हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ अभी अभी # १०६८ ⇒ अट्टहास ☆ श्री प्रदीप शर्मा ☆

श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “अट्टहास ।)

?अभी अभी # १०६८ ⇒ आलेख – अट्टहास ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

(HEE HAW )

हँसने के कई तरीके होते हैं। जब हँसी छूटती है, तब वह भीड़ की तरह दिशाहीन होती है। कहीं मंद मंद हँसी, तो कहीं हँसी के फव्वारे। कभी कभी तो भरे हुए बादलों की तरह हँसी फूट पड़ती है। आखिर हँसी में ऐसा क्या है, कि जब यह वेग में होती है, तो रोके नहीं रुकती।

हमारे अंदर गम और खुशी के गोदाम हैं, आप चाहें तो उन्हें गोडाउन भी कह सकते हैं। गोदाम अक्सर भरते रहते हैं, और खाली होते रहते हैं। आजकल इन्हें कोल्ड स्टोरेज भी कहा जाने लगा है। जब चीजों के दाम बढ़ते हैं, तब गोदाम भरे रहते हैं, और जब चीज़ों के दाम घटने लगते हैं, तो गोदाम खाली होते चले जाते हैं। गोदाम का भरना और खाली होना, वस्तुओं के दाम बढ़ने और घटने, से जुड़ा रहता है। दाम के अप और डाउन होने, अर्थात् घटने बढ़ने से गोडाउन की सेहत पर असर पड़ता है।।

हँसना सेहत के लिए अच्छा है। सेहत सुधारने के लिए आजकल लोग हेल्थ क्लब की तरह लाफ्टर क्लब भी जाने लग गए हैं। रोना तो इंसान जन्मजात लेकर आया है, लेकिन वह बड़ा होकर हँसना भूल गया है। हँसने की कोचिंग क्लास है लाफिंग क्लब, जहां हँसना सिखाया जाता है।

गम के गोदाम अक्सर भरे हुए ही रहते हैं और खुशी के खाली, क्योंकि गम के खरीददार कम होते हैं, और खुशी तो इंसान हर कीमत पर खरीदने को तैयार होता है। पहले खुशी खरीदने के लिए ढेर सारा पैसा लेकर बाजार जाना पड़ता था, आजकल खुशी भी ऑनलाइन पेमेंट पर अमेजान और फ्लिपकार्ट पर चढ़कर घर चली आती है। गम पर डिस्काउंट बढ़ता जा रहा है, पर कोई खरीद नहीं रहा। खुशी, लोग खुशी खुशी अपने घर ले जा रहे हैं।।

हँसना, खुशी जाहिर करने का पारंपरिक तरीका है। यूं तो हँसी के कई भेद हैं, लेकिन प्रमुख भेद पुरुष और स्त्री की हँसी का है। महिलाएँ, हँसती नहीं, खिलखिलाती हैं। लगता है, कहीं घंटियाँ बज रही हों।

चूड़ी की खनक और पायल की झंकार उनकी हँसी में शामिल होती है, क्योंकि ईश्वर ने उनके गले में सुर और स्वर दिया है।

पुरुष का स्वर खुरदुरा होता है क्योंकि रिश्ते में वे किसी के बाप लगते हैं। जितनी मोटी आवाज़, उतनी ही मर्दानी आवाज़ और ऊपर से हँसी के ठहाके। हा, हा, हि ही और हु हू की पूरी बारहखड़ी हं, ह:, ह : ह :। बिना कुछ कहे, कहकहे ही कहकहे के ऐसे फव्वारे छूटते हैं, कि लोग भीग जाने के अंदेशे से, चार कदम दूर ही खड़े रहते हैं।।

एक और धांसू हँसी होती है, जिसे अट्टहास कहते हैं। अट्टहास शब्द से ही ऐसा प्रतीत होता है, मानो अचानक कोई चट्टान की हँसी फूट पड़ी हो। हमारे धार्मिक सीरियल में अक्सर राक्षसों को हँसते हुए दिखाया जाता है। वह हँसी थमने का नाम ही नहीं लेती। हर एक दो डायलॉग के बाद फिर वही हँसी का टेप। आप इस हँसी को अट्टहास का परिहास भी कह सकते हैं, क्योंकि इस हँसी पर किसी को हँसी नहीं आती।

कभी कभी हँसते हँसते भी, आँखों में आँसू निकल आते हैं तो कभी रोते रोते भी हँसी निकल आती है। हँसना, रोना सहजता की निशानी है। किसी बात पर हँसना, किसी घटना पर हँसना अथवा परिस्थिति पर हँसना बुरा नहीं लेकिन किसी पर हँसना मना है। जो झरने की तरह फूटे, वह हँसी। फिर चाहे वह ठहाका हो, कहकहा हो, या फिर अट्टहास। लेकिन इस बात का जरूर रखें खयाल, कोई बीमार, दुखी, लाचार ना हो आसपास।।

खुशियों में शामिल हों, लोगों को अपनी खुशी में शामिल करें। गम के गोदाम खाली पड़े रहें, खुशियों को कैद ना करें, आज़ाद करें। सुना है खुशी बांटने से बढ़ती है और हँसी की फुहार भी तो रंगबिरंगी होली की फुहार ही होती है। जिस चेहरे पर हंसी ना,

वह काहे की हसीना। अब तो हँसी ना, हँसी ना …!!

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ रुग्ण मानसिकता…! ☆ डॉ. रामेश्वरम तिवारी ☆

डॉ. रामेश्वरम तिवारी

संक्षिप्त परिचय

  • हिंदी-प्राध्यापक(सेवानिवृत्त) महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल  (म.प्र).
  • नई दुनिया, दैनिक भास्कर, वीणा, हंस, धर्मयुग, कादम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविता और लघुकथाएँ प्रकाशित। पुस्तकः कविता के ज़रिए,  मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा  – रुग्ण मानसिकता…!

☆ लघुकथा ☆ रुग्ण मानसिकता…! ☆ डॉ. रामेश्वरम तिवारी

(आज के समय में दम तोड़ती हुई संवेदना से उपजी लघुकथा…!)

 

रमिया जिन साहब के घर झाड़ू-पोंछे और बर्तन साफ़ करने का काम करती है। उनकी उम्र यही कोई अस्सी और मेम साहब की लगभग पचहत्तर की होगी। पति-पत्नी दोनों पढ़े-लिखे और सेवानिवृत्त हैं। बेटा और बेटी लक्ष्मी जी की कृपा से साधन-सम्पन्न हैं।

पिछले दिनों रमिया के साहब की आधी रात के लगभग अचानक साँस हलक में अटकने से पलक झपकते निधन हो गया। मेम साहब ने रमिया को मोबाइल लगाकर दुखद समाचार दिया कि साहब नहीं रहे हैं। वह भागी-भागी साहब के घर पहुँची और रात भर मेम साहब के आँसू पोंछती रही।

मेम साहब आँसू बहाते हुए बोली- ‘हाय राम! देख, तो री! रमिया… मेरे दाँए पड़ोसी को कैंसर और बाँए पड़ोसी को हार्ट की बीमारी है, बावजूद उनको कुछ नहीं हुआ और मेरे अच्छा-ख़ासा, खाता-पीता, चलता-फिरता आदमी मेरी आँखों के सामने चल बसा।

यह सुनकर कम पढ़ी-लिखी, पर समझदार रमिया ने अपना सर दीवार से ठोक लिया और सोचने लगी… क्या कथित शिक्षित और सभ्य कहे जाने वाले लोग ऐसी रुग्ण मानसिकता के होते हैं जो अपनों की मौत पर बीमार पड़ोसियों के मरने की कामना करते हैं…!

© डॉ. रामेश्वरम तिवारी

सम्पर्क – सागर रॉयल होम्स, होशंगाबाद रोड, भोपाल-462026

मोबाईल – 8085014478

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (10 अगस्त से 16 अगस्त 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ? 

☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (10 अगस्त से 16 अगस्त 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

जय श्री राम। गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि हनुमान जी के पास राम नाम का रसायन है। इसका अर्थ हुआ हनुमान जी के पास राम नाम रूपी दवा है। श्री हनुमान जी श्री रामचंद्र जी के सेवक हैं इसलिए उनके पास राम नामरूपी दवा है। इस दवा का उपयोग हर प्रकार के रोग में किया जा सकता है। दुनिया में सिर्फ श्रीराम नाम ही एक ऐसी दवा है जिसे सभी रोग ठीक हो जाते हैं। श्री हनुमान जी को याद करने के अद्भुत ग्रंथ श्री हनुमान चालीसा में लिखा है कि :-

राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥

इस चौपाई के संपुट पाठ करने से सभी रहस्यों की प्राप्ति होती है।

नाशे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

मैं पंडित अनिल पाण्डेय आज आपको 10 से 16 अगस्त तक के सप्ताह के साप्ताहिक राशिफल के बारे में बताऊंगा परंतु सबसे पहले इस सप्ताह के ग्रहों के विचलन के बारे में बता रहा हूं।

इस सप्ताह सूर्य, बुध और गुरु कर्क राशि में, मंगल मिथुन राशि में, शुक्र कन्या राशि में शनि मीन राशि और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे।

आईये अब राशि वार राशिफल की चर्चा करते हैं।

मेष राशि

इस सप्ताह आपको अपनी प्रतिष्ठा में वृद्धि प्राप्त होगी। अगर आप ध्यान देंगे तो प्रतिष्ठा में अधिक वृद्धि हो सकती है। आपका और आपके जीवन साथी को स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आपको अपने संतान से थोड़ा सहयोग प्राप्त होगा। कचहरी के कार्यों में आपको सावधान रहना चाहिए। आपके शत्रु शांत रहेंगे। छात्रों की पढ़ाई ठीक-ठाक चलेगी। भाई बहनों के साथ संबंधों में मामूली तनाव रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 10, 11 और 12 तारीख कार्यों करने के लिए सफलता दायक है। 15 तारीख के दोपहर के बाद से और 16 अगस्त को आपको सचेत रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

वृष राशि

यह सप्ताह आपके भाई बहनों के लिए उत्तम है। उनको प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। उनके धन में वृद्धि होगी। आपके साथ उनका संबंध अच्छा रहेगा और आपको उनका अच्छा सहयोग भी प्राप्त हो सकता है। आपका और आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। कर्मचारियों अधिकारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य रहेगा। जैसे पहले चल रहा था वैसे ही चलेगा। आपके संतान को थोड़ा कष्ट हो सकता है। छात्रों की पढ़ाई में बाधा पड़ सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 15 तारीख सफलता प्राप्त करने में मददगार है। सप्ताह के बाकी दिन पहले जैसे ही रहेंगे। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले उड़द की दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर शनि देव का पूजन करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

मिथुन राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने का सुंदर योग है। थोड़े से परिश्रम से ज्यादा धन की प्राप्ति होगी। भाग्य से इस सप्ताह आपको मदद नहीं मिल पाएगी। भाग्य के भरोसे बिल्कुल ही ना बैठे। अपने परिश्रम पर विश्वास करें। आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति इस सप्ताह सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा माता जी के स्वास्थ्य के प्रति भी आपको सतर्क रहना चाहिए। भाई बहनों के साथ संबंध पहले जैसे ही रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 15 और 16 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए मददगार है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

कर्क राशि

यह सप्ताह आपके लिए अत्यंत अच्छा हो सकता है। आपको बस परिश्रम और सही सोच के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। आपका स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भाई बहनों के स्वास्थ्य में थोड़ी कमजोरी हो सकती है। भाई बहनों से आपके प्रयासों के कारण संबंध सुधार सकते हैं। भाग्य से मामूली सहयोग प्राप्त होगा। कचहरी के कार्यों में सावधान रहें। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आप अपने दुश्मनों को साधारण से प्रयास से पराजित कर सकते हैं। इस सप्ताह आपके लिए 10, 11 और 12 तारीख विभिन्न प्रकार से लाभदायक है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनिवार के दिन दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का वाचन करें सप्ताह का शुभ दिन सोमवार है।

सिंह राशि

सही ढंग से कार्य करने पर कचहरी के कार्यों में सफलता की उम्मीद है। आपके माताजी और पिताजी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। भाग्य से मामूली मदद मिलेगी। आपके संतान को सुख प्राप्त होगा। संतान का आपको सहयोग मिलेगा। शत्रुओं को आप आसानी से हरा सकते हैं। छात्रों की पढ़ाई ठीक चलेगी। परीक्षाओं में उनको सफलता प्राप्त होगी। भाग्य के स्थान पर अपने परिश्रम पर आपको यकीन करना चाहिए। भाग्य से आपको मामूली मदद ही मिल पाएगी। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 15 तारीख फलदायक है। 10, 11 और 12 तारीख को आपको सावधानी के साथ सचेत रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

कन्या राशि

अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह ठीक है। विवाह के उत्तम प्रस्ताव आएंगे। प्रेम संबंधों में वृद्धि भी संभव है। नए प्रेम संबंध भी बन सकते हैं। धन आने का अच्छा योग है। व्यापार में आपको लाभ होगा। व्यापारियों के लिए सप्ताह ठीक रहेगा। कर्मचारी एवं अधिकारियों को इस सप्ताह बहुत ध्यानपूर्वक कार्य करना चाहिए। इस सप्ताह आपके शत्रु शांत रहेंगे परंतु समाप्त नहीं होंगे। आपके माता जी का और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 15 तारीख के दोपहर के बाद का समय तथा 16 तारीख अनुकूल है। 13, 14 और 15 के दोपहर तक का समय सचेत रहने का है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

तुला राशि

अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। उनको अपने अधिकारियों की प्रशंसा प्राप्त होगी। कार्यालय में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। उनको अच्छे प्रोजेक्ट मिल सकते हैं। कचहरी के कार्यों में सावधान रहें। सफलता मिल सकती है। इस सप्ताह आपके शत्रु शांत रहेंगे परंतु परास्त नहीं होंगे। भाग्य से आपको इस सप्ताह मदद मिलने की उम्मीद नहीं है। आपको अपने कर्म पर विश्वास करना पड़ेगा। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक-ठाक रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 10, 11 और 12 तारीख परिणाम दायक है। 15 और 16 तारीख को आपको सजग रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

वृश्चिक राशि

इस सप्ताह आपको अपने भाग्य से अच्छी मदद प्राप्त होगी। भाग्य से आपके कई कार्य हो सकते हैं। इस सप्ताह आपको अपने भाग्य पर अपने परिश्रम के साथ भरोसा करना चाहिए। दुर्घटनाओं से आपको सावधान रहना चाहिए। आपको अपने प्रतिष्ठा के प्रति भी इस सप्ताह थोड़ा सावधान रहना चाहिए। धन प्राप्ति हेतु बहुत ज्यादा प्रयास करना इस सप्ताह आपके लिए हानिप्रद हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 15 तारीख शुभ है। सप्ताह के बाकी दिन ठीक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

धनु राशि

इस सप्ताह आपको दुर्घटनाओं से डरने की विशेष आवश्यकता नहीं है। दुर्घटनाओं में आपको कोई नुकसान नहीं होगा। लंबी यात्रा का योग बन सकता है। कर्मचारी एवं अधिकारियों को इस सप्ताह सतर्क रहकर कार्य करना चाहिए। आपका स्वास्थ्य इस सप्ताह उत्तम रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 15 और 16 तारीख कार्यों को करने के लिए लाभप्रद है। 10, 11 और 12 तारीख को आपको सतर्क रहकर अपने कार्यों को मुस्तैदी से करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

मकर राशि

यह सप्ताह आपके जीवन साथी के लिए अत्यंत सुंदर रहेगा। उनके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। उनको ऐश्वर्य और वैभव प्राप्त होगा। उनकी मानसिक स्थिति भी अत्यंत अच्छी रहेगी। इस सप्ताह आप अपने शत्रुओं को आसानी से परास्त कर सकते हैं। भाग्य आपको कुछ विशेष ढंग से मदद करेगा। भाग्य की मदद आपको सीधे-सीधे प्राप्त नहीं होगी। परंतु आपके कई कार्य अच्छे भाग्य के कारण हो जाएंगे। व्यापारियों का व्यापार ठीक चलेगा। आपका और आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। माता और पिताजी का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 10, 11 और 12 तारीख विशेष रूप से परिणाम मूलक है। 13, 14 और 15 तारीख को आपको सजगता के साथ अपने कार्यों को अंजाम देना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

कुंभ राशि

इस सप्ताह आप अपने शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। उनको समाप्त करने के लिए आपको प्रयास करने चाहिए। आपके प्रयासों को सफलता प्राप्त होगी। कचहरी के कार्यों में आपको थोड़ी बहुत सफलता प्राप्त हो सकती है। परंतु सावधानी आवश्यक है। धन आने का योग है। दुर्घटनाओं से आप इस सप्ताह बाल बाल बचेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 13, 14 और 15 तारीख के दोपहर तक का समय उत्तम है। सप्ताह के बाकी दोनों में आपको सावधान रहकर कार्य करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन शुक्रवार है।

मीन राशि

 यह सप्ताह आपके संतान के लिए उत्तम रहेगा। उनको प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। अगर वह नौकरी में है तो वहां उनको अच्छा प्रोजेक्ट या अच्छी सीट मिल सकती है। विवाह के प्रस्ताव के बारे में इस सप्ताह आपको सतर्क रहना चाहिए। कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। धन आने की उम्मीद की जा सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 15 की दोपहर के बाद से लेकर और 16 तारीख प्रभावशाली है। 13, 14 और 15 की दोपहर तक आपको सतर्क रहकर कार्य करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।

 राशि चिन्ह साभार – List Of Zodiac Signs In Marathi | बारा राशी नावे व चिन्हे (lovequotesking.com)

निवेदक:-

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

(प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री)

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल 

संपर्क – साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया, सागर- 470004 मध्यप्रदेश 

मो – 8959594400

ईमेल – 

यूट्यूब चैनल >> आसरा ज्योतिष 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ शशि साहित्य # ३४ – कविता – राधा कृष्ण प्रीत… ☆ श्रीमती शशि सराफ ☆

श्रीमती शशि सराफ

(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘मधुमास।)

☆ शशि साहित्य # ३४ ☆

? कविता – मधुमास…  ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ  ? ?

रूप सजा वसुधा का दुल्हन सा,

बलिहारी हो रहे ऋतुराज…

बदरा भी रिमझिम हुए,

हरियाली का है राज…

*

टिप टिप करती बूंदनियां,

ज्यों बजे कहीं पर साज…

भावुक मन में उठे हिलोरें,

बतलाओ क्या है राज…

*

प्रकृति खिलखिला उठी,

पहन लिया  सौंदर्य का ताज…

ना बोलो कुछ कठोर बोल,

दिल पर गिरे है गाज…

*

बूंदों संग खुशियां बरसें,

छाया मधुमास है आज…

© श्रीमती शशि सराफ

जबलपुर, मध्यप्रदेश 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – विविधा ☆ मला समजलेली संत तुकारामांची अभंग गाथा… भाग – ३२ ☆ अरुणा मुल्हेरकर ☆

अरुणा मुल्हेरकर

? विविधा ?

☆ मला समजलेली संत तुकारामांची अभंग गाथा… भाग – ३२ ☆ अरुणा मुल्हेरकर ☆

समर्पण (२)

पांडुरंगाची भक्ती करताना संत तुकाराम भगवंताच्या पायी लीन झाले आहेत, त्यांची देह बुद्धी नष्ट होऊन परमेश्वराशी त्यांनी स्वतःला कसे समर्पित केले आहे याविषयीचे काही अभंग मागील लेखात आपण पाहिले. आज आणखी काही अभंगांचा परामर्श घेऊ.

महाराजांना चोहीकडे एका परमेश्वराचेच रूप दिसत आहे, त्याचाच आवाज त्याला ऐकू येत आहे. ते देवाला म्हणतात…

ध्याईन तुझे रूप/ गाईन तुझे नाम/

आन न करी काम/ जिव्हा मुखे//

पाहिन तुझे पाय/ ठेवीन मी डोई/

पृथक ते काही/ न करी आन//

तुझेचि गुण नाद/ आईकेन कानी/

आणिकांची वाणी/ पुरे आता//

करीन मी सेवा करे/ चालेन मी पायी/

आणिक न वजे ठायी/ तुजविण//

तुका म्हणे जीव/ ठेवीन मी पायी/

आणिक ते काही/ देऊ कवणा//

हे देवा मी सदैव तुझेच रूप माझ्या डोळ्याने पाहत राहीन आणि तुझेच नाम सतत गात राहीन. माझ्या जिभेवर दुसरे काहीच येणार नाही. माझ्या डोळ्यांनी फक्त तुझे पाय मी पाहीन आणि त्यावरच माझे मस्तक ठेवीन.

त्याशिवाय दुसरे काही करणार नाही. तुझे गुणगान ऐकत राहीन, बाकी काही बडबड करणार नाही. तुझ्याकडे पायी चालत येईन आणि या माझ्या हाताने तुझी सेवा करीन. तुला सोडून दुसरीकडे कोठेही मी जाणार नाही. हा माझा जीव तुझ्या चरणी अर्पण करीन. आता दुसऱ्या कुणाला देण्यासाठी माझ्याकडे काही उरले नाही. हरीनामा- व्यतिरिक्त तुकारामांकडे काही नव्हते, ते हरिमय झाले होते.

एका विठू माऊलीला शरण गेल्याने भक्ताचा कसा फायदा होतो ते महाराज या अभंगात सांगत आहेत.

भावे ऐसा नाश/ अवघिया  दिला त्रास/

अविटाचा केला संग / सर्व भोगी पांडुरंग//

आइताच पाक/ संयोगाचा सकळीका/

तुका म्हणे धणी / सीमा राहिली होऊनी//

आज पर्यंत मी दुसऱ्यांना जो काही त्रास दिला असेल आणि त्यामुळे मला जे पाप लागले असेल, ते या पांडुरंगाला शरण गेल्यामुळे आता नष्ट होईल. कारण त्याच्या अवीट भक्तीमुळे मला त्याचा संग लागला आहे आणि माझी सर्व सुखदुःखे तो एक पांडुरंग आता भोगत आहे. तुकाराम महाराजांना हेच सांगायचे आहे की हरिभक्तीत लीन झाल्यामुळे भक्ताला सुखदुःखाची जाणीव राहत नाही. कोणत्याही परिस्थितीत, चांगली अथवा वाईट त्याचा समभाव राहतो.

तुकाराम सांगतात की अन्नाचा दुष्काळ पडला आहे किंवा त्यांना फार भूक लागली आहे म्हणून ते अन्न सेवन करत नाहीत, तर सर्वसाक्षी जनार्दनाचा मान राखण्यासाठी ते भोजन करतात. बालका बरोबर जर ते जेवावयास बसले तर त्यांना असे जाणवते की आमचा पिताच आम्हाला मोठ्या प्रेमाने भरवीत आहे.

चांगली आणि वाईट दोन्ही कर्मे जेथे जळून जातात ते आत्मपद महाराजांना प्राप्त झाले आहे. मी कोणी नसून कर्ता- करविता तोच एक नियंता आहे याची अनुभूती त्यांना आलेली आहे.

तुकारामांच्या मनाची ही अवस्था ते या अभंगातून कशी व्यक्त करत आहेत ते बघा.

जे जे काही करितो देवा/ ते ते सेवा समर्पे//

भेद नाही सर्वात्मना/ नारायणा तुज मज //

आम्ही दुजे नेणो कोणा/ हेचि मना मन साक्ष/

तुका म्हणे जगन्नाथा/ हे अन्यथा नव्हे की//

ते जे जे काही कर्म करतात ते ते सर्व एका नारायणाला समर्पित करायचे या एका मनोभूमीकेतून. सर्वात्मक सर्वेश्वर आणि तुकाराम महाराज स्वतः यात तो आणि मी असा जराही भेद आता राहिलेला नाही. त्यांचे मनच या स्थितीला साक्षी आहे. ते पुन्हा पुन्हा सांगतात, ” हे जगन्नाथा, मी हे जे सांगतो आहे ते पूर्ण सत्य आहे, यात जराही खोटेपणा नाही.”

लोहचुंबकाच्या बळे/ उभे राहिले निराळे/

तैसा तूचि आम्हा ठाई/ खेळतासी अंतर्बाही //

भक्ष अग्नीचा तो दोरा/ त्यासी वाचवी मोहरा/

तुका म्हणे अधीलपणे/ नेली लाकडे चंदने//

नारायणाच्या संगतीने भक्त कसा परमेश्वराशी एकरूप होतो हे तुकाराम महाराजांनी वरील अभंगात काही उदाहरणे देऊन स्पष्ट केले आहे.

चुंबकाच्या आकर्षणाने लोखंडाची सुई उभी राहते, तसा परमेश्वर भक्तांच्या अंतर्बाह्य उभा आहे. धाग्याचा धर्म आगीने जळण्याचा असतो, परंतु तोच धागा मोहरा नामक खड्याला गुंडाळून अग्नीत टाकला तर जळत नाही. चंदनाच्या संगतीने इतर वृक्षांचे गुणधर्म जाऊन त्यांना चंदनाचा सुगंधी गुण येतो. सत्संग किती महत्त्वाचा आहे ही गोष्ट या उदाहरणांवरून आपल्या लक्षात येते. तात्पर्य, देवाच्या संगतीने भक्त आमुलाग्र बदलतो.

समर्पणाविषयी अनेक अभंग आपल्याला गाथेत आढळतात. मला असे वाटते की या सर्व अभंगांचा आपण अभ्यास करावा. चांगल्या वाचनाने आपल्यावरही चांगले संस्कार होऊन उचित परिणाम होऊ शकतो. यास्तव पुढील लेखात समर्पणाविषयीचे आणखी काही अभंग आपण अवश्य विवेचनासाठी घेऊ.

क्रमशः… ३२

© अरुणा मुल्हेरकर 

डेट्राॅईट (मिशिगन) यू.एस्.ए.

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर ≈

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मराठी साहित्य – वाचताना वेचलेले ☆ विषप्रयोग… लेखक : सुरेश नाईक ☆ प्रस्तुती : उषा नाईक ☆

उषा नाईक

📖 वाचताना वेचलेले 📖

☆ विषप्रयोग… लेखक : सुरेश नाईक ☆ प्रस्तुती : उषा नाईक ☆

Wish You..

– GoodMorning

– GoodAfternoon

– GoodEvening

– Happy Birthday

– Happy Anniversary

– Happy Journey

– Happy Stay

यासारखे विष-प्रयोग सकाळी उठल्यापासून ते रात्री झोपेपर्यंत आपले अनेक नातेवाईक, इष्ट मित्र-मैत्रिणी, सहाध्यायी, बरोबर काम करणारी मंडळी व्हॉट्सॲपवर करीत असतात व त्यांना. उत्तर म्हणून आपणही असेच प्रति-विषप्रयोग त्यांच्यावर करीत असतो..

हा सगळा विषप्रयोग आपल्या मंडळींनी पाश्चिमात्यांकडून उचलला आहे. बऱ्याच पाश्चिमात्य देशात हवामान अत्यंत लहरी असते. एका दिवसात अनेकदा ऊन-पाऊस, गोठवणारी थंडी, घोंघावता वारा या सर्वांचा प्रसाद मिळू शकतो.. त्यातूनच सकाळी-सकाळी आपल्या आप्तेष्टांना आजची सकाळ, आजचा दिवस आपल्याला सुखकारक जावो अशा शुभकामना देण्याचा प्रघात पडला. आपल्या देशातील हवामान दिवसात फारसे बदलत नसते. त्यामुळे अशा शुभकामना देणे यथोचित वाटत नाही.

वैश्विक मायाजाळातून फारशी तोशीस न घेता शोधून फुले, फुलांचे ताटवे यांचे रतीब घालणारे या विष-प्रयोगाबरोबरच कळत-नकळत अनेक वेळा त्या सोबत व्हायरस पाठवत असतात. मुख्य म्हणजे त्यामुळे फोनमधील बरीच मेमरी व डाटा खर्ची पडतो.. – परत हे सगळे कोमेजलेले फुलांचे ताटवे मेमरीमधून काढून टाकण्याची कसरतसुध्दा करावी लागते..

कळत-नकळत असे विषप्रयोग करणाऱ्या मंडळींचे, त्यांनी न मागता केलेले हे प्रबोधन!

लेखक – सुरेश नाईक

प्रस्तुती :  उषा नाईक

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि – ह्रास ☆ श्री संजय भारद्वाज ☆

श्री संजय भारद्वाज

(श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं।)

? संजय दृष्टि – ह्रास ? ?

इसने कहा,

उसके भीतर

कुछ कम हो रहा है,

उसने कहा,

उसके भीतर

कुछ कम हो रहा है,

सबने कहा,

सबके भीतर

कुछ कम हो रहा है,

हरेक को भीतर

कुछ कम होने का भास है,

मनुज! संभवत: यही

मनुष्यता का ह्रास है..!

?

© संजय भारद्वाज   

14 जुलाई 2020प्रात: 11:13 बजे

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर संपादक– हम लोग पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

☆ आपदां अपहर्तारं ☆

गुरु साधना 19 जुलाई से बुधवार 29 जुलाई तक चलेगी। 🕉️ 

इसका मंत्र होगा-

ॐ गुं गुरुभ्यो नम:

(उच्चारण- ओम गुम गुरुभ्यो नमह)

💥 आप अपने गुरु / मानस गुरु / मार्गदर्शक / माता /पिता / प्रेरक व्यक्तित्व आदि जिस किसी में भी आपकी श्रद्धा हो, को स्मरण कर इस मंत्र का पाठ कर सकते हैं। यदि ऐसा कोई व्यक्तित्व आपके जीवन में नहीं है तो भी अपनी सैद्धांतिक / वैचारिक प्रतिबद्धता को यह मंत्र समर्पित कर सकते हैं। सनातन ठहराव नहीं बहाव है। अतः प्रवाह की दिशा स्वयं तय करें। 💥

इसके साथ नीचे दिए श्लोक का भी अपनी सुविधा के अनुसार 11 /21 /31 /51 बार पाठ करें। 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

संस्थापक संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – इंद्रधनुष्य ☆ श्री रविंद्रनाथ टागोर यांची “गीतांजली”… भाग –३३ ☆ डॉ. शोभना आगाशे ☆

डॉ. शोभना आगाशे

? इंद्रधनुष्य ?

☆ श्री रविंद्रनाथ टागोर यांची “गीतांजली”… भाग – ३३ ☆ डॉ. शोभना आगाशे ☆

श्री रविंद्रनाथ टागोर  

गीतांजलीत प्रकट झालेले टागोरांचे मृत्यू विषयक विचार :-

गीतांजलीतील बहुतांश कवितांमध्ये टागोरांनी आपले मृत्यू विषयक विचार मांडलेले आहेत. ते मृत्यूचं स्वागत करतात आणि तेही अत्यंत संयतपणे व सौहार्दपूर्ण रितीने! मृत्यू अटळ आहे म्हणून तो आनंदाने स्वीकारायचा, असं नाही तर ती एक आनंददायक व हवीहवीशी वाटणारी घटना आहे असं त्यांना वाटतं व म्हणून ते मृत्यूची वाट बघतात. मृत्यू नंतर परमेश्वरासारखा जिवलग सखा भेटणार म्हणून ते आनंदित होतात. मृत्यू मधेच जीवनाची इतिकर्तव्यता आहे असं ते मानतात.

आत्म्याला सुखावणारी एकमेव गोष्ट म्हणजे मृत्यू! त्यानंतर ‘पुनरपि जननम् ‘ वाटणीला येईल की, मोक्ष मिळून परमेश्वरा बरोबर एकरूपता मिळेल हे टागोरांना महत्वाचे वाटत नाही. गीत क्र. ३४ मधे तर ते देवाला म्हणतात की, “मला मुक्ती नकोच कारण तुझ्यापासून वेगळा असेन तरच मी तुला डोळे भरून पाहू शकेन, तुझ्यावर भरभरून प्रेम करू शकेन. तुझी सेवा करण्याची संधी मला मिळेल. तू माझा आहेस हे मला सर्वांना अभिमानाने दाखविता येईल. “

पुनःपुन्हा मिळणाऱ्या जीवनासाठी टागोर कृतज्ञ आहेत. गीतांजलीतील अनेक कवितांमधून त्यांनी ‘जीवन मृत्यूच्या चक्रा’ विषयी भाष्य केलं आहे. ते म्हणतात, “जीवन व मृत्यू दोन्ही चिरंतन आहेत कारण जीवना नंतर मृत्यू आला तरी मृत्यूनंतर पुन्हा जीवन अटळ आहे. आणि जर मोक्षप्राप्ती झाली तर मृत्यूपश्चात मृत्यूचे भयच रहात नाही. ” 

एका गीतात (क्र. ९५) आईचं दूध पिणाऱ्या बालकाचे उदाहरण देऊन ते सांगतात की, “आई बाळाला उजव्या स्तनाकडून डाव्या स्तनाकडे नेते तेंव्हा ते बाळ रडू लागते. त्याला हे कळत नाही की, दुसऱ्या बाजूचे दूध त्याला मिळणारच आहे. तद्वतच माणसाला मृत्यूची भीती सतावत असते आणि मृत्यूनंतर पुन्हा जीवन मिळणारच आहे, हे तो विसरतो. “

मराठी संतांनी देवाच्या सहवासाची तुलना माहेरपणाशी केली आहे तर टागोर देवाच्या चिरंतन सहवासाची तुलना सासरी होणाऱ्या पतीच्या अखंड सहवासाशी करतात. एके ठिकाणी (गीत क्र. ९४) ते म्हणतात, “मृत्यूनंतर मी पतीगृही जाईन, तिथे ग्रह तारे माझं स्वागत करतील व पतीबरोबर एकांती भेट झाल्यानंतर, मीलन झाल्यानंतर माझं स्वतंत्र अस्तित्वच राहणार नाही. जीव शिव एकरूप होऊन जातील. “

एका कवितेत (९०) ते म्हणतात की, ” जर मृत्यू (यम) माझ्या दारात अतिथी म्हणून आला तर मी त्याला दार दडपून हाकलून देणार नाही तर त्याचं मी आदरातिथ्य करेन. माझ्या जवळच्या सर्व ऐहिक गोष्टी त्याला देईन व माझे प्राण त्याच्या स्वाधीन करीन. कारण आपल्याला सर्वात प्रिय असलेल्या गोष्टीचं दान देण्याची शिकवण मला माझ्या संस्कृतीने दिली आहे.

कधी ते देवाला आपला प्रियकर मानून (गीत क्र. ९१) त्याला सांगतात की, “तुझ्या भेटीची आस मनात बाळगूनच मी हे जीवन व्यतीत केलं आहे. तुझ्याकडे जाण्यासाठी मी इथले सगळे पाश हळूहळू तोडत आलो आहे. आता तुझी भेट हीच माझी अंतिम आस आहे. ते म्हणतात जीवनाचा संघर्ष आता मला निष्फळ वाटतो आहे. (गीत क्र. ९९) जीवनाच्या ऐलतीरावरून मृत्यूच्या पैलतीरापर्यंत ही आयुष्याची होडी वल्हवणं आता मला शक्य नाही. तेव्हा तूच मला आता पैलतीरावर घेऊन जा. अन्यथा मी हे सुकाणू सोडून देईन म्हणतो. “

एके ठिकाणी (गीत क्र. ९२) ते म्हणतात, “जीवन हे एक नाटक आहे. शेवटच्या अंकानंतर पडदा पडेल व मृत्यूनेच उजळलेलं तुझं अमर्त्य जग मला मिळेल. इथे कसलाही भेदभाव नाही, काळाचा अडसर नाही, उभ्या जन्माच्या देण्या घेण्याचा हिशेब, कामना, वासनांची लक्तरे या नश्वर जगातच टाकून देऊन तुझ्या अमर्त्य जगात मी प्रवेश करीन.

मित्र, आप्तेष्ट, सगेसोयरे सर्वांचा निरोप घेऊन (गीत क्र. ९३) ते आपल्या चुकांबद्दल क्षमा मागतात व या अंतिम प्रवासाला निघताना त्यांच्या प्रेमाची शिदोरी सोबत घेऊन जाण्याची इच्छा व्यक्त करतात.

—–

गीत : ९७

WHEN my play was with thee I never questioned who thou wert. I knew nor shyness nor fear, my life was boisterous.

In the early morning thou wouldst call me from my sleep like my own comrade and lead 

me running from glade to glade.

On those days I never cared to know the meaning of songs thou sangest to me. Only 

my voice took up the tunes, and my heart danced in their cadence.

Now, when the playtime is over, what is this sudden sight that is come upon me? The 

world with eyes bent upon thy feet stands in awe with all its silent stars.

—–

 मराठी भावानुवाद : गीत : ९७

खेळगडी तू माझा

परि ठाऊक नसे

मज गांव तुझा,

नावही माहित नसे

तुझ्यासोबत परि

कसली भीती नसे

जीवन आनंदमय,

बुजरेपणा नसे

प्रभातीच तू यावे,

सोबत मज न्यावे

वनीरानी फिरवावे,

सुहृद सखा व्हावे

सोबतीने फिरतांना,

ऐकविसी मज गाना

अर्थ ठाऊक नसे मना

ऐकून त्या सूर ताना,

मनमोर नाचतांना

बाल्य सरे जेधवा

उमगे मज तेधवा,

नभ, धरा अन् तारे

आणि तसे जग सारे

नतमस्तक, आदरे

चरण तुझे स्पर्शत रे!

भावानुवाद © शोभना आगाशे

संपर्क: ९८५०२२८६५८

—–

 गीत : ९८

 WILL deck thee with trophies, garlands of my defeat. It is never in my power to escape 

unconquered.

I surely know my pride will go to the wall, my life will burst its bonds in exceeding pain, and my empty heart will sob out in music like a hollow reed, and the stone will melt in tears.

I surely know the hundred petals of a lotus will not remain closed for ever and the secret recess of its honey will be bared.

From the blue sky an eye shall gaze upon me and summon me in silence. Nothing will 

be left for me, nothing whatever, and utter death shall I receive at thy feet.

—–

मराठी भावानुवाद : गीत : ९८

पराभूत मी असे जीवनी

अजिंक्य नसणे सत्य जाणुनि

आलो शरण पायी तुझ्या मी

स्वाभिमानास त्यागुनि॥

*
वेदनांचा विस्फोट होता

हुंदके मम हृदयी दाटता

वेळूही शोकात्म सूर दे

खडकालाही पाझर फुटता॥

*
एक आशा तेवतसे पण

मिटले कमल उमलेल तो क्षण

तुझ्या कृपेचा मधु मिळे मग

वाट पाहतो माझा कण कण॥

*

नील गगनातून कोणी

पाहतसे मज क्षणोक्षणी

पाठवील संदेश मूक तो

मुदित होईन मनोमनी॥

`*

मृत्यू विना नच कांही मागीन

अन्य कांही नकोच सांगीन

तुझिया पदांशी करित समर्पण

चिद्शांतीने तव मुख पाहीन॥

भावानुवाद © शोभना आगाशे

संपर्क: ९४५०२२८६५८

—–

गीत : ९९

WHEN I give up the helm I know that the time has come for thee to take it. What there is to do will be instantly done. Vain is this struggle.

Then take away your hands and silently put up with your defeat, my heart, and think it your good fortune to sit perfectly still where you are placed.

These my lamps are blown out at every little puff of wind, and trying to light them I forget 

all else again and again.

But I shall be wise this time and wait in the dark, spreading my mat on the floor; and 

whenever it is thy pleasure, my lord, come silently and take thy seat here.

—–

मराठी भावानुवाद : गीत : ९९

जीवन नौका मी वल्हवितो

सोडून देईन सुकाणू म्हणतो 

*

संघर्षही आता वाटे निष्फळ 

दूर किनारा, तूच ने जवळ

*

नाही जर का हे तुज साध्य 

पराभव तुझा करी तू मान्य

*

शांत आणि मग तुझ्या मंदिरी

दगडी मूर्तीत रहा दगडापरी

*

विझवे दीपक, वार्‍याची फुंकर

पुनःपुन्हा मी लावी तो शुभंकर

*

कळले आता कशास लावू?

अंधारतचि पथारी पसरू

*

जेंव्हा तुजला वाटे येशील

मजपाशी अंधारी बसशील

– क्रमशः भाग ३३..

मूळ इंग्लिश काव्य : श्री. रविंद्रनाथ टागोर.

भावानुवाद : कवयित्री : © शोभना आगाशे

सांगली 

दूरभाष क्र. ९८५०२२८६५८

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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हिंदी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ प्रतुल साहित्य # ३३ – हास्य-व्यंग्य – “सदा दौड़ता रहता है नेता” ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆

श्री प्रतुल श्रीवास्तव 

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक श्री प्रतुल श्रीवास्तव, भाषा विज्ञान एवं बुन्देली लोक साहित्य के मूर्धन्य विद्वान, शिक्षाविद् स्व.डॉ.पूरनचंद श्रीवास्तव के यशस्वी पुत्र हैं। हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रतुल श्रीवास्तव का नाम जाना पहचाना है। इन्होंने दैनिक हितवाद, ज्ञानयुग प्रभात, नवभारत, देशबंधु, स्वतंत्रमत, हरिभूमि एवं पीपुल्स समाचार पत्रों के संपादकीय विभाग में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। साहित्यिक पत्रिका “अनुमेहा” के प्रधान संपादक के रूप में इन्होंने उसे हिंदी साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान दी। आपके सैकड़ों लेख एवं व्यंग्य देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आपके द्वारा रचित अनेक देवी स्तुतियाँ एवं प्रेम गीत भी चर्चित हैं। नागपुर, भोपाल एवं जबलपुर आकाशवाणी ने विभिन्न विषयों पर आपकी दर्जनों वार्ताओं का प्रसारण किया। प्रतुल जी ने भगवान रजनीश ‘ओशो’ एवं महर्षि महेश योगी सहित अनेक विभूतियों एवं समस्याओं पर डाक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्माण भी किया। आपकी सहज-सरल चुटीली शैली पाठकों को उनकी रचनाएं एक ही बैठक में पढ़ने के लिए बाध्य करती हैं।

प्रकाशित पुस्तकें –ο यादों का मायाजाल ο अलसेट (हास्य-व्यंग्य) ο आखिरी कोना (हास्य-व्यंग्य) ο तिरछी नज़र (हास्य-व्यंग्य) ο मौन

आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय व्यंग्य  सदा दौड़ता रहता है नेता

साप्ताहिक स्तम्भ ☆ प्रतुल साहित्य # ३३ 

☆ व्यंग्य ☆ “सदा दौड़ता रहता है नेता” ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव

हाल ही में एक मंत्री जी को मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर पर सवार होने के लिए पूरी ताकत से दौड़ लगाना पड़ी। मंत्री जी को दौड़ता देख कर उनके साथ उनके सुरक्षाकर्मी भी दौड़े। मंत्री जी की दौड़ काम आई और वे हेलीकॉप्टर उड़ने के पहले उसमें सवार होने में सफल हो गए। मंत्री जी को दौड़ता हुआ देखकर लोग हंसते हुए उनका मजाक उड़ाने लगे। अरे मौका आने पर सभी अपनी छूटती गाड़ी पकड़ने के लिए दौड़ते हैं। इसमें हंसने वाली क्या बात है? और नेता की दौड़ तो कभी खतम नहीं होती।

नेता के लिए आराम हराम है, इक मंजिल मिलते ही दूसरी दौड़ शुरू हो जाती है।

 नेता बनने के लिए क्या – क्या नहीं करना पड़ता। दिन का चैन और रात की नींद हराम करना पड़ती है, पहले बड़े नेताओं के पीछे उनसे अपनी पहचान बनाने दौड़ो फिर उनका खास चमचा बनने दौड़ो, अपने फोटो और समाचार छपवाने पत्रकारों के पीछे दौड़ो। पार्टी से टिकट लेने के लिए फिर चुनाव प्रचार के लिए दौड़ो। आजकल वोटर समझदार हो गए हैं, शाद उदयपुरी कहते हैं –

किसको दूं मैं वोट यहां पर,

सबके भीतर खोट यहां पर।

जीत गए तो मंत्री बनने के लिए दौड़, मंत्री बन गए तो मंत्री बने रहने के लिए फिर मलाईदार विभाग के मंत्री पद को हथियाने के लिए और पुनः – पुनः चुनाव जीतने के लिए। आगे मुख्यमंत्री, राज्यसभा या लोकसभा में पहुंचने और केंद्रीय मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की आकांक्षा को लेकर नेताओं की अथक दौड़ जारी रहती है। बिना दौड़े नेतागिरी में सफलता संभव नहीं। … और दौड़ भी अपने समकक्ष नेताओं को धकियाते – गिराते हुए उनसे तेज। आप ध्यान से देखेंगे तो आपको हर छोटा – बड़ा नेता दौड़ता, अपने प्रतियोगी नेताओं को टांग मारता हुआ नजर आएगा।

नेतागिरी में सब जायज़ है,

कुछ भी कर, अपना रास्ता साफ कर।

जो दौड़ में थका – हारा उसका नेतागिरी का कैरियर खत्म। समाज सेवा का झंडा थामे राजनीति के पथ पर दौड़कर सफल होने वाले सभी नेताओं को बहुत बहुत बधाई। नेता बनने के इच्छुक बेरोजगारों को मेरी समझाइश है कि सेवा के नाम पर नेतागिरी को जीवन यापन का साधन बनाने की कोशिश तभी करें जब आजीवन दौड़ते रहने तैयार हों वरना कोई और काम देखलें।

© श्री प्रतुल श्रीवास्तव 

संपर्क – 473, टीचर्स कालोनी, दीक्षितपुरा, जबलपुर – पिन – 482002 मो. 9425153629

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य # २७० – बारिश ☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ ☆

श्रीमती  सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’

(संस्कारधानी जबलपुर की श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ जी की लघुकथाओं, कविता /गीत का अपना संसार है। साप्ताहिक स्तम्भ – श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य शृंखला में आज प्रस्तुत है स्त्री विमर्श पर आधारित विचारणीय लघुकथा “बारिश”।) 

☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य # २७०  ☆

🌻 अति लघु कथा (अ ल क) 🌻 🌧️बारिश🌧️

आज बारिश की बूँदों ने श्रेया के मन में ही नही, तन को भी फफोले बना रही थी। तेज, तर्रार, तीखे नयन नक्श, चुल्हे के जैसी धधकी ज्वाला जिसे अनजाने में ही किसी ने सुलगती धुंआ- धुंआ कर डाला।

© श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’

जबलपुर, मध्य प्रदेश

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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