स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”
(संस्कारधानी जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया। वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है, आपके काव्य संग्रह ‘शब्द नहीं रहे शब्द‘ की एक भावप्रवण कविता – अधिनायक वादी प्रजातंत्र…।)
साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २५९ – अधिनायक वादी प्रजातंत्र
(काव्य संग्रह – शब्द नहीं रहे शब्द से )
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प्रजातंत्र में
प्रजा ने जिसे चुना
हमने उसे गुना ।
यह क्या
विदेशी वेशभूषा
और
अधिनायकवादी स्वर ।
हम उसे उखाड़ देंगे
उसे पछाड़ देंगे
उच्च स्वर में कहेंगे
केवल हम ही रहेंगे
इस बस्ती में रहेंगे वे
जो हमारा आदेश मानेंगे
हमें सहेंगे।
क्या किसी के पास है
इस कालिया के काटे का मंत्र
आखिर कब तक चलेगा
यह अधिनायकवादी प्रजातंत्र
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© डॉ. राजकुमार “सुमित्र”
साभार : डॉ भावना शुक्ल
112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





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