सूचनाएँ/Information ☆ ☆ व्याख्यान : हिंदी लोकल से ग्लोबल — हिंदीतर प्रांत मातृभाषा दिवस, युवा रचनापाठ ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ व्याख्यान : हिंदी लोकल से ग्लोबल — हिंदीतर प्रांत मातृभाषा दिवस, युवा रचनापाठ ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆

शुक्रवार, दिनांक 6 मार्च 2026 को हिंदी विभाग मॉडर्न महाविद्यालय, शिवाजीनगर, महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति और वैश्विक हिंदी परिवार, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में हिंदीतर प्रांत मातृभाषा दिवस, युवा रचनापाठ और व्याख्यान का आयोजन मॉडर्न महाविद्यालय में किया गया थाl

कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि डॉ. जवाहर कर्णावट डॉक्टर दामोदर खडसे डॉ. सुनील देवधर, डॉ. नीलम जैन, डॉ. प्रेरणा उबाळे, स्वरांगी साने के हाथों सरस्वती पूजन संपन्न हुआ और युवा पाठ कार्यक्रम का उद्घाटन हिंदी विभाग की परंपरा के अनुसार पौधे को पानी देते हुए उसे सींचकर काव्यपाठ करने वाले हमारे हिंदी के प्रिय छात्रों के शुभ करकमलों से कार्यक्रम का उद्घाटन किया गयाl

हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेरणा उबाळे ने कार्यक्रम के आरंभ में हिंदी विभाग में विभागाध्यक्षा के रूप में पिछले 10 वर्षों से अविरत चलने वाली विभिन्न गतिविधियों से परिचय कराया – जैसे, आज का शब्द, आज का मुहावरा, अरुणिमा साहित्यिक पत्रिका, राष्ट्रीय हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता, विज्ञापन लेखन प्रतियोगिता, काव्यपाठ, हिंदी फिल्म क्लब, फिल्म स्क्रीनिंग, विभिन्न विषयों पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशालाएं, बिदाई समारोह, पुराने छात्रों का स्नेहमिलन, विभिन्न व्याख्यानमालाएँ आदि की जानकारी अतिथि मान्यवर और उपस्थितों को दीl सभी का स्वागत उन्होंने शॉल और मॉडर्न महाविद्यालय की पत्रिका देते हुए कियाl

युवा रचना पाठ में उस्मान मोहम्मद (कश्मीर), शाहिद बशीर (कश्मीर), सदुर्शना अरूणागिरी (श्रीलंका), मुकेश रावत(कुमाऊं, हिमालय), साक्षी कांबले, योगेश काले, विद्या केलकर-सराफ (महाराष्ट्र), ने अपनी मातृभाषाओं में अनुक्रमत: कश्मीरी, तमिल, कुमाऊनी, हिंदी, मराठी, भाषा में सारगर्भित कविताएं पढ़ीl इन छात्रों की कविताओं ने सबका मन मोह लियाl इस समय हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय नेl युवा रचना पाठ होने के बावजूद भी हिंदी विभाग के आरंभिक समय की एक छात्रा को निमंत्रित किया थाl हिंदी विभाग के प्रथम अध्यक्ष डॉ. श्रीरंग संगोराम की छात्रा रह चुकी हैंl विद्या केलकर- सराफ (1979) ने मॉडर्न महाविद्यालय और हिंदी विभाग की स्मृतियों को तजा करते हुए अपनी कविता पढ़ीl साथ ही अनेक वर्षों बाद विभाग में आने की ख़ुशी जताईl भूतकाल और वर्तमान समय के हिंदी विभाग के छात्रों के काव्यपाठ का सुंदर मिलाप यहाँ दिखाई दियाl

डॉ. प्रेरणा उबाळे ने अतिथि मान्यवारों का परिचय करायाl इसके बाद महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के कार्याध्यक्ष और आकाशवाणी पुणे के पूर्व सहायक निदेशक, हिंदी लेखक डॉ. सुनील देवधर ने व्याख्यान के आयोजन और हिंदी के वैश्वीकरण के संदर्भ में भूमिका सामने रखीl इस्रायल का उदाहरण देते हुए उन्होंने यह बताया कि हिब्रू भाषा कैसे अनिवार्य करने के बाद जीवंत हो उठीl

प्रस्तुत कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि डॉ. जवाहर कर्णावट, भोपाल ने “हिंदी लोकल से ग्लोबल” विषय पर अपना व्याख्यान दियाl उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि जब हमें हवा, भोजन और पानी शुद्ध चाहिए तो हिंदी शुद्ध क्यों नहीं ? उन्होंने यह प्रश्न उपस्थित किया कि हम हिंदी को देवनागरी के बजाए रोमन में क्यों लिखते हैं ? हिंदी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं के विश्व में विस्तार की जानकारी उन्होंने प्रदान की? डॉ. जवाहर कर्णावट ने विश्व के लगभग 60 देशों में यात्रा करते हुए वहां हिंदी की स्थिति का जायजा लेकर ‘विश्व में हिंदी’ शीर्षक पुस्तक की रचना की वह पुस्तक उन्होंने हिंदी विभागाध्यक्षा डॉ. प्रेरणा को प्रदान कीl डॉ. जवाहर कर्णावट हिंदी भाषा, साहित्य के संदर्भ में संपूर्ण विश्व में अनुसंधान कार्य कर रहे हैंl उनके हिंदी से संबंधित समर्पण भाव से किए गए कार्य के कारण फिजी की संसद में उन्हें हिंदी सेवी सम्मान से सम्मानित किया जा चुका हैl

कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. दामोदर खडसे, जिन्होंने भारतीय सभी मंत्रालयों, समितियों, संस्थाओं से जुड़कर हिंदी से संबंधित कार्य किया है तथा नई शिक्षा प्रणाली में भारतीय भाषाओं के संदर्भ में जिनका ठोस योगदान रहा हैl उन्होंने अपने व्याख्यान में प्रवासी हिंदी साहित्यकार तथा विदेशों में व्याप्त हिंदी की स्थिति और गति के संदर्भ में अपने अनुभव कथन किएl

इस कार्यक्रम को डॉ. नीलम जैन प्रवासी हिंदी साहित्यकार का सानिध्य प्राप्त हुआl उन्होंने अपने भाषण में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, प्रवासी हिंदी साहित्य और वैश्विक हिंदी के संदर्भ में सबसे संवाद कियाl साथ ही प्रस्तुत कार्यक्रम के आयोजन हेतु डॉ. प्रेरणा को बधाई दीl

कार्यक्रम का आभारज्ञापन कवयित्री, पत्रकार डॉ. स्वरांगी साने ने कियाl वैश्विक हिंदी परिवार की प्रांत संयोजक के रूप में संयुक्त तत्वाधान में हिंदी विभाग से जुड़कर इस कार्यक्रम के आयोजन में वह सक्रियता से जुटी रहीl

इस अवसर पर हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय के प्रा. सूरज बिरादर, रेशमा कांबले, शुभम राऊत उपस्थित थे तथा विभाग के स्नातक और स्नातक स्तर के छात्र बड़ी संख्या में मौजूद थेl इस कार्यक्रम में हिंदी कहानीकार डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव, नाटककार डॉ. रमेश मिलन भारतीय संस्कृति की अध्येता डॉ. ममता जैन, हिंदी कवि हितेश व्यास, मंजू चोपड़ा, श्री. देशमुख आदि हिंदी-मराठी लेखक पत्रिकाओं के कुछ संपादक, अन्य महाविद्यालयों के प्राध्यापक भी उपस्थित रहेंl संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रेरणा उबाळे ने कियाl कार्यक्रम के अंत में काव्यपाठ करने वाले सभी छात्रों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गयाl संपूर्ण कार्यक्रम अत्यंत सुचारू ढंग से संपन्न हुआl सभी मान्यवरो ने स्व. शंकरराव कानिटकर हिंदी विभागीय ग्रंथालय को भेंट दीl ग्रंथालय को 600 पुस्तकें प्रदान करने वाले डॉ. दामोदर खड़से और अन्य विद्वानों ने अपनी पुस्तकें संजोकर रखने पर प्रसन्नता व्यक्त कीl

साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे

अध्यक्ष, हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय, शिवाजीनगर, पुणे

संपर्क- 7028525378

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – कविता ☆ ढगांनी जसे ग्रासिले… + संपादकीय निवेदन – श्री राजकुमार कवठेकर – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

श्री राजकुमार कवठेकर

💐 अ भि नं द न 💐

आपल्या समुहातील ज्येष्ठ गझलकार श्री राजकुमार कवठेकर यांचा क्लेशवृक्षाच्या छायेतहा दुसरा कवितासंग्रह आज १०मार्च २०२६ रोजी प्रकाशित होत आहे. हा संग्रह कोल्हापूरच्या अक्षरदीप प्रकाशनने प्रकाशित केला आहे.

ई अभिव्यक्ती मराठी परिवारातर्फे श्री. कवठेकर यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि पुढील लेखनासाठी शुभेच्छा 💐

  संपादक मंडळ

 ई अभिव्यक्ती मराठी

आज प्रकाशित होत असलेल्या संग्रहातील एक कविता –

? कवितेचा उत्सव ?

☆ “ढगांनी जसे ग्रासिले” ☆ श्री राजकुमार कवठेकर ☆

ढगांनी जसे ग्रासिले सुर्यबिंबा

 क्षणार्धात सर्वत्र सांजावले

चकाकून जाती विजांच्या शलाका

 थवे पाखरांचे घरी पातले

 *

धुळीचे कुठे लोळ गेले नभाला

 पुन्हा शांतले वृक्ष.. वेली.. पिले

भुईचे तसे तापलेल्या छतांचे

 उदासीन जे चित्त, आनंदले

 *

उभारून बाहो जणू वृक्ष वेली

 वरूणास व्याकूळ हाकारती

” पुन्हा यौवनाची अम्हा दे उभारी.. “

 तृणांकूर माळासवे प्रार्थती

 *

लडीवाळ बाळापरी पावसाच्या

 नभाच्या कुशीतून आल्या सरी

झळांचा बने थंडसा मंद वारा

 घुमे रानझाडीतुनी बासरी

 *

मघा साठले.. दाटले मोकळे हो

 पुन्हा ऊन हे कोवळे सांडले

तुझ्या आठवांचे ऋतू जीववेडे

 मलाही दिसांनी किती भेटले

© श्री राजकुमार कवठेकर

मिरज

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, क्षितिज पुणे एवं हिंदी आंदोलन परिवार का आयोजन – भ’ से भाषा, ‘भ’ से भारत’ ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, क्षितिज पुणे एवं हिंदी आंदोलन परिवार का आयोजनभ’ से भाषा, ‘भ’ से भारत’  

महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, क्षितिज पुणे एवं हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार 7 मार्च को ‘भ’ से भाषा, ‘भ’ से भारत’ कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों की विविध भाषाओं की कविताओं और लोकगीतों की वाचन, गायन, नृत्य एवं अभिनय द्वारा प्रस्तुति की गई।

इसके लेखक, निर्देशक, सूत्रधार- संजय भारद्वाज थे। कार्यक्रम का निर्माण क्षितिज इन्फोटेनमेंट ने किया था। रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक डॉ. जवाहर कर्नावट आयोजन के मुख्य अतिथि थे। उद्घाटन सत्र के अपने वक्तव्य में हिंदी के वैश्विक होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए और अधिक काम करना होगा। आपने भाषाई स्वाभिमान को सदैव जगाए रखने पर भी बल दिया। कार्यक्रम का आरंभ संजय भारद्वाज की कविता और उदीयमान नृत्यांगना प्राची पुजारी के कथक की जुगलबंदी से हुई। तत्पश्चात विभिन्न भारतीय भाषाओं की कविताओं एवं उनके भावानुवाद, विभिन्न ललित कलाओं द्वारा मंच पर आते गए। प्रमुख रचनाकारों, वाचकों एवं कलाकारों में सुधा भारद्वाज, वीनु जमुआर, ऋता सिंह, विनीता सिन्हा, गौरी कुलकर्णी, अनिल अब्रोल, सतीश कुमार, आशीष त्रिपाठी, अपर्णा कडसकर, डॉ. ज्योति कृष्ण, कंचन त्रिपाठी, गौतमी चतुर्वेदी पांडेय, कंचन त्रिपाठी, ऊर्जा वाईकर, पूर्णिमा पांडेय, शशिकला गुंडलूपेट, अपूर्व शर्मा, प्राची पुजारी, अंगिता कुमार, अनुपम पांडेय, रितेश बुरूड आदि सम्मिलित थे। विशेष बात यह रही कि कविता या गीत प्रस्तुत करने वाले हर रचनाकार ने भारत के किसी राज्य विशेष का परिधान धारण किया था। कार्यक्रम में हिंदी, संस्कृत, मराठी, बंगाली, कन्नड़, पंजाबी, खोरठा, असमिया, बुंदेलखंडी, सधुक्कड़ी आदि भाषाओं की रचनाओं का पाठ हुआ। रंगमंचीय शैली में प्रस्तुत इस कार्यक्रम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य तथा कलाप्रेमी उपस्थित थे। प्रमुख उपस्थितों में डॉ. केशव प्रथमवीर, डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव, श्री हेमंत बावनकर, डॉ. विपिन पवार, डॉ. रमेश गुप्त, डॉ. कांतिदेवी लोधी, डॉ. रजनी रणपिसे एवं अन्य अनेक प्रतिष्ठित हस्ताक्षर सम्मिलित थे।

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ संपादकीय निवेदन – The Art Avenue International Brooklyn Galleria Excellence Award 2026 – डॉ. भारती माटे – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

डॉ. भारती माटे

💐 अ भि नं द न !! 💐 हार्दिक अभिनंदन !!!💐

आपल्या ई-अभिव्यक्ती साहित्य मंचातर्फे आपण गेली चार वर्षे अतिशय देखणा असा दिवाळी विशेषांक प्रकाशित करतो आहोत. हे देखणेपण अंकाच्या मुखपृष्ठापासूनच वाचकांचे लक्ष वेधून घेते. या अंकांचे फार सुंदर आणि देखणे मुखपृष्ठ आपल्याला तयार करून देणाऱ्या चित्रकार सुश्री डॉ. भारती माटे यांचे आपल्या सर्वांतर्फे खास अभिनंदन करण्यासाठी आजचे हे खास संपादकीय… 

नुकताच डॉ. भारतीताई यांना “The Art Avenue International Brooklyn Galleria Excellence Award 2026 in the category of Paintings! “ हा आंतरराष्ट्रीय पुरस्कार देऊन गौरवण्यात आलेलं आहे. 


या संस्थेविषयी आणि पुरस्काराविषयी अगदी थोडक्यात सांगायचे तर – –  

Art Avenue is the leading International Art Competition & Exhibition in INDIA I UK & INTERNATIONAL ARTIST’S International Brooklyn Award by Art Avenue is an independent Art Center of Excellence that offers a platform for everyone to create, collaborate and reflect upon social issues & others through the arts.

या निमित्ताने डॉ. भारती माटे यांच्या इथपर्यंतच्या यशस्वी वाटचालीबद्दल थोडेसे जाणून घेऊ या. 

डॉ.भारती माटे – –  स्टेट बँकेत ३३ वर्ष नोकरी आणि बँकेत असतानाच छंद म्हणून जोपासायला सुरुवात केलेल्या चित्रांचं पुढे व्यवसायात रूपांतर करण्यात त्यांनी सुयश मिळवलेले आहे.. आत्तापर्यंत तीन आर्ट रिसर्च प्रोजेक्ट केले – – –                     

पहिला प्रोजेक्ट :

मध्यप्रदेशातील भीमबेटक्याच्या गुफांमधील, सात कालखंडातील काढलेल्या चित्रशैली आणि चित्रांचा प्रवास. साधारणपणे ४००००-१००००० वर्षांपूर्वीची शिलाचित्रे, आणि त्याचे विशेष म्हणजे रंगीत चित्रे, (pigmented Rock art) ह्यावर संशोधनात्मक  लेखन  व चित्र निर्मिती.

दुसरा प्रोजेक्ट :

सिंधू संस्कृतीतील कलाविष्कार – – त्यांनी साधारणपणे दहा ते बारा वर्षे ह्या प्रोजेक्टवर काम केलं.  त्याच्यातून आठ ते दहा एकल चित्र प्रदर्शने, 15 ते 20 ग्रुप शो, आणि हा प्रोजेक्ट लोकाभिमुख करण्याच्या दृष्टिकोनातून भेटपत्रे, चित्रे, चित्र प्रदर्शने, डायरी, कॅलेंडर अशा माध्यमातून लोकांपर्यंत पोहोचवण्याचा प्रयत्न केला.                 

 प्रोजेक्ट तिसरा :

ड्रायफ्रेस्कोज् ऑफ रंगावली ऑन कॅनव्हास.. .. .. त्यांनी जमिनीवर असणारी रांगोळी ड्रायफ्रेस्को पद्धतीने कॅनव्हासवर आणली. जमिनीवर असलेल्या रांगोळीला उभं करण्यात त्यांना यश प्राप्त करता आलं आहे . आपल्या दिवाळी अंकांची मुखपृष्ठे त्यांनी याच पद्धतीने चितारलेली आहेत. विशेष म्हणजे याच कलाविष्काराबद्दल Irvine, USA या अमेरिकन विद्यापीठाने त्यांना पी.एच.डी. प्रदान केलेली आहे. 

.. .. .. आजपर्यंत त्यांना दोन इंटरनॅशनलतीन नॅशनल आणि पाच स्टेट अवॉर्ड्स मिळाली आहेत.   त्याच्यात भर म्हणून आता नुकताच आर्ट अवेन्यू ब्रुकलीन इंटरनॅशनल कॉम्पिटिशन फॉर पेंटिंग अँड फोटोग्राफीमध्ये 2026 चे एक्सलन्स अवॉर्ड 2026′ त्यांना मिळालेले आहे.  

नुकत्याच मिळालेल्या या सुप्रतिष्ठित पुरस्काराबद्दल त्या सांगतात.. 

.. ..” या सदर प्रदर्शनात मी व माझे सहचित्रकार सुनील बलकवडे आम्ही दोघांनी वैयक्तिक सहभाग घेतला होता. पंतप्रधान श्री नरेंद्र मोदीजींच्या 75 व्या वाढदिवसानिमित्त केलेल्या ‘वसुधैव कुटुंबकम्‘, या विषयावरील सात चित्रांच्या मालिकेला हे बक्षीस मिळालं. 

.. .. .. भारतामध्ये साधारणपणे साडेसहाशे लोककला आहेत..  रांगोळी ही त्यापैकीच एक.  त्यातल्या अनेक कला आता संपत चाललेल्या आहेत.  अशा वेळेला तिला काय करून जपता येईल अशा प्रयत्नांमधून ही फ्रेस्को चित्रशैली जन्माला आली, त्याच्यावर आम्ही साधारणपणे दहा ते बारा वर्षे काम केलं आणि आता हे कॅनव्हास आपण जगभर कुठेही पाठवू शकतो इतकी सिद्धता आता प्राप्त झालेली आहे.   आपण स्वतःच  एक प्रोजेक्ट घेऊन ‘रांगोळी’ ही संपत असणारी कला कशी सांभाळून ठेवू शकू ? या विचारातून या प्रोजेक्टला सुरुवात झाली. 

.. .. .. भारतीय चित्रकलेत रांगोळीचा चेहरा हा मुळातच प्रतीकात्मक आहे आणि प्रतिकात्मक रांगोळी मधील रेषा ही त्यांची चैतन्य केंद्रे आहेत.

.. .. .. भारतीय कला विश्वात आपल्याकडे मुळामध्ये वेद आणि उपनिषदिक वाड्गमय हे अपौरुषेय आहे, परम आध्यात्मिक वैभव आहे .. इतके की त्यातील शब्द, श्लोक, सुभाषिते असतील, मंत्र जप असतील, बिजाक्षर असतील किंवा काही चांगली वाक्यं असतील, तर अशा सगळ्या ‘ स्क्रिपचर्स ‘ माध्यमातून ती आपल्यापर्यन्त पोचतात, कारण ही स्क्रिपचर्स म्हणजे थॉट फॉर्मस् आहेत, आणि हे थॉट फॉर्मस् आपल्याला चित्रांमध्ये परिवर्तित करता येतात हे जेव्हा मला कळलंतेव्हा काम करताना खूप मजा यायला लागली, आणि त्यामुळे या चित्रमालिकेमध्ये सुद्धा आपण वेदांनी उदघोषित केलेल्या वाक्यातून प्रेरणा घेऊन ‘वसुधैव कुटुंबकम्‘, चा विचार प्रत्येक वैयक्तिक चित्रातून मांडण्याचा प्रयत्न आम्ही केलेला आहे . नमुन्यादाखल सदर मालिकेतील एक चित्र सोबत जोडले आहे…ज्याचे शीर्षक आहे.. 

‘Save Nature, A Sacred Duty’. 

(कृपया enlarge करून पहावे). 


या पुरस्कारप्राप्त चित्राबद्दल मी इतकेच सांगेन की – 

“Our series of seven paintings on Vasudhaiva Kutumbakam—born from the sacred light of Prime Minister Narendra Modiji’s 75th birthday—has touched souls across oceans.

This isn’t mere award—it’s affirmation that art bridges hearts, just as Modiji’s vision, unites Bharat with the world…  From Pune’s studios to Brooklyn’s galleries!! “ 

भारती माटे. 

***** 

इतका व्यापक आणि अत्यंत मोलाचा विचार आपल्या कलेच्या माध्यमातून जगभरात पोहोचवण्याचा भारतीताईंचा हा यशस्वी प्रयत्न खरोखरच अपवादात्मक आणि अत्यंत गौरवास्पद आहे.  

– – आपल्या सर्वांतर्फे सुश्री डॉ.भारती माटे यांचे अतिशय मनःपूर्वक अभिनंदन आणि या आगळ्या वेगळ्या वाटेवरचा त्यांचा यापुढील प्रवासही असाच यशस्वीपणे सातत्याने चालू रहावा यासाठी त्यांना असंख्य हार्दिक शुभेच्छा. 

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

 

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ प्रतिभाशाली कथाकार सोनी पांडेय को पांचवां सविता कथा सम्मान – अभिनंदन ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ प्रतिभाशाली कथाकार सोनी पांडेय को पांचवां सविता कथा सम्मान – अभिनंदन ☆ 

सविता कथा सम्मान का यह पांचवां वर्ष है। इसे प्रतिवर्ष चयनित महिला कथाकार को दिया जाता है। इसे श्रीमती सविता दानी की स्मृति में प्रारंभ किया गया है। यह देश का विशिष्ट सम्मान है। इस वर्ष इसे प्रतिभाशाली कथाकार सोनी पांडेय को दिया जा रहा है। सोनी पांडेय आजमगढ उत्तर प्रदेश में निवास करती हैं।

अन्विति पत्रिका, पहल और सविता कथा सम्मान आयोजन समिति के द्वारा आयोजित यह सम्मान समारोह आज 7 मार्च 2026 को संध्या 7 बजे डा हीरालाल कला वीथिका, रानी दुर्गावती संग्रहालय, भंवरताल जबलपुर में संपन्न होगा। प्रसिद्ध शिल्पकार व लेखिका शम्पा शाह, भोपाल यह पुरस्कार प्रदान करेंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवियत्री सविता भार्गव करेंगी। कार्यक्रम का संचालन कथाकार श्रद्धा श्रीवास्तव करेंगी।

जबलपुर शहर के इस प्रतिष्ठा आयोजन में आप सादर आमंत्रित हैं। कृपया अवश्य पधारें। कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह राजेन्द्र दानी, शरद उपाध्याय, योगेन्द्र श्रीवास्तव, विवेक चतुर्वेदी, कुंदन सिद्धार्थ, हिमांशु राय व सभी साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं ने किया है।

💐 ई- अभिव्यक्ति परिवार की ओर से कथाकार सोनी पांडेय जी को इस विशिष्ट उप्लब्धि के लिए हार्दिक बधाई 💐

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ वैदिक प्रकाशन द्वारा मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग जी सर्वश्रेष्ठ लेखक पुरस्कार 2026 से अलंकृत  – अभिनंदन ☆ ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ वैदिक प्रकाशन द्वारा मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग जी सर्वश्रेष्ठ लेखक पुरस्कार 2026 से अलंकृत  – अभिनंदन ☆

ई-अभिव्यक्ति के वरिष्ठ साहित्यकार मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग जी को एकल पुस्तिका “शब्द सरिता का प्रवाह / कविता संग्रह” में उनके अमूल्य साहित्यिक योगदान तथा  लेखन एवं संकलन के क्षेत्र में उत्कृष्ट भूमिका के लिए वैदिक प्रकाशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ लेखक पुरस्कार 2026 से अलंकृत किया गया।


💐 ई- अभिव्यक्ति परिवार की ओर से मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग जी  को इस विशिष्ट उप्लब्धि के लिए हार्दिक बधाई
💐

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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सूचनाएँ/Information ☆ शोक वार्ता – स्मृतिशेष कै. श्रीमती कुंदा कुलकर्णी आणि कै. सुहास सोहोनी — विनम्र श्रद्धांजलि ☆

☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ शोक वार्ता – स्मृतिशेष कै. श्रीमती कुंदा कुलकर्णी आणि कै. सुहास सोहोनी — विनम्र श्रद्धांजलि ☆

कळविण्यास अत्यंत दु:ख होते की आपल्या ‘ ई अभिव्यक्ती मराठी ‘ समुहातील ज्येष्ठ साहित्यिका श्रीमती कुंदा कुलकर्णी आणि ज्येष्ठ साहित्यिक श्री.सुहास सोहोनी यांचे नुकतेच निधन झाले .

ईश्वर त्यांच्या आत्म्यास सद्गती देवो ही प्रार्थना 🙏

श्रीमती कुलकर्णी व श्री.सोहोनी यांच्या कुटुंबीयांच्या दु:खात आम्ही सर्व सहभागी आहोत.या दु:खद प्रसंगाला त्यांनी धीराने सामोरे जावे .🙏

संपादक मंडळ .

****

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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मराठी साहित्य – कविता ☆ असे केले कधी नाही… + संपादकीय निवेदन – सौ. ज्योती कुलकर्णी – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

सौ. ज्योती कुलकर्णी

💐 अ भि नं द न 💐

सिद्ध लेखिका समुहातर्फे आयोजित राज्यस्तरीय गझल लेखन स्पर्धेत आपल्या समुहातील ज्येष्ठ कवयित्री सौ. ज्योती कुळकर्णी यांना प्रथम क्रमांक मिळाला आहे.

ई-अभिव्यक्ती मराठी तर्फे सौ. कुळकर्णी यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन आणि शुभेच्छा 💐💐

पुरस्कार प्राप्त कविता ‘असे केले कधी नाही आज प्रकाशित होत आहे. 🪻

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

? कवितेचा उत्सव ?

☆ “असे केले कधी नाही” ☆ सौ. ज्योती कुलकर्णी ☆

(सिद्ध लेखिका समुहातर्फे आयोजित राज्यस्तरीय गझल लेखन स्पर्धेत – प्रथम पारितोषिक प्राप्त)

कुणी मज नाव ठेवावे असे केले कधी नाही

जरी मी नाव काढावे असे केले कधी नाही

*

कसे देवास मी मागू? निरोगी ठेवले त्याने

नियंत्याने कमी द्यावे असे केले कधी नाही

*

जरी मी हारले असले तरी वृत्ती खिलाडू ना!

रडीचे डाव खेळावे असे केले कधी नाही

*

दिल्या जखमा मलाही तर जगाने बोचऱ्या काही

जगाने बोल लावावे असे केले कधी नाही

*

कुठे मी आपल्या केली भलाई वागण्याची का?

कुणी वाईट वागावे असे केले कधी नाही

© सौ. ज्योती कुलकर्णी

अकोला.

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ संपादकीय निवेदन – डॉ. शैलजा करोडे – अभिनंदन ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information 

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

डॉ. शैलजा करोडे

💐 अ भि नं द न 💐

आपल्या समूहातील ज्येष्ठ लेखिका / कवयित्री सुश्री डॉ. शैलजा करोडे यांना दिशा महाराष्ट्राची या यू ट्यूब चॅनेलप्रस्तुत साहित्य संमेलनात साहित्य भूषण – २०२६ पुरस्काराने सन्मानित करण्यात आले आहे.

– – त्यांच्या प्रदीर्घ साहित्य सेवेसाठी त्यांना हा पुरस्कार प्रदान करण्यात आला आहे. शैलजा करोडे यांची नुकतीच — 1) माणुसकी—कथासंग्रह, 2) हुंकार काळजाचा—कवितासंग्रह, आणि 3)निशिगंध —ललित लेख संग्रह — अशी तीन पुस्तके प्रकाशित झालेली असून, आतापर्यंत त्यांची एकूण 26 पुस्तके प्रकाशित झालेली आहेत. समाजाच्या सर्व स्तरातून शैलजा करोडे यांचे अभिनंदन होत आहे.

आपल्या सर्वांतर्फे शैलजाताईंचे मनःपूर्वक खूप अभिनंदन, आणि पुढील अशाच यशस्वी साहित्य सेवेसाठी असंख्य हार्दिक शुभेच्छा. 💐💐

आजच्या जीवनरंग सदरात वाचूया त्यांची एक कथा.

संपादक मंडळ

ई अभिव्यक्ती मराठी

 

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ.उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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सूचनाएँ/Information ☆ प्रथम अफ्रीका क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन में भागीदारी ☆ साभार – डॉ. जवाहर कर्नावट ☆

 ☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹 प्रथम अफ्रीका क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन में भागीदारी 🌹 साभार – डॉ जवाहर कर्णावट 🌹

मिस्र (Egypt) की राजधानी काहिरा में भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा प्रथम अफ्रीकी क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन 8- 9 फरवरी 2026 को संपन्न हुआ।

इस सम्मेलन में  मुझे   विशिष्ट वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था ।मिस्र के अलावा दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, जांबिया, केन्या, तंजानिया ,मॉरीशस आदि देशों के हिंदी लेखकों एवं शिक्षकों की  भागीदारी रही। सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर विदेश सचिव (दक्षिण) श्रीमती  नीना मल्होत्रा ,मिश्र में  भारत के राजदूत श्री सुरेश के रेड्डी, ऐन शेम्स विश्वविद्यालय  मिस्र के अध्यक्ष तथा नेपाल के राजदूत श्री सुशील कुमार लम्साल की विशिष्ट उपस्थिति रही ।इस सम्मेलन का संयोजन मौलाना अबुल कलाम आजाद, सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक श्री प्रकाश चौधरी ने किया। इस अवसर पर आईसेक्ट प्रकाशन द्वारा श्री संतोष चौबे जी के मार्गदर्शन में मेरे द्वारा संपादित  पुस्तक ‘विश्व में हिंदी’ (70 देशों में हिंदी) विदेश सचिव (दक्षिण) श्रीमती नीना मल्होत्रा तथा भारतीय राजदूत श्री रेड्डी को  भेंट की।

सम्मेलन में मिस्र के विश्वविद्यालय  तथा संस्थाओं में अध्यनरत सौ से अधिक विद्यार्थियों , शिक्षकों तथा लेखकों की भी भागीदारी रही।

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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