्ताह आपके शत्रु शांत रहेंगे, परंतु उनको समाप्त करने के लिए आपको बहुत ज्यादा प्रयास करना पड़ेगा। इस सप्ताह आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त नहीं हो पाएगा। छात्रों की पढ़ाई में बाधा पड़ेगी। भाई बहनों के साथ संबंध सामान्य रहेंगे अर्थात जैसे पहले थे वैसे ही रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 15 और 16 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों को करने के लिए प्रभावशाली हैं। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।
कुंभ राशि
अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह ठीक है। विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं। नए-नए प्रेम संबंध भी बन सकते हैं। इस सप्ताह आपको अपने संतान का सहयोग प्राप्त होगा। परीक्षाओं में छात्रों को सफलता प्राप्त होगी। इस सप्ताह आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह उत्तम है। धन आने का मामूली योग है। इस सप्ताह आपके लिए 17 और 18 जुलाई लाभदायक है। 15 और 16 तारीख को आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को निपटाना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र की तीन माला का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।
मीन राशि
यह सप्ताह आपके संतान के लिए उत्तम रहेगा। आपको अपने संतान से सहयोग भी प्राप्त होगा। छात्रों को परीक्षाओं में सफलता प्राप्त होगी। आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। आपके शत्रु इस सप्ताह आपको थोड़ा परेशान कर सकते हैं। उनसे आपको सतर्क रहना चाहिए और उनको परास्त करने का प्रयास भी करना चाहिए। कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह ठीक-ठाक है। भाग्य से आपको मामूली मदद मिल पाएगी। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 19 तारीख कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए उचित है। 17 और 18 तारीख को आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को निपटाना चाहिए। 17 और 18 तारीख को विशेष रूप से आपको अपने शत्रुओं के प्रति सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।
ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।