आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिक अमरावती येथील श्री विष्णू सोळंके यांचा कातरवेळी हा काव्य संग्रह आणि संवाद मौनाशी हे आत्मचरित्र नुकतेच प्रकाशित झाले आहे.
श्री.सोळंके यांच्या नव्या साहित्य कृतींबद्दल ई अभिव्यक्ती परिवारातर्फे मन:पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील लेखनासाठी शुभेच्छा 💐✒️💐
आज त्यांची कविता “सांज मला डसते…“, ‘कवितेचा उत्सव‘ या सदरात देत आहोत.
☆ व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई की स्मृति – परसाई जी समाज के डाक्टर थे ☆ साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार ☆
जबलपुर l देश की ख्यातिलब्ध संस्था जबलपुर व्यंग्यम (अपंजीकृत) द्वारा “व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई जी” की स्मृति में मेरी दृष्टि में “हरिशंकर परसाई व्याख्यान माला” का आयोजन जानकीरमण महाविद्यालय में आयोजित किया गया जिसमें डॉ. कुंदन सिंह परिहार ने उनकी साथ के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि “परसाई को जानना है तो उनका पूरा साहित्य पढ़ना चाहिए जिससे समाज में व्याप्त विसंगतियों की जानकारी हो सकेगी. परसाई जी व्यंग्य के दीपक स्तंभ है जो निडरता से बुराइयों पर प्रहार करने की दृष्टि और शक्ति प्रदान करते है.” इस व्याख्यान माला में देश के उद्भट व्यंग्यकार सर्वश्री अभिमन्यु जैन, शरद जोशी सम्मान से सम्मानित सुरेश विचित्र, आचार्य विजय तिवारी किसलय, रमाकांत ताम्रकार, राकेश सोहम, विजय विश्वकर्मा, विनोद खंडालकर ने उक्त आशय के विचार व्यक्त किए.
दूसरे सत्र में व्यंग्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें आचार्य विजय तिवारी किसलय ने धूपगांव का अपग्रेडेड लड़का, रमाकांत ताम्रकार ने अस्पताल का चक्कर, सुरेश मिश्रा विचित्र ने मुख्य अतिथि की पीड़ा, अभिमन्यु जैन ने भोजन और विमोचन, राकेश सोहम ने राशन में मिले डाटा, विनोद खंडालकर ने सावधान! आगे हैलमेट चेकिंग चालू आहे, डॉ कुंदन सिंह परिहार जी ने भाई हिम्मत लाल का संकट और विजय विश्वकर्मा ने समाधि से सम्भोग की ओर का वाचन किया.
कार्यक्रम का संचालन श्री राकेश सोहम ने तथा आभार प्रदर्शन श्री अभिमन्यु जैन ने किया.
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साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार, जबलपुर
≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
सोहम क्रिएशन अँड पब्लिकेशन्स यांच्यातर्फे “काव्यानुभूती” हे पुस्तक दिनांक २७ जुलै २०२५ रोजी पुणे येथे प्रकाशित झाले. हे पुस्तक कादंबरी – कथासंग्रह – लेखसंग्रह किंवा कवितासंग्रह अशा कुठल्याच प्रकारात येत नाही – तर हा आहे दहा कवयित्रींच्या वेगवेगळ्या प्रत्येकी पाच कवितांच्या रसग्रहणाचा संग्रह… एकूण ५० कवितांचे रसग्रहण यात आहे आणि हे रसग्रहण केलेले आहे आपल्या समूहातील पाच ज्येष्ठ लेखिका / कवयित्रींनी.. त्या कवयित्री म्हणजे – – –
** सुश्री ज्योत्स्ना तानवडे
** सुश्री अरुणा मुल्हेरकर
** सुश्री नीलिमा खरे
** सुश्री राधिका भांडारकर
** सुश्री अमिता पाटणकर
या अनोख्या संग्रहाबद्दल वरील सर्व लेखिका / कवयित्री यांचे आपल्या सर्वांतर्फे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि हार्दिक शुभेच्छा.
आजच्या ‘काव्यानंद ‘ सदरात वाचूयात या संग्रहातील एका कवितेचे रसग्रहण. आणि या पुस्तकाच्या संकल्पनेबद्दल जाणून घेऊ या ‘ पुस्तकावर बोलू काही ‘ या सदरातून.
संपादक मंडळ
ई अभिव्यक्ती मराठी
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈
☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ के बाल उपन्यास – “चंद्रबस्ती का रहस्य” को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की स्वीकृति – अभिनन्दन ☆
बाल साहित्य में चंद्रमा की ओर एक नई उड़ान –
नई दिल्ली। बाल साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ द्वारा रचित उपन्यास “चंद्रबस्ती का रहस्य” को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय द्वारा किशोरों के लिए भारतीय साहित्य पुस्तकमाला के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है।
यह उपन्यास विज्ञान और कल्पना का अद्भुत संगम है, जिसमें लेखक ने चंद्रमा पर भविष्य में मानव बस्ती बसने की संभावना को आधार बनाकर एक रोमांचक और विचारोत्तेजक कथा रची है। बाल पाठकों के लिए यह रचना न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान, अन्वेषण और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास भी है।
“चंद्रबस्ती का रहस्य” में लेखक ने चंद्रमा की सतह, वहां की चुनौतियाँ, तकनीकी संघर्ष और मानव जिज्ञासा को बाल मनोविज्ञान के अनुरूप प्रस्तुत किया है। यह उपन्यास बच्चों को कल्पनाशीलता, वैज्ञानिक सोच और साहसिकता की ओर प्रेरित करता है।
उपन्यास के रचनाकार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ एक प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार हैं, जिनकी रचनाएँ बाल पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। वे बाल साहित्य में संवेदना, संस्कृति और विज्ञान के समन्वय के लिए जाने जाते हैं। उनकी यह नवीनतम रचना बाल साहित्य को अंतरिक्ष की नई दिशा में ले जाने वाली मानी जा रही है।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा इस उपन्यास को स्वीकृति मिलना न केवल लेखक की उपलब्धि है, बल्कि यह संकेत है कि बाल साहित्य अब कल्पना से आगे बढ़कर भविष्य की वैज्ञानिक संभावनाओं को भी छूने लगा है।
यह उपन्यास शीघ्र ही प्रकाशित होकर देशभर के किशोर पाठकों तक पहुंचेगा, और उन्हें चंद्रमा की रहस्यमयी दुनिया में एक नई दृष्टि प्रदान करेगा।
≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
आपल्या समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका प्रा. सुमती पवार यांच्या, मानस, इंद्रा आणि नक्षत्र या तीन कवितासंग्रहांचे नुकतेच प्रकाशन झाले आहे. साहित्य क्षेत्रातील त्यांच्या या कामगिरीबद्दल ई अभिव्यक्ती परिवारातर्फे त्यांचे मन: पूर्वक अभिनंदन आणि पुढील प्रकाशनासाठी हार्दिक शुभेच्छा.
आज त्यांची एक नवीन कविता “भेट आपुली ती पहिली…“, ‘कवितेचा उत्सव‘ या सदरात देत आहोत.
🙏 💐 वरिष्ठ साहित्यकार गुरुवर प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी अनंत में विलीन – विनम्र श्रद्धांजलि 💐🙏
भोपाल। वरिष्ठ साहित्यकार, भगवतगीता , रघुवंश, मेघदूत के हिंदी काव्य में अनुवादक, 40 से ज्यादा कृतियों के कवि, लेखक, आध्यात्मिक, राष्ट्र प्रेम की भावधारा के साहित्यिक पिताजी प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध का दुखद अवसान 99 वर्ष की आयु में आज 25 जुलाई को शाम 4 बजकर 50 मिनट पर हो गया है।
उन्होने शांति से अंतिम सांसे ली, और दिव्य स्थान को प्रस्थान कर गए हैं।
उन्होंने बच्चों के बच्चों के संग भी जीवन का भरपूर आनंद लिया।
ई-अभिव्यक्ति परिवार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ संपादक ई-अभिव्यक्ति (हिंदी) के इस दुःख में सहभागी है। 🙏
– हेमन्त बावनकर, पुणे
🙏 ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से गुरुवर प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध जी को विनम्र श्रद्धांजलि 🙏
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈