हिंदी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ प्रतुल साहित्य # २३ – व्यंग्य – “युद्ध और युद्ध विराम से खुशी और गम” ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆

श्री प्रतुल श्रीवास्तव 

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक श्री प्रतुल श्रीवास्तव, भाषा विज्ञान एवं बुन्देली लोक साहित्य के मूर्धन्य विद्वान, शिक्षाविद् स्व.डॉ.पूरनचंद श्रीवास्तव के यशस्वी पुत्र हैं। हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रतुल श्रीवास्तव का नाम जाना पहचाना है। इन्होंने दैनिक हितवाद, ज्ञानयुग प्रभात, नवभारत, देशबंधु, स्वतंत्रमत, हरिभूमि एवं पीपुल्स समाचार पत्रों के संपादकीय विभाग में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। साहित्यिक पत्रिका “अनुमेहा” के प्रधान संपादक के रूप में इन्होंने उसे हिंदी साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान दी। आपके सैकड़ों लेख एवं व्यंग्य देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आपके द्वारा रचित अनेक देवी स्तुतियाँ एवं प्रेम गीत भी चर्चित हैं। नागपुर, भोपाल एवं जबलपुर आकाशवाणी ने विभिन्न विषयों पर आपकी दर्जनों वार्ताओं का प्रसारण किया। प्रतुल जी ने भगवान रजनीश ‘ओशो’ एवं महर्षि महेश योगी सहित अनेक विभूतियों एवं समस्याओं पर डाक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्माण भी किया। आपकी सहज-सरल चुटीली शैली पाठकों को उनकी रचनाएं एक ही बैठक में पढ़ने के लिए बाध्य करती हैं।

प्रकाशित पुस्तकें –ο यादों का मायाजाल ο अलसेट (हास्य-व्यंग्य) ο आखिरी कोना (हास्य-व्यंग्य) ο तिरछी नज़र (हास्य-व्यंग्य) ο मौन

आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय व्यंग्य  युद्ध और युद्ध विराम से खुशी और गम

साप्ताहिक स्तम्भ ☆ प्रतुल साहित्य # २३

☆ व्यंग्य ☆ “युद्ध और युद्ध विराम से खुशी और गम” ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव

“गेहूँ के साथ घुन पिसता है” आपने अक्सर सुना होगा। इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच जारी घमासान युद्ध में विश्व भर में यह कथन सार्थक हुआ। नष्ट हुए तेल ठिकानों, अवरुद्ध आपूर्ति मार्गों ने न सिर्फ तेल और गैस के दाम विश्व भर के देशों में बढ़ा दिए हैं वरन चिंताजनक कमी पैदा कर दी। यद्यपि फिलहाल युद्ध विराम हो गया है पर युद्ध के बादल अभी छंटे नहीं हैं। युद्ध में बुरे फंसे ट्रंप को अपमानित कराकर आखिर “कम्बल ने उन्हें छोड़ दिया” फिर भी अगले पल वे क्या करेंगे, उन्हें खुद भी नहीं पता, कह नहीं सकते कि कब वे फिर से “कम्बल पकड़ लें”। युद्ध के परिणाम कहीं साइकिल और चूल्हा युग के दर्शनों से वंचित, पैदल चलने से परहेज करने वाली नई पीढ़ी को इसका अनुभव न करा दें। आरोप – प्रत्यारोप के साथ – साथ “तू तू – मैं मैं” की पक्ष – विपक्ष की राजनीतिक बयानबाजियों, हुल्लड़, प्रदर्शनों से तो सभी परिचित हैं। विपक्ष तो सदा ही सरकार को कमजोर, अदूरदर्शी, नाकाम साबित करने के लिए मुद्दों और अवसरों की तलाश में लगा रहता है। यद्यपि हमारे देश की सरकार काफी समय से चीख – चीख कर कह रही थी कि अभी हमारे सामने पेट्रोल, डीजल का संकट नहीं है और अब तो युद्ध विराम भी हो गया है, गैस की थोड़ी समस्या है किंतु इसके समाधान के प्रयत्न भी जारी हैं। पर जो सरकार की बात सुन और समझ कर जनता को भी समझाए क्या आप उसे विपक्ष कहेंगे ? विपक्ष सरकार को नकारा साबित करने निरंतर अपने कदम कठोर करता जा रहा है, सरकार ने इस समस्या से निपटने पहले कदम, फिर कठोर कदम और अति कठोर कदम उठाना शुरू कर दिए हैं।

गैस सिलेंडर प्राप्त करने के लिए गृहणियां अपने – अपने पतियों – पुत्रों से गैस एजेंसियों की ओर कदम उठाने और वहां पहुंचकर जब तक गैस न मिले अंगद की तरह पैर जमाए रखने की हिदायत दे रही हैं। लोगों का सूर्योदय – सूर्यास्त गैस एजेंसियों के समक्ष लगी लाइन में हो रहा है। कुछ अच्छी पत्नियां तो गैस की लाइन में लगे अपने पति को टिफिन पहुंचाते हुए भी देखी गईं। सरकार तेल और गैस के लिए लगी लाइनें देख कर चिंतित होती रही है और विपक्ष खुशियां मनाता रहा, विपक्ष चाह रहा था कि लाइन बढ़ती जाएं, लोगों में टकराव शुरू हो। डीजल – पेट्रोल पंपों में भी उपभोक्ताओं को जरूरत से ज्यादा तेल लेने प्रयासरत देखा गया। जो इसमें सफल हो जाता उसकी खुशी देखते ही बनती। विपक्ष गैस, डीजल – पेट्रोल की किल्लत का ठीकरा सरकार पर फोड़ रहा है। उसका कहना है कि सरकार के मुखिया ट्रंप के चमचे हैं वे ईंधन की आपूर्ति के लिए प्रयास करने की जगह घुइयां छील रहे हैं।

टीवी चैनलों में डिवेट जारी है। सरकार और विपक्ष के प्रतिनिधि एक दूसरे का चीर हरण कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि वह परिस्थितियों से निपट रही है, उसके पास 2 माह का पर्याप्त स्टॉक है और कच्चे तेल के जहाज आ रहे हैं। विपक्ष इसे सरकार का झूठ बताता रहा। उसका कहना है कि ऐसा है तो गैस, पेट्रोल के लिए लंबी कतारें क्यों लगी ? इसके विपरीत सरकार का कहना है कि पेट्रोल, डीजल, गैस की कमी की अफवाह फैलाकर लोगों की लाइन लगवाने का काम विपक्ष ने किया। जनता उलझन में है कि किसकी बात को सही माने ! कुछ लोगों का कहना है कि सरकार 5 राज्यों के होने वाले चुनावों तक रुकी है फिर देश में तेल और गैस की मारा मारी भी होगी और दाम भी बढ़ेंगे। सरकार तो सरकार है क्या नहीं कर सकती। कुछ लोग कह रहे हैं कि यदि हम थाली, घंटा बजाकर, दिया और टॉर्च जलाकर कोरोना को भगा सकते हैं तो हमें अमेरिका, इजरायल, ईरान का युद्ध परमानेंट रुकवाने के लिए भी इसी तरह के कुछ प्रयोग करना चाहिए। आश्चर्य है, जिन लोगों को दीवाली के पटाखों से प्रदूषण का खतरा नजर आता था, पृथ्वी की ओज़ोन परत फटती नजर आती थी, जो पटाखों की मनाही के लिए देश – विदेश में हाहाकार मचाने लगते थे वे सब ईरान, इजरायल, अमेरिका के आतिशी युद्ध पर मौन रहे। एक बात और बता दूं मेरे पड़ोसी वर्मा जी जब – तब मेरे पास आकर मुझसे युद्ध रुकवाने का आग्रह करते रहे, कहते थे आप पत्रकार हैं, सक्षम हैं, आपको इस सिलसिले में मोदी जी से बात करना चाहिए। अच्छा हुआ युद्ध विराम हो गया, ट्रंप कम्बल से छूटे, हमारी सरकार को राहत मिली, विपक्ष नए मुद्दे की तलाश में लग गया और वर्मा जी ने भी मेरा पीछा छोड़ा।

© श्री प्रतुल श्रीवास्तव 

संपर्क – 473, टीचर्स कालोनी, दीक्षितपुरा, जबलपुर – पिन – 482002 मो. 9425153629

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ चुभते तीर # ९० – व्यंग्य – डिजिटल उपवास ☆ डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ ☆

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

(‘उरतृप्त’ उपनाम से व्यंग्य जगत में प्रसिद्ध डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा अपनी भावनाओं और विचारों को अत्यंत ईमानदारी और गहराई से अभिव्यक्त करते हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण उनके लेखन के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान से मिलता है। वे न केवल एक प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं, बल्कि एक कवि और बाल साहित्य लेखक भी हैं। उनके व्यंग्य लेखन ने उन्हें एक विशेष पहचान दिलाई है। उनका व्यंग्य ‘शिक्षक की मौत’ साहित्य आजतक चैनल पर अत्यधिक वायरल हुआ, जिसे लगभग दस लाख से अधिक बार पढ़ा और देखा गया, जो हिंदी व्यंग्य के इतिहास में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान है। उनका व्यंग्य-संग्रह ‘एक तिनका इक्यावन आँखें’ भी काफी प्रसिद्ध है, जिसमें उनकी कालजयी रचना ‘किताबों की अंतिम यात्रा’ शामिल है। इसके अतिरिक्त ‘म्यान एक, तलवार अनेक’, ‘गपोड़ी अड्डा’, ‘सब रंग में मेरे रंग’ भी उनके प्रसिद्ध व्यंग्य संग्रह हैं। ‘इधर-उधर के बीच में’ तीसरी दुनिया को लेकर लिखा गया अपनी तरह का पहला और अनोखा व्यंग्य उपन्यास है। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को तेलंगाना हिंदी अकादमी, तेलंगाना सरकार द्वारा श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान, 2021 (मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के हाथों) से सम्मानित किया गया है। राजस्थान बाल साहित्य अकादमी के द्वारा उनकी बाल साहित्य पुस्तक ‘नन्हों का सृजन आसमान’ के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है। इनके अलावा, उन्हें व्यंग्य यात्रा रवींद्रनाथ त्यागी सोपान सम्मान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों साहित्य सृजन सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। डॉ. उरतृप्त ने तेलंगाना सरकार के लिए प्राथमिक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर कुल 55 पुस्तकों को लिखने, संपादन करने और समन्वय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिहार, छत्तीसगढ़, तेलंगाना की विश्वविद्यालयी पाठ्य पुस्तकों में उनके योगदान को रेखांकित किया गया है। कई पाठ्यक्रमों में उनकी व्यंग्य रचनाओं को स्थान दिया गया है। उनका यह सम्मान दर्शाता है कि युवा पाठक गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी लेखन की पहचान कर सकते हैं।)

जीवन के कुछ अनमोल क्षण 

  1. तेलंगाना सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री के. चंद्रशेखर राव के करकमलों से  ‘श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान’ से सम्मानित। 
  2. मुंबई में संपन्न साहित्य सुमन सम्मान के दौरान ऑस्कर, ग्रैमी, ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी, दादा साहब फाल्के, पद्म भूषण जैसे अनेकों सम्मानों से विभूषित, साहित्य और सिनेमा की दुनिया के प्रकाशस्तंभ, परम पूज्यनीय गुलज़ार साहब (संपूरण सिंह कालरा) के करकमलों से सम्मानित।
  3. ज्ञानपीठ सम्मान से अलंकृत प्रसिद्ध साहित्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ल जी  से भेंट करते हुए। 
  4. बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट, अभिनेता आमिर खान से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
  5. विश्व कथा रंगमंच द्वारा सम्मानित होने के अवसर पर दमदार अभिनेता विक्की कौशल से भेंट करते हुए। 

आप प्रत्येक गुरुवार डॉ सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ जी के साप्ताहिक स्तम्भ – चुभते तीर में उनकी अप्रतिम व्यंग्य रचनाओं को आत्मसात कर सकेंगे। इस कड़ी में आज प्रस्तुत है आपकी विचारणीय व्यंग्य – डिजिटल उपवास )  

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ चुभते तीर # ९० – व्यंग्य  – डिजिटल उपवास ☆ डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ 

(तेलंगाना साहित्य अकादमी से सम्मानित नवयुवा व्यंग्यकार)

धरमपुरा गांव के स्वघोषित समाजशास्त्री ‘फरेब सिंह’ ने जब प्रधानी के चुनाव में अपनी दावेदारी पेश की, तो उन्होंने गांव वालों को एक नया और डरावना सपना दिखाया—’डिजिटल नरक’। फरेब सिंह का चुनावी घोषणापत्र किसी धार्मिक ग्रंथ और सॉफ्टवेयर मैनुअल का मिला-जुला खिचड़ी था। उन्होंने तर्क दिया कि गांव की बदहाली का कारण सड़कें नहीं, बल्कि मोबाइल के भीतर बैठा वह ‘अदृश्य राक्षस’ है जो सबका डेटा और पुण्य एक साथ चबा रहा है। उन्होंने वादा किया कि जीतते ही वे पूरे गांव में ‘डेटा-जामर’ लगवाएंगे और हर ग्रामीण को एक ‘एनालॉग शांति कार्ड’ देंगे। उनका दावा था कि जो उन्हें वोट देगा, उसके स्मार्टफोन से निकलने वाली ‘नेगेटिव ऊर्जा’ को वे एक विशेष सरकारी फिल्टर के जरिए बिजली में बदल देंगे, जिससे गांव के मंदिर की लाइटें मुफ्त में जलेंगी। गांव के लोग, जो रील बनाने और देखने के चक्कर में अपनी फसल और अक्ल दोनों गंवा रहे थे, अचानक ‘डिजिटल वैराग्य’ के इस क्रांतिकारी विचार पर लट्टू हो गए।

प्रचार के अंतिम सप्ताह में फरेब सिंह ने गांव के तालाब के पास एक ‘सोशल मीडिया विसर्जन कुंड’ बनवाया। यह वास्तव में एक गहरा गड्ढा था जिसके चारों ओर टूटे हुए कंप्यूटर के कीबोर्ड और माउस लटकाए गए थे। उन्होंने घोषणा की कि जो भी ग्रामीण अपनी ‘फेसबुक की बुराइयां’ और ‘व्हाट्सएप के झूठ’ इस कुंड में मानसिक रूप से विसर्जित कर फरेब सिंह को वोट देने का संकल्प लेगा, उसका अगला सात जन्म तक किसी भी ‘स्कैम कॉल’ या ‘लोन मैसेज’ से पाला नहीं पड़ेगा। विपक्षी उम्मीदवार ‘गपोड़ी लाल’ चिल्लाते रहे कि गांव को मुफ्त इंटरनेट चाहिए, लेकिन फरेब सिंह ने उन्हें ‘असुर’ घोषित कर दिया जो जनता की निजता को खतरे में डालना चाहता है। गांव के बुजुर्गों को लगा कि फरेब सिंह साक्षात कलियुग के यमराज से उनका स्मार्टफोन बचाने आए हैं। लोग अपनी फटी धोतियों के कोने में चिपके पुराने हैंडसेटों की पूजा करने लगे ताकि फरेब सिंह की ‘सुरक्षा ढाल’ उन्हें मिल सके।

मतदान के अगले दिन जब फरेब सिंह की भारी मतों से जीत हुई, तो पूरा गांव अपना ‘डेटा-मुक्ति प्रमाण पत्र’ लेने उनके दरवाजे पर कतारबद्ध हो गया। फरेब सिंह ने बड़े इत्मीनान से अपनी नई चमचमाती गाड़ी से उतरे और सबके हाथ में एक-एक डाक टिकट जैसा कागज थमा दिया, जिस पर लिखा था— “डेटा ही माया है।” जनता हक्की-बक्की रह गई, “हुजूर, यह क्या है? हमारा नेटवर्क तो अब भी गायब है और मोबाइल में कुछ नहीं चल रहा!” फरेब सिंह ने अपनी नई आईफोन की स्क्रीन चमकाते हुए गंभीर स्वर में कहा— “मूर्खों! नेटवर्क गायब नहीं हुआ, मैंने गांव के टावर का किराया डकार कर उसे अपने नाम आवंटित करवा लिया है। अब तुम सब ‘डिजिटल उपवास’ करो ताकि मेरा निजी बिजनेस बिना किसी रुकावट के तेज चल सके। तुमने डेटा छोड़ा, मैंने उसे पकड़ लिया; यही तो असली समाजवाद है!” जनता सन्न खड़ी अपने पत्थर जैसे मोबाइल देख रही थी और फरेब सिंह अपनी गाड़ी के शीशे चढ़ाकर ‘हाई-स्पीड’ घोटाले की नई फाइल जमा करने शहर की ओर कूच कर गए।

(टीप: यह आवश्यक नहीं है कि संपादक मंडल व्यंग्य /आलेख में व्यक्त विचारों/राय से सहमत हो।)

© डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

संपर्क : चरवाणीः +91 73 8657 8657, ई-मेल : drskm786@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

Please share your Post !

Shares

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २६० ☆ # “प्रकाश पुंज…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “प्रकाश पुंज…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २६० ☆

☆ # “प्रकाश पुंज…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

(14 अप्रैल डा आंबेडकर जयंती पर विशेष)

चीरकर सदियों का अंधेरा

सूर्य हमारा निकला था

ताप से जिसके बेड़ियों का लोहा

धीरे-धीरे पिघला था

 

बह रहा था लहू

जख्मी हाथ और पांव से

बहिष्कृत थे हम

समाज और गांव से

दूषित हो जाते थें लोग

अशुचि हमारी छांव से

प्रभाकर की प्रभा से

जल उठा गरल

जो हमने निगला था

चीरकर सदियों  का अंधेरा

सूर्य हमारा निकला था

 

कुआं हमने खोदा

पर जल पर हमारा हक नहीं था

फसल बोई, काटी

पर अन्न पर हमारा हक नहीं था

पौधा लगाया वृक्ष बनाया

पर फल पर हमारा हक नहीं था

लिखकर नया अध्याय

उसने पुराना अध्याय बदला था

चीरकर सदियों का अंधेरा

सूर्य हमारा निकला था

 

शिक्षित बनो यह मंत्र देकर

उसने अभियान चलाया

संगठित रहो यह मन्त्र देकर

उसने अभिमान जगाया

संघर्ष करो यह तंत्र देकर

उसने स्वाभिमान बढ़ाया

जीने की राह दिखाने

वह प्रकाश पुंज अकेला निकला था

चीरकर सदियों का अंधेरा

सूर्य हमारा निकला था

 

तूफानों से लड़कर

पर्वतों में राह बनाई

बुझीं बुझीं आंखों में

जीने की चाह जगाई

कमजोरों को गले लगा कर

सबको अपनी बांह थमाई

शक्तिमान बनाया समाज को

जो कभी दुबला था

चीरकर सदियों का अंधेरा

सूर्य हमारा निकला था

 

उसने आसमान को झुकाया

विद्वत्ता के दम पर

उसने जर्रे जर्रे को चमकाया

उपकार किया हम पर

उसने रोशनी का दिया जलाया

वार किया तम पर

आलोकित हुए पथ पर

जन सैलाब उबला था

चीरकर सदियों का अंधेरा

सूर्य हमारा निकला था

 

दया करुणा प्रेम हो जिसमें

वही सच्चा इंसान है

वंचितो शोषितो पीड़ितों के

हर सांस का वह प्राण है

रोम रोम में बसा

वह मानव नहीं भगवान है

रूढ़ियों को तोड़कर

जिसने व्यवस्था को बदला था

चीरकर सदियों का अंधेरा

सूर्य हमारा निकला था

ताप से जिसके बेड़ियों का लोहा

धीरे-धीरे पिघला था /

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

Please share your Post !

Shares

हिन्दी साहित्य – कविता ☆ अभिव्यक्ति # -१०३ – मुझे, उपग्रह ही रहने दो… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

श्री राजेन्द्र तिवारी

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता मुझे, उपग्रह ही रहने दो।)

☆ अभिव्यक्ति # १०३ ☆ मुझे, उपग्रह ही रहने दो☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

चांद कुछ कहता रहा,

कहा कुछ,

हम, समझे कुछ,

उसने कहा था,

किसने कहा, कि मुझे,

सौंदर्य की, उपमा दो,

किसने कहा कि,

मुझे पृथ्वी का भाई,

बना दो,

कुछ भी, करते हो,

कुछ भी, कहते हो,

मुझे, उपग्रह ही रहने दो,

पृथ्वी का, छोटा सा,

मुझे निश्छल भाव से,

परिक्रमा करने दो, पृथ्वी की,

सागर से लगाव, रहने दो,

मुझे पृथक न, करो,

अपनो से,

बस चांद ही रहने दो.

© श्री राजेन्द्र तिवारी  

संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर

मो  9425391435

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/ ≈

Please share your Post !

Shares

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ परिहार जी का साहित्यिक संसार # ३३१ ☆ व्यंग्य – कलियुग के त्रिदेव ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार ☆

डॉ कुंदन सिंह परिहार

(वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय  डॉ  कुन्दन सिंह परिहार जी  का साहित्य विशेषकर व्यंग्य  एवं  लघुकथाएं  ई-अभिव्यक्ति  के माध्यम से काफी  पढ़ी  एवं  सराही जाती रही हैं।   हम  प्रति रविवार  उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते  रहते हैं।  डॉ कुंदन सिंह परिहार जी  की रचनाओं के पात्र  हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं।  उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल  की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं।आज प्रस्तुत है समसामयिक विषय पर आपका एक अप्रतिम विचारणीय व्यंग्य – ‘कलियुग के त्रिदेव’। इस अतिसुन्दर रचना के लिए डॉ परिहार जी की लेखनी को सादर नमन।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार  # ३३१ ☆

☆ व्यंग्य ☆ कलियुग के त्रिदेव

‘दैनिक खबरची’ का पत्रकार खोजीलाल बहुत परेशान है। रूस-यूक्रेन युद्ध ख़त्म हुआ नहीं और अमेरिका-इज़रायल-ईरान युद्ध के पटाखे फूटने लगे। गज़ा पर इज़रायली आक्रमण से 70000 से ज्यादा बेकसूर मरे। खाने की लाइन में लगे बच्चों पर गोलियां चलीं। अमेरिका की ईरान पर बमबारी से 160 मासूम स्कूली छात्राएं असमय काल-कवलित हुईं। श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत डुबाने से 80 से ज्यादा ईरानी सैनिक मरे। इस पर प्रेसिडेंट ट्रंप की टिप्पणी थी कि उनके सैनिकों को जहाज़ पर क़ब्ज़ा करने के बजाय उसे  डुबाने में ज़्यादा मज़ा आता है। इन लड़ाइयों में हज़ारों इमारतें ज़मींदोज हुईं, हजारों परिवार बेघर और बर्बाद हुए। लेकिन इस बर्बादी के लिए ज़िम्मेदार राष्ट्राध्यक्षों के माथे पर शिकन नहीं पड़ी। वे हंसते, मज़ाक करते, नृत्य की मुद्राएं बनाते रहे, ‘शत्रु’ की बर्बादी पर बगलें बजाते रहे।

खोजीलाल धार्मिक आदमी है। उसने पढ़ा है कि सृष्टि के सृजन, पालन और विनाश की ज़िम्मेदारी ब्रह्मा, विष्णु और शिव यानी त्रिदेव के हाथों में है। इसीलिए जब वह ज़्यादा विचलित होता है तो आकाश की तरह मुंह उठाकर कहने लगता है— ‘यह क्या हो रहा है प्रभु? आदमी आदमी की जान का दुश्मन बना हुआ है। छोटे-छोटे बच्चे कीड़े मकोड़ों की तरह मर रहे हैं। फिर उन्हें जन्म देने की क्या ज़रूरत थी? क्या यह सब आपकी सहमति से हो रहा है? पाप और अन्याय करने वालों को आप रोकते क्यों नहीं?’

खोजीलाल को युद्ध में कूदने वाले देशों का यह तर्क परेशान करता है कि  वे अपनी सुरक्षा के लिए आक्रमण कर रहे हैं। उसे लगता है कि यदि यह तर्क मान लिया  जाए तो हर देश को अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर आक्रमण करने का लाइसेंस मिल जाएगा। फिर कानून-कायदे किस लिए हैं?

इन्हीं तर्कों-वितर्कों में उलझा खोजीलाल एक दिन घर आकर सो गया। थोड़ी देर में देखा सामने साक्षात शिवजी खड़े हैं। वही बाघंबर, त्रिशूल, शरीर पर भस्म और कंठ में नाग। लेकिन चेहरे पर बड़ी गंभीरता। खोजीलाल दर्शन करके भावविभोर हुआ, हाथ जोड़कर बोला, ‘दर्शन पाकर कृतार्थ हुआ प्रभु, लेकिन संसार में यह क्या हो रहा है? सृष्टि के विनाशक तो आप हैं लेकिन आदमी आदमी के प्राण लेने पर क्यों तुला है? क्या यह सब आपकी मर्जी से हो रहा है?’

शिवजी कुछ और गंभीर हो गये, बोले, ‘भक्त, तुम्हारा दुख और तुम्हारी चिन्ता सही है, लेकिन जो हो रहा है उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं। इसके लिए आदमी ही जिम्मेदार है। ब्रह्मा जी आदमी की रचना ऐसी करते हैं कि मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट न हो तो उसका शरीर आराम से सत्तर अस्सी साल तक चलेगा। तुम लोग जो कृत्रिम अंग बनाते हो वे दस पंद्रह साल भी नहीं चलते। तुमने नाना प्रकार के वाहन सड़कों और आकाश में चला कर आदमी की उम्र को अनिश्चित और छोटा किया है। भ्रष्टाचारी लोग भवनों और पुलों में मिलावट करके दूसरों के प्राण लेते रहते हैं। तानाशाह हजारों वर्षों से अपने शक्ति प्रदर्शन के लिए युद्ध का खेल खेलते रहे हैं क्योंकि उसमें जान  सैनिकों और नागरिकों की जाती है। वे खुद सुरक्षित रहते हैं।

‘दूसरे, आदमी ने अपनी तरक्की दिखाने के चक्कर में युद्ध को ज्यादा नुकसानदेह बना दिया है। पहले युद्ध मैदान में सवेरे शुरू होते थे और शाम को बंद हो जाते थे। सैनिकों के घर और परिवार तक तब के अस्त्रों की पहुंच नहीं हो पाती थी। अब शत्रु के नगरों, इमारतों और परिवारों पर हमला होता है जिसमें हजारों निर्दोष मारे जाते हैं। बड़े पैमाने पर बर्बादी होती है, लेकिन इसी को तुम लोग तरक्की बताकर फूले फिरते हो। तुम्हारी करतूतों के लिए हम कहां दोषी हैं? दरअसल अब आदमी ही सृष्टि का पालक और विनाशक बना बैठा है। हमें अप्रासंगिक, आउटडेटेड बताया जाता है।’

सुनकर खोजीलाल हाथ जोड़कर बोला, ‘आप ठीक कहते हैं प्रभु, लेकिन अब इस संसार का क्या होगा?’

शिवजी ने जवाब दिया, ‘मैंने विष्णु जी से बात की है। उन्होंने कभी भस्मासुर का अंत किया था। वे ही कलियुग के भस्मासुरों से निपटने का उपाय बताएंगे।’

© डॉ कुंदन सिंह परिहार

जबलपुर, मध्य प्रदेश

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ ≈ मॉरिशस से ≈ लघु कथा # १०२ – राज — तंत्र… – ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

श्री रामदेव धुरंधर

(ई-अभिव्यक्ति में मॉरीशस के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर जी का हार्दिक स्वागत। आपकी रचनाओं में गिरमिटया बन कर गए भारतीय श्रमिकों की बदलती पीढ़ी और उनकी पीड़ा का जीवंत चित्रण होता हैं। आपकी कुछ चर्चित रचनाएँ – उपन्यास – चेहरों का आदमी, छोटी मछली बड़ी मछली, पूछो इस माटी से, बनते बिगड़ते रिश्ते, पथरीला सोना। कहानी संग्रह – विष-मंथन, जन्म की एक भूल, व्यंग्य संग्रह – कलजुगी धरम, चेहरों के झमेले, पापी स्वर्ग, बंदे आगे भी देख, लघुकथा संग्रह – चेहरे मेरे तुम्हारे, यात्रा साथ-साथ, एक धरती एक आकाश, आते-जाते लोग। आपको हिंदी सेवा के लिए सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन सूरीनाम (2003) में सम्मानित किया गया। इसके अलावा आपको विश्व भाषा हिंदी सम्मान (विश्व हिंदी सचिवालय, 2013), साहित्य शिरोमणि सम्मान (मॉरिशस भारत अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 2015), हिंदी विदेश प्रसार सम्मान (उ.प. हिंदी संस्थान लखनऊ, 2015), श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान (जनवरी 2017) सहित कई सम्मान व पुरस्कार मिले हैं। हम श्री रामदेव  जी के चुनिन्दा साहित्य को ई अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों से समय समय पर साझा करने का प्रयास करेंगे।

आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय गद्य क्षणिका “– राज — तंत्र …” ।

~ मॉरिशस से ~

☆ कथा कहानी  ☆ लघु कथा # १०२ राज — तंत्र  ☆ श्री रामदेव धुरंधर ☆

क्रांति — दूत के अपाहिज होने पर राज द्रोह के उसके खाते बंद कर दिये गए। इसके पीछे जानी बूझी सोच यह थी जो अपाहिज हो गया उससे अब आतंकित होने का काई कारण शेष रहा नहीं। पर इस कोण से सतर्कता की एक दृष्टि तो रखी ही जाती थी जो निढाल हो गया कहीं वह फिर से सक्रिय न हो जाए। कुछ दिनों बाद क्रांति — दूत की दयनीय मृत्यु होने पर वे खाते जला दिये गए। इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण था। इन लोगों के दुर्योग से अगले चुनाव में इनकी हार हो जाती और नई सरकार क्रांति — दूत के उन बंद खातों को खुलवाती तो शर्म के मारे इन्हें नर्क में भी मुँह छिपाना भारी पड़ता। वास्तव में क्रांति — दूत के राज द्रोह थे कहाँ। उसकी तो समर्पित राज भक्ति थी।

 © श्री रामदेव धुरंधर

10 — 04 — 2026

संपर्क : रायल रोड, कारोलीन बेल एर, रिविएर सेचे, मोरिशस फोन : +230 5753 7057   ईमेल : rdhoorundhur@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संजय उवाच # ३३१ – आदिम से आदिम तक ☆ श्री संजय भारद्वाज ☆

श्री संजय भारद्वाज

(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के  लेखक  श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ  हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको  पाठकों का  आशातीत  प्रतिसाद मिला है।”

हम  प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है  इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों  के माध्यम से  हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)

☆  संजय उवाच # ३३१ आदिम से आदिम तक… ?

मनुष्य जंगल में रहता था। शिकार के लिए संघर्ष होता था। स्वाभाविक है कि शस्त्र के रूप में पत्थर और लकड़ी का प्रयोग होता होगा।  मनुष्य ने विकास की राह पर कदम बढ़ाए। आदिम से आधुनिक होने की सतत यात्रा की।

इस यात्रा में मनुष्य ने बस्तियाँ बसाई। बस्तियों से गाँव, गाँव से नगर बने। नागरी सभ्यता का उदय हुआ। अकेला-दुकेला रहने वाला मनुष्य समूह में बसने लगा, समाज बना। तथापि संसाधनों के केंद्रीकरण के चलते संग्रह की वृत्ति जन्मी, लालच पनपा। इसने न केवल संघर्ष को बढ़ाया, अपितु द्वंद्व के नए आयाम भी खोले। मनुष्यजीवन के केंद्र में पैसा आता गया। धन संपदा, संसाधनों पर अधिकार जमाए रखने की वृत्ति बढ़ती गई, समर तीव्र होता गया।

संघर्ष की परिधि बढ़ी तो पत्थर, डंडे से आगे बढ़कर मनुष्य ने तलवारें विकसित की। फिर तो एक दूसरे को मारने- काटने के लिए विनाश का खून मुँह लग गया। गोली-गोले ढाले जाने लगे, मनुष्य द्वारा मनुष्य पर दागे जाने लगे। दो लोगों की सिर फुटव्वल में एक की अधिक हानि होती थी, अब हानि सामूहिक होने लगी। शत्रु का संहार, भीषण  नरसंहार में बदलने लगा।

विज्ञान का विकास और विस्तार हुआ। आदमी का आदिम और निखरा। अब ‘मास डिस्ट्रक्शन’ या बड़ी संख्या में मनुष्य को एक साथ मौत के घाट उतार देने के साधन तैयार हुए।

मनुष्य- मनुष्य में होने वाला संघर्ष, दो समूहों में होने वाले युद्ध से होते हुए विभिन्न राष्ट्रों के आपसी  संग्राम तक आ पहुँचा।

फिर उन्नीसवीं सदी आई । बड़ी संख्या में विश्व के राष्ट्र एक दूसरे से उलझे। यह प्रथम विश्वयुद्ध था। इस विश्वयुद्ध ने डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों की बलि ली।

दो दशक बीतते-बीतते, विनाश के अजगर ने फिर अपना मुँह खोला। द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ हुआ। येन केन प्रकारेण विजय प्राप्त करना ही इसका अंतिम ध्येय था। इस बार मनुष्य पर परमाणु बम का परीक्षण किया गया। इस विनाश के साक्ष्य के रूप में पूरे शहर में जलकर खाक हुए और कुछ अधजले पेड़ बचे रहे, बाकी पूरा शहर मर गया।

आदमी के भीतर का आदमी मरता रहा, आज भी मर रहा है। कहा गया कि तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा। संसार की महाशक्तियों को लगा कि पहले तेल पर तो आधिपत्य जमा लें, फिर पानी पर सोचा जाएगा।

अस्त्र-शस्त्र अब इतने संहारक हो चले कि एक रात में एक पूरी सभ्यता को नष्ट करने की चेतावनी दी जाने लगी। आदमी के विकराल आदिम को देखते हुए इस चेतावनी के सच सिद्ध होने की आशंका सदा बनी रहती है। आदमी की विडंबना और विसंगति देखिए कि किसी की आशंका, किसी के लिए संभावना भी होती है।

आदमी ने अपनी सूझबूझ से जंगल से महानगर तक यात्रा की। ज़मीन को अपने कब्जे में लिया, अंतरिक्ष को घातक हथियारों से पाट दिया समुद्र के गर्भ में विनाश बो दिया। बाहर से आधुनिक होने की यात्रा में भीतर का आदिम निखरता रहा।

अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि चौथा विश्वयुद्ध पत्थरों और लकड़ियों से लड़ा जाएगा। सभ्यता नष्ट करने का आसुरी उन्माद यह स्थिति ला भी सकता है कि हमारी कथित सभ्य प्रजाति ही नष्ट हो जाए।  जब हथियारों के उपयोग से प्रजाति नष्ट हो जाएगी तो नये हथियार ढालने वाले भी नष्ट हो जाएँगे। साधनहीन बचे- खुचे लोग जंगलों में रहने लगेंगे। इसके बाद आगे जब कभी संघर्ष होगा तो फिर वही पत्थर, वही लकड़ियाँ साधन बनेंगे।

आदिम से आदिम की इस यात्रा के असंख्य आयाम हैं। इन आयामों पर हर विचारवान को अपने-अपने ढंग से चिंतन करना चाहिए। इस चिंतन से कोई समाधान निकल कर आ सके तो मनुष्य जाति पर बड़ा उपकार होगा।

© संजय भारद्वाज 

प्रातः 7:31 बजे, 11 अप्रैल 2026

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

☆ आपदां अपहर्तारं ☆

🕉️ 2 अप्रैल से  एक माह की हनुमान साधना वैशाख पूर्णिमा तदनुसार 1 मई 2026 को संपन्न होगी। 🕉️

💥 इसमें हनुमान चालीसा एवं संकटमोचन हनुमानाष्टक के पाठ किए जाएँगे। हनुमान चालीसा के 21 या अधिक पाठ करने वाले विशेष साधक तथा 51 या अधिक पाठ करने वाले महा साधक कहलाएँगे। 101 या अधिक पाठ करने वाले परम साधक कहलाएँगे। आत्म परिष्कार और मौन साधना साथ चलेंगे।💥

अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप  करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं। 

संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सलिल प्रवाह # २७५ – ग़ज़ल – हरिऔध  ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  – ग़ज़ल – हरिऔध )

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २७५ ☆

☆ ग़ज़ल – हरिऔध ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

(अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध'(15 अप्रैल, 1865-16 मार्च, 1947) हिन्दी के कवि, निबन्धकार तथा सम्पादक थे।)

हिंदी माँ के पुत्र यशस्वी हैं हरिऔध।

देह मिट गई सृजन सनातन हैं हरिऔध।।

.

प्रिय प्रवासकर रहे जहाँ है लोक जगत।

राधा-विरह लोक हित से जोड़ें हरिऔध।।

.

कृष्ण न केवल व्यक्ति, समष्टि समाए हैं।

निज सुख का परित्याग निरंतर है हरिऔध।।

.

वैदेही वनवासत्याग-तप की गाथा।

सहन शक्ति नारी की, गायक हैं हरिऔध।।

.

मंत्र-तंत्र है प्रकृति-चित्रण अलबेला।

मातृभूमि की चरण वंदना हैं हरिऔध।।

.

गौरव गान विरासत का संबल बनता।

शीश उठाकर जीने का परचम हरिऔध।।

.

सत्य-अहिंसा-जनसेवा को लक्ष्य बना।

स्वतंत्रता सत्याग्रह विजय ध्वजा हरिऔध।।

.

दृष्टि कलात्मक फूल अधखिलालोक जुड़ी।

निज भाषा सम्मान प्रवर्तक हैं हरिऔध।।

.

ऐक्य भाव, समरसता, सत्याग्रह, जनहित

जन कल्याण, लोक सेवा राही हरिऔध।।

.

सुरवाणी-जनवाणी का छांदस संगम।

ठाठ ठेठ हिन्दी काहै चोखा हरिऔध।।

.

वर्ण वृत्त से सजे चौपदे चोखेहैं।

राष्ट्रवाद के सच्चे गायक हैं हरिऔध।।

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

१०.४.२०२६

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (13 अप्रैल से 19 अप्रैल 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

विज्ञान की अन्य विधाओं में भारतीय ज्योतिष शास्त्र का अपना विशेष स्थान है। हम अक्सर शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ विवाह के लिए सर्वोत्तम कुंडली मिलान आदि करते हैं। साथ ही हम इसकी स्वीकार्यता सुहृदय पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। हमें प्रसन्नता है कि ज्योतिषाचार्य पं अनिल पाण्डेय जी ने ई-अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के विशेष अनुरोध पर साप्ताहिक राशिफल प्रत्येक शनिवार को साझा करना स्वीकार किया है। इसके लिए हम सभी आपके हृदयतल से आभारी हैं। साथ ही हम अपने पाठकों से भी जानना चाहेंगे कि इस स्तम्भ के बारे में उनकी क्या राय है ? 

☆ ज्योतिष साहित्य ☆ साप्ताहिक राशिफल (13 अप्रैल से 19 अप्रैल 2026) ☆ ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय ☆

जय श्री राम।  श्री रामचंद्र जी के सबसे बड़े सेवक और हमारे स्वामी श्री हनुमान जी के चरणों में शत-शत नमन के साथ आज की चौपाई है :-

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना,

लंकेस्वर भए सब जग जाना॥

हनुमान चालीसा की इस चौपाई के संपुट पाठ करने से राजकीय मान सम्मान प्राप्त होता है। हनुमत कृपा पर विश्वास आपको चतुर्दिक सफलता दिलाएगा।

“नाशे रोग हरे सब पीरा” नाम की पुस्तक में हनुमान चालीसा की चौपाइयों के संबंधित सभी उपायों का विस्तृत विवरण दिया हुआ है। इस पुस्तक को आप हमारे यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

आइये अब हम आपको इस सप्ताह, ग्रहों के विचरण की जानकारी देते हैं।

इस सप्ताह मंगल, बुध और शनि मीन राशि में, गुरु मिथुन राशि में, शुक्र मेष राशि में और राहु कुंभ राशि में गोचर करेंगे। सूर्य प्रारंभ में मीन राशि में रहेगा तथा 14 तारीख को 11:45 दिन से मेष राशि में प्रवेश करेगा। मेष राशि में सूर्य उच्च के होते हैं अतः उनके असर के कारण परिणाम बेहद चौंकाने वाले होंगे।

आइये अब राशिवार राशिफल की चर्चा करते हैं।

मेष राशि

इस सप्ताह सूर्य आपके लग्न में बैठा हुआ है तथा यह उच्च का है अर्थात परम शक्तिशाली है। इस कारण से आपका आत्मविश्वास बहुत अच्छा रहेगा और अपने आत्मविश्वास के बल पर आप बहुत सारे कार्यों को कर सकेंगे। अविवाहित जातकों के विवाह के प्रस्ताव आएंगे। प्रेम संबंधों में भी वृद्धि होगी। भाई बहनों के साथ में संबंध पहले जैसा ही रहेगा। कचहरी के कार्यों में सतर्कता से कार्य करने पर सफलता की उम्मीद की जा सकती है। आपको अपने संतान का सहयोग प्राप्त हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 17 की दोपहर के बाद से लेकर 18 और 19 तारीख सफलता दायक हैं। 15, 16 और 17 के दोपहर तक का समय आपके लिए सोच विचार कर कार्य करने का समय है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

वृष राशि

इस सप्ताह कचहरी के कार्यों में आपके लिए सफलता का योग है। धन प्राप्ति की उम्मीद भी की जा सकती है। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह सावधानी से कार्य करने का है। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सप्ताह सामान्य है परंतु आपको अपने अंदर क्रोध की मात्रा को नियंत्रित करना पड़ेगा। संतान से आपको इस सप्ताह सहयोग मिलने की उम्मीद है। इस बात की संभावना हो सकती है कि यह सहयोग कम मात्रा में प्राप्त हो छात्रों को सीमित सफलता प्राप्त हो सकती है आपका और आपके जीवन साथी का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 13 और 14 अप्रैल उपयोगी है सत्र 18 एवं 19 तारीख को आपको सावधान रहकर कार्यों को करना चाहिए इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन विश्व सहस्त्रनाम का पाठ करें सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

मिथुन राशि

इस सप्ताह आपको अपने व्यवसाय में लाभ की मात्रा में बढ़ोतरी होगी। धन आने की मात्रा भी बढ़ेगी। व्यापारियों और सभी के लिए धन के मामले में यह सप्ताह अच्छा रहेगा। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सप्ताह ठीक है। उनको अपने कार्यालय में प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। भाग्य से इस सप्ताह आपको सहयोग प्राप्त करने के स्थान पर अपने परिश्रम पर विश्वास करना चाहिए। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक रहेंगे। संतान से आपको सामान्य रूप से सहयोग प्राप्त हो सकता है। इस सप्ताह आपके लिए 15, 16 और 17 तारीख यह दोपहर तक का समय विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयुक्त है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन काले कुत्ते को तंदूर की रोटी खिलाएं। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

कर्क राशि

अधिकारियों कर्मचारियों के लिए यह सप्ताह उत्तम रहेगा। अगर प्रमोशन ड्यू है तो वह भी हो सकता है। अच्छे स्थान पर पोस्टिंग का भी योग है। इस सप्ताह भाग्य आप सभी का साथ देगा। भाग्य के कारण जो कार्य रुके हुए हैं वह सभी कार्य सप्ताह संपन्न हो सकते हैं। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य है। जनप्रतिनिधियों के लिए भी यह सप्ताह ठीक-ठाक है। आपको अपने संतान से इस सप्ताह कोई विशेष सहयोग प्राप्त नहीं होगा। भाई बहनों के साथ संबंध ठीक-ठाक रहेंगे। कचहरी के कार्यों में किसी भी प्रकार का रिस्क ना लें। वहां पर सफलता का योग बहुत कम है। इस सप्ताह आपके लिए 17, 18 और 19 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए फलदायक है। 13 और 14 तारीख को आपको सचेत रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन रविवार है।

सिंह राशि

इस सप्ताह आप सभी को भाग्य से बहुत अच्छी मदद मिलेगी। आपके जो भी कार्य भाग्य की वजह से रुके हैं वह सभी कार्य संपन्न हो सकते हैं। आपको इस सप्ताह का बहुत अच्छा इस्तेमाल करना चाहिए। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी यह सप्ताह ठीक है। उनको अच्छे पद स्थापना मिलने का भी योग हो सकता है। दुर्घटनाओं से आप साफ-साफ बचेंगे। आपका या आपके जीवन साथी दोनों में से किसी एक का स्वास्थ्य थोड़ा खराब हो सकता है। माता और पिता जी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आपको अपने संतान से उत्तम सहयोग प्राप्त होगा। इस सप्ताह आपके लिए 13 और 14 तारीख समस्त प्रकार के कार्यों के लिए लाभदायक है। 15, 16 और 17 तारीख को आपको सावधान रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन शिव पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

कन्या राशि

इस सप्ताह आपको भाग्य से अच्छा सहयोग मिल सकता है। आपके कई कार्य भाग्य की कारण हो सकते हैं। धन आने के संयोग बन सकते हैं। आपके जीवनसाथी और आपके लिए यह सप्ताह ठीक रहेगा। व्यापार में आपको लाभ होगा अर्थात व्यापारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा है। ‌अधिकारियों कर्मचारियों के लिए सप्ताह ठीक है। जनप्रतिनिधियों को इस सप्ताह अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। आपके शत्रु शांत रहेंगे। परंतु समाप्त नहीं हो पाएंगे इस सप्ताह आपके लिए 15 और 16 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों में परिणाम दायक रहेंगे। सप्ताह के बाकी दिन आपको सचेत रहकर कार्यों को संपन्न करने की आवश्यकता है। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन बुधवार है।

तुला राशि

यह सप्ताह आपके जीवनसाथी के लिए अब बहुत अच्छा रहेगा। उनका स्वास्थ्य ठीक रहेगा। मानसिक तौर पर वह बहुत स्वस्थ रहेंगे। भाग्य से आपको थोड़ी कम मदद मिलेगी। आपको अपने संतान के प्रति सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको अपने संतान से सहयोग नहीं मिल पाएगा। इस सप्ताह अगर आप थोड़ा सा भी प्रयास करेंगे तो अपने शत्रुओं को आसानी से पराजित कर सकते हैं। कचहरी के कार्यों में आपको सावधानी बरतना चाहिए। ‌धन आने के मार्ग में कुछ बाधायें हैं। व्यापार आपका ठीक चलेगा। इस सप्ताह आपके लिए 17 के दोपहर के बाद से लेकर 18 और 19 तारीख विभिन्न का प्रकार के कार्यों के लिए शुभ है। 15, 16 और 17 की दोपहर तक आपको सावधानीपूर्वक कार्यों को अंजाम देना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

वृश्चिक राशि

अविवाहित जातकों के लिए यह सप्ताह अच्छा रहेगा। उनके विवाह के नए-नए प्रस्ताव प्राप्त होंगे। प्रेम संबंधों में भी वृद्धि हो सकती है। आपको अपने पेट की परेशानियों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। इस सप्ताह आपको अपने संतान से अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह कम ठीक है। उनको सावधान रहना चाहिए। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह अच्छा है। अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए भी यह सप्ताह ठीक रहेगा। इस सप्ताह आपके लिए 13 और 14 अप्रैल किसी भी कार्य को करने के लिए परिणाम मूलक हैं। 17, 18 और 19 तारीख को आपको सावधान रहकर अपने कार्यों को पूर्ण करना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें। सप्ताह का शुभ दिन मंगलवार है।

धनु राशि

जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह बहुत अच्छा रहेगा। जनता के बीच में उनके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। अधिकारियों कर्मचारियों के लिए सप्ताह ठीक-ठाक है। यह सप्ताह आपके संतान के लिए अच्छा रहेगा। उनको हर तरह से सफलताएं प्राप्त होगी। इस सप्ताह आपके शत्रु शांत रहेंगे, परंतु समाप्त नहीं रहे होंगे। भाई बहनों के साथ संबंधों में थोड़ा तनाव आ सकता है। विवाह के प्रस्ताव आ सकते हैं। प्रेम संबंधों में वृद्धि हो सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 15, 16 और 17 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयोगी है। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन विद्यार्थियों के बीच में पुस्तकों का दान दें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

मकर राशि

यह सप्ताह जन प्रतिनिधियों के लिए बहुत अच्छा रहेगा। उनके प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। कर्मचारी एवं अधिकारियों के लिए यह सप्ताह थोड़ा सावधान रहने वाला है। उनको अपने अधिकारियों से सावधान रहना चाहिए। व्यापारियों के लिए यह सप्ताह सामान्य रहेगा। भाई बहनों के साथ आपके संबंध सामान्य रहेंगे। आपके पेट में कुछ तकलीफ हो सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 17, 18 और 19 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयुक्त हैं। सप्ताह के बाकी दिन भी ठीक-ठाक हैं। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन रुद्राष्टक का पाठ करें। सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

कुंभ राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने का योग है व्यापारिक कार्यों में सावधान रहें अन्यथा आपको हानि हो सकती है भाई बहनों के साथ संबंध अच्छे रहेंगे इस सप्ताह आप अपने संतान से काम सहयोग प्राप्त होगा छात्रों को पढ़ाई में नुकसान हो सकता है परीक्षाओं में आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है भाग्य के स्थान पर सप्ताह आपको अपने परिश्रम पर विश्वास करना चाहिए भाग्य पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं करना चाहिए आपके माताजी और पिताजी का स्वास्थ्य ठीक रहेगा आपकी और आपके जीवनसाथी में से किसी एक का स्वास्थ्य थोड़ा खराब हो सकता है इस सप्ताह आपके लिए 13 और 14 तारीख विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए सफलता प्रदान करने वाली है सप्ताह के बाकी दिन ठीक हैं इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और शनिवार को दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर में जाकर कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का वचन करें सप्ताह का शुभ दिन शनिवार है।

मीन राशि

इस सप्ताह आपके पास धन आने का अच्छा योग है। व्यापारिक कार्यों में आपको सफलता प्राप्त होगी। जनप्रतिनिधियों के लिए यह सप्ताह थोड़ा सा सावधानी रखने वाला है। कर्मचारी और अधिकारियों के लिए सप्ताह अच्छा रहेगा। अविवाहित जातकों के विवाह के नए-नए प्रस्ताव आ सकते हैं। कचहरी के कार्यों में आपको सावधान रहना चाहिए। भाग्य से थोड़ी बहुत मदद मिल सकती है। इस सप्ताह आपके लिए 15, 16 और 17 तारीख उत्तम है। 13 और 14 अप्रैल को आपको हर कार्य में सावधानी रखना चाहिए। इस सप्ताह आपको चाहिए कि आप प्रतिदिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। सप्ताह का शुभ दिन बृहस्पतिवार है।

ध्यान दें कि यह सामान्य भविष्यवाणी है। अगर आप व्यक्तिगत और सटीक भविष्वाणी जानना चाहते हैं तो आपको मुझसे दूरभाष पर या व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाना चाहिए। मां शारदा से प्रार्थना है या आप सदैव स्वस्थ सुखी और संपन्न रहें। जय मां शारदा।

 राशि चिन्ह साभार – List Of Zodiac Signs In Marathi | बारा राशी नावे व चिन्हे (lovequotesking.com)

निवेदक:-

ज्योतिषाचार्य पं अनिल कुमार पाण्डेय

(प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री)

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, मध्यप्रदेश विद्युत् मंडल 

संपर्क – साकेत धाम कॉलोनी, मकरोनिया, सागर- 470004 मध्यप्रदेश 

मो – 8959594400

ईमेल – 

यूट्यूब चैनल >> आसरा ज्योतिष 

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares

मराठी साहित्य – इंद्रधनुष्य ☆ मनाचे श्लोक – एक सार्वकालिक ‘मनोपनिषद’… – श्लोक २५ आणि २६ ☆ श्री विश्वास देशपांडे ☆

श्री विश्वास देशपांडे

? इंद्रधनुष्य ?

☆ मनाचे श्लोक – एक सार्वकालिक ‘मनोपनिषद’… – श्लोक २५ आणि २६ ☆ श्री विश्वास देशपांडे ☆

श्लोक क्र. २५ – – 

मना वीट मानू नको बोलण्याचा ।

पुढे मागुता राम जोडेल कैचा?

सुखाची घडी लोटता दुःख आहे ।

पुढे सर्व जाईल काही न राहे ।।२५।।

अर्थहे मना, माझ्या या बोलण्याचा—एकच गोष्ट पुन्हा पुन्हा सांगण्याचा—तू कंटाळा मानू नकोस. कारण तसे झाले तर ज्या भगवंतप्राप्तीसाठी तू प्रयत्न करीत आहेस, तो राम तुला कसा प्राप्त होईल? या संसारात सुख-दुःखाचे चक्र अखंड सुरू असते. सुखाचा क्षण संपला की दुःख येतेच. आणि शेवटी ज्याला तू सुख मानतोस तेही नाश पावणारेच आहे—काहीही शाश्वत राहात नाही.

विवेचनया श्लोकात समर्थांची लोककल्याणाची विलक्षण तळमळ पुन्हा एकदा प्रकर्षाने जाणवते. आपण वारंवार सांगत असलेला उपदेश ऐकून लोकांना कंटाळा येऊ शकतो, याची त्यांना जाणीव आहे. म्हणूनच ते प्रेमाने सांगतात—

माझ्या बोलण्याचा वीट मानू नकोस.

आपल्या व्यवहारातही असेच घडते. कोणी आपल्या हितासाठी एखादी गोष्ट सांगितली, उपदेश केला तर तो आपल्याला लगेच पटत नाही. उलट, आपले भले व्हावे या उद्देशाने स्पष्ट बोलणाऱ्या व्यक्तीपासून आपण दूर राहण्याचा प्रयत्न करतो. अशा व्यक्तीबद्दल अनेकदा नकारात्मक मत तयार केले जाते—

“तो खूप स्पष्टवक्ता आहे”, “तो नेहमी नकारात्मकच बोलतो”, “त्याचे ऐकले तर व्यवहार कसा करायचा? ”

परंतु सत्य हे असे आहे की अप्रिय पण हितकारक बोलणारा माणूस दुर्मिळ असतो, आणि त्याचे ऐकणारा त्याहूनही दुर्मिळ!

संसारात सुख आणि दुःख यांचे चक्र अखंड चालू असते. सुखाचा काळ संपला की दुःख येणारच—ही अटळ गोष्ट आहे. एखादा माणूस मोठ्या पदावर पोहोचतो—आमदार, खासदार किंवा मंत्री होतो. पण त्या सत्तेचा उपयोग लोककल्याणासाठी करण्याऐवजी तो स्वतःच्या स्वार्थासाठी करतो. सत्तेची नशा चढते. परंतु एक दिवस सत्ता जाते, आणि त्याला वास्तवाला सामोरे जावे लागते.

एखाद्या उद्योगपतीचा भरभराटीला आलेला व्यवसाय अचानक तोट्यात जातो. जोपर्यंत सुख आपल्या वाट्याला असते, तोपर्यंत आपण त्यातच रमून जातो. त्या सुखात इतके गुंततो की परमेश्वराची आठवणही होत नाही. आपल्याला वाटते—हे सुख कायम राहील.

परंतु हे सर्व प्रारब्धावर अवलंबून असते. जसे सुख आपल्या कर्मानुसार मिळते, तसेच दुःखही भोगावे लागते. सुख-दुःखाचे हे चक्र, जन्म-मरणाचा हा फेरा—कोणालाही टाळता येत नाही.

म्हणूनच, जर आपल्याला या चक्रातून मुक्त व्हायचे असेल, तर परमेश्वराशी नाते जोडणे आवश्यक आहे. आणि त्यासाठी जो कोणी आपल्याला सत्य, श्रेयस्कर आणि हितकारक मार्ग दाखवेल, त्याचे बोलणे कंटाळा न करता ऐकणे गरजेचे आहे.

अर्थात, अशी शिकवण संतच देऊ शकतात. समर्थांसारख्या संतांच्या वचनांमध्ये गूढार्थ, अनुभव आणि करुणा दडलेली असते. त्यांचे प्रत्येक शब्द आपल्याला योग्य दिशेने नेणारे असतात.

खरा साधक कधीच त्यांच्या बोलण्याचा कंटाळा करत नाही; उलट तो त्या मार्गावर निष्ठेने चालत राहतो.

स्वसंवाद :: 

  • माझ्या हितासाठी कोणी सत्य सांगितले तर मी ते खुलेपणाने स्वीकारतो का?
  • सुखाच्या काळात मी परमेश्वराला विसरतो का, की त्याचे स्मरण ठेवतो?
  • सुख-दुःख हे क्षणभंगुर आहे याची जाणीव ठेवून मी जीवनाकडे पाहतो का?
  • संतांचे किंवा हितचिंतकांचे मार्गदर्शन मी मनापासून ऐकतो आणि आचरणात आणतो का?

 – – – – 

श्लोक क्र. २६ – – 

देहे रक्षणाकारणे येत्न केला ।

परी सेवटी काळ घेऊनि गेला ।

करी रे मना भक्ती या राघवाची ।

पुढे अंतरी सोडी चिंता भवाची ।।२६।।

अर्थ : मनुष्य आपल्या देहाचे रक्षण व्हावे म्हणून खूप प्रयत्न करतो, त्याची काळजी घेतो. परंतु शेवटी काळ (मृत्यू) त्याला घेऊन जातोच. म्हणून हे मना, तू राघवाची भक्ती कर आणि मनातील संसाराची (भवाची)चिंता सोडून दे.

विवेचनमागील श्लोकात समर्थांनी सुख-दुःखाच्या चक्राचे वास्तव आपल्यासमोर ठेवले. या श्लोकात त्याच विचाराला पुढे नेत ते देहाभिमानाचे वास्तव आपल्यासमोर मांडतात.

आपण आयुष्यभर देहाच्या रक्षणासाठी झटत असतो. देहबुद्धी इतकी प्रबळ असते की देहसुखालाच आपण खरे सुख मानतो. शरीराला आनंद मिळावा म्हणून माणूस विविध भोग-विलासात रमतो. काही जण तर केवळ खाणे-पिणे आणि मौजमजा हाच जीवनाचा उद्देश समजतात.

पूर्वी चार्वाकांनीही “यावत् जीवेत् सुखं जीवेत्” असा भोगवाद मांडला होता. आज अनेकजण नकळत त्याच विचारसरणीचा स्वीकार करताना दिसतात.

पण येथे समर्थांचा हेतू देहरक्षणाला नाकारण्याचा नाही. देहाची काळजी घेऊ नये असे ते म्हणत नाहीत. उलट, देह ही एक मौल्यवान देणगी आहे.

शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्”. शरीर हेच धर्मसाधनेचे पहिले साधन आहे.

म्हणून देहाची योग्य काळजी घेणे आवश्यकच आहे. निरोगी आयुष्य जगणे, जीवनाचा आनंद घेणे हेही चुकीचे नाही. परंतु याचबरोबर एक गोष्ट लक्षात ठेवावी लागते की हा देह नश्वर आहे आणि एक दिवस तो सोडून जावेच लागणार आहे.

वेदकाळातील ऋषींनीही आपल्या निरोगी दीर्घायुष्याची कामना केली, पण मिळालेल्या त्या आयुष्याचा उपयोग त्यांनी ईश्वरप्राप्तीसाठी आम्ही करणार आहोत असे स्पष्ट सांगितले.

आपल्या जीवनात आपले काहीतरी ध्येय असते. आस्तिक व्यक्ती परमेश्वर प्राप्तीसाठी झटते तर नास्तिक किंवा बुद्धिवादी मंडळी मानवसेवा, समाजसेवा, वैज्ञानिक प्रगती यासारख्या गोष्टींना आपल्या आयुष्याचे ध्येय मानतात. परंतु बरेचदा आपण मात्र ध्येय बाजूला ठेवून देहासाठीच अधिक वेळ खर्च करतो.

माणूस स्वतःच्या देहाबरोबरच संसाराची, घरदाराची, मुलाबाळांची चिंता करीत राहतो. पण प्रारब्धानुसार जे घडायचे ते घडणारच असते. म्हणून समर्थ सांगतात

– – – “करी रे मना भक्ती या राघवाची”

श्रीरामाबद्दल बोलताना समर्थ नेहमी “या राघवाची” भक्ती करावी असे म्हणतात. त्यांचे आराध्य दैवत असलेला श्रीराम जणू त्यांच्यासमोर उभा आहे. त्या राघवाची असे ते कधीही म्हणत नाहीत. समर्थांसाठी श्रीराम हे केवळ तत्त्व नाही, तर सजीव अनुभव आहे. जणू समोर उभा असलेला ईश्वर!

म्हणूनच ते आपल्याला सांगतात की बाबारे, संसाराची चिंता करण्याऐवजी मनाला राघवाच्या स्मरणात गुंतव. एकदा का मन त्याच्याकडे लागले, की मग संसाराची चिंता आपोआप कमी होत जाते. आणि हळूहळू अशी भावना दृढ होते की राम कर्ता आहे, सर्व काही त्याच्याच कृपेने घडते आहे.

अशी श्रद्धा निर्माण झाली की मन हलके होते, चिंता निवळते आणि जीवन अधिक शांत, समाधानी बनते.

स्वसंवाद :: 

  • मी माझ्या देहाची काळजी घेताना त्यालाच अंतिम सत्य मानून चालतो का?
  • जीवनाचे खरे ध्येय लक्षात ठेवून मी देहाचा उपयोग करतो आहे का?
  • संसाराच्या चिंतेत मी इतका गुंततो का की परमेश्वराचे स्मरण विसरतो?
  • माझ्या मनाला राघवाच्या नामस्मरणाची सवय लागली आहे का?

– क्रमशः श्लोक २५ आणि २६

© श्री विश्वास देशपांडे

चाळीसगाव

प्रतिक्रियेसाठी ९४०३७४९९३२

≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

Please share your Post !

Shares