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पुस्तक समीक्षा : काव्य संग्रह – अन्तर्ध्वनि – – सुश्री मालती मिश्रा

अन्तर्ध्वनि (काव्य-संग्रह) लेखिका : सुश्री मालती मिश्रा प्रकाशन :     उन्वान  प्रकाशन मूल्य : रुपये 150/- मात्र समीक्षक : अवधेश कुमार 'अवध' (पुस्तक समीक्षा/आत्मकथ्य की इस कड़ी में हम सुश्री मालती मिश्रा जी के काव्य-संग्रह  अन्तर्ध्वनि की समीक्षा प्रस्तुत कर रहे हैं। समीक्षा श्री अवधेश कुमार ‘अवध’ जी ने लिखी है। हम कल इस काव्य संग्रह की एक चुनिन्दा  कविता प्रकाशित करेंगे। ) मनुष्यों में पाँचों इन्द्रियाँ कमोबेश सक्रिय होती हैं जो अपने अनुभवों के समन्वित मिश्रण को मन के धरातल पर रोपती हैं जहाँ से समवेत ध्वनि का आभास होता है, यही आभास अन्तर्ध्वनि है। जब अन्तर्ध्वनि को शब्द रूपी शरीर मिल जाता है तो काव्य बन जाता है। सार्थक एवं प्रभावी काव्य वही होता है जो कवि के हृदय से निकलकर पाठक के हृदय में बिना क्षय के जगह पा सके और कवि - हृदय का हूबहू आभास करा सके। नवोदित कवयित्री सुश्री मालती मिश्रा जी ने शिक्षण के दौरान अन्त: चक्षु से 'नारी' को नज़दीक से देखा। नर का अस्तित्व है नारी, किन्तु वह नर के कारण अस्तित्व विहीन...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल–Meditation: Mindfulness of Breathing-Learning Video#1-Shri Jagat Singh Bisht

MEDITATION: MINDFULNESS OF BREATHING LEARNING VIDEO #1 This is the first video in a series of videos to learn and practice meditation by yourself by listening to and following the video. It gives simple and straight instructions to meditate in pure form. Just follow the instructions and meditate. Practice meditation on a daily basis listening to the video. When you feel confident that you are comfortable and ready, you may go to the next video in the series. We will be happy to have your feedback and would answer any questions that you may have. Questions may be sent to us at lifeskills.happiness@gmail.com. Voice in the video: Jagat Singh Bisht, Founder: LifeSkills MEDITATION: Meditation is a practice that makes it possible to cultivate and develop certain basic positive human qualities in the same way as other forms of training make it possible to play a musical instrument or acquire any other skill. The object of meditation is the mind. For the moment, it is simultaneously confused, agitated, rebellious and subject...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – सपने, सच और उड़ान – डॉ दिवाकर पोखरियाल 

  आत्मकथ्य – सपने, सच और उड़ान - डॉ दिवाकर पोखरियाल  (अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग) पृष्ठभूमि से संबन्धित एवं ऊर्जा (एनर्जी) में पी. एच डी कर चुके डॉ . दिवाकर पोखरियाल का साहित्य एवं गीत-संगीत में रुझान उनकी सर्वांगीण प्रतिभा का परिचायक है। आपकी विशिष्ट साहित्यिक प्रतिभा के कारण आपका नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड्स – 2014 एवं  2017’ में दर्ज है। हम ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तित्व को आपसे रूबरू करने में गौरवान्वित अनुभव करते हैं।प्रस्तुत है उनके  उपन्यास 'सपने, सच और उड़ान' का आत्मकथ्य एवं उसका एक अंश उनकी ही कलम से।) पहले भाग में ( जो पहले 5 पाठ है) 5 बच्चे समाज से अलग अलग हिस्से से अपने सपनो के लिए अपनो से लड़ते है|  उस सोच का हिस्सा है जहाँ माँ बाप बच्चो का भविष्य निर्धारित करते है ना कि खुद बच्चे अपनी काबिलियत के हिसाब से| रितिका उन लड़कियो में से है जो प्यार के चक्कर में बहुत जल्दी फँस जाने के कारण अंदर से भावनात्मक हो जाते है और उस एहसास...
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हिन्दी साहित्य- कहानी – इंतजार का सिलसिला – सुश्री मालती मिश्रा 

सुश्री मालती मिश्रा             इंतजार का सिलसिला..... (यह कहानी सुश्री मालती मिश्रा जी के कथा-संग्रह  'इंतजार ' की शीर्ष कहानियों में से एक है। हमने कल इस पुस्तक की समीक्षा प्रकाशित की थी। हमें पूर्ण विश्वास है आपको निश्चित ही यह कहानी पसंद आएगी। ग्रामीण परिवेश , प्रतीक्षारत पिता, असहाय दिवंगत पुत्र की भावनाएं एवं दिवंगत पुत्र के मित्र की भावनाओं का अत्यंत सजीव चित्रण इस कहानी की विशेषता है। ) दोपहर की चिलचिलाती धूप मानों शरीर के भीतर के खून को भी उबाल रही थी, ऐसी तपती दुपहरी में रामधनी काका न जाने कहाँ से लाठी टेकते हुए चले आ रहे थे.....कमर इतनी झुकी हुई कि लाठी के सहारे अर्धवृत्ताकार आकार बन गए थे, काया इतनी शुष्क कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि हड्डियों के ढाँचे के ऊपर एक पतली सी खाल चढ़ा दी गई हो लाठी पकड़े हुए चलते हुए शरीर इस प्रकार काँप उठता कि मानों अभी लड़खड़ा कर गिर पड़ेंगे, फिर भी इस दुपहरी में वो न जाने किस...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – इंतज़ार (कहानी संग्रह) – सुश्री मालती मिश्रा

इंतज़ार (कहानी संग्रह) लेखिका : सुश्री मालती मिश्रा प्रकाशन : समदर्शी प्रकाशन, हरियाणा संस्करण : प्रथम, जून - 2018 मूल्य : रुपये 175/- मात्र (लेखक मित्रों के सुझावों के अनुरूप यह एक नवीन प्रयास है। इसमें लेखक मित्रों की चुनिन्दा पुस्तकों की समीक्षा/आत्मकथ्य प्रकाशित करना प्रारम्भ कर रहे हैं। इस कड़ी में हम सर्वप्रथम सुश्री मालती मिश्रा जी के कथा संग्रह इंतज़ार की समीक्षा प्रस्तुत कर रहे हैं। समीक्षा श्री अवधेश कुमार 'अवध' जी ने लिखी है। हम कल इस कथा संग्रह की एक चुनिन्दा कहानी 'इंतजार का सिलसिला' प्रकाशित करेंगे।  अवधेश कुमार 'अवध' जब से मानव ने कुटुम्ब में रहना सीखा तब से परिजनों में छोटे - बड़े और बच्चे - वृद्ध की भावना आई और साथ ही आई प्राय: बड़ों द्वारा छोटों को कहानियाँ सुनाने का सिलसिला। प्रकारान्तर में वही कहानियाँ चमत्कारों, अप्सराओं और अदृश्य शक्तियों से होती हुईं धरातल पर उतरीं जिनमें समाज का प्रतिबिम्ब देखा जा सकता है और प्रेरित होकर समाज को उचित दिशा भी दिया जा सकता है। लेखिका सुश्री मालती मिश्रा 'अन्तर्ध्वनि'...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल – Surya Namaskara: Salutations to the Sun – Mrs. Radhika Bisht

SURYA NAMASKARA: SALUTATIONS TO THE SUN (For Video please click on following picture) Surya namaskara is a well-known and vital technique within the yogic repertoire. It is a practice which has been handed down from the sages of vedic times. Surya means ‘sun’ and namaskara means ‘salutation’. It is a technique of solar vitalization, a series of exercises which recharge us like a battery, enabling us to live more fully and joyfully with dynamism and skill in action. Surya namaskara is a series of twelve physical postures. These alternate backward and forward bending asanas flex and stretch the spinal column and limbs through their maximum range. The series gives such a profound stretch to the whole body that few other forms of exercise can be compared with it. It is almost a complete sadhana in itself, containing asana, pranayama and meditational techniques within the main structure of the practice. It also has the depth and completeness of a spiritual practice. Surya namaskara can be easily integrated...
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हिन्दी साहित्य – कविता – जब मैं छोटा बच्चा था – डॉ सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’

डॉ  सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’ जब मैं छोटा बच्चा था   जब मैं छोटा बच्चा था तब सब कुछ अच्छा था दादाजी कहते हैं, मेरे तब मैं सच्चा था ।   तब न खिलोने थे ऐसे मंहंगे रिमोट वाले नहीं कभी बचपन ने ऊंच नीच के भ्रम पाले टी.वी.फ्रिज, कम्प्यूटर ए. सी.नहीं जानते थे आदर करना, एक-दूजे का सभी मानते थे। तब न स्कूटर कार कहीं थे घर भी कच्चा था.........   चाचा,मामा, मौसी,दादा रिश्ते खुशबू के अंकल,आंटी, माम् डेड,ब्रा नाम न थे, रूखे गिल्ली-डंडे, कौड़ी-कंचे खेल, कबड्डी कुश्ती खूब तैरना, नदी-बावड़ी तन-मन रहती चुस्ती। बड़े बुजुर्ग, मान रखते बच्चों की इच्छा का..........   दहीं-महीं और दूध-मलाई जी भर खाते थे शक्तिवर्धक देशी व्यंजन सब को भाते थे सेन्डविच,पिज्जा-बर्गर का नाम निशान न था रोगों को न्योता दे ऐसा खान-पान नहीं था। बुड्ढी के वे बाल शकर का मीठा लच्छा था.........   हमें बताते, दादाजी तब की  सारी  बातें सुन कर खुश तो होते पर, संशय में पड़ जाते अचरज तो होता, सुनकर जो भी वे, बतलाते सहज,सरल शिक्षा नीति की ज्ञान भरी बातें। पर जब भी, जो कहा उन्होंने बिल्कुल सच्चा था..... © डॉ सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’...
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हिन्दी साहित्य- लघुकथा – दिखावटी मजबूरी  – श्री कुलदीप सांखला

श्री कुलदीप सांखला दिखावटी मजबूरी  क्लास खत्म होते ही सीढ़ियों से जैसे ही नीचे उतरा तो देखा कि बारिश बहुत तेज है। क्लास के अंदर पता ही नहीं चला कि कब बारिश शुरू हो गयी और वैसे भी चंडीगढ़ में बारिश कब शुरू हो जाये पता ही नहीं चलता, खासकर अगस्त सितम्बर के महीनों में। खैर बारिश को देख कर सुखद अहसास होता है। एक पल में जैसे बचपन की बारिश की यादें ताजा हो जाती हैं। वो दोस्तों के साथ गलियों में भाग कर निकलना, बहते पानी में कागज की कश्तियों की दौड़ लगाना, ठहरे पानी मे गोते लगाना, जिद्द करके पकौड़े बनवाना। सच में तब इंतज़ार था कि बारिश कब आये। वो सब यादें कि जैसे खड़े खड़े ताजा हो रहीं थीं और बारिश बढ़ती ही जा रही थी। आज बारिश को देख कर खुशी नहीं हो रही थी। रात के 8:30 बज रहे थे और घर जाने की भी जल्दी थी। अब तो जैसे कि नाराजगी सी थी इस...
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संस्मरण-मौसी – सुश्री मालती मिश्रा मयंती

मालती मिश्रा मयंती            (सुश्री मालती मिश्रा जी का अपनी मौसी से संबन्धित संस्मरण उनकी संवेदनशीलता की  पराकाष्ठा है। यह दस्तावेज़ उनके संवेदनशील हृदय  से संलिप्त  स्मृतियों  का जीवंत चित्रण है। ) मौसी आज अचानक ही न जाने क्यों उस व्यक्तित्व की याद आई जो मेरे जीवन में माँ सी थीं। हालांकि आज वो इस दुनिया में प्रत्यक्ष रूप से नहीं हैं परंतु माँ की यादों के साथ उनकी यादें भी सदा मेरे हृदय में जीवित रहती हैं। आज तो मेरी माँ जिन्हें हम 'अम्मा' कहते हैं वो भी हमारे बीच प्रत्यक्ष रूप से नहीं हैं । परंतु, मौसी उनकी छोटी बहन होते हुए भी उनसे पहले ही इहलोक को छोड़ गई थीं । शायद उनका बिछोह ही था, जिसने अम्मा को और अधिक तोड़ दिया।  मुझे तो उनकी मृत्यु के विषय में बाद में पता चला।  अम्मा ने फोन पर बताया कि 'मौसी चल बसीं' और वो आज ही उनकी तेरहवीं आदि सारे क्रियाकर्म सम्पन्न करवाकर घर लौटी हैं। उनकी आवाज उनके व्यथित...
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योग-साधना LIFESKILLS/जीवन कौशल – Grooming Facilitator Master Teachers

Groom yourself as Facilitator Master Teacher (Yoga, Meditation & Laughter Yoga During the next year (2019), RadhikaJagat Bisht and Jagat Singh Bisht, Founders: LifeSkills, will conduct training to groom facilitators/ master teachers. This will enable them to learn, understand, practise, and propagate life skills for health, happiness and tranquillity. It includes practical sessions on the art of Meditation, the basics of Yoga and the fundamentals of Laughter Yoga. Also included are inputs on the elements of Happiness and Well-being and the quintessence of Spirituality. If you are interested, please send us an email at lifeskills.happiness@gmail.com....
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