हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ अभी अभी # १०२५ ⇒ व्यंग्य – लॉ और इन-लॉ ☆ श्री प्रदीप शर्मा ☆

श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका व्यंग्य – “लॉ और इन-लॉ।)

?अभी अभी # १०२५ ⇒ व्यंग्य – लॉ और इन-लॉ ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

इंसान प्रेम को रिश्तों में बांधता है, उसे नाम देता है, समाज उसे स्वीकृति देता है। रिश्ते लौकिक भी होते हैं और अलौकिक भी ! जिन प्रथा और परंपराओं को समाज मान्यता देता है, कालांतर में वे ही कानून का रूप ले लेती हैं। अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेने पर विवाह संपन्न हो जाता है। शादी होते ही नए रिश्ते जन्म लेने लगते हैं, सास ससुर, साला साली, दामाद और समधी, समधन। एक और संसार, जिसे ससुराल कहते हैं, जीवन में प्रवेश कर जाता है।

कानून को अंग्रेजी में लॉ कहते हैं और ससुराल पक्ष को इन -लॉ। दुनिया का कोई कानून आपको अपने ससुर को कानूनी रूप से पिता मानने को बाध्य नहीं कर सकता। हम यहां उनकी बात नहीं कर रहे, जो अपने बाप को ही बाप नहीं मानते। लेकिन ससुर को फादर -इन -लॉ, यानी कानून के अनुसार पिता तो नहीं माना जा सकता न। साला यह कौन सा लॉ है जो साले को जबरदस्ती ब्रदर – इन – लॉ, यानी कानूनी रूप से आपका भाई बना बैठता है। यह तो अंधा कानून हुआ। भाषा के नाम पर रिश्तों का यह अत्याचार हम कब तक सहते रहेंगे। सास, सास ही रहेगी, वह मदर – इन – लॉ, यानी कानूनी तरीके से हमारी मां नहीं बन सकेगी। बहू, बहू ही रहेगी, सारी खुदाई एक तरफ रहेगी, लेकिन जोरू का भाई, जोरू का भाई ही रहेगा, कानूनी रूप से हमारा भाई यानी ब्रदर – इन – लॉ कभी नहीं बनेगा। हमने पहले भी अंग्रेजी का विरोध किया है, और कानूनन, रिश्तों की आड़ में ससुराल को हम पर हावी करने की इस साजिश का हम पुरजोर विरोध करते हैं।।

हम शायद इस बात को इतना तूल भी नहीं देते, अगर हमारी साली बीच में नहीं आती ! हमने शादी ही यह सोचकर करी थी कि साली, आधी घर वाली लेकिन जब अंग्रेजी किताब उठाई तो पाया वह तो सिस्टर – इन – लॉ है, यानी वह तो आधी बहन बनने पर तुल गई। आग लगे ऐसी अंग्रेजी किताबों को। कितना प्यारा शब्द है दूल्हा – दुल्हन !

और अंग्रेजी में ब्राइड और ब्राइड ग्रूम। हमें तो इस इंग्लिश शब्द में जोरू और जोरू के गुलाम वाली बू आती है। हसबैंड वाइफ फिर भी थोड़ा ठीक है, वाइफ ही अपना बैंड बजा रही है, फादर – इन – लॉ तो नहीं।

हम कानून का भी सम्मान करते हैं और रिश्तों का भी। कुछ रिश्ते कानून से भी ऊपर होते हैं, और संसारी रिश्तों से भी ! उन्हें हम अलौकिक रिश्ते कहते हैं। शिव पार्वती, लक्ष्मी नारायण और सीता – राम की तरह ही एक अलौकिक रिश्ता और भी है राधा कृष्ण का, जहां कोई सामाजिक बंधन, मर्यादा नहीं। सबसे ऊंची, प्रेम सगाई। एक ऐसा आदर्श जो मुक्त है, उन्मुक्त है, लेकिन आचरण में नहीं उतारा जा सकता। भक्त होना बड़ा कठिन है। अपने पति के होते हुए जब चित्तौड़ की महारानी, मीराबाई गलियों में इकतारा ले, गाती फिरती है, मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। जाके सर मोर मुकुट, मेरो पति सोई, तो सारे आदर्श, प्रथा, परंपराएं, सामाजिक बंधन, कानूनी बेड़ियां कमजोर पड़ जाती हैं। मीरा जीत जाती है, जगत हार जाता है।।

चलिए वापस लौटते हैं लव इन और इन लाँ के रिश्ते से लिव इन रिलेशन पर ! जी हां, वही मुक्त और उन्मुक्त प्रेम जिसे सुप्रीम कोर्ट भी मान्यता दे चुका है। गुजरात का छुट्टा छेड़ा, कब का गुजरात छोड़, एक व्यापक रूप अख्तयार कर चुका है। विवाह का रजिस्ट्रेशन जरूरी है, लिव इन का नहीं, क्योंकि विवाह एक बंधन है और लिव इन एक आपसी करार, जिससे आप जब चाहें करें इन्कार।

रिश्तों में प्रेम हो, मर्यादा हो, एक ऐसा मनोवैज्ञानिक बंधन हो जिसमें मुक्ति का भी अहसास हो। समाज और कानून के बंधन में कब बंध पाए प्रेम के रिश्ते। अगर रिश्तों में प्रेम होता तो इतने तलाक नहीं होते। घर घर में पारिवारिक क्लेश और मनमुटाव नहीं होता। एक ही रास्ता रिश्तों को पटरी पर लाने का। लव इन, लॉ आउट। लव नॉट आउट।।

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (22 जून से 28 जून 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ? 

☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (22 जून से 28 जून 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

जय श्री राम। कहा जाता है कि समय सबसे बलवान होता है परंतु हमारे देवता श्री माता अंजनी के लाल श्री हनुमान जी समय से भी शक्तिशाली है अगर समय कुछ गड़बड़ करता है तो उसको सुधारने की ताकत हमारे श्री हनुमान जी में है, हनुमान जी की भक्ति की कड़ी में आज की चौपाई है –

नासै रोग हरे सब पीरा |

जपत निरन्तर हनुमत बीरा ||

इस चौपाई के संपुट पाठ करने से समस्त प्रकार के रोग और पीड़ाओं का अंत हो जाएगा।

नासै रोग हरे सब पीरा नाम की पुस्तक में श्रीहनुमान चालीसा की चौपाइयों से संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

आइये अब मैं पंडित अनिल पाण्डेय आपको इस सप्ताह अर्थात 22 जून से 28 जून 2026 तक के सप्ताह के, ग्रहों के विचरण की जानकारी दे रहा हूं।

इस सप्ताह सूर्य मिथुन राशि में, मंगल वृष राशि में, बुध, गुरु और शुक्र कर्क राशि में, शनि मीन राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे

आईये अब हम राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।

मेष राशि

इस सप्ताह आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यापारियों को सावधान रहना चाहिए। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह काफी ठीक रहेगा। आपको अपने संतान से सहयोग मिल सकता है। भाई बहनों के साथ संबंध सामान्य रहेंगे। इस सप्ताह आपके लिए 24, 25 और 26 तारीख के दोपहर तक का समय कार्यों के प्रति अनुकूल है। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधान रहकर कार्यों का निपटारा करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

वृष राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने की थोड़ी उम्मीद है। भाई बहनों के साथ सामान्य संबंध रहेंगे अर्थात जैसे पहले थे वैसे ही रहेंगे। आपके जीवनसाथी को विभिन्न कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। आपके प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है। दुर्घटना होने की आशंका करीब करीब नहीं है। आप को अपने संतान से इस सप्ताह कोई विशेष सहयोग नहीं मिल पाएगा। इस सप्ताह आपके लिए 27 और 28 तारीख कार्यों को पूर्ण करने के लिए उपयोगी है। 24, 25 और 26 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन स्नान करने के उपरांत तांबे के पात्र में जल अक्षत और लाल पुष्प लेकर भगवान सूर्य को जल अर्पण करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है। औऊप

मिथुन राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने की उम्मीद है। आपके जीवनसाथी के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। इस सप्ताह आपको अपने कर्मों पर विश्वास करना चाहिए। भाग्य पर नहीं। इस सप्ताह आपको अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सचेत रहना चाहिए। कुछ लोग आपको मानसिक कष्ट प्रदान करने का प्रयास कर सकते हैं। उनसे सावधान रहें। अगर आप सावधान रहेंगे तो वे आपको तंग नहीं कर पाएंगे। कचहरी के कार्यों में भी सावधान रहें। इस सप्ताह आपके लिए 22 और 23 तारीख परिणाम दायक हैं। सभी प्रकार के कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए आपको इन तारीखों का उपयोग करना चाहिए। 27 और 28 तारीख को आप अपने शत्रुओं पर सफलता पा सकते हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

कर्क राशि

यह सप्ताह आपके संतान के लिए ठीक रहेगा। उनको उन्नति प्राप्त हो सकती है। उनका अच्छा सहयोग आपको प्राप्त होगा। छात्रों के लिए भी यह सप्ताह ठीक रहेगा। उनको परीक्षाओं में सफलता प्राप्त होगी। व्यापार ठीक चलेगा। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य रहेगा अर्थात जैसा पहले था वैसा ही रहेगा। कचहरी के कार्यों में सावधानी बरतें। इस सप्ताह आपके लिए 24, 25 और 26 तारीख के दोपहर तक का समय हर प्रकार के कार्यों के लिए ठीक-ठाक है। 26 तारीख की दोपहर से लेकर 27 और 28 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। विशेष रूप से अपने संतान के प्रति। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले उड़द की दाल का दान करें और शनिवार को शनि मंदिर में जाकर पूजा पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन सोमवार है।

सिंह राशि

इस सप्ताह आपको धन लाभ की उम्मीद है। आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपके माता जी का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। छात्रों की पढ़ाई अच्छी चलेगी। संतान से आपके सहयोग मिलेगा। कचहरी के कार्यों में सावधान रहें। अधिकारी और कर्मचारियों को सावधान रहकर कार्य करना चाहिए। व्यापार सामान्य रूप से चलेगा। दुर्घटनाओं से इस सप्ताह आपको थोड़ा सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपके लिए 26 की दोपहर से लेकर 27 और 28 तारीख प्रतिष्ठा संबंधी कार्यों के लिए उपयोगी है। जनप्रतिनिधियों को इस तारीख का उपयोग करना चाहिए। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें और मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

कन्या राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने की उम्मीद है। कचहरी के कार्यों में सफलता मिल सकती है, मगर बहुत ज्यादा सावधानी लेनी पड़ेगी। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। भाई बहनों के साथ आपका संबंध ठीक-ठाक रहेगा। आपके माता जी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आपका और आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। गारदन या कमर में दर्द हो हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 22 और 23 तारीख विभिन्न कार्यों में मददगार है। 26 तारीख के दोपहर से लेकर 27 और 28 तारीख को आपको अपने भाइयों के प्रति सावधान रहना चाहिए। उनसे आपको या उनको कष्ट हो सकता है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन सफेद चावल का दान करें और शुक्रवार को मंदिर में जाकर पुजारी जी को सफेद वस्त्रो का दान दें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

तुला राशि

इस सप्ताह भाग्य आपका साथ दे सकता है। कुछ कार्य भाग्य के भरोसे कर सकते हैं। मगर ज्यादा विश्वास आपको अपने कर्मों पर करना चाहिए। धन आने की उम्मीद की जा सकती है। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। कार्यालय में आपको सावधान रहकर कार्य करना चाहिए। वैसे कार्यालय में आपका कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा। इस सप्ताह आपके शत्रु शांत रहेंगे परंतु समाप्त नहीं हो पाएंगे। इस सप्ताह आपके लिए 24, 25 और 26 की दोपहर तक का समय विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए मंगल दायक है। 26 की दोपहर से लेकर 27 और 28 तारीख को आपको धन प्राप्त करने के संबंध में सतर्कता पूर्वक कार्य करना चाहिए। अगर आप सतर्कता पूर्वक कार्य नहीं करेंगे तो धन आपके पास नहीं आ पाएगा। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

वृश्चिक राशि

इस सप्ताह आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपकी मानसिक स्थिति भी बहुत अच्छी रहेगी। आत्मविश्वास बढ़ेगा। भाग्य से आपको लाभ मिलेगा। आपके जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। संतान से आपको सामान्य सहयोग ही प्राप्त हो पाएगा। ज्यादा सहयोग नहीं मिलेगा। दुर्घटनाओं से चोट लगने की संभावना बहुत कम है। धन आने की उम्मीद की जा सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 26 की दोपहर के बाद से लेकर 27 और 28 तारीख को लाभदायक है। 24, 25 और 26 तारीख की दोपहर तक आपको सावधान रहकर कार्यों का निष्पादन करना चाहिए। श्रइस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

धनु राशि

इस सप्ताह आपका आत्मविश्वास बहुत बढ़ेगा। आपके कई कार्य आपके आत्म विश्वास के कारण ही संपन्न हो जाएंगे। लंबी यात्रा का योग बन सकता है। दुर्घटनाओं से आपको खतरा होने की उम्मीद करीब करीब नहीं है। आप अपने शत्रुओं को इस सप्ताह थोड़े से परिश्रम से परास्त कर सकते हैं, परंतु उनसे आपको इस सप्ताह सावधान भी रहना चाहिए। आपका और आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 22 और 23 तारीख शुभ है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। वकीलों से मिलने का कार्य आपको 27 और 28 तारीख को विशेष रूप से कर लेना चाहिए। इसके अच्छे परिणाम निकल सकते हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

मकर राशि

यह सप्ताह आपके जीवन साथी के लिए अत्यंत अच्छा रहेगा। उनको बहुत सारे कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। आपके शत्रु इस सप्ताह शांत रहेंगे। अगर आप ज्यादा प्रयास करेंगे समाप्त भी हो सकते हैं। धन प्राप्ति के लिए आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको अपने संतान से सहयोग नहीं मिल पाएगा। कचहरी के कार्यों में सफलता मिल सकती है। मगर सावधानी बढ़ानी पड़ेगी। इस सप्ताह आपके लिए 24, 25 और 26 तारीख की दोपहर तक का समय अच्छा है। 26 के दोपहर के बाद से लेकर 27 और 28 तारीख को धन लाभ के मामले में आपको सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

कुंभ राशि

कर्मचारी और अधिकारियों के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहेगा। आपको धन की प्राप्ति हो सकती है। आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य भी ठीक रहना चाहिए। आपके घर में धन खर्च की कोई योजना बन रही है। जैसे नया प्लाट खरीदना, मकान बनवाना, शादी करना आदि। इस सप्ताह आपको अपने संतान से सहयोग प्राप्त हो सकता है। परीक्षार्थियों को परीक्षा पास करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। इस सप्ताह आपके लिए 27 और 28 तारीख को कार्यालय के कार्यों में सफलता का योग है। 22 और 23 तारीख को आपको सावधानी पूर्वक कार्यों को अंजाम देना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

मीन राशि

यह सप्ताह आपके संतान के लिए ठीक-ठाक हो सकता है। उनको सफलताएं प्राप्त हो सकती हैं। उनका अच्छा सहयोग भी आपको मिल सकता है। छात्रों की पढ़ाई ठीक चलेगी। उनको सफलता प्राप्त हो सकती है। भाई बहनों के साथ संबंध पहले जैसे ही रहेंगे। कचहरी के कार्यों में सावधानी पूर्वक कार्य करते रहें। सफलता मिल सकती है। प्रतिष्ठा सामान्य रहेगी अर्थात आपकी प्रतिष्ठा में न कमी आएगी और ना बढ़ोतरी होगी। इस सप्ताह आपके लिए 22 और 23 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों को निपटने के लिए परिणाम मूलक और प्रभावशाली हैं। सप्ताह के बाकी दिनों में आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को करना चाहिए। कोई भी कार्य 26 तारीख के दोपहर के बाद से लेकर 27 और 28 तारीख को भाग्य के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।

 राशि चिन्ह साभार – List Of Zodiac Signs In Marathi | बारा राशी नावे व चिन्हे (lovequotesking.com)

निवेदक:-

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

(प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री)

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल 

संपर्क – साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया, सागर- 470004 मध्यप्रदेश 

मो – 8959594400

ईमेल – 

यूट्यूब चैनल >> आसरा ज्योतिष 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ लघुकथा – “आज का रांझा” ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆

श्री कमलेश भारतीय 

(जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता)

☆ लघुकथा – “आज का रांझा” ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆

उन दोनों ने एक दूसरे को देख लिया था और मुस्कुरा दिए थे। करीब आते ही लड़की ने इशारा किया था और क्वार्टरों की ओर बढ़ चली। लड़का पीछे पीछे चलने लगा।

लड़के ने कहा -तुम्हारी आंखें झील सी गहरी हैं।

– हूं।

लड़की ने तेज तेज कदम रखते इतना ही कहा।

– तुम्हारे बाल काले बादल हैं।

– हूं।

लड़की तेज चलती गयी।

बाद में लड़का उसकी गर्दन , उंगलियों, गोलाइयों और कसाव की उपमाएं देता रहा। लड़की ने हूं भी नहीं की।

क्वार्टर खोलते ही लड़की ने पूछा -तुम्हारे लिए चाय बनाऊं?

चाय कह देना ही उसकी कमजोर नस पर हाथ रख देने के समान है , दूसरा वह बनाये। लड़के ने हां कह दी। लड़की चाय चली गयी औ, लड़का सपने बुनने लगा। दोनों नौकरी करते हैं। एक दूसरे को चाहते हैं। बस। ज़िंदगी कटेगी।

पर्दा हटा और ,,,,

लड़का सोफे में धंस गया। उसे लगा जैसे लड़की के हाथ में चाय का प्याला न होकर कोई रायफल हो , जिसकी नली उसकी तरफ हो। जो अभी गोली उगल देगी।

– चाय नहीं लोगे?

लड़का चुप बैठा रहा।

लड़की से, बोली -मेरा चेहरा देखते हो? स्टोव के ऊपर अचानक आने से झुलस गया। तुम्हें चाय तो पिलानी ही थी। सो दर्द पिये चुपचाप बना लाई।

लड़के ने कुछ नहीं कहा। उठा और दरवाजे तक पहुंच गया।

– चाय नहीं लोगे?

लड़की ने पूछा।

– फिर कब आओगे?

– अब नहीं आऊंगा।

– क्यों? मैं सुंदर नहीं रही?

और वह खिलखिला कर हंस दी।

लड़के ने पलट कर देखा,,,

लड़की के हाथ में एक सड़ा हुआ चेहरा था और वह पहले की तरह सुंदर थी।

लड़का मुस्कुरा कर करीब आने लगा तो उसने सड़ा हुआ चेहरा उसके मुंह पर फेंकते कहा -मुझे मुंह मत दिखाओ।

लड़के में हिम्मत नहीं थी कि उसकी अवज्ञा करता।

© श्री कमलेश भारतीय

पूर्व उपाध्यक्ष हरियाणा ग्रंथ अकादमी

संपर्क :   1034-बी, अर्बन एस्टेट-।।, हिसार-125005 (हरियाणा) मो. 94160-47075

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिंदी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ श्रेयस साहित्य # ५६ – आलेख – सूर्य की घनघोर किरणों का असर – तब और अब ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆

श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्रेयस साहित्य # ५६ ☆

☆ आलेख ☆ ~ सूर्य की घनघोर किरणों का असर – तब और अब ~ ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆ 

सूर्य की किरणे शरीर को छुकर लौट पड़ी, लगा कि किसी ने जलते लाल तप्त लौह को बदन पर ही रख दिया हो। गनीमत बस इतनी थी कि किरणे छु कर ही निकल गयीं थीं। असंख्य – अनगिनत विषाणु -कीटाणु बिलबिला कर रह गये और यह कहते सुने गये कि हे भगवन् ! जान बची तो लाखों पाए।

हालांकि आधुनिक घोर शीतक यन्त्र से निकली बर्फ़ीली हवाओं से चिल्ड हो रहे कमरे से निकल कर बाहर आने की जुर्रत उसने मज़बूरी में ही कि थी। मन का सुकून शबाश पर था  लेकिन उसे यह पता नही था कि असंख्य दुश्मन भी सुकून से उसे चूस रहे थे। घुटनों और जोड़ों के दर्द से कराहते शरीर के पास बेचारा नींद आने से डर रहा था। एक गिलास दूध में घोल कर पिए गये सेसेस का इतना असर जरूर हुआ कि अगले कुछ दिनों- हफ्तों वह बिना दर्द के सो पाया।

पच्चास वर्ष पहले बचपन में अलगू चाचा को खुली पीठ को घंटों हल जोतते लेखक ने देखा था, जिनके नंगे बदन को सूर्य की यहीं घनघोर किरणे घंटो चूमती रहती थीं और वे ची करना तो दूर की बाद, पूर्बी की धुन में खो गये होते थे। उन असंख्य बिषाणुओं – किटाणुओं का दूर दूर तक पता नही लगता था, यूँ कहे सूर्य की तप्त किरणों में उनका अस्तित्व ही नही बचा था। अलगू चाचा का शरीर बिना बिस्तर बिछे बसखट पर जब एक बार गिरा तो उसके बाद वे चैन की वाली  दुनियां में जाकर भूल गये कि कोई दर्द वाली दुनियां भी होती है।

बैलो के गर्दन में बधे घुघुरुओ की आवाज ने उन्हें हौले से जगाया, तो ठंडी ठंडी भोर ने उनका आलिंगन करते हुए पूछा, अलगू चाचा पक्षियों का कलरव आपको कैसा लगा ?

♥♥♥♥

नोट : तब दादा की पीठ पर सूर्य की किरणे कहर बरसाती थी, लेकिन जिन्दगी रोग रहित चैन की थी, आज पोते के पीठ पर जब ए. सी  बर्फ जमाती है, लेकिन जिंदगी दर्द भरी, पीड़ा में है.

© श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”

लखनऊ, उप्र, (भारत )

दिनांक 22-02-2025

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ यात्रा संस्मरण – सगरमाथा से समुन्दर – पग-पग नर्मदा यात्रा – भाग – ३७ ☆ श्री सुरेश पटवा ☆

श्री सुरेश पटवा

(श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं। आपकी पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “गुलामी की कहानी, पंचमढ़ी की कहानी, नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास) एवं  तलवार की धार को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है। अब आप प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकते हैं यात्रा संस्मरण – सगरमाथा से समुन्दर)

? यात्रा संस्मरण – सगरमाथा से समुन्दर – पग-पग नर्मदा यात्रा – भाग- ३७ ☆ श्री सुरेश पटवा ?

7.पग-पग नर्मदा यात्रा

भड़पुरा से झाँसीघाट: 17 अक्टूबर 2018

रात्रि विश्राम हमने भडपुरा स्थित कुटी में किया। कुटी की देखभाल एक बूढ़ी माँ माँग-ताँग कर करती है। वह आश्रम किसी बड़े किसान ने इस शर्त पर बनवा दिया था कि परिक्रमा करने वालों को भोजन मिलना चाहिए। बूढ़ी माँ वैरागी हैं, उसका बेटा नवरात्रि में दुर्गा जी की मूर्ति का पंडा बना था। झाँकी के पंडाल में रहता था। सुबह नहाने धोने भर को घर आता था। उसे ख़बर लगी तो वह देखने आया। बातचीत करके संतुष्ट हो कर चला गया। उसकी बीबी को छः लोगों के लिए रोटी सब्ज़ी बनाना था तो उसका मूड ख़राब होने से वातावरण ठीक नहीं रहा। हमने खाना बनाने में मदद की पेशकश की, जिसे निष्ठुरता से ठुकरा दिया गया। उसका 12 साल का लड़का बहुत बातूनी था। उसी के मार्फ़त बातचीत चलती रही। अंत में अपनी घरेलू चार रोटियों के बराबर एक टिक्कड नमक मिर्च में बनी आलू की सब्ज़ी के साथ एक गोल थाली में आए जैसे भीम अपनी गदा के साथ रथ में डोलता चला आ रहा हो। किसी ने दो किसी ने तीन और किसी ने चार खाए। सच हैं स्वाद भोजन में नहीं भूख में होता है। नींद न जाने टूटी खाट, भूख न जाने बासी भात। यहाँ तो न खाट थी और न भात परंतु नर्मदा  किनारा था। बाहर निकल कर नर्मदा की ओर देखा वह शांत होकर हँसिया आकार चाँद की रोशनी में निंद्रामग्न थी। लहरों की झिलमिल जो दिन में नज़र आती है वह नदारत थी।

वर्षो बाद जमीन पर और कुछ लोगों ने शायद जीवन में पहली बार गद्दे के बिना सोने का प्रयास शुरू हुआ। बिस्तर तीन तरफ़ से खुली दलहान में लगाए गए। सबसे पहले तो मच्छरों का हमला हुआ लड़के ने कचरा जलाकर धुआँ करके उनसे छुटकारा दिलाया। उसके बाद मुंशीलाल जी के पास एक कुतिया आकर सो गई। उसे डंडे से भगाया। सोने की कोशिश की तो बरगद के पेड़ पर तेज़ हलचल होने लगी। जैसे भूतों का डेरा हो। उठकर देखा तो निशाचार चमगादड़ का एक झुंड बरगद के फलों को खा रहा था। फलों के टुकड़े पट-पट नीचे गिर रहे थे। एकाध घंटा चमगादड़ देखते रहे। फिर सोने की कोशिश की तो सिर के पास कुछ आवाज़ आई। हाथ फेरा तो एक मेंढक पकड़ में आया उसे दूर फेंक दिया। सब डर गए कि मेंढक की खोज में साँप वहाँ आ सकता है। हमने सोचा छोड़ो यार शंकर भगवान गले में डाले रहते हैं। अब आएगा सो आएगा। 90% सांप ज़हरीले नहीं होते हैं और फिर जैसे हम सांप से डरते हैं उसी प्रकार वे भी आदमी से डरते हैं। अरुण दनायक जी अपनी डायरी लिखने बैठ गए। लोग पहले पानी पीते फिर पेशाब जाते रात गुज़रने की राह देखते रहे। देर रात एक झपकी लगी और सवेरा हो गया। कहीं कोई पाखाना नहीं था। खुले में हल्के हुए। कुटी की गाय का एक-एक गिलास कच्चा दूध पिया। उनको तीन सौ रुपए दान स्वरूप दिए और चल पड़े।

हम गाँव वालों से बैलों के बारे में पूछते रहे कि एक ज़माने में खेतों में, सड़कों पर और गौधुलि बेला में चर कर लौटते हुई रेहड में गायों के साथ मस्ती करते बैल और उछलते बछड़े दिखते थे, वे अब नदारत हैं। जो जानकारी मिली वह भयावह है। जब से ट्रैक्टर ट्रॉली, कल्टिवेटर, रोटावेटा, आए हैं तब से हल-बखर और बैलगाड़ी के साथ बैलों की भी विदाई हो गई लगती है। यहाँ तक तो ठीक था कि यंत्रीकरण ने मानवीय श्रम की जगह मशीनीकरण से कृषि काम आसान और उसकी गति तेज़ हो गई।

ग्रामीण लोगों से जब पूछा कि बैलों की ग़ैर-मौजूदगी में गायों के ग्यावन की क्या व्यवस्था है। ख़ुलासे चौंकाने वाले थे। गाय बैल का नैसर्गिक संसर्ग समाप्त हो गया है। भिटौनी में पशु चिकित्सालय में ख़बर देने पर वहाँ से कृत्रिम गर्भधारण करने कर्मचारी आते हैं। कृत्रिम गर्भाधान से गाय की देशी नस्ल ख़त्म हो रही है क्योंकि नर्मदा किनारे के गाँवों में बैल बूचडखानों की भेंट चढ़ चुके हैं। सरकार हरियाणा से विदेशी नस्ल का बीज लाकर गर्भाधान करवाती है। इस व्यवस्था से गाय के दूध की प्राकृतिक गुणवत्ता समाप्त होती जा रही है। उनके और भैंस के दूध में कोई अंतर नहीं रहा है। गाय का दूध अब हल्का पीला नहीं होता। हमने जब भडपुरा में गाय का ताज़ा दूध पिया था वह पूरी तरह सफ़ेद था। सबसे पहले तो गाय से प्राकृतिक चारा छीनकर  उन्हें खली-भूसा खिलाने लगे। उनसे खुली हवा में विचरण के साथ अब बैलों से प्राकृतिक मिलन भी छुड़ा लिया। एक मशीनी क्रिया से अनुत्तेजित अवस्था में लम्बी सीरिंज से गर्भाधान ने पशुओं से उत्साह उमंग उछलना कूदना भी छुड़ा लिया है। ऊपर से इंजेक्शन लगाकर दूध दुहने लगे। इस पूरी यात्रा में नर्मदा किनारे सिर्फ़ एक जगह गायों को बैल दिखा उनके चेहरे चमक उठे वे चारा चरना छोड़कर एकटक बैल को देखे जा रहीं थीं। भूख, नींद, आराम और प्रजनन पशुओं और मनुष्य की एकसी अनिवार्यता हैं इसीलिए मनुष्य को सामाजिक पशु माना जाता है। वह अद्भुत दृश्य तुरंत मोबाइल में क़ैद कर लिया।

हम पाँचों फिर चले और बीहड डांगर, नाले पार करते भीकमपुर पहुँचे। ऊँची घास से रास्ता नहीं सूझता था। एक भी गलत कदम कम से कम बीस फुट नींचे गिरा सकता था। और हुआ भी यही एक जगह रास्ते की खोज में दनायक जी गिरते गिरते बचे वापिस मुड उपर से मुंशीलाल पाटकार ने आवाज लगाई इधर आईये रास्ता यहाँ से है। अरुण दनायक ने सुरेश पटवा को मन ही मन कुढ़ते हुए ख़ूब गालियों से नवाज़ा कि यार इनके कहने में कहाँ फँस गए। अब कभी नहीं आएँगे। थोड़ा आराम करने के बाद बोले यार अगली यात्रा फ़रवरी में ही करेंगे।

भडपुरा के हनुमान आश्रम का तोता हमारे पहुँचते ही अपने सिर पर आकर बैठ गया। उतरने से साफ़ इंकार करता रहा। चिकनी चाँद उसे भा गई। तोता महाराज वीडियो के शौक़ीन थे। जिस देश में गंगा बहती है का “है आग हमारे सीने मे हम आग से खेला करते हैं “ गीत पर ख़ूब नाचा ससुरा। विडियो बंद करो तो चोंच मारता था। फिर लगाया “चल उड़ जा रे पंछी ये देश हुआ बेगाना” सुनकर मस्त हो गए तोता राम। काफ़ी मान-मनुअ्अल के बाद अरूण दनायक भाई के सिर को भी उपकृत किया। एक और साथी जगमोहन भाई की ज़िद पर महाराज वहाँ पहुँचे लेकिन टैक्स के रूप में चोंच मारकर ख़ून निकाल दिया। उसे काजू दिए तो उसने कुतर कर छोड़ दिए। तोता खुले में रहता था उड़ता नहीं था। पता चला कि उसे गाँजा पीसकर खिलाया गया है इसलिए उसे तलफ की आदत हो है इसलिए वह बाबाओं के पास रहता है।

धरती कछार गाँव पड़ा, वहाँ के स्कूल में दनायक जी ने बच्चों से मुलाकात में गांधी चर्चा की जिसने हमें आन्नदित किया कि गांधी जी की पहुँच समय और भौगोलिक स्थितियों की ग़ुलाम नहीं है। आंगनवाडी केन्द्र की ममता चढार की कर्तव्य परायणता से प्रफुल्लित हुए। धरती कछार से गोपाल बर्मन को कोलिता दादा का बैग रखने को साथ ले लिया। उसने बातों-बातों में बताया कि लोग भाजपा से नाराज़ हैं। ग्रामीण समाज में भी लड़कियाँ खुल कर बिना झिझक सामने आने लगीं हैं और शादियों के लिए लड़कों को निरस्त भी करने लगीं हैं। वहीं दूसरी ओर उनका यौन व्यवहार भी तेज़ी से बदल रहा है। बाय फ़्रेंड-गर्ल फ़्रेंड का कल्चर खेतों में या मेड पर विडीओ, वट्सएप, फ़ेस्बुक के माध्यम से फैल रहा है। ये मोबाइल क्रांति का असर है। अब लड़कियाँ को सेनेटरी पैड और विटामिन की गोलियाँ आंगनवाड़ी से प्रदान की जाती हैं।

आश्रम से चले तो आधा घण्टे में एक बड़े नाले से साबका पड़ा। सौ फ़ुट चढ़ाई चढ़ कर फिर नीचे उतर नाला पार किया, फिर चढ़ाई चढ़कर ऊपर पहुँचे तो पहाड़ी के सामने एक और नाला दिखा। भूगोल का दिमाग़ लगाया तो देखा कि एक ही नाला सांप की कुंडली की तरह चारों तरफ़ घुमा हुआ है। चार-पाँच बार पहाड़ियाँ चढ़-उतर कर नाला पार करना होगा लोगों का दम निकल जाएगा। निर्णय लिया कि दाहिनी तरफ़ नर्मदा में उतर जाएँ वहाँ से किनारे-किनारे झाँसीघाट की तरफ़ बढ़ेंगे। आगे बढ़े तो एक सौ फ़ुट ऊँची खाई का मुँह नाले में खुल रहा था। वह नाला नर्मदा में मिल रहा था। उतरने को कहीं कोई रास्ता नहीं था। हम (सुरेश पटवा) और कोलिता दादा आगे थे बाक़ी तीन पीछे भटक गए। कोलिता दादा को पीछे करके हम बैठ कर सौ फ़ुट खाई में स्कीइंग करके नाले के किनारे से नर्मदा की गोद में पहुँच गए। उन्होंने कोलिता दादा को भी इसी तरह स्कीइंग करके उतारा। तब तक बाक़ी लोग ऊपर आ गए थे वे चिल्ला रहे थे कि रास्ता कहाँ है। उनको तरीक़ा बताया तो वे आगे बढ़ने को तैयार न थे। लेकिन कोई रास्ता था भी नहीं। आधे घंटे की मशक़्क़त के बाद सब लोग नीचे आ गए। वहाँ से विक्रमपुर का रेल पुल अब स्पस्ट दिख रहा था और झाँसीघाट का सड़क पुल धुंधला सा नज़र आ रहा था।

ग्वारीघाट से लगभग पचास किमी दूर जबलपुर और नरसिंघपुर की सीमा पर स्थित भीकमपुर गाँव है। नर्मदा दाहिनी तट की ओर शान्त सी बहती है उधर बाँए तट से सनेर नदी अथाह जलराशि लिये आगे बढती है। ऐसा लगता है नर्मदा बडी विनम्रता से सनेर की भेंट की हुई जलराशि वैसे ही स्वीकारती है जैसे भिषुणी भिक्षा ग्रहण करती है और फिर अगले घाट की ओर चली जाती है। सनेर सदानीरा है,इसका जल स्वच्छ है और इसे लोग सनीर भी कहते हैं। सनेर नदी का उदगम सतपुडा के पहाड से होता है। इसका उदगम स्थल लखनादौन जिला सिवनी स्थित नागटोरिया रय्यत है। यह बारहमासी नदी धनककडी, नागन देवरी, दरगडा, सूखाभारत आदि गावों से गुजरते हुये संगम स्थल भीकमपुर पहुँचती है। कोलूघाट तट पर सिवनी जिले के आदिवासियों का मेला भरता है तो संगम तट भीकमपुर में जबलपुर व नरसिंहपुर जिले के लोग शिवरात्रि आदि पर्वो पर एकत्रित होते हैं।

नर्मदा परिक्रमा का पहला खंड योजना अनुसार पूरा होने को आ रहा था। सुबह से खजूर, मूँगफली दाने और चने व पानी के भरोसे चले आ रहे थे। मंज़िल सामने देखकर भूखी देहों में अजीब सा शक्ति संचार होने लगा। नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लिया फिर दो घंटे में विक्रमपुर के रेल्वे पुलों के नीचे से निकल झाँसीघाट पहुँच गए। नहाया धोया नर्मदा जी को प्रणाम करके झोतेश्वर धर्मशाला पहुँचे।

क्रमशः…

© श्री सुरेश पटवा 

भोपाल, मध्य प्रदेश

संस्थापक सम्पादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३५ – कविता – भयानक… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर ☆

डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “भयानक“.)  

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३५ ?

? कविता – भयानक… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

=1=

द्वेष  ईर्ष्या  कपट  भयानक

गर्म-गर्म  लू-लपट भयानक

=2=

शेर    मारने,    चूहे  निकले

मिल रई ऐसी रपट भयानक

=3=

शिष्य  गुरु  पर  हावी  हैं उफ़

अब वो डाँट न डपट भयानक

=4=

बाहर    ख़ामोशी   है   किन्तु

भीतर शोर है विकट भयानक

=5=

दंगे-तिकड़म-हुड़दंग   ‘राजेश’

करवाती यह  टिकट भयानक

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # ७ – मानव अब तो जाग ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆

सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’

(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता मानव अब तो जाग. )

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # ७ ☆

☆ मानव अब तो जाग ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆

नभ से हर पल गिर रही, लपटें बनकर आग।

जले धरा भी ताप से, मानव अब तो जाग।।

दिनकर निकले भोर में, मोहक लगता रूप।

भरी दुपहरी में लगे, लपट बनी यह धूप।।

शहर सकल वीरान यह, मनुज रहे सब भाग।

जले धरा भी ताप से, मानव अब तो जाग।।

सघन वनों को काट कर, बनते खूब मकान।

बढ़ता पारा देख अब, विकल हुए इंसान।।

सब जन मिलकर गा रहे, गहन तपन का राग।

जले धरा भी ताप से, मानव अब तो जाग।।

बचना है यदि ताप से, जन-जन करे प्रयास।

तरुवर हर इक द्वार हो, हरी-भरी सी घास।।

रिम-झिम प्रभु बरसात कर, मिट जाए यह आग।

जले धरा भी ताप से, मानव अब तो जाग।।

© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”

झालरापाटन राजस्थान

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ “श्री हंस” साहित्य # २०८ ☆ दोहा छंद – ।। बाल काल बचपन नटखटपन ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # २०८ ☆

☆ दोहा छंद ।। बाल काल बचपन नटखटपन ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

1

कभी बाल्यकाल गुम नहीं हो,   बचपन की   उम्र में।

नटखटपन कभी गुम नहीं, हो छोटे चंचल मन में।।

2

चाचा नेहरू जयंती मनाई जाती, ले बाल दिवस रूप।

बच्चों को मोबाइल से दूर, खेलने दो वर्षा और धूप।।

3

बालपन मासूमपन बना रहे, हमेशा मुन्ना-मुनिया में।

बचपन को सुरक्षित रखोहमेशा   ही दुनिया में।।

4

बचपन कच्ची मिट्टी    सा ,जैसा बनाएं बन जाएगा।

परिवार पहली पाठशाला ,जैसा बनाएंगे बन आएगा।।

5

बच्चों को खाने को दें ,पौष्टिक आहार ही   सदा।

फास्ट फूड की लत न हो, खाएं केवल यदा-कदा।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ काव्य धारा #२७१ ☆ कविता – महाराणा प्रताप… ☆ स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ☆

स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

(आज प्रस्तुत है गुरुवर स्व  प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी  द्वारा रचित – “कविता  – महाराणा प्रताप। हमारे प्रबुद्ध पाठकगण स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी  काव्य रचनाओं को प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकेंगे.।) 

☆ काव्य धारा # २७१ ☆  

☆ महाराणा प्रताप…  स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

अपनी त्याग तपस्या प्रण का स्मारक जो आप है

वह इतिहास पुरुष भारत का अनुपम वीर प्रताप है।।

*

गीत लिखे है बलिदानों के उसने हल्दी घाटी में

खुशबू है उसके विश्वासों की चित्तौड़ी माटी में।।

*

आती है ध्वनि अब भी चेतक के विश्वासी टापों की

सुन पड़ती आवाजें दम्भी अकबर के संतापों की ।।

*

भामाशाह की भावनाओं के चित्र नजर जो आते हैं

हर पढ़ने वाले की आंखों में आंसू भर आते हैं।।

*

पढ़ते जब भी पृष्ठ युद्ध के पुस्तक में इतिहासों की

रुक सी जाती गति पढ़ने वाले भावुक की सांसों की ।।

*

कैसा था प्रताप वह जिसकी वन में कटी जवानी थी।

और संग में जिसके भूखी बिटिया थी औ’ रानी थी।।

*

कैसी सुदृढ़ भावना थी गहरी मन में उस राणा की

सभी सुखों को लात मार जिसने चिन्ता की बाना की।।

*

अकबर भी भौंचक था उसकी सोच समझ कुर्बानी पर

थी जिसकी दुनियां न्यौछावर मातृभूमि के पानी पर।।

© प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

ए २३३ , ओल्ड मीनाल रेजीडेंसी  भोपाल ४६२०२३

मो. 9425484452

vivek1959@yahoo.co.in

≈  संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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मराठी साहित्य – इंद्रधनुष्य ☆ मनाचे श्लोक – एक सार्वकालिक ‘मनोपनिषद’… – श्लोक श्लोक ५९ आणि ६० ☆ श्री विश्वास देशपांडे ☆

श्री विश्वास देशपांडे

? इंद्रधनुष्य ?

☆ मनाचे श्लोक – एक सार्वकालिक ‘मनोपनिषद’… – श्लोक ५९ आणि ६० ☆ श्री विश्वास देशपांडे ☆

श्लोक क्र. ५९ – – – 

मना कल्पना कल्पिता कल्पकोटी |

नव्हे रे नव्हे सर्वथा रामभेटी |

मनी कामना राम नाही जयाला |

अति आदरे प्रीति नाही तयाला ||५९||

अर्थ : हे मना, नाना प्रकारच्या अनंत कल्पना तू करीत राहिलास तर भगवंताचे दर्शन कदापिही शक्य नाही. ज्याच्या अंतरात वासना असतील, त्याच्या मनामध्ये भगवंताविषयीची कामना निर्माण होणे शक्य नाही आणि भगवंताविषयी कामना नसेल तर त्याच्यावर आदरयुक्त प्रेम कसे राहील?

(कल्पिता – कल्पना करणे, कल्पकोटी – अनंत/ नाना प्रकारच्या)

विवेचन : आपल्या जीवनात कल्पनेचे देखील काही एक विशिष्ट स्थान आहे. आपल्या मनातील कल्पना चांगल्या आणि विधायक असतील तर व्यवहारात त्या प्रत्यक्षात येऊ शकतात, त्यांचा उपयोग होतो. परंतु त्या कल्पनांना जर योग्य दिशा नसेल आणि त्या विधायक नसतील तर त्या जीवनाचा नाश करू शकतात. सदैव कल्पनेच्या राज्यात रमणारा माणूस व्यवहारात अयशस्वी होतो. त्याला धड प्रपंचही जमत नाही आणि धड परमार्थही तो करू शकत नाही. अशी अनेक उदाहरणे आपण आपल्या अवतीभवती नेहमी पाहतो.

समर्थांनी दासबोधात सांगितले आहे की आधी प्रपंच करावा नेटका मग घ्यावे परमार्थ विवेका. ज्याला प्रपंच नीट करता आला नाही त्याला परमार्थ कसा जमणार? म्हणून आपल्याला यशस्वी प्रपंच करून परमार्थाकडे वाटचाल करायची आहे. अस्थिर मनाने प्रपंच आणि परमार्थ ही साधणार नाही.

कल्पना करीत राहणे हा मानवी स्वभाव आहे. या कल्पनाच आपल्याला विषयांच्या राज्यात घेऊन जातात आणि त्यांच्या तीव्र ओढीने विषयांचे सेवन आपल्याकडून घडते. साहजिकच भगवंतापासून आपण दूर जात असतो. ज्याप्रमाणे एका म्यानात दोन तलवारी राहू शकत नाहीत, त्याप्रमाणे मनामध्ये विषय चिंतन आणि भगवंत या दोन्ही गोष्टी एकाच वेळी राहू शकत नाहीत. मन एकाच गोष्टीला पूर्णपणे वाहिले पाहिजे.

परमार्थाकडे वाटचाल करताना मनामध्ये वासना असता कामा नये. वासना असतील तर आपल्याला भगवंत हवा, अगदी मनापासून हवा असे वाटणारच नाही. जोपर्यंत आपल्याला भगवंत हवाच आहे असे मनापासून वाटत नाही तोपर्यंत त्याच्याबद्दल प्रेम निर्माण होणार नाही.

भगवंत हवा आहे असे मनापासून वाटत असेल तर विषयाकडे धावणारी वृत्ती सवयीने हळूहळू कमी करायला हवी. त्यासाठीच नामस्मरण, पूजा, सत्संग, साधना इ. गोष्टी सांगितल्या आहेत.

पण विषयाकडे धावणारे मन नाना प्रकारच्या कल्पना करीत राहते. मनाची शक्ती अपार आहे. परंतु आपण या शक्तीचा योग्य वापर करण्यापेक्षा गैरवापरच जास्त करीत असतो. दिशाहीन आणि निरुपयोगी कल्पना मनाला थकवा आणतात. म्हणूनच मनाला प्रयत्नपूर्वक योग्य मार्गावर आणायला हवे आणि त्याला योग्य दिशा द्यायला हवी. मला भगवंत हवा आहे अशी निव्वळ इच्छा करून तो प्राप्त होणार नाही. तर त्यासाठी प्रयत्न करावे लागतील. विवेक आणि वैराग्य धारण करावे लागेल. भगवंत हवा असेल तर अन्य सर्व इच्छांचा त्याग करून त्याच्या प्राप्तीसाठी प्रयत्न केले पाहिजेत. एखाद्या गोष्टीचा नित्य सहवास लाभला की त्याबद्दल आपल्याला प्रेम निर्माण होते. त्याप्रमाणेच सतत भगवंताचे नाम घेत गेल्याने त्याच्याबद्दल आदरयुक्त प्रेम निर्माण होईल.

स्वसंवाद ::

१) माझ्या मनात दिवसभर कोणत्या प्रकारच्या कल्पना सर्वाधिक येतात – विधायक की विषयप्रधान?

२) मी वास्तवात जगतो का, की कल्पनांच्या जगात जास्त वेळ घालवतो?

३) मला खरोखर भगवंताची ओढ आहे का, की ती केवळ एक वरवरची इच्छा आहे?

४) मी माझ्या मनाला जाणीवपूर्वक योग्य दिशेला वळवण्यासाठी काही प्रयत्न करतो का (नामस्मरण, वाचन, सत्संग)?

– – – – – 

श्लोक क्र. ६० – – – 

मना राम कल्पतरू कामधेनू |

निधी सार चिंतामणी काय वानू|

जयाचेनि योगे घडे सर्व सत्ता|

तया साम्यता कायसी कोण आता |६०|

अर्थ : हे मना राम म्हणजे भगवंत कल्पतरू, कामधेनू आहेत. ते निधी, सार, चिंतामणी… सारे सारे काही आहेत. हे सगळे शब्द त्यांचे वर्णन करण्यासाठी कमी पडतात म्हणून समर्थ म्हणतात की त्यांचे कसे आणि काय वर्णन करू? त्यांच्याच योगाने आणि सत्तेने सर्व काही घडत आहे. त्यांची तुलना किंवा साम्य कशाशी दाखवता येईल?

(चिंतामणी – इच्छिलेली वस्तू देणारा, वानू – वर्णन करू)

विवेचन : या श्लोकात समर्थ श्रीरामांच्या भक्तीची महती आपल्याला सांगतात. श्रीरामांबद्दल बोलताना त्यांनी वेगवेगळी विशेषणे वापरली आहेत. श्रीराम कामधेनू, कल्पतरू, निधी सार, चिंतामणी सारे सारे काही आहेत असे समर्थ म्हणतात. या एकेक शब्दाचा अर्थ आपण लक्षात घेऊया.

कल्पतरू म्हणजे इच्छिलेले सर्व काही देणारा एक वृक्ष. त्याच्या छायेत बसून जी कल्पना करावी ते सर्व आपल्याला प्राप्त होते. कामधेनू म्हणजे इच्छिलेले सर्व काही देणारी दिव्य गोमाता. निधी म्हणजे कुबेराचे भांडार किंवा खजिना, चिंतामणी म्हणजे इच्छिलेले सर्व काही देणारा काल्पनिक मणी.

प्रभू रामचंद्र भक्तांचे सर्व मनोरथ पुरवणारे आहेत. ते कल्पतरू, कामधेनू आहेत. आपल्या भक्तांना काहीही कमी पडणार नाही याची काळजी ते घेतात. इच्छिलेले सर्व काही देणारे ते आहेत. ते निधी म्हणजे कुबेराचे भांडार आहेत. कुबेराचे भांडार म्हणजे समृद्ध खजिना! कशाचीही कमी नाही. म्हणजेच श्रीरामाच्या भक्तांना कसलीही कमी पडणार नाही. त्यानंतर समर्थ म्हणतात की ते सार आहेत. सार म्हणजे महत्त्वाचे तत्व! या विश्वामध्ये सार म्हणजे फक्त एक श्रीराम. बाकी सर्व काही असार. एका वाक्यात सांगायचे झाले तर रामनाम ही सर्व कुलुपांची अशी एक किल्ली आहे की ज्यामुळे सर्व कुलुपे विनासायास उघडतात.

संत ज्ञानेश्वरांनी आपल्या पसायदानात परमेश्वराला प्रार्थना करताना म्हटले आहे, “जो जे वांछील, तो ते लाहो. ” म्हणजे ज्याला ज्याला जी जी इच्छा होईल ती ती गोष्ट प्राप्त होवो. अर्थात या ठिकाणी इच्छा म्हणजे सदिच्छा किंवा चांगली इच्छा हे गृहीत आहे. भक्ताच्या चांगल्या इच्छाच भगवंत पुरवेल. आणि श्रीरामांच्या भक्तांना वाईट इच्छा कशी होईल? म्हणून आपल्या भक्तांच्या मोक्षाच्या, दर्शनाच्या सर्व कामना तो दयानिधी पुरविल.

वर निधी म्हणजे कुबेराचा खजिना असे आपण म्हटले आहे. परंतु निधी या शब्दाचा अर्थ या ठिकाणी आणखी वेगळा आणि थोड्या व्यापक अर्थाने घेता येईल. निधी म्हणजे साठा. निधी म्हणजे समुद्र. श्रीराम म्हणजे गुणांचा साठा, दयेचा आणि करुणेचा समुद्र. आपल्या भक्तांची कधीही उपेक्षा न करणारा असा तो आहे. त्याच्या गुणांचे काय वर्णन करावे? त्यासाठी शब्द कमी आहेत. तो कोणासारखा बरं आहे? तर त्याच्यासारखा तोच!

अनंत हस्ते कमलावराने, देता किती घेशील दो कराने? असा तो आहे. तो द्यायला बसला की आपली झोळी अपुरी पडेल. म्हणून काही मागायचे तर त्याच्या जवळच मागावे. जो सगळे काही आहे जो, सारसर्वस्व आहे, त्याच्याजवळ मागण्याचे सोडून इतरांजवळ मागण्यात काय हशील?

व्यवहारामध्ये आपली इच्छापूर्ती किंवा वासनापूर्ती करणारी सारी साधने गौण आहेत. त्या इच्छा, त्या वासना कधी संपतच नाहीत. भगवंत जेव्हा आपली इच्छापूर्ती करतो, तेव्हा काही मागायचे राहतच नाही. संत तुकाराम महाराज म्हणतात, ” काय उणे आम्हा विठोबाचे पायी? ” अशी भक्ताची अवस्था होते. मन शांत, तृप्त होते आणि अत्यंत सामर्थ्यशाली बनते. कोणतीही आणि कशीही विपरीत परिस्थिती आली तरी ज्याची भगवंतावर श्रद्धा आहे, असा भक्त डगमगत नाही. असे समाधान देणारा भगवंत हा एकमेवाद्वितीय आहे. त्याची बरोबरी कशानेही होणार नाही.

स्वसंवाद :: 

१) मी माझ्या इच्छा पूर्ण करण्यासाठी बाह्य साधनांवर जास्त अवलंबून आहे का, की परमेश्वरावर विश्वास ठेवतो?

२) “मला अजून काही हवे आहे” ही भावना माझ्यात कितपत आहे? की “काय उणे आहे? ” अशी तृप्ती आहे?

३) मी जे मागतो, ते खरोखर माझ्या कल्याणासाठी आहे का, की केवळ वासनापूर्ती आहे?

४) माझ्या जीवनात “सार” आणि “असार” यातील फरक मला स्पष्टपणे कळतो का?

५) मला भगवंत “सर्वस्व” वाटतो का, की अजूनही इतर गोष्टींमध्येच माझा जास्त विश्वास आहे? (क्रमशः)

– क्रमशः श्लोक श्लोक ५९ आणि ६०.

© श्री विश्वास देशपांडे

चाळीसगाव

प्रतिक्रियेसाठी ९४०३७४९९३२

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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